/प्रेमचंद जयंती समारोह – कहानी पाठ एवं फिल्‍म प्रदर्शन

प्रेमचंद जयंती समारोह – कहानी पाठ एवं फिल्‍म प्रदर्शन

प्रेमचंद जयंती, मंगलवार, 31 जुलाई, 2012 की शाम 4 बजे, कृष्‍णायन, जवाहर कला केंद्र, जयपुर में आना है आपको..

गौरतलब है कि राजस्‍थान प्रगतिशील लेखक संघ ने जवाहर कला केंद्र के साथ मिलकर तीन साल पहले प्रेमचंद जयंती पर कहानी पाठ की शुरुआत की थी। अब इसका हर किसी को इंतजार रहने लगा है, खास तौर पर कहानीकारों को… इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि जो लेखक इस कार्यक्रम में एक बार कहानी पाठ कर चुका है, उसे फिर से नहीं बुलाया जाता, हर बार नये लेखकों को शामिल करते हैं। इसमें भी कोशिश यही होती है कि लेखक किसी न किसी रूप में राजस्‍थान से संबद्ध हो।

अब तक इसमें 16 कथाकार अपनी कहानियां पढ़ चुके हैं। 31 जुलाई, 2012 को कृष्‍णायन जवाहर कला केंद्र, जयपुर में शाम 4 बजे ‘कथा सरिता’ में 8 कहानीकार अपनी कहानियों का पाठ करेंगे। हिंदी, उर्दू और राजस्‍थानी के इन कहानीकारों की एक खास बात यह भी है कि इस बार कहानियां पढ़ने वालों में से 6 रचनाकार फेसबुक पर मौजूद हैं। कहानी पाठ से पहले रंगकर्मी अभिषेक गोस्‍वामी प्रेमचंद की कहानी का आकर्षक वाचन करेंगे।

इसके बाद वरिष्‍ठ कथाकार डॉ. हेतु भारद्वाज की अध्‍यक्षता में ईशमधु तलवार, मीठेश निर्मोही, राधेश्‍याम तिवारी, रमेश खत्री, मदन गोपाल लढा, शहनाज़ फातिमा और संदीप मील का कहानी पाठ होगा। इस अवसर पर प्रेमचंद की कहानी पर बनी फिल्‍म का भी प्रदर्शन किया जाएगा। इससे पहले प्रेमचंद समारोह में रामकुमार सिंह, राजपाल सिंह शेखावत, जितेंद्र भाटिया, अरुण कुमार असफल, आदिल रज़ा मंसूरी, दिनेश चारण, दुष्‍यंत, लक्ष्‍मी शर्मा, चरण सिंह पथिक, विजय, उमा, मोनिका अरोड़ा, चण्‍डीदत्‍त शुक्‍ल और भाग चंद गुर्जर कहानी पाठ कर चुके हैं। मनीषा कुलश्रेष्‍ठ और गौरव सोलंकी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे किन्‍हीं कारणों से नहीं आ सके।

आज शाम 4 बजे, जवाहर कला केंद्र, जयपुर के कृष्‍णायन में 8 कहानीकार कहानियां पढेंगे, रंगकर्मी अभिषेक गोस्‍वामी ‘ईदगाह’ का वाचन करेंगे और परदे पर गुलज़ार के निर्देशन में बनी ‘ईदगाह’ देखेंगे… एक नये किस्‍म का अनुभव होता है यह हर साल… आप सब सादर आमंत्रित हैं।

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.