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शादी के बाद भी पन्द्रह या इससे कम उम्र की लड़की से सम्भोग करना दुष्कर्म!

By   /  July 29, 2012  /  No Comments

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दिल्ली  हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि बाल्यकाल में विवाह होने पर 15 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ जब संभोग होता है तो उसे बलात्कार ही माना जाएगा. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि संभोग के लिए भले ही लड़की की रजामंदी हो, तब भी इसे बलात्कार ही माना जाएगा और ऐसे मामलों में पुरुष को उसके धार्मिक अधिकारों के तहत संरक्षण हासिल नहीं है.

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एके सीकरी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ का कहना था, ”15 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ संभोग आईपीसी की धारा 375 के तहत एक अपराध है. इस कानून के विषय में कोई अपवाद नहीं हो सकता है और इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए.”

न्यायाधीशों ने कहा, ”ऐसे मामलों में रजामंदी का कोई औचित्य नहीं है. ऐसी उम्र में रजामंदी को मंजूर करना मुश्किल है. इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि लड़की का विवाह हुआ है या नहीं. सम्बद्ध पक्षों के निजी कानून भी यहां मायने नहीं रखते हैं.”

पीठ ने ये व्यवस्था लड़की के विवाह और संभोग के लिए रजामंदी की सही उम्र संबंधी भारतीय दंड संहिता, हिंदू विवाह अधिनियम और बाल-विवाह रोकथाम अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों पर उठे कई सवालों का जबाव देते हुए दी.

पीठ के समक्ष ये कानूनी सवाल खास तौर पर उठाया गया था कि ‘क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 363 या धारा 376 के तहत दर्ज मामला, नाबालिग लड़की के इस बयान के आधार पर खारिज किया जा सकता है कि उसने विवाह खुद किया था.’

कोर्ट ने ये भी कहा है कि ऐसे मामलों में लड़की की उम्र यदि 16 वर्ष से ज्यादा है और उसने विवाह के बाद संभोग के लिए रजामंदी दी है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को कानून के मुताबिक खारिज किया सकता है.

कोर्ट ने कहा, ”लड़की की आयु 16 वर्ष से ज्यादा है और वो यदि बयान देती है कि वो रजामंद थी और बयान किसी दबाव में या प्रभाव में नहीं दिया गया है तो इस बयान को स्वीकार किया जा सकता है और अदालत अपने अधिकार-क्षेत्र में रहते हुए आईपीसी की धारा 363 (अपहरण) या धारा 376 (बलात्कार) के मामले को खारिज कर सकती है.”

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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