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ओलम्पिक में सभी भारतीय खिलाडियों को मेरी शुभकामनाएं – भूमिका चावला

By   /  July 30, 2012  /  No Comments

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आजकल जिधर देखो उधर ओलम्पिक का ही बुखार छाया हुआ है चाहे राजनेता हो, फ़िल्मी कलाकार हो या आम इंसान सभी में एक उत्साह सा भरा हुआ है ओलम्पिक खेलों को लेकर. सभी चाहते हैं कि भारत अपनी कुछ तो दावेदारी पेश करे इस बार. कुछ तो मैडल हमारे भी हिस्से में आये. ऐसे में हमारी प्यारी से भूमिका चावला भी कैसे पीछे रहती अपने देश के सभी खिलाड़ियों को अपनी शुभ कामनायें देने में. ‘तेरे नाम’ फेम भूमिका कालेज में बैडमिंटन और बिलियर्ड्स खेलती थी.

भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएँ देते हुए वो कहती हैं कि, “मुझे लगता है कि इस बार हमारे पास बेहतर अवसर हैं हमें अधिक पदक मिलने की उम्मीद है सायना नेहवाल , अभिनव बिंद्रा, गगन नारंग, एमसी मैरीकॉम, सुशील कुमार, दीपिका कुमारी आदि सभी खिलाड़ी अच्छे हैं पहले भी सभी ने अच्छा परफोर्म किया है. मुक्केबाजी, कबड्डी, लॉन टेनिस, बैडमिंटन, शूटिंग और तीरंदाजी में पदक जीतने की संभावना है. मेरा मानना है कि अगर कड़ी मेहनत की जाये तो हम ट्रैक  फील्ड में भी पदक जीत सकते हैं क्योंकि क्या पता कौन सा खिलाड़ी रिकॉर्ड तोड़ दे और भारत को एक स्वर्ण पदक हासिल हो जाए. जिस तरह के प्रतिभाशाली खिलाडी ओलम्पिक में हिस्सा लेने गये हैं मुझे उम्मीद है की इस बार जरूर कुछ अच्छा ही होगा.”

भूमिका हॉकी के बारे में कहती हैं, “हॉकी में भी  हम स्वर्ण पदक जीतने की क्षमता रखते है. इस बार ओलम्पिक में २०० देश हिस्सा ले रहे हैं सच में बहुत मज़ा आएगा इस बार खेल देखने में”  सायना के बारें में भूमिका कहती हैं कि, “ सायना में गज़ब की प्रतिभा है, मुझे पूरा यकीन है कि वह स्वर्ण पदक जरुर ही जीतेगी. इसके अलावा बैडमिंटन के तैराकी और वाटर कैनोइंग में भी कामयाबी की उम्मीद है”.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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