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रामपाल के बाद डेरा सच्चा सौदा वाले ‘स्वयंभू गॉड’ राम रहीम पर कोर्ट का शिंकजा.. रामपाल के बाद डेरा सच्चा सौदा वाले ‘स्वयंभू गॉड’ राम रहीम पर कोर्ट का शिंकजा..(0)

लगता है ‘खुद को ईश्वर’ बताने वाले बाबाओं के बुरे दिन चल रहे हैं. विवादित ‘स्वयंभू गॉड’ रामपाल के बाद हरियाणा के ही एक और बाबा कोर्ट के निशाने पर आ गए हैं. सिरसा में डेरा जमाए सच्चा सौदा के मुखिया गुरमीत राम रहीम सिंह के खिलाफ पंचकुला की सीबीआई कोर्ट ने शिकंजा कस दिया है. 15 नवंबर को दिए अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि राम रहीम के खिलाफ रेप और हत्या के मामलों की अलग-अलग सुनवाई होगी.

राम रहीम के खिलाफ डेरा निवासी के यौन उत्पीड़न के मामले की अगली सुनवाई कोर्ट ने 29 नवंबर को तय की. वहीं, दो हत्याओं के मामले की सुनवाई 6 दिसंबर को होगी. हालांकि राम रहीम इस दौरान सुनवाई के लिए कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, बल्कि सिरसा से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

इससे पहले 14 नवंबर को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप, हत्या और कोर्ट की अवमानना के मामले में वांछित बाबाओं को कोर्ट में पेश करने के मामले में नाकाम हरियाणा सरकार को लताड़ लगाई थी. अक्टूबर महीने में कोर्ट ने राम रहीम के खिलाफ रेप और हत्या के मामले से जुड़े सारे दस्तावेज मांगे थे.

14 नवंबर को राम रहीम के खिलाफ ताजा याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस के. कन्नन ने कहा, ‘अदालतें बाबाओं के आदेश से नहीं चलती. फर्जी बाबा लोग अपने आपको समझते क्या हैं? उन्हें पता होना चाहिए कि भगवान कृष्ण ने भी कुछ समय जेल में बिताया था. अदालतों को न्यायाधीश चलाते हैं, बाबा नहीं.’

गौरतलब है कि साल 2002 में राम रहीम के दो भक्तों ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर राम रहीम के खिलाफ यौन शोषण का आरोप लगाया था. इसके बाद कोर्ट ने सितंबर 2002 में सीबीआई जांच का आदेश दिया था, इस मामले में 30 जुलाई 2007 को चार्जशीट फाइल हुई थी.

राम रहीम पर चौटाला का हमला
उधर, हरियाणा के नेता विपक्ष और इनेलो लीडर अभय चौटाला ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी का समर्थन करने वाले राम रहीम के खिलाफ जंग छेड़ दी है. गुरुवार को सोनीपत में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चौटाला ने कहा, ‘डेरा के समर्थन ने हरियाणा में राजनीतिक समीकरण बदल दिए और इनेलो को इसकी कीमत चुकानी पड़ी.’

चौटाला ने कहा, ‘इनेलो का रास्ता रोकने वाला बाबा बच नहीं सकता. एक बाबा जेल चला गया, दूसरा भी उसी के रास्ते पर जाएगा. बीजेपी भी उसे बचा नहीं पाएगी.’

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अवैध कनेक्शनों का गोरखधंधा, रेवड़ियों की तरह बांटें बिजली कनेक्शन.. अवैध कनेक्शनों का गोरखधंधा, रेवड़ियों की तरह बांटें बिजली कनेक्शन..(0)

-प्रकाशचंद बिश्नोई और श्रीराम ढाका।।

धोरीमन्ना, घरेलू कनेक्शन लेकर बिजली का व्यवसायिक उपयोग करना आम बात है। मुख्य मार्ग सहित विभिन्न खेतो में अवैध कनेक्शनों की भरमार है। उपर से नीचे तक के विभागीयकर्मी इससे वाकिफ हैं। आखिर कैसे लोग बिना कनेक्शन के धड़ल्ले के साथ बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन न तो इसकी जांच पड़ताल कराई जाती है न ही कर्मचारियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। इससे साबित होता है कि उपर के अधिकारी भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं। जोधपुर डिस्कॉम को लाखों की चपत।

धोरीमन्ना पंचायत समिति क्षेत्र के पीपराली व बांटा ग्राम में बिजली विभाग की मिली भगत से किसानों को अवैध घरेलु कनेक्शन बिना किसी नियम कायदे के तहत दिए गये पत्रिका टीम द्वारा किये गये सर्वे के अनुसार बांटा गांव में बिजली विभाग के अधिकारीयों द्वारा किसानों से मोटी रकम वसुल कर बिना किसी स्किम के घरेलु कनेक्शन कर दिया कागजी खानापुर्ति मे ३७०० रू़ कि डिमांड राशी दर्शा कर उक्त कनेक्शनों को सर्विस लाइन से होना बताया गया जबकि मौके पर ४-५ खम्भें खड़े हुऐ मिले है।

मीटर नं- ३११४०१९२ के अवैध कनेक्शन से अनार कि खेती
बांटा ग्राम पचायत के रोली गांव एक खेत में बुंद बुंद सिचाई पद्वति से अनार की खेती कि गई है खेत में घर नही बना हुआ है परन्तु उस खेत में घरेलु कनेक्शन किया हुआ है मिटर को खम्भें पर ही लटकाया हुआ है तथा उस कनेक्शन से ही सिचाई कर रहा है यह कनेक्शन अधिकारीयों द्वारा बिना कोई स्कीम के ही मोटी रकम वसुल कर किया गया है कनेक्शन का केबल भी 33 केवी लाइन के खम्भे पर लटका कर खेचा गया है अनार के खेत मे कृषि विभाग से सबसिडी मिल रही है, यह सब विभागीय अधिकारीयों के सहयोग से ही सभंव हो रहा है.

बिना घर के लगाया मीटर नं- ३११४०७६६
बांटा ग्राम पचायत के रोली गांव के एक खेत में कोई घर नही बना हुआ एक छप्पर बनाकर उसके पास चिण रोपकर मीटर लगाया गया है तथा खुले तारों से नहर पर अवैध मोटर लगाकर खेती हो रही है जो कि नियम विरूद्व है उक्त कनेक्शन भी मोटी रकम लेकर किया गया है वहा ट्रासफार्मर पर क्षमता से अधिक कनेक्शन जोड़े गये है।

सुनसान खेत मे लगा मीटर नं- ३११४१५२२
बांटा ग्राम पचायत के रोली गांव के सुनसान पड़े खेत में भी ऐसा ही गड़बड़ झाला हो रहा है खेत में कोई घर नही बना हुआ है खम्भे के पास ही एक बड़ा पत्थर (चीण) खड़ा कर उस मीटर लटका दिया गया है।
नहर पर लगे दर्जनो अवैध मीटर ओर मोटरें
पिपराली ग्राम पचायत कि सरहद मेनहर पर बनी डिक्कीयों पर दर्जनों अवैध मोटर चल रही है कुछ खुले तारो के मीटर लगे है नाम न छापने कि शर्त पर ग्रामिण बताते है की नहरी अधिकारियों ने घरेलु कनेक्शन के मीटर यहा लाकर मोटर चलाने को कहा है नहर की डिक्की के पास लगे टऊासफार्मर पर बिजली के तार खुले पड़े है जो कभी भी बड़े हादसे हो सकते है। इस सम्बध में ग्रामिणों से बात करनी चाही तो सभी ने चुप्पी साध ली लेकिन कुछ लोगों के द्वारा दबी जुबान से अवैध कनेक्शन।

विभागीय अधिकारियों कि मिली भगत की बात सामने आयी
क्या कहता है नियम- घरेलु कनेक्शन पांच फाईलों के ग्रुप मे दिया जाता है टऊासफार्मर या लाइन से १०० मीटर तक की दुरी पर ३७०० रू कि डिमाण्ड राशी से घरों मे ही कनेक्शन किया जाता है जबकी पिपराली और बांटा गांव पचायत मे ऐसे कई कनेक्शन दिये गये है जो कि टऊास्फार्मर से ५००० दुरी पर स्थित है तथा कई ऐसे कनेक्शन दिए गए है जहाँ कोई घर नही है।

घरेलू कनेक्शन लेकर बिजली का व्यवसायिक उपयोग करना आम बात है। मुख्य मार्ग सहित विभिन्न खेतो में अवैध कनेक्शनों की भरमार है। उपर से नीचे तक के विभागीयकर्मी इससे वाकिफ हैं। आखिर कैसे लोग बिना कनेक्शन के धड़ल्ले के साथ बिजली का उपयोग कर रहे हैं। यह बड़ा सवाल है जिसका जवाब किसी के पास नहीं है। लेकिन न तो इसकी जांच पड़ताल कराई जाती है न ही कर्मचारियों पर अंकुश लगाया जा रहा है। इससे साबित होता है कि उपर के अधिकारी भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं।

बिजली का अंश 

इस सम्बंध मे जब उच्च अधिकारीयों से बात करने की कोशिश की तो उन्होने वहा के सहायक अभियंता से बात करने को कहकर अपना पल्ला झाड़कर मोबाइल बन्द कर दिया गया।
इनका कहना :-
वहा के सहायक अभियंता से बात करके जानकारी लो
प्रेमजीत धोबी, अधिक्षण अभियंता जोधपुर डिस्कॉम बाड़मेर

मेरी नई जोईनिंग है मुझे अभी तक गावों के नाम कि भी जानकारी नही है आप सहायक अभियंता को नोट करवा देना
मेघाराम प्रजापत अधिशाषी अभियंता गुड़ामालानी

पुरे गुड़ामालानी क्षैत्र मे ऐसे कई फर्जी कनेक्शन लगे हुए है, जिसकी हमे सुचना मिलती है तो हम वहा जाकर कार्यवाही करते है. आप भी हमे सुचना दो हम जाकर कार्यवाही करेगें।
भंवराराम चौधरी सहायक अभियंता गुड़ामालानी

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वर्ल्ड सेक्सिस्ट क्रिमिनल लड़की को हो सकती है कई साल की सज़ा.. वर्ल्ड सेक्सिस्ट क्रिमिनल लड़की को हो सकती है कई साल की सज़ा..(0)

नर्सिंग की एक छात्रा को कनाडा और पश्चिमी मीडिया ने ‘वर्ल्ड सेक्सिस्ट क्रिमिनल’ का नाम दिया है. जी हां हालांकि उस हसीना पर चोरी और अवैध हथियार रखने के 114 मामलों में आरोप है लेकिन उसकी चर्चा उसके अपराध से ज्यादा उसके हुस्न के लिए हो रही है. कनाडा की अदालत में वर्ल्ड सेक्सिस्ट क्रिमिनल कही जा रही उस लड़की ने अपना अपराध कबूल लिया है. उसे कई साल जेल में बिताने पड़ सकते हैं.

21 साल की स्टेफनी बेयूदोइन कभी नर्सिंग की छात्रा थी लेकिन जल्दी ही वो गुनाह के दलदल में उतर गई. और अब सोशल मीडिया में उसकी चर्चा उसके गुनाहों के लिए कम उसके हुस्नो-अदाओं के लिए ज्यादा हो रही है. स्टेफनी बेयूदोइन पर चोरी और अवैध हथियार रखने के कुल 114 मामले हैं. उसे चोरी के आरोप में कनाडा के विक्टोरिया विले से गिरफ्तार किया गया था लेकिन जब से मॉन्ट्रियल की एक पत्रिका ने उसकी बिकनी वाली तस्वीरें छापी हैं तब से वो सोशल मीडिया पर वर्ल्ड सेक्सिस्ट क्रिमिनल के नाम से मशहूर हो गई है.

स्टेफनी की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब शेयर की जा रही हैं. ट्विटर पर उसकी एक तस्वीर पर एक शख्स ने लिखा कि पहले ये महिला आपका दिल चुराएगी फिर आपका सामान. हालांकि स्टेफनी ने अब चोरी से तौबा कर ली है. अदालत में उसने कहा है कि अपने बुरे वक्त में मैंने अपनी सनक के आधार पर काम किया. अब उसके नतीजे भुगत रही हूं, जो सही भी है.

अदालती कार्रवाही के दौरान स्टेफनी ने चोरी और असलहे रखने के खुद पर लगे 30 आरोपों में अपना गुनाह कबूल लिया है, जिसके बाद उस पर मुकद्दमा चलाने वाले उस पर लगे बाकी आरोप वापस ले लेंगे. इसके बावजूद कई साल सलाखों के पीछे काटना पड़ सकता है. स्टेफनी ने कहा है कि वो सजा भुगतने के लिए तैयार है, हालंकि उसे उम्र कैद तक की सजा हो सकती है.

स्टेफनी ने 13, 14 और 17 साल के तीन बच्चों के साथ मिल कर कनाडा के 42 घरों में चोरी की थी. स्टेफनी पीछे के दरवाजे या बेसमेंट की खिड़कियों से घरों में घुसती थी. यही नहीं अपने गुनाह के दिनों के दौरान उसने नौ हथियार भी इक्ट्ठा कर लिए थे. पुलिस ने वो सभी हथियार उसकी कार से बरामद किए हैं.

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पुलिस ने रामपाल को हाई कोर्ट में पेश किया, अगली सुनवाई 28 को होगी.. पुलिस ने रामपाल को हाई कोर्ट में पेश किया, अगली सुनवाई 28 को होगी..(0)

दो दिनों की मशक्कत के बाद गिरफ्त में आए स्वयंभू संत रामपाल को पुलिस ने अदालत की अवमानना के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पेश कर दिया है. हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई शुरू करते हुए पुलिस से रामपाल के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन और उनकी ओर से किए गए प्रतिरोध पर रिपोर्ट मांगी. अदालत ने डेरों में गैर-कानूनी हथियारों की मौजूदगी पर गंभीर चिंता जताई. इस मामले में अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी. हाई कोर्ट हत्या के मामले में उनकी जमानत सुबह ही रद्द कर चुका है.

इस बीच, रामपाल की गिरफ्तारी के एक दिन बाद भी उनके अनुयायियों का आश्रम से बाहर आना लगातार जारी है. आज सुबह अधिकारियों ने सतलोक आश्रम में मौजूद अनुयायियों से बाहर निकल आने की अपील करते हुए उनसे कहा था कि पुलिस और नागरिक प्रशासन वहां उनकी मदद के लिए है. पुलिस ने कहा कि उसे संदेह है कि रामपाल के कुछ कट्टर समर्थक और उसके कुछ निजी कमांडो अभी भी अंदर हैं. आश्रम में हथियार, आपत्तिजनक वस्तुएं खोज निकालने के लिए व्यापक स्तरीय खोज अभियान चलाने से पहले पुलिस ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सभी निर्दोष अनुयायी बाहर आ जाएं ताकि अंदर छिपे किसी भी कमांडो या आरोपियों को अलग-थलग किया जा सके.

इससे पहले बुधवार की रात रामपाल को गिरफ्तार किए जाने के बाद जरूरी मेडिकल जांच के लिए ऐम्बुलेंस से पंचकूला के सेक्टर 6 स्थित सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें पूरी तरह से ठीक करार दिया गया. गौरतलब है कि अवमानना के मामले में अदालत में उपस्थित होने से इनकार करने वाले 63 साल के रामपाल दावा कर रहे थे कि वह बीमार है और उन्हें हिसार के बरवाला में सतलोक आश्रम से दो सप्ताह तक चले गतिरोध के बाद गिरफ्तार किया गया था. सदर अस्पताल के डॉ. राजेश ने संवाददाताओं से कहा कि रामपाल का स्वास्थ्य सभी मापदंडों पर ठीक हैं. पंचकुला अस्पताल लाए जाने के बाद रामपाल ऐम्बुलेंस से खुद चलकर बाहर आए. रामपाल ने शॉल ओढ़े हुए थे.

गुरुवार सुबह अस्पताल से थाने ले जाने के दौरान रामपाल ने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए सभी आरोप झूठे हैं. उन्होंने निजी सेना रखने के आरोपों को भी खारिज कर दिया है. अपने ईद-गिर्द जमा पत्रकारों के सवालों के बौछारों के बीच रामपाल चलते हुए इंतजार कर रहे पुलिस गाड़ी की ओर चले गए.

साढ़े 33 घंटे के ऑपरेशन और हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद रामपाल को पुलिस ने बुधवार की रात करीब साढ़े नौ बजे गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी के साथ ही दो हफ्ते से पुलिस और रामपाल के समर्थकों के बीच चल रहा तनावपूर्ण गतिरोध खत्म हो गया. रामपाल को गिरफ्तार करने से पहले उनके 15,000 समर्थकों को आश्रम से बाहर निकालने की कार्रवाई भी की गई.

पुलिस महानिदेशक एस एन वशिष्ठ ने कहा कि रामपाल के खिलाफ राजद्रोह, हत्या के प्रयास, आपराधिक षड्यंत्र, अवैध रूप से लोगों को हिरासत में रखने, दंगा फैलाने समेत अन्य कई नए मामले दर्ज किए गए हैं. रामपाल के खिलाफ शस्त्र अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है. कभी जूनियर इंजिनियर रहे रामपाल को पकड़ने के लिए चलाए गए अभियान में आश्रम में चार महिलाओं की रहस्यमयी परिस्थिति में मृत्यु हो गई और दो अन्य लोगों की अस्पताल में मौत हो गई.

इस मामले में हैं वॉरंट

2 जुलाई, 2006 को हरियाणा के रोहतक के करौंथा में बाबा रामपाल द्वारा संचालित सतलोक आश्रम के बाहर एक युवक की मौत हो गई थी. इस मामले में बाबा रामपाल और उसके 37 समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है. इसी मुद्दे पर 12 मई, 2013 को करौथा में पुलिस और ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई थी.

14 मई, 2013 को पुलिस ने आश्रम खाली कराया. संत रामपाल बरवाला स्थित आश्रम में चले गए. इन्हीं मामलों में बाबा रामपाल और उसके अनुयायियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है. पेशी से छूट खत्म होने के बाद हिसार कोर्ट में 14 मई, 2014 को रामपाल की विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई. सुनवाई के दिन समर्थकों ने वकीलों से हाथापाई की, जजों के खिलाफ नारेबाजी भी की. हाई कोर्ट ने खुद संज्ञान लिया. उसे पेश होने का आदेश दिया गया. कई सुनवाई पर रामपाल पेश नहीं हुए तो हाई कोर्ट ने रामपाल और उनके अनुयायी व सेवा समिति के अध्यक्ष रामकुमार ढाका के खिलाफ गैर जमानती वॉरंट जारी किया.

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रामपाल का आश्रम है या कुकर्म का अड्डा.. रामपाल का आश्रम है या कुकर्म का अड्डा..(0)

हिसार, साढ़े 33 घंटे के ऑपरेशन के बाद हरियाणा पुलिस ने बुधवार की रात सतलोक आश्रम से स्वयंभू संत रामपाल को गिरफ्तार कर लिया. रामपाल की गिरफ्तारी के बाद आश्रम की तलाशी के दौरान पुलिस को कॉन्डम, महिला शौचालयों में खुफिया कैमरे, नशीली दवाएं, बेहोशी की हालत में पहुंचाने वाली गैस, अश्लील साहित्य समेत भारी तादाद में आपत्तिजनक सामग्री मिली हैं. आश्रम से बाहर आई एक महिला ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में उनके साथ कई बार दुष्कर्म किया गया.

बताया जा रहा है कि बुधवार को रामपाल ने पुलिस के सामने सरेंडर करने की जो पेशकश की थी, उसमें शर्त भी रखी थी कि आश्रम की तलाशी नहीं ली जाएगी. हालांकि, पुलिस ने उसकी सरेंडर और तलाशी न लेने की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया था. पुलिस की कार्रवाई और आश्रम से करीब 20 हजार अनुयायियों को निकालने के बाद रात साढ़े नौ बजे के करीब रामपाल को गिरफ्तार कर लिया गया था. आश्रम से निकलने के बाद अनुयायियों ने बताया कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया था.
रामपाल की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने लाउडस्पीकर से घोषणा की कि जो भी अंदर हैं वे बाहर निकल जाएं, मगर जब कोई नहीं निकला तो पुलिस ने आश्रम को खंगालने का काम शुरू कर दिया. सबसे पहले मेन गेट के पास बने महिला शौचालय की जांच शुरू हुई. पुलिस के शौचालय को देखकर होश उड़ गए. शौचालय के बाहर लगे कैमरे का मुंह भी अंदर की तरफ किया गया था. शौचालय में पुलिस को कॉन्डम भी मिले हैं. आश्रम के अंदर गैस की बदबू आ रही थी. डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि यह नाइट्रोजन गैस की बदबू है.

बुधवार को आश्रम से बाहर आने पर महिलाओं ने भी चौंकाने वाले अनेक खुलासे किए. उनके अनुसार रामपाल के निजी कमांडो उन्हें बंधक बनाकर दुष्कर्म तक करते थे और ऐसी जगह रखते थे कि किसी तक उनकी आवाज नहीं पहुंच सकती थी. आश्रम से बाहर आई एक महिला ने बताया कि वह अपने पति और बच्चे के साथ यहां आई हुई थी और पिछले कई सात दिनों से वह आश्रम में ही है. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से उनसे दुष्कर्म किया जा रहा था. महिला का कहना है कि पांच दिनों से पति के साथ उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है.

पुलिस ने रामपाल के साथ-साथ उनके राजदारों को भी गिरफ्तार किया है. रामपाल का पूरा कारोबार और आश्रम की गतिविधियों के मास्टरमाइंड कहे जाने वाले रामपाल के भाई पुरुषोत्तम दास, जगदीश ढाका, प्रवक्ता राजकपूर और एक महिला भी गिरफ्तार की गई है. रामपाल की संपत्ति और उसके तमाम कारोबार को यही लोग संचालित करते हैं. सारा लेन-देन और आश्रम में सत्संग सहित सभी कार्यक्रमों की रूपरेखा रामपाल से विचार-विमर्श करके यही चारों लोग तय करते थे.

(नभाटा)

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रामपाल के छह समर्थकों की मौत, पुलिस ने नहीं चलाई एक भी गोली: हरियाणा डीजीपी रामपाल के छह समर्थकों की मौत, पुलिस ने नहीं चलाई एक भी गोली: हरियाणा डीजीपी(0)

बरवाला: कानून और न्यायिक व्यवस्था का मखौल उड़ाने वाले रामपाल को गिरफ्तार करने की कोशिश में हरियाणा पुलिस आज नए सिरे से सतलोक आश्रम पर धावा बोलेगी. पुलिस ने रामपाल और उसके एक हजार समर्थकों के खिलाफ बरवाला में देशद्रोह समेत चार केस दर्ज किए हैं.

हरियाणा के डीजीपी एसएन वशिष्ठ ने कहा है कि रामपाल आश्रम में ही है. पुलिस आश्रम के भीतर नहीं घुसी और न ही पुलिस की ओर से अब तक कोई गोली चलाई गई है. डीजीपी ने कहा कि आश्रम ने चार महिलाओं के शव सौंपे हैं, इनके अलावा एक महिला और एक बच्चे की भी मौत हुई है.

उन्होंने कहा कि हम अब भी कह रहे हैं कि रामपाल सरेंडर कर दे. डीजीपी ने यह भी कहा कि निर्दोष लोगों के जानमाल को बचाए रखना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन रामपाल को गिरफ्तार करने की कार्रवाई जारी रखी जाएगी.

दरअसल, मंगलवार रामपाल समर्थकों के आगे लाचार हुई पुलिस ने बीती शाम अपना अभियान रोक दिया था. कल की घटना के बाद आज भी पुलिस और रामपाल समर्थकों के बीच टकराव के आसार हैं.

इस बीच रामपाल कहां हैं और इतने हंगामे के बाद भी क्यों सामने नहीं आ रहे हैं, ये बड़ा सवाल बना हुआ है. वहीं दूसरी ओर हजारों की संख्या में रामपाल समर्थक आश्रम छोड़ कर जा चुके हैं. आसपास के लोगों ने बताया कि करीब 10 हजार लोगों ने रात में आश्रम छोड़ा है, हालांकि अभी भी बड़ी तादाद में रामपाल समर्थक आश्रम के अंदर मौजूद हैं. लोगों ने बताया कि आश्रम के अंदर राशन करीब-करीब खत्म हो गया है और खाने−पीने की चीजें बहुत ही कम मात्रा में बची हैं

मंगलवार दोपहर पुलिस ने जब कार्रवाई की तो रामपाल के समर्थकों ने आश्रम के अंदर से फायरिंग की और पेट्रोल बम फेंके. इस झड़प में 100 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हुए. जाहिर है कि आश्रम के अंदर मौजूद लोगों को भी इस कार्रवाई में चोटें आई होंगी, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है.

आश्रम के अंदर से बाहर आए कुछ लोगों की मानें तो रामपाल और उनके कुछ कट्टर समर्थकों ने आश्रम के अंदर लोगों को बंधक बनाकर रखा हुआ है. ऐसे में पुलिस की मुश्किल रामपाल और उसके गुंडों को काबू में करने के साथ ही आश्रम के अंदर बंद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की भी है.

वैसे, रामपाल समर्थकों की गुंडागर्दी के साथ−साथ मंगलवार को पुलिस ने भी बर्बर रवैया अपनाया और घटना को कवर करने गए पत्रकारों पर डंडे बरसाए. पुलिस की कार्रवाई में एनडीटीवी के रिपोर्टर और कैमरामैन जख्मी हुए.

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In Number One Haryana Hooda Had Filed  A Criminal Complaint Lodged With Chandigarh Police.. In Number One Haryana Hooda Had Filed A Criminal Complaint Lodged With Chandigarh Police..(0)

-Pawan Kumar Banasal||
NEW-DELHI. Is chief minister of Haryana empowered that he can order closing of a criminal case registered in Chandigarh which is not under jurisdiction of Haryana Govt.Documents received under Right to Information Act by Murari Lal of Bhiwani has come with shocking revelations that not only Home Secretary of Chandigarh, Anil Kumar but then Haryana Chief Secretary S.C.Choudhary and then chief minister , Bhupinder Hooda had abused their authority for hushing up a complaint lodged with Chandigarh Police for registration of criminal case against,K.S.Sangwan, project director of socio, economic and educational survey and members of Haryana Backward Classes Commission who had recommended reservation for Jats and some other castes in Haryana Govt. services on basis of forged data submitted by Sangwan.It is clear case in which pliable officers and Chief minister entered into criminal conspiracy to scuttle the process of justice.
In his complaint, Murarilal has alleged that Sangwan who was appointed by Hooda for conducting survey has forged data for personal gains.On this complaint, Inspector General of Police has recommended to Home Secretary, Chandigarh that considering inter state ramifications it should be probed by some independent agency preferably by C.B.I.
Haryana cadre I.A.S officer ,Anil Kumar instead of discussing the matter with the Administrator of Chandigarh sent the case of Haryana Govt.
Here blue eyed officers of Bhupinder Hooda led by then Chief Secretary ,S.C.Choudhary who was later accommodated by Hooda planned a strategy to hush up the sensitive matter.File should have returned back to Chandigarh Administration as in a criminal compliant Haryana Govt. has no no powers to act.But the case was sent to Home departmentwhich sent it to Vigilance Department.Vigilance department wrote that since they investigate only corruption cases hence it should be probed either by Police or some other independent agency.
File was put up before Hooda who asked Chief Secretary to give his opinion on the case.
Pliable chief secretary recommended on file that since the matter of granting reservation by taken by Haryana Cabinet after due deliberation hence there is no need to enquire into the allegations which are of vague nature and hence the case should be filed.Chief Secretary closed the file after noting that Chief Minister has seen and he agrees with recommendations.
It is interesting to note here that allegations of complainant were proved true as Hooda later awarded K.S.Sangwan who was accused of forging date by appointing him Chairman of all powerful teachers selection board with status of a minister.

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बाड़मेर: हैंडलूम कॉर्पोरेशन के नाम से फर्जी बिल बना लाखों का घोटाला.. बाड़मेर: हैंडलूम कॉर्पोरेशन के नाम से फर्जी बिल बना लाखों का घोटाला..(0)

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर लम्बे समय से भ्रष्टाचार के मामलों के सिलसिलेवार राज फ़ाश के बावजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में घोटाले दर घोटाले हो रहे हैं. एक के बाद एक हो रहे लाखों रुपये के घोटालो पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है.

लम्बे समय से राजनीतिक आकाओ का सरंक्षण प्राप्त एक मेल नर्स विभाग में कैशिअर कम स्टोरकीपर का काम देख रहाहै. नियम विरुद्ध लगे इस स्टोरकीपर की कारस्तानियों के विभागीय अधिकारी भी भागीदार बने हैं . यह बात राज्य सरकार के आदेश से हुए विशेष ऑडिट जांच में उजागर हुई है.

गौरतलब हे कि सी एम एच ओ कार्यालय द्वारा स्टोर में स्टोरकीपर द्वारा राजस्थान राज्य स्टेट हैंडलूम कॉर्पोरेशन जयपुर की फर्जी बिल बुको के जरिये लाखो की सामग्री की सप्लाई भी मौजूदा स्टोरकीपर ने ही की थी. लेकिन सारे मामले को विभागीय स्तर पर ही रफा दफा कर दिया गया. कॉर्पोरेशन की जयपुर इकाई से वास्तव में कोई खरीद नहीं की गयी. वहीँ. इसकी बाड़मेर इकाई अस्तित्व में ही नहीं हैं. इसके बावजूद बाड़मेर इकाई के फर्जी बिलो के जरिये स्टोरकीपर ने लाखो रुपयो का भुगतान होना बताया गया . आश्चर्य की बात हैं की यहाँ समय समय पर आई ऑडिट पार्टियो ने भी इस मामले को गोलमाल कर दिया . बताया जा रहा हैं कि राजनितिक आकाओ का वरदहस्त प्राप्त इस स्टोरकीपर ने अनियमित खरीद और फर्जी बिलो से लाखो रुपयो का गबन किया हैं जिसको विभाग दबा रहा हैं क्यूंकि उच्च अधिकारियो की भी इसमे मिलीभगत रही . गत माह स्टोरकीपर पद पर किसी और का आदेश हुआ तो स्टोरकीपर ने विभागीय दलाल के जरिये छ लाख रुपये आकाओ को भेज आदेश रुकवा दिया .

स्टोरकीपर की कारस्तानियों का कच्चा चिटठा खुद विभाग के एक अधिकारी ने खोला. तथा तत्कालीन निदेशक डॉ समिट शर्मा ने पूर्ण जांच तक दिए मगर समिट शर्मा के आदेश ही हवा में उड़ा दिए. जबकि उसी आदेश प्रति के आधार पर हमने इसका खुलासा किया था. तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी सहित कई दो नंबर के अधिकारी इस घोटाले में शामिल हैं . जिनकी पूर्ण निष्पक्ष जांच होनी चाहिए की आखिर फर्जी बिलो के जरिये आखिर लाखो का भुगतान उठाया किसने.

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बायतु: लोगों को बेवफूक बनाकर हरियाणा के लोग बेच रहे है पशुओं के दुध बढ़ाने की नकली दवाई.. बायतु: लोगों को बेवफूक बनाकर हरियाणा के लोग बेच रहे है पशुओं के दुध बढ़ाने की नकली दवाई..(0)

-जगदीश सैन पनावड़ा||

बाड़मेर, बायतु उपखण्ड के गिङा थाना के परेऊ क्षेत्र के आसपास के गांवो मे पशुओं का दुध बढ़ाने के नाम पर घर-घर जाकर हरियाणा क्षेत्र के आठ दस संदिग्ध लोग फर्जी कम्पनी की नकली दवाई बेच रहे है लोगों को उक्त दवाई सरकारी योजना के अन्तर्गत बेचने का दावा कर बेवफूक बनाया जा रहा है.

अनपढ़ लोग हो रहे हैं शिकार ..
गांव के अनपढ़ लोग चाव से ये दवाई खरीद रहे है.गौरतलब है कि उक्त दवाई बेचने के बाद एक फर्जी रसीद भी दी जा रही है जिसमें दवाई की रेट पर सब्सिडी देने की बात लिखी जा रही है.

डिब्बे पर लिखी हुई सारी जानकारी फर्जी है..
डिब्बे पर लिखी सारी जानकारी गलत है वेबसाइट पता भी गलत लिखा हुआ है इस नाम से कोई वेबसाइट नहीं है।पशुपालन विभाग से जानकारी के अनुसार सरकार द्वारा पशुओं के दुध बढ़ाने वाली दवाई बेचने के लिए किसी कम्पनी को अधिकृत नहीं किया गया है न ही ऐसी दवाईया पर सब्सिडी देने वाली योजना है. ग्रामीणो द्वारा गिङा पुलिस को इस बारे मे इतिला दी गई मगर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही है.

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इलाज़ के नाम पर रामपाल आश्रम से गायब हुआ.. इलाज़ के नाम पर रामपाल आश्रम से गायब हुआ..(0)

हिसार: हिसार के संत रामपाल ने सोमवार को कोर्ट में पेश होने से इनकार कर दिया है. आज रामपाल के सरेंडर करने का आखिरी दिन है और आज सुबह रामपाल की ओर से आए एक बयान में कहा गया है कि उनकी सेहत ठीक नहीं है और वे आज कोर्ट में पेश नहीं होंगे.
संत रामपाल के प्रवक्ता ने कहा है कि बाबा की तबीयत खराब हो गई है और उन्हें इलाज के लिए अज्ञात स्थान पर ले जाया गया है.

रामपाल के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट से हरियाणा सरकार और पुलिस को कड़ी फटकार पड़ी है. कोर्ट अब दोपहर ढाई बजे मामले की सुनवाई करेगी. आज मामले की सुनवाई शुरू होने पर हरियाणा के डीजीपी ने कोर्ट से कहा कि उन्हें रामपाल को कोर्ट में पेश करने के लिए कुछ और वक्त चाहिए.

इसके जवाब में कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति इस तरह से सामांतर सत्ता नहीं चला सकता है और कार्रवाई न करने पर आम लोगों के बीच गलत संदेश जाएगा.

आश्रम के प्रवक्ता राज कपूर ने कहा, ‘वह (रामपाल) यात्रा करने की स्थिति में नहीं हैं क्योंकि वह बीमार हैं. हम चिकित्सा प्रमाणपत्र देंगे जो उच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा.’ उन्होंने कहा कि अदालत से वे और समय तथा रामपाल की स्थिति सुधरने तक दूसरी तारीख की मांग करेंगे.

कपूर ने यह भी कहा कि बीती रात डॉक्टरों के पांच सदस्यीय बोर्ड ने रामपाल की स्वास्थ्य जांच की जिसमें तीन डॉक्टर राज्य स्वास्थ्य विभाग के और दो डॉक्टर निजी अस्पताल से थे जो दिल्ली और लुधियाना से यहां आए हैं. उन्होंने कहा, ‘संत रामपाल जी को पूर्ण आराम की सलाह दी गई है.’ उन्होंने कहा कि वह वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हो सकते हैं.

अब सबकी नज़र इस बात पर है कि क्या पुलिस रामपाल को गिरफ़्तार करती है. पिछले कुछ दिनों से रामपाल के आश्रम को पुलिस ने घेरा हुआ है. वहीं, रामपाल के हज़ारों समर्थक आश्रम के बाहर जुटे हुए हैं. इसमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी हैं.

रामपाल समर्थक उसे किसी कीमत पर गिरफ़्तार नहीं होने देना चाहते हैं. रामपाल के समर्थक आश्रम की दीवारों, छतों और उसके बाहर लाठी−डंडों से लैस हैं. ऐसे में पुलिस को रामपाल की गिरफ़्तारी में परेशानी हो सकती है.

पुलिस की ओर से बड़ी संख्या में महिला दस्ते को भी तैनात किया गया है. कोर्ट की अवमानना के मामले में रामपाल के खिलाफ गैर−ज़मानती वारंट जारी है. उसे 17 नवंबर तक कोर्ट में पेश किया जाना है.

चंडीगढ़ में बढ़ाई गई सुरक्षा
संत रामपाल के वारंट पर पुलिस के अमल करने की डेडलाइन आज ख़त्म हो रही है. इसको देखते हुए चंडीगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है. पंचकुला और मोहाली से लगने वाले बॉर्डर को सील कर दिया गया है.

पुलिस पैरामिलिट्री फोर्स के जवान चारों तरफ़ तैनात हैं. बस टर्मिनल और रेलवे स्टेशन पर पुलिस तैनात है. पिछले हफ़्ते जब रामपाल के कोर्ट में पेश होने की ख़बर आई थी, उसके बाद शहर में ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई थी.

रामपाल के चार सुझाव

इस बीच रामपाल आश्रम के प्रशासन ने सरकार को चार विकल्प दिए हैं. उनके मुताबिक, रामपाल सोमवार सुबह तक ठीक हो गए तो वह चंडीगढ़ जाएंगे और अगर उनकी तबीयत ठीक नहीं हुई तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बयान लेने की कोशिश की जाए.

आश्रम प्रशासन की मांग है कि कोर्ट रामपाल को निजी पेशी से राहत दे दे या फिर कोर्ट पुनर्विचार करें और पेशी के लिए दूसरी तारीख़ दे.

मुख्यमंत्री की अपील
इससे पहले हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शनिवार को रामपाल से शांतिपूर्ण तरीके से और बिना किसी अवरोध के खुद अदालत में पेश होने के लिए अपील करते हुए कहा था कि हर किसी को न्यायिक तंत्र की गरिमा को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए.

पुलिस की अपील
वहां पर कैंप कर रहे हिसार रेंज के पुलिस महानिरीक्षक एके राव ने रामपाल के अनुयायियों को पुलिस के साथ सहयोग करने और अदालती आदेश की तामील करने को कहा था. पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पिछले सोमवार को सरकारी की इस दलील को खारिज कर दिया था कि रामपाल अस्वस्थ हैं और उनकी गिरफ्तारी से कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो सकती है.

क्या है मामला

उच्च न्यायालय ने अदालत की अवमानना के मामले में पिछले हफ्ते एक गैर जमानती वारंट जारी किया था.
जुलाई 2006 में ग्रामीणों के साथ एक झड़प के दौरान हजारों समर्थक आश्रम में जमा हो गए थे और रामपाल तक पुलिस का पहुंचना मुश्किल कर दिया था. पुलिस हत्या के एक मामले में उन्हें हिरासत में लेना चाहती थी. इसके बाद 2013 में भी करोंथा गांव में उनके आश्रम पर कब्जा करना चाहा तो काफी संख्या में उनके समर्थक आश्रम के अंदर घुस गए, जिसके चलते हुई झड़प में दो लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे.

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सिरसा में पत्रकार से मारपीट.. सिरसा में पत्रकार से मारपीट..(0)

सिरसा, शराब के नशे में धुत सफेद रंग की कार पर सवार एक टैंट हाऊस के पूर्व संचालक एवं पर्यटन केंद्र के पूर्व ठेकेदार रमेश अरोड़ा ने अपने साथियों के साथ बीती रात सुरतगढिय़ा चौक पर पंजाब केसरी (जांलधर) के संवाददाता राम माहेश्वरी पर हमला कर दिया. हमलावरों ने न केवल पत्रकार को जान से मारने की धमकियां दी, बल्कि गंदी-गंदी गालियां भी निकाली.

इस घटना को लेकर पत्रकारों में गहरा रोष है. पत्रकारों ने आज शहर थाना प्रभारी सुरेशपाल से मिलकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. राम माहेश्वरी ने थाना प्रभारी को लिखित शिकायत सौंपकर आरोपियों के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है.

पुलिस को दी शिकायत में पीडि़त पत्रकार राम माहेश्वरी ने बताया कि रविवार 16 नवम्बर की रात 10 बजे सुरतगढिय़ा चौक के पास स्थित एक डेयरी पर वह दूध लेने गया था. जैसे ही दूध लेकर अपनी मोटरसाइकिल के पास पहुंचा, तभी एक सफेद रंग की कार (एच.आर.24एस/2626) वहां आकर रुकी. कार ड्राइव कर रहे रमेश अरोड़ा (जिसको मैं पहले से ही जानता हूं) ने बेमतलब उसे गंदी गालियां निकाली. जब एतराज जताया तो उसने अपने साथियों के साथ मिलकर उसके साथ मारपीट की.

पीडि़त पत्रकार ने बताया कि आसपास के लोगों ने उसे हमलावरों के चंगुल से छुड़ाया. किसी तरह वह अपनी मोटरसाइकिल पर बैठकर घर के लिए रवाना हुआ, लेकिन तभी हमलावर दोबारा गाड़ी में पीछे लग गए. रास्ते में रुकवाकर फिर मारपीट की और जान से मारने की धमकियां दी तथा फरार हो गए. इतने में वहां से गुजर रहे पत्रकार राजेंद्र कुमार व दीपक शर्मा यह दृश्य देेखकर रुक गए. दोनों ने उसे घर पहुंचाया.

माहेश्वरी ने शिकायत में कहा कि घटनाक्रम के बारे में रात को ही उसने अपने समाचार पत्र के हिसार जोन इंचार्ज संजय अरोड़ा को अवगत करवाया. इस मामले को लेकर आज सुबह मीडिया सैंटर में पत्रकारों की बैठक हुई, जिसमें सभी ने एक स्वर में कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला करने के आरोपी रमेश अरोड़ा व उसके साथियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आगे से कोई इस तरह का दुस्साहस न कर सके. शहर थाना प्रभारी सुरेश पाल ने पत्रकारों को आश्वासन दिया कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

(प्रेसवार्ता)

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रामपाल की गिरफ्तारी के लिए सीआरपीएफ तैनात.. रामपाल की गिरफ्तारी के लिए सीआरपीएफ तैनात..(0)

हिसार, रामपाल की गिरफ्तारी के लिए हरियाणा में बरवाला स्थित उनके सतलोक आश्रम के इर्द-गिर्द सुरक्षा बलों का घेरा बढ़ता जा रहा है. रामपाल की गिरफ्तारी के लिए आश्रम के आसापास सीआरपीएफ की तैनाती की गई है. उधर, पुलिस के पास उन्हें कोर्ट में पेश करने के लिए बस आज का दिन बचा है. पुलिस को उन्हें कल सुबह तक कोर्ट में पेश करना है. उधर, आश्रम के प्रवक्ता ने संकेत दिया है कि संत रामपाल कोर्ट में पेश हो सकते हैं.
स्थिति से निपटने के लिए आइजी अनिल राव के नेतृत्व में 30 हजार जवानों को तैनात किया गया है.
दिल्ली से कमांडो की दो बटालियन भी मौके पर पहुंच गई हैं. केंद्र सरकार ने शनिवार रात सीआरपीएफ के 1400 और जवान हिसार के लिए रवाना कर दिए. आश्रम के आसपास लाठी-डंडों के साथ जमे हजारों समर्थकों को काबू करके संत रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए प्रशासन ने सारे इंतजाम कर लिए हैं. आश्रम की पानी-बिजली काट दी गई है, राशन भी नहीं पहुंचने दिया जा रहा. संत रामपाल पर सन 2006 में हुई एक हत्या के मामले में शामिल होने का आरोप है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ सोमवार को दोबारा गैर जमानती वारंट जारी किया है.
बरवाला कस्बे व सतलोक आश्रम के बीच लगाए गए पुलिस के तीन नाकों पर तैनात जवानों को धीरे-धीरे आश्रम की ओर बढऩे को आदेश दिया गया है. शनिवार दोपहर से पुलिस बल में हरकत शुरू हो गई. आश्रम और सुरक्षा बलों के बीच का फासला अब तीन सौ मीटर से भी कम रह गया है. आश्रम को कमांडो ने भी घेरना आरंभ कर दिया है. महिला पुलिस भी सक्रिय है. मौके पर 16 बुलेट प्रूफ गाडिय़ां, 29 एंबुलेंस और 20 जेसीबी मशीन तैयार खड़ी हैं. इस बीच मुख्यमंत्री मनोहर लाल खïट्टर ने संत रामपाल से कानून का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से अदालत में पेश होने का अनुरोध किया है. पुलिस को 17 नवंबर तक संत रामपाल को अदालत में पेश करना है.

खेतों में उतरे पुलिस के जवान

प्रशासन ने सतलोक आश्रम के चारों तरफ घेराबंदी को सख्त करते हुए आश्रम के पास के खेतों में भी पुलिस के जवानों को उतार दिया है. राष्ट्रीय राजमार्ग से अनुयायियों के आश्रम की ओर जाने पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद जो भी अनुयायी खेतों से आश्रम में पहुंच रहे थे, उन्हें भी रोक दिया गया है. आश्रम जाने वाली सड़क पर आम आदमी के गुजरने पर रोक है. इलाके में निषेधाज्ञा लागू है.

छतों पर डटे हैं संत के अनुयायी

सतलोक आश्रम के बाहर और छतों पर संत रामपाल के हजारों भक्त डेरा जमाए हुए हैं. आश्रम के बाहर बैठे भक्तों का कहना है कि वे अपने गुरु के सत्संग को सुनने के लिए आए हुए हैं और सत्संग कैसेट के जरिये सुनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि पुलिस प्रशासन उनके गुरु को गिरफ्तार करने की कोशिश करती है तो पुलिस को पहले उनकी लाशों से गुजरना होगा.

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कतरा कतरा आबरू.. कतरा कतरा आबरू..(0)

….जहां सभ्यता नंगी खड़ी है।

- भंवर मेघवंशी

‘‘दोपहर होते-होते नीचे हथाई पर पंच और गांव के मर्द लोग इकट्ठा होने लगे। उनकी आक्रोशित आवाजें ऊपर मेरे कमरे तक पहुंच रही थी, सबक सिखाने की बातें हो रही थी। आज सुबह से ही हमारे परिवार को हत्यारा समझकर गांव से भाग जाने की अफवाह जान-बूझकर फैला दी गई थी, जबकि हम निकटवर्ती नाथेला उप स्वास्थ्य केन्द्र पर अपनी गर्भवती बेटी लीला को प्रसव पीड़ा उठने पर नर्स के पास लेकर गए थे।

जब अफवाहों की खबर हमें लगी तो बेटी को वहीं छोड़कर घर लौटे। तब तक 50-60 लोग आ चुके थे। धीरे-धीरे और लोग भी आ रहे थे। हम अपने घर में ही थे। नीचे आवाजें तेज होने लगी। ‘बुलाओ नीचे’ की एक साथ कई आवाजें। तब धड़धड़ाते हुए कई नौजवान मर्द सीढि़यां चढ़कर मेरे घर में घुस आए। पहले मुझे चोटी से पकड़ा, फिर पांवों की ओर से पकड़कर घसीटते हुए नीचे ले गए, जहां पर सैंकड़ों पंच, ग्रामीण अन्य तमाशबीन खड़े थे। मैं सोच रही थी ये मर्द भी अजीब होते हैं, कभी ‘कालीमाई’ कहकर पांव पड़ते है तो कभी ‘कलमुंही’ कहकर पैर पकड़ कर घसीटते है। मर्द कभी औरत को महज इंसान के रूप में स्वीकार नहीं कर पाते। उसे या तो पूजनीय देवी बना देते है या दासी, या तो अतिमानवीय मान कर सिर पर बिठाल देते है या अमानवीय बनाकर पांव की जूती समझते है।

वे मुझे घसीटकर नीचे हथाई पर ले आए। उन्होंने मेरे दोनों हाथों में तीन-तीन ईंटें रखी और सिर पर भारी वजन का पत्थर रख दिया। मेरा सिर बोझ सहने की स्थिति में नहीं था। पत्थर नीचे गिर पड़ा, हाथों में भी दर्द हो रहा था, उन्होंने मेरी कोहनियों में लकड़ी के वार किए, वे मुझसे पूछ रहे थे- सच बता। मैं क्या सच बताती? जाने कौन सा सच वे जानना चाहते थे। मैंने कहा-‘‘म्है नहीं जाणूं (मैं नहीं जानती), म्हूं कठऊं कहूं (मैं कहां से कहूं)।’’

एक अकेली औरत और वह भी हत्या जैसे संगीन आरोप के शक में पंचों की आसान शिकार बनी हुई, अगर निर्भीकता से बोले तो पुरुषों का संसार चुनौती महसूस करने लगता है। लोगो को उसका निडर होकर बोलना पसंद नहीं आया। आखिर तो वह अभी तक औरत ही थी ना। क्या वह अरावली की इन पहाडि़यों के बीच बसे इलाके के प्राचीन कायदों को नहीं जानती थी? क्या वह भूल गई थी, पिछले ही साल तो राजस्थान के राजसमंद जिले के इसी चारभुजा थाना क्षेत्र में बुरे चाल-चलन के सवाल पर एक बाप ने अपनी ही बेटी का सर तलवार से कलम कर डाला था और फिर लहू झरते उस सिर को बालों से पकड़े,  बाप उसे थाने में लेकर पहुंच गया था।

इज्जत के नाम पर, ऐसा तालिबानी कृत्य करते हुए यहां के मर्द तनिक भी नहीं झिझकते है तो भी इसकी यह बिसात, अरे यह तो सिर्फ औरत जात है यहां तो किसी मर्द पर भी हत्या का शक मात्र हो जाए तो उसे गधे पर बिठाकर घुमाते है पंच। फिर यह औरत है ही क्या?

बस फिर देर किस बात की थी। इस छिनाल को नंगा करो…। एक साथ सैंकड़ों आवाजें! एक महिला को निर्वस्त्र देखने को लपलपाती आंखों वाले कथित सभ्य मर्द चिल्ला पड़े। ‘उसे नंगा करो।’ उसके कपड़े जबरन उतार लिए गए। वह जो आज तक रिवाजों से, कायदों से, संस्कृति और कथित संस्कारों के वशीभूत हुई मुंह से घूंघट तक नहीं उघाड़ती थी। आज उसकी इज्जत तार-तार हो रही थी, इस बीच 2 नवम्बर 2014 को आत्महत्या करने वाले वरदी सिंह की बेवा सुंदर बाई चप्पलों से उसे मारने लगी। एक महिला पर दूसरी महिला का प्रहार, मर्द आनंद ले रहे थे।

जमाने भर की नफरत की शिकार अपनी पत्नी की हालत उसके पति उदयसिंह से देखी नहीं गई। वह अपने बेटों पृथ्वी और भैरों के साथ बचाव के लिए आगे आया। उसके दुसाहस को जाति पंचायत ने बर्दाश्त नहीं किया। सब उस पर टूट पड़े। मार-मार कर अधमरा कर डाला तीनों बाप-बेटों को और उनको उनके ही घर में बंद कर दिया गया। ‘‘अब तुझे कौन बचाएगा छिनाल। बोल, अब भी वक्त है, सच बोल जा, तेरी जान बख्श देंगे। स्वीकार कर ले कि तेने ही मारा है वरदी सिंह को, तू उसकी बेवा सुंदर को नाते देना चाहती है, तेरा कोई स्वार्थ जरूर है, तूने ही मारा है उसे।’’

पीडि़ता ने मन नही मन सोचा, यह कैसा गांव है, अभी जिस दिन वरदी सिंह ने आत्महत्या की तो पुलिस को इत्तला देने की बात आई थीं तब सारा गांव एकजुट हो गया कि पुलिस को बताने की कोई जरूरत नहीं है। फिर बिना एफआईआर करवाए, बिना पोस्टमार्टम करवाए ही चुपचाप मृतक वरदी सिंह की लाश को इन्हीं लोगों ने जला दिया था तथा उसकी आत्महत्या को सामान्य मौत बना डाला था… और आज उसकी हत्या का आरोप उस पर लगाकर उसकी जान के दुश्मन बन गए है।

‘‘अच्छा… ये ऐसे नहीं बोलेगी। इसके मुंह पर कालिख पोतो, बाल काटो इस रण्… के! और गधे पर बिठाओ कलमुंही को।’’ जाति पंचायत का फरमान जारी हुआ। फिर यह सब अकल्पनीय घटा- शर्म के मारे नग्न अवस्था में गठरी सी बनी हुई पीडि़ता का काला मंुह किया गया, बाल काटे गए, जूतों की माला पहनाई गई और गधे पर बिठा कर उसे पूरे गांव में घुमाया गया। इतना ही नहीं उसे 2 किलोमीटर दूर स्थित थुरावड़ के मुख्य चैराहे तक ले गए। यह कथा पौराणिक नहीं है और ना ही सदियों पुरानी। यह घटना 9 नवम्बर 2014 को घटी।

पीडि़ता रो रही थी, मदद के लिए चिल्ला रही थी, उसके आंसू चेहरे पर पुती कालिख में छिप गए थे और रुदन मर्दों के ठहाकों में। औरतें भी देख रही थी, वे भी मदद के लिए आगे नहीं आई। थुरावड़ चैराहे पर तो एक औरत ने उसके सिर पर किसी ठोस वस्तु का वार भी किया था। पढ़े-लिखे, अनपढ़, नौजवान, प्रौढ़, बुजुर्ग तमाम मर्द इंसान नहीं हैवान बन गए थे। लगभग पांच घंटे तक हैवानियत और दरिंदगी का एक खौफनाक खेल खेला गया मगर किसी की इंसानियत नहीं जागी। जो लोग इस शर्मनाक तमाशे में शरीक थे, उनके मोबाइल तो पंचों ने पहले ही रखवा लिए थे ताकि कोई फोटो या विडियो क्लिपिंग नहीं बनाई जा सके, मगर राहगीरों व थुरावड़ के लोगों ने भी इसका विरोध नहीं किया।

थुरावड़ पंचायत मुख्यालय है। वहां पर पटवारी, सचिव, प्रधानाध्यापक, आशा सहयोगिनी, रोजगार सहायक, सरपंच, वार्ड पंच, नर्स, कृषि पर्यवेक्षक इत्यादि सरकारी कर्मचारियों का अमला बिराजता है। इनमें से भी किसी ने भी घटना के बारे में अपने उच्चाधिकारियों को सूचित नहीं किया और ना ही विरोध किया। वह अभागिन उत्पीडि़त होती रही। अपनी गरिमा, लाज, इज्जत के लिए रोती रही। चीखती-चिल्लाती, रोती- कळपती जब उसकी आंखें पथरा गई और निरंतर मार सहना उसके वश की बात नहीं रही तो वह गधे पर ही बेहोश होकर धरती पर गिरने लगी। मगर दरिंदे अभी उसको कहां छोड़ने वाले थे। वे उसे जीप में डालकर वापस उसके गांव थाली का तालाब की ओर ले चले, रास्ते में जब होश आया तो फिर वही सवाल-

‘सांच बोल, कुणी मारियो’ (सच बोल, किसने मारा)। उसने कहा ‘‘मेरा कोई दोष नहीं, मुझे कुछ भी मालूम नहीं, मैं कुछ नहीं जानती, मैं क्या बोलूं।’’ तब उसकी फिर पिटाई की गई, तभी अचानक रिछेड़ चैकी और चारभुजा थाना पुलिस की गाडि़यां वहां पहुंच गई। बकौल पीडि़ता-‘‘पुलिस उसके लिए भगवान बनकर आई, उन दरिंदों से पुलिस ने ही छुड़वाया वरना वे मुझे मार कर ही छोड़ते।’’

बाद में पुलिस पीडि़ता, उसके पति व बच्चों सहित पूरे परिवार को चारभुजा थाने में ले गई, ढाढ़स बंधाया और मामला दर्ज किया, उसे अस्पताल ले गए, डाॅक्टरों को दिखाया, इलाज करवाया और रात में वहीं रखा।

अब पुलिस के सामने चुनौती थी, आरोपियों की गिरफ्तारी की। सुबह पुलिस ने गांव में शिकंजा कसा, जो पंच मिले उन्हें पकड़ा और थाने में ले गई। थाने तक पहुंचने तक भी इन पंचों को अपने किए पर कोई शर्मिन्दगी नहीं थी। वे कह रहे थे-‘‘इसमें क्या हो गया? वो औरत गलत है, उसने गलती की, जिसकी सजा दी गई।’’ वे कानून-वानून पर भरोसा नहीं करते, अपने हाथों से तुरंत न्याय और फटाफट सजा देने में यकीन करते है। उनका मानना है कि- ‘‘हमने कुछ भी गलत नहीं किया, हम निर्दोष है।’’ यहां इसी प्रकार के पाषाणयुगीन न्याय किए जाते है, जो कि अक्सर औरतों तथा गरीबों व कमजारों के विरुद्ध होते है। यहां खाप पंचायत के पंचों का शासन है, वे कुछ भी कर सकते है, इसलिए यह शर्मनाक कृत्य उन्होंने बेधड़क किया।

पंचों को घटना की गंभीरता का अहसास ही तब हुआ, जब उन्हें शाम को घर के बजाय जेल जाना पड़ा और पिछले कई दिनों से करीब 30 लोग जेल में पड़े है, अब उन्हें अहसास हो रहा है कि – शायद उनसे कहीं कोई छोटी-मोटी गलती हो गई है।

घटना के दूसरे दिन जिला कलक्टर राजसमंद कैलाश चंद्र वर्मा तथा पुलिस अधीक्षक श्वेता धनखड़ मौके पर पहुंचे, महिला आयोग की अध्यक्ष लाडकुमारी जैन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून के प्रवक्ता फरहान हक एवं मजदूर किसान शक्ति संगठन व स्कूल फाॅर डेमोक्रेसी और महिला मंच के दलों ने भी पीडि़ता से मुलाकात की है। मगर आश्चर्य की बात यह है कि इसी समुदाय के एक पूर्व जनप्रतिनिधि गणेश सिंह परमार यहां नहीं पहुंचे, ना कोई वार्ड पंच आया और ना ही सरपंच, स्थानीय विधायक एवं पूर्व मंत्री सुरेंद्र सिंह राठौड़ भी नहीं आए, इसी जिले की कद्दावर नेता और सूबे की काबीना मंत्री किरण माहेश्वरी भी घटना के पांच दिन बाद आई और मुख्यमंत्री की ओर से राहत राशि देकर वापस चली गई। गृहमंत्री हो अथवा मुख्यमंत्री किसी के पास इस पीडि़ता के आंसू पौंछने का वक्त नहीं है। कुछ मानवाधिकार संगठन, मीडिया और पुलिस के अलावा सबने इस शर्मनाक घटना से दूरी बना ली है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर तो आरोपियों को बचाने के प्रयास के आरोप भी लग रहे है, वहीं राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित इस कांड के विरूद्ध मुख्य विपक्षी दल ने तो बोलने की जहमत तक नहीं उठाई है।

जब मामला मीडिया के मार्फत थाली का तालाब गांव से निकलकर देश, प्रदेश और विदेश तक पहुंचा और चारों ओर थू-थू होने लगी, तब राज्य की नौकरशाही चेती और पटवारी, स्थानीय थानेदार, नर्स, प्रधानाध्यापक, वार्ड पंच, उप सरपंच और सरपंच आदि को निलंबित किया। राशन डीलर तो इस जघन्य कांड में खुद ही शामिल हो गया था। उसका प्राधिकार पत्र खत्म करने की कार्यवाही भी अमल में लाई गई है, मगर प्रश्न यह है कि सांप के निकल जाने पर ही लकीर क्यों पीटता है प्रशासन? क्या उसे नहीं मालूम कुंभलगढ़ का यह क्षेत्र महिला उत्पीड़न की नरकगाह है, यहां ‘डायन’ बताकर कई औरतें मारी गई है। हत्या, जादू-टोने के शक में महिलाओं पर अत्याचार आम बात है, आज भी इस इलाके में जाति के नाम पर खौफनाक खाप पंचायतों के तालिबानी फरमान लागू होते है, सरकारी धन से बने सार्वजनिक चबूतरों पर बैठकर खाप पंच औरतों तथा गांव के कमजोर वर्गों के विरुद्ध खुले आम फैसले करते है, सही ही कहा था संविधान निर्माता अंबेडकर ने कि गांव अन्याय, अत्याचार तथा भेदभाव के मलकुण्ड है।

सबसे ज्वलंत सवाल अभी भी पीडि़ता व उसके परिवार की सुरक्षा का है, उसके पुनर्वास तथा इलाज का है। न्याय देने और उसे क्षतिपूर्ति देने का है। सरकार से किसी प्रकार की मदद के सवाल पर पीडि़ता ने कहा-‘‘ पुलिस ने मुझे बचाकर मदद की है, बाकी मेरे हाथों की पांचों अंगुलियां सलामत है तो मैं मेहनत मजदूरी करके जी लूंगी।’’

मुझे पीडि़तों की इस बात को सुनकर पंजाब के संघर्षशील दलित कवि और गायक कामरेड बंत सिंह की याद हो आई, जिनको अपनी बेटी के साथ दबंगों द्वारा किए गए बलात्कार का विरोध करने की सजा उनके हाथ-पांव काट कर दी गई। जब बंत सिंह होश में आए तब उन्होंने कहा-‘‘जालिमों ने भले ही मेरे दोनों हाथ व दोनों पांव काट डाले है मगर मेरी जबान अभी भी सलामत है और मैं अत्याचार के खिलाफ बोलूंगा।’’ सही है, इस पीडि़ता ने भी अपनी अंगुलियों की सलामती और बाजुओं की ताकत पर भरोसा किया है तथा उसे लगता है कि उसकी अंगुलियां सलामत है तो वह संघर्ष करते हुए मेहनत-मजूरी से जीवन जी लेगी। पीडि़ता की तो अंगुलियां सलामत है मगर हमारे इस पितृसत्तात्मक घटिया समाज का क्या सलामत है, जो उसे जिंदा रखेगा? पीडि़ता के पास तो अपना सच है और पीड़ा की यादें है, ये यादें उसके जीने के संघर्ष का मकसद बनेगी, मगर हम निरे मृतप्रायः लोगों के पास अब क्या है जो सलामत है? अगर अब भी हम सड़कों पर नहीं उतरते है, अन्याय और अत्याचार की खिलाफत नहीं करते है तो हमारा कुछ भी सलामत नहीं है। हम पर लाख-लाख लानतें और करोड़ों-करोड़ धिक्कार!

(लेखक राजस्थान में कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्षरत है।)

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