/जबलपुर में दैनिक प्रदेश टुडे का आगाज – 15 अगस्त से आसपास के जिलों में होगा विस्तार

जबलपुर में दैनिक प्रदेश टुडे का आगाज – 15 अगस्त से आसपास के जिलों में होगा विस्तार

-रवीन्द्र जैन||

जबलपुर। मप्र की राजधानी भोपाल के बाद दैनिक प्रदेश टुडे ने प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर की ओर रुख किया है। जबलपुर में पहले दिन ही इस सांध्य दैनिक को उम्मीद बड़ी सफलता मिली है। अखबार का पहले दिन का प्रिंट आर्डर 32782 कापी था। यही नहीं जबलपुर के विज्ञापन दाताओं ने भी अखबार को हाथोंहाथ लिया है। लांचिंग के पहले ही 50 लाख से अधिक विज्ञापन के आदेश अखबार के दफ्तर तक पहुंच गये थे। इस सफलता से उत्साहित पत्रकार से इस अखबार के मालिक बने हृदेश दीक्षित का कहना है कि 15 अगस्त से प्रदेश टुडे पूरे महाकौशल और विंध्य के हर जिले कस्बे व गांव में दिखाई देने लगेगा। 
मात्र दो साल पहले हृदेश दीक्षित राज एक्सप्रेस के संपादक थे। राज एक्सप्रेस छोडऩे के बाद उन्होंने भोपाल में स्वयं का सांध्य कालीन अखबार निकालने का निर्णय लिया। कई मित्रों ने उन्हें अखबार निकालना, आत्महत्या करना जैसा बताया। ऐसे समय में जबकि प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित समाचार पत्र नई दुनिया लगातार घाटे के बाद जागरण समूह के हाथों बिक रहा था तब हृदेश दीक्षित दैनिक प्रदेश टुडे को भोपाल में जमाने में व्यस्त दिखाई दिये। आंकड़े चौंकाने वाले लेकिन सच और प्रमाणिक हैं कि भोपाल में मात्र 16 महीने में दैनिक प्रदेश टुडे की प्रसार संख्या 1 लाख 18 हजार प्रतियों तक पहुंच गई है। हृदेश दीक्षित इस जादूई आंकड़े का श्रेय प्रदेश टुडे ग्रुप के चेयरमैन सतीश पिम्पले को देते हैं। उत्साह और उमंग से लबरेज सतीश पिम्पले का दावा है कि इन 16 महीनों में भोपाल में 12 पेज का यह सांध्य दैनिक न केवल लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है बल्कि प्रदेश में सकारात्मक पत्रकारिता के संवाहक के रूप में भी पहचाने जाने लगा है। पिम्पले का एक और दावा अखबार जगत के लिए चौंकाने वाला है उनका कहना है कि मात्र 16 महीनों में प्रदेश टुडे भोपाल में घाटे से उभरकर प्राफिट में आ गया है। 

जबलपुर में जनता से जुड़ा 
भोपाल की सफलता के बाद प्रदेश टुडे ने जबलपुर की ओर रुख किया है। पिछले छह महीने से इस अखबार की जबलपुर में ऐसी ब्रांडिंग हुई कि घर-घर में इस अखबार का इंतजार होने लगा। दैनिक भास्कर के पैटर्न पर प्रदेश टुडे ने 40 से ज्यादा सर्वे टीमों का गठन किया। जिन्होंने जबलपुर में 7 लाख से ज्यादा लोगों से व्यक्तिगत संपर्क कर अखबार के बारे में उन्हें न केवल जानकारी दी बल्कि 32 हजार से ज्यादा पेड सदस्य भी बना लिये। जबलपुर के इतिहास में ऐसी ब्रांडिंग और पहले दिन से इतना बड़ा सक्र्यूलेशन किसी अखबार का नहीं हुआ। अखबार की लांचिंग भी महोत्सव के रूप में हुई। 27 जुलाई को सुबह पूजन के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई जो 29 जुलाई रात को 6 हजार लोगों द्वारा सामूहिक नर्मदा आरती तक चला। शहर के हर तबके ने प्रदेश टुडे से जुड़ाव महसूस किया। 28 जुलाई को दोपहर होटल समदडिय़ा ग्रांड में यूं तो कई नेता, मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर और अफसर मौजूद थे लेकिन हृदेश दीक्षित ने अपने पूज्य माता-पिता को मंच पर बुलाया और उनके हाथों जबलपुर संस्करण का विमोचन कराया। विमोचन से पहले जबलपुर के पाठकों का आभार व्यक्त करने शहर में बड़ी रैली निकाली गई। यूं तो अपने ब्रांड की लोकप्रियता के लिए शहर में रैली निकालना नई बात नहीं है लेकिन प्रदेश टुडे की रैली का शहर के लोगों ने कदम-कदम पर जिस तरह स्वागत किया उससे लगता है कि इस अखबार का आम पाठक से सीधा जुड़ाव हो गया है। इधर नई दुनिया ग्रुप में 38 वर्षों तक सक्रिय और सकारात्मक पत्रकारिता करने वाले नई दुनिया के ग्रुप एडीटर उमेश त्रिवेदी के प्रदेश टुडे में प्रधान संपादक के रूप में जुडऩे से पूरी टीम का मनोबल सातवें आसमान पर दिख रहा है। 

अब ग्वालियर – रायपुर पर नजर
जबलपुर की सफल और ऐतिहासिक लांचिंग के बाद प्रदेश टुडे ग्रुप ग्वालियर की ओर रुख करने जा रहा है। अगले छह महीने में ग्वालियर और रायपुर संस्करण शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। दिसंबर 2013 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश टुडे एक बड़ी ताकत के साथ इंदौर पहुंचने की योजना बना रहा है।
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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.