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रंजीत सिंह कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन ने सेक्स रैकेट चलाना कबूला.. रंजीत सिंह कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन ने सेक्स रैकेट चलाना कबूला..(0)

रांची बहुचर्चित तारा शाहदेव के मामले में आरोपी रंजीत सिंह कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन ने पुलिस पूछताछ में सरकारी अधिकारियों को लड़की सप्लाई करने की बात कबूल कर ली है. इसके साथ ही तारा शाहदेव ने अपने पति पर जो भी आरोप लगाए हैं, पुलिस जांच में उनकी पुष्टि होती दिख रही हैं. इस बीच, निष्पक्ष जांच को लेकर बढ़ते दबाव और रकीबुल के राज्य के कई पुलिस अधिकारियों और हाई प्रोफाइल लोगों से संबंध को देखेत हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है.

महिला शूटर तारा शाहदेव ने आरोप लगाया था कि रंजीत सिंह कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन ने खुद को हिन्दू बताते हुए उनसे शादी की और उसके बाद मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए दबाव डालने लगे. तारा ने हिन्दू रीति-रिवाज से विवाह के अगले दिन जबरन निकाह करवाने का आरोप भी लगाया था. इस मामले में जिस काजी द्वारा निकाहनामा पढ़वाने की बात कही गई थी, शुक्रवार को वह सामने आ गए. काजी मोहम्मद मुस्तफी ने कहा कि उन्हें 8 जुलाई को वे ब्लेयर अपार्टमेंट में निकाह करवाने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वल्दीयतनामा में साइन नहीं होने की वजह से उन्होंने निकाहनामे पर दोनों के साइन नहीं करवाए थे.

दूसरी तरफ, शुक्रवार को कोर्ट ने रंजीत सिंह कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन को तीन दिनों के पुलिस रिमांड में भेज दिया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जगन्नाथपुर थाने में पूछताछ के दौरान उसने सेक्स रैकेट चलाने की बात कबूल ली. बताया जा रहा है कि उसने प्रशासन और न्यायपालिका से जुड़े करीब तीन दर्जन लोगों के नाम भी पुलिस के सामने उजागर किए, जिनके पास वह लड़कियां पहुंचाता था. रकीबुल ने तारा के उस आरोप की पुष्टि की कि वह मंत्रियों समेत रसूखदार लोगों को स्टेशन रोड स्थित होटेल अकॉर्ड में ले जाता था.

तारा ने कहा था कि इस मामले में जिन मंत्री, जज और पुलिस ऑफसरों के नाम सामने आए हैं, उनकी सीबीआई जांच कराई जाए. शुक्रवार को महिला शूटर ने दावा किया था कि राज्य के एक वर्तमान मंत्री तो रकीबुल के कहने पर रात एक बजे अपनी लालबत्ती लगी गाड़ी और सिक्यॉरिटी गार्ड छोड़ होटल अकॉर्ड के कमरा नंबर 307 में जाते थे. तारा ने कहा था कि इन लोगों के जाल में 19 से 22 साल की कई लड़कियां फंसीं हुई हैं, जिन्हें ये लोग नामी कॉलेजों में एडमिशन और पैसे का लालच देकर भेजते हैं.

सूत्रों के अनुसार, रंजीत ने पुलिस को बताया है कि झारखंड के एक जिले में पोस्टेड डीएसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी जब रांची आते थे, तब उसके अशोक नगर रोड नंबर छह स्थित किराए के मकान या अशोक विहार स्थित मकान में ठहरते थे. वहां वह लड़कियों को भेजता था. इन दोनों घरों का इस्तेमाल वह बाहर से रांची आने वाले अधिकारियों को ठहराने के लिए करता था और अय्याशी के लिए लड़कियां भेजता था. इस मामले में देवघर में पोस्टेड एक जज का नाम भी आ रहा है, जबकि हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार विजिलेंस मुश्ताक अहमद पहले ही निलंबित हो चुके हैं.

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सरकार ने SC से कहा कि चार करोड़ Porn वेबसाइटस को ब्लॉक करना असम्भव.. सरकार ने SC से कहा कि चार करोड़ Porn वेबसाइटस को ब्लॉक करना असम्भव..(1)

नई दिल्ली, पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने जवाब दिया ऐसा करने में परेशानियां आ रही है. सरकार ने कहा कि ऐसी लगभग चार करोड़ वेबसाइट हैं और जब हम एक को बंद करते हैं तो दूसरी खुल जाती है. सब पर प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं.’

यह जवाब केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया है. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘अगर इस तरह का कोई कानून बने, तो वह पूरी तरह लागू भी हो.’ कोर्ट ने कहा कि ‘टेक्नोलॉजी चमत्कार कर सकती है, वह विनाश भी कर सकती है. केंद्र सरकार पोर्न वेबसाइट्स, खासतौर से चाइल्ड पोर्न से जुड़ी वेबसाइट्स को ब्लॉक करने के लिए प्रभावी कदम उठाए.’ हालांकि सरकार ने कहा है कि इस पर काम जारी है.

सरकार ने कहा कि सर्वर्स विदेशों से पोर्न मुहैया करा रहे हैं इससे इन पर काबू पाना काफी मुश्किल है. इस समस्या का सामना करने के लिए कमिटी का गठन कर दिया गया है. सरकार के जवाब पर जज ने कहा कि छह हफ्ते बाद होने वाली अगली सुनवाई के दौरान वे कमिटी से अपडेट की उम्मीद करते हैं. मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से कहा कि इंटरनेट पर प्रसारित होने वाली पोर्न सामग्री पर नियंत्रण के लिए कानून, तकनीक और शासन को एकजुट होना होगा.

गौर हो कि इस मामले में इसी साल जनवरी में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि सरकार और कोर्ट के आदेशों के बिना पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाना उनके लिए तकनीकी और व्यावहारिक रूप से असंभव है. आपत्तिजनक कंटेट के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

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मुखबिर होने के संदेह में एक किशोरी की माता-पिता के सामने गोली मारकर हत्या.. मुखबिर होने के संदेह में एक किशोरी की माता-पिता के सामने गोली मारकर हत्या..(0)

असम के चिरांग जिले में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) ने मुखबिर होने के संदेह में एक किशोरी की उसके माता-पिता के सामने गोली मारकर हत्या कर दी. इस वारदात का वीडियो स्थानीय टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित होने के बाद जांच की घोषणा की गई.

इस वीडियो में रूनीखाता थानाक्षेत्र के द्विमुग्री गांव में 16 साल की लड़की प्रिया अपने माता-पिता और ग्रामीणों के बीच खून से लथपथ ढेर पड़ी हुई नजर आ रही है. नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) ने यह वीडियो भेजा था जिसे कल रात से टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित किया जा रहा है.

सरकार के प्रवक्ता राज्य के उद्योग मंत्री प्रद्युत ने कहा कि नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) के उग्रवादियों द्वारा की गई इस हत्या की जांच का आदेश दिया जाएगा. इस खबर की पुष्टि की जाएगी कि लड़की का शव खेत में पिछले दो दिन से पड़ा है और उसके अभिभावक शव लाने से डर रहे हैं.
सरकार कर्तव्य में लापरवाही के लिए दोषी पाए जाने वाले किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई करेगी.

संदेह है कि 20 अगस्त को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (सोंगबिजीत) उग्रवादियों के मारे जाने के अगले दिन इस लड़की की हत्या कर दी गई.

एक उग्रवादी ने वीडियो में दावा किया कि मुखबिर होने की वजह से लड़की की हत्या की गई और यह दूसरों के लिए चेतावनी है.

उसका यह भी दावा है कि उसके गुट के उग्रवादियों को सेना ने नहीं बल्कि दूसरे गुट के उग्रवादियों ने मार डाला.

ग्रामीणों का आरोप है कि वीडियो के प्रसारण के बाद ही पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. इस घटना की विभिन्न संगठनों ने निंदा की है.

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रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के बेटे कार्तिक पर बलात्कार का मामला दर्ज… रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के बेटे कार्तिक पर बलात्कार का मामला दर्ज…(0)

नई दिल्ली, मोदी सरकार के रेल मंत्री सदानंद गौड़ा के बेटे कार्तिक पर एक महिला की शिकायत पर बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है. महिला का आरोप है कि कार्तिक ने उससे शादी की है. गौरतलब है कि  कल बुधवार को ही गौड़ा के बेटे कार्तिक की सगाई हुई है.

महिला का आरोप है कि शादीशुदा होने के बाद भी कार्तिक ने सगाई की. कार्तिक के खिलाफ धारा 376 यानी बलात्कार और 420 यानी धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

मैत्रेयी का कहना है कि वह कार्तिक को इस साल मई से ही जानती है. उसने दावा किया कि वह कार्तिक की मां से भी बात कर चुकी है. उसने दावा किया कि कार्तिक ने मंगलूर स्थित अपने आवास पर गोपनीय ढंग से शादी की थी और हल्दी वाला मंगलसूत्र भी पहनाया था, लेकिन 25 जुलाई से उससे बातचीत बंद कर दी. मैत्रेयी की मां ने भी दोनों के रिश्ते की पुष्टि की है. कार्तिक ने मैत्रेयी से किसी भी रिश्ते से इन्कार किया है. उसके साथ की अंतरंग तस्वीरों को उसने फर्जी बताया है.

मैत्रेयी ने अजय राव के साथ सूर्या द ग्रेट ,हृदय आइ मिस यू के अलावा तमिल फिल्म थीकुचि में भी काम किया है. कुछ टीवी चैनल मैत्रेयी को कांग्रेस कार्यकर्ता बता रहे हैं. मैत्रेयी के पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि वे कर्नाटक राज्य महिला आयोग जाने की तैयारी कर रहे हैं.

बेटे पर लगे इन आरोपों पर रेल मंत्री सदानंद गौड़ा ने हैरानी जताई है. उनका कहना है कि इन आरोपों से उन्हें धक्का पहुंचा है. सदानंद के मुताबिक ये आरोप ब्लैकमेल करने के लिए लगाए गए हैं. वहीं कार्तिक ने भी महिला के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.

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LOC पर ब्रिगेडियर ने अपने सहायक से किया कुकर्म.. LOC पर ब्रिगेडियर ने अपने सहायक से किया कुकर्म..(0)

जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास तैनात एक ब्रिगेडियर पर अपने सहायक से कथित रूप से कुकर्म करने के मामले में उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना है.

सहायक को पहले बैटमैन के रूप में जाना जाता था जो नियमित लड़ाकू सैनिक हैं और अधिकारियों के सरकारी कामकाज में सहयोग के लिए उन्हें रखा जाता है. लेकिन इस प्रणाली को खत्म करने की मांग है क्योंकि उनका कथित रूप से दुरूपयोग घरेलू कार्यों के लिए किया जाता है.

ब्रिगेडियर एलओसी के पास पुंछ सेक्टर में सैनिकों के कमांडर हैं और संवेदनशील इलाकों के प्रभारी हैं जहां अक्सर पाकिस्तानी युद्धविराम उल्लंघन होता है.

सूत्रों ने बताया कि उनके व्यवहार के बारे में शिकायत मिलने के बाद ब्रिगेडियर को कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के लिए एक इन्फैन्ट्री डिविजन में भेज दिया गया है.

7/8 गोरखा राइफल्स के ब्रिगेडियर ने कहा कि उन्हें जबरन छुट्टी पर भेजा गया है विशिष्ट सेवा मेडल और दो अन्य मेडल से सम्मानित ब्रिगेडियर अभी हाल तक आर्मी हेडक्वार्टर में कर्नल के पद पर तैनात था.

सेना मुख्यालय ने कहा कि इस तरह की एक घटना प्रकाश में आई है और इस मामले में जांच जारी है. अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं पहले भी हुई हैं और अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है क्योंकि सशस्त्र बलों में इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है.

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ज़िन्दगी के सौदागर.. ज़िन्दगी के सौदागर..(0)

-भावना पाठक||

अगर वो हिम्मत करके चलती ट्रेन से कूदी न होतीं तो ना जाने उन्हें किसे बेच दिया जाता ? उन्हें कितने में बेचना है , खरीददार कौन है , सब तय हो चुका था, बस अब तो लड़कियों को मैसूर तक ले जाना भर बाकी था. रतलाम से अगवा की गयी दो नाबालिग बच्चियों को जैसे ही इस बात की भनक लगी कि ४०-४० हज़ार में उनका सौदा कर दिया गया है, वैसे ही उन लड़कियों ने बैतूल स्टेशन पर चलती ट्रेन से छलांग लगा दी. ख़ुदा का शुक्र है वो सलामत हैं. उन मानव तस्करों के चंगुल से भी और चलती ट्रेन से कूदने पर होने वाली दुर्घटना की आशंका से भी.

यह मानव तस्करी का पहला मामला हो ऐसा नहीं है , आये दिन अख़बारों, टीवी चैनलों पर मानव तस्करी की घटनाएं सुनने को मिल जाती हैं. ड्रग्स और हथियारों के बाद यह दुनियां का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध है जो बड़ी तेज़ी से फल-फूल रहा है. जहां महिलाओं और लड़कियों को यौन शोषण और देह व्यापार की आग में झोंक दिया जाता है तो मासूम बच्चों को बंधुआ मजदूर बनाकर अमानवीय तरीकों से होटलों, फैक्ट्रियों आदि में उनसे घंटो काम कराया जाता है साथ ही उनका यौन शोषण भी होता है. इतना ही नहीं बच्चों के हाथ पैर तोड़ कर इनसे भीख तक मंगवाई जाती है. पडोसी देश नेपाल से लाये गए बच्चों से जबरन सर्कस में काम कराया जाता है. इन सब के अलावा किडनी, लीवर आदि मानव अंगों की तस्करी के लिए भी मानव तस्करी की जाती है. मानव तस्करी को ख़त्म करने में एक बड़ी दिक्कत यह भी आती है की इसमें कम से कम तीन देशों के अपराधी शामिल रहते हैं – पहला जहां से बच्चों और औरतों को उठाया जाता है दूसरा वह देश जहां से होकर इनको गंतव्य देश तक पहुँचाया जाता है. इन् अपराधियों की लोकल से लेकर नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक ज़बरदस्त नेटवर्किंग रहती है.

मानव तस्करी के प्रमुख कारणों में – गरीबी, अशिक्षा , बेरोज़गारी है जिसका फायदा मानव तस्कर उठाते हैं. वे गरीब और ज़रूरतमंद लड़कियों और औरतों को शहर या दूसरे देश में नौकरी दिलाने के बहाने , कभी शादी का झांसा देकर तो कभी पैसों का लालच देकर उन्हें उनके घरों से निकालते हैं और बाद में उनका सौदा कर देते हैं. जो लडकियां औरतें आसानी से उनके झांसे में नहीं आती उन्हें डरा धमकाकर या अगवा कर के भी इस काम में लगाया जाता है. नेपाल और बांग्लादेश से लडकियां पहले भारत लायी जाती हैं फिर यहां से खाड़ी देशों , यूरोप और अमेरिका तक में भेजी जाती हैं. जहां उनसे जबरन शादी से लेकर घरेलू कामकाज के साथ साथ देह व्यापार तक कराया जाता है. यह भी देखा गया है की कभी कभी जो महिला खुद मानव तस्करी का शिकार होती है कुछ समय बाद वह इस व्यवसाय में शामिल हो जाती है और दलाल बनकर वे दूसरी लड़कियों महिलाओं को अपना शिकार बनाती हैं. ऐसा करने के लिए भी अक्सर उन्हें पैसों का लालच, इमोशनल ब्लैकमेल या नशे का आदि बनाकर किया जाता है.

दूर क्या जाना देश की राजधानी दिल्ली के पश्चिमी इलाके शकरपुर बस्ती में ही घरेलू नौकर मुहैया कराने वाली ५००० से ज़्यादा एजेंसियां काम कर रही हैं जिनका कोई लेख जोखा किसी भी सरकारी विभाग में नहीं है. बिहार, झारखण्ड, कर्णाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, नार्थईस्ट की लडकियां सबसे ज़्यादा दिल्ली में लेकर बेचीं जाती हैं. फर्स्ट पोस्ट के एक लेख के अनुसार दिल्ली भारत के मानव तस्कर व्यापार का गढ़ है. मानव तस्करी सबसे ज़्यादा देह व्यापार के लिए की जाती है. यहां से लड़कियों को हरियाणा जैसे राज्य में भी बेचा जाता है जहां उनसे हरियाणा के कुंवारे जबरन ब्याह रचाते हैं.

हमारे देश में इंसानी खरीद-फ़रोख्त जैसे गैर कानूनी अपराध की सजा सात साल से लेकर आजीवन कारावास तक रखी गयी है बावजूद इसके यह अपराध घटने का नाम नहीं ले रहा क्यूंकि मानव तस्करी का काम बड़े ही योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है जिसमें कई बिचोलिये होते हैं. विडंबना तो यह है की अभी तक कोई ऐसा यूनिवर्सल कानून नहीं बना है जो मानव तस्करी के सभी पहलुओं को शामिल करता हो. मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाई गयी लड़कियों और औरतों के लिए जो शेल्टर्स बनाये भी गए हैं वहाँ उनके लिए सम्मान से अपने पैरों पे फिर से खड़े होने जैसे इंतजामात तक नहीं होते. माना अँधेरा बहुत घना है पर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहे कई गैर सरकारी संगठन उम्मीद की रौशनी का काम भी कर रहे हैं. अमेरिका का इंटरनेशनल जस्टिस मिशन, नेपाल का ए. बी. सी., कनाडा का अ बेटर वर्ल्ड, भारत के शक्ति वाहिनी, प्रज्ज्वला, अपने आप वुमन वर्ल्ड वाइड आदि ऐसे गैर सरकारी संगठन हैं जो अपने स्तर पर मानव तस्करी के विरुद्ध लड़ाई लड़ रहे हैं. ये संगठन न केवल मानव तस्करों के चंगुल से औरतों लड़कियों और बच्चों को आज़ादा कराते हैं बल्कि उनके रहने, ट्रेनिंग देने का भी काम करते हैं ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें और सम्मान के साथ जीवन जी सकें. अंत में आप सबसे मेरी यह अपील है कि जब कभी भी और कहीं भी आप महिलाओं और बच्चों को संदिग्ध अवस्था में पाएं जहां उनके मानव तस्करों के हाँथ में पड़ने की आशंका हो तो ऐसे में कम से कम १०० नंबर डायल करके पुलिस को जानकारी ज़रूर दे दें.

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खांप ने लगा रखी थी पीड़ित परिवार पर कई पाबंदियां, बाड़मेर में दो बहनों के साथ गैंगरेप में बड़ा खुलासा.. खांप ने लगा रखी थी पीड़ित परिवार पर कई पाबंदियां, बाड़मेर में दो बहनों के साथ गैंगरेप में बड़ा खुलासा..(2)

खांप पंचायत ने बीस महीने से कर रखा है परिवार का हुक्का पानी बंद.. जिला प्रशासन पर उठे सवाल.. खांप पंचायत ने लगा रखा था पत्नी पर गाँव में आने पर प्रतिबंध.. खांप पंचायत ने सुना रखा था इस परिवार को सरकारी योजनाओं से वंचित रखने का फरमान..

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर, राजस्थान के बाड़मेर में स्कूल एस घर लौट रही दो बहनों के साथ सामूहिक रेप मामले में सनसनीखेज खुलासे ने बाड़मेर के प्रशासन, पुलिस के साथ ही सरकार को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है. पीड़ित लड़कियों के पिता ने पहली बार अपने गाँव से बाहर आकर अपनी बेटियो का अस्पताल में इलाज करवाने के बाद मीडिया से बात करते हुए खुलासा किया कि उसके परिवार का हुक्का पानी पिछले बीस महीने से समाज ने बंद कर रखा है. यहाँ तक कि उसकी पत्नी के गाँव में प्रवेश करने पर भी प्रतिबंध लगा रखा है. यही नहीं बल्कि पिछले बीस महीने से सरकारी योजनाओं के फायदे उठाने पर भी समाज ने पाबन्दी लगा रखी है. राशन डीलर इस परिवार को राशन तक नहीं देता है.

आज़ाद भारत का मुगालता पालने वालों के लिए एक बुरी खबर हैं. बाड़मेर आज भी तुगलकी ब्रिटिश कालीन स्थिति में हैं. हद हैं कि 20 माह से ज्यादा समय से एक परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित रहा मनरेगा का काम इस परिवार के लिए प्रतिबंधित रहा मज़े की बात यह हैं कि राजस्थान सरकार का नियुक्त राशन डीलर इनके सरकारी राशन कार्ड पर अनाज नही देता था. इसका कारण जान कर आप भी हतप्रभ रहे जायेंगे कि इसको सरकारी !! माफ़ करे !! लोकतान्त्रिक पद्धति से चुनी हुई सरकार ने ये सुविधाएँ नही दी क्यूंकि खांप पंचायत के इस परिवार को समाज से बहिष्कृत कर रखा था और बाद में इसी समाज के ठेकेदारों ने परिवार की दो युवतियों को हवस का शिकार बना दिया. पुलिस से वहशी भेडियो की हवस का शिकार हुई इन दोनों पीड़िताओ ने बलात्कार के प्रयास की शिकायत भी की लेकिन गिड़ा थाना इनके लिए कोई उम्मीद का सहारा नही रहा.

सामूहिक बलात्कार में दरिंदो ने समाज से बहिष्कृत हो चुके इस परिवार की दो बेटियों दो सगी बहनों को हवस का शिकार बनाया लेकिन पुलिस का मूकदर्शी रवैया कायम रहा. अब जब यह मामला प्रकाश में आया तो मानवाधिकार संगठनों ने आगे बढ़ कर इस प्रकरण को आन्दोलन के जरिये आगे बढ़ाने की चेतावनी दी हैं. मानवाधिकार संगठन की प्रतिनिधि कविता श्रीवास्तव ने इस प्रकरण में बाड़मेर कलक्टर और एस पी की भूमिका पर सवाल खड़े किये हैं.

अब जरा इन लड़कियों के अभागे पिता की दास्ताँ को सुने. हर पत्थर दिल पिघल जाएगा ये सुनकर. इस अभागे बाप के मुताबिक पिछले 20 माह से वो मर मर कर जिए हैं. उनको अब न्याय नही मिलेगा तो मौत का सहारा लेना पड़ेगा.

इस पूरे मामले के सामने आने के दो दिन बीत जाने के बाद भी कलक्टर और एस पी ने खांप पंचायत के पंचों के ख़िलाफ़ कोई भी कारवाई नहीं की है और न ही पीड़ित लड़कियों का इलाज भी कराने की कोई जरूरत  समझी. दो दिन बाद पीड़ित लड़कियों को मानवाधिकार संगठनो ने इलाज के लिए बाड़मेर के निजी अस्पताल में भर्ती करवाया है. जबकि कानून के मुताबिक दोनों लड़कियों के इलाज के साथ ही पुनर्वास की जिम्दारी भी सरकार की .  लेकिन लगता है वसुंधरा सरकार को इस मामले कोई विशेष रूचि नजर नहीं आ रही है. अब मानवाधिकार संगठनो ने चेतवानी दी है कि इस मामले में समाज के पंचो के साथ ही लापरवाह पुलिस अधिकारियो के खिलाफ भी जल्द कारवाई हो अन्यथा बड़ा आंदोलन किया जाएगा.

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पंचायत ने दी रेप की सज़ा महज़ पांच थप्पड़.. पंचायत ने दी रेप की सज़ा महज़ पांच थप्पड़..(0)

यूपी के बिजनौर में 14 साल की एक लड़की के साथ रेप करने वाले युवक को गांव की पंचायत ने ‘भयानक’ सजा दी. सजा के तौर पर पीड़ित लड़की को पांच थप्पड़ मारने को कहा गया और उसे आदेश दिया गया कि पुलिस में शिकायत दर्ज न कराए.

यह घटना बिजनौर के चांडक गांव में हुई. आरोप है कि सोमवार को एक युवक ने 14 साल की एक लड़की के साथ रेप किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी. अगले दिन उसने लड़की को फिर से छेड़ा तो लड़की ने अपने परिवार को पूरी बात बता दी. परिवार जब थाने पहुंचा तो युवक का परिवार और पंचायत के लोग भी पहुंच गए और पुलिस पर केस दर्ज न करने का दबाव बनाया.

पुलिस ने लड़की के परिवार से पंचायत में मामला हल करने को कहकर भेज दिया. पंचायत में फैसला किया गया कि पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी और बदले में लड़की पांच थप्पड़ मार सकती. एक अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक ग्रामीण सर्वेश सिंह ने बताया कि पंचायत और युवक के परिवार ने लड़की के परिवार को पुलिस शिकायत करने पर हुक्का-पानी बंद कर देने की धमकी दी. पीड़ित के पिता एक भूमिहीन मजदूर हैं जबकि आरोपी एक प्रभावशाली परिवार से है.

बिजनौर ग्रामीण के एडिशनल एसपी राधे श्याम ने मामले की जांच के लिए एक पुलिस टीम गठित की है.

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 सामूहिक बलात्कार के बाद गुप्तांगों में डाली लकड़ियां और खा गए नोच नोच के..  सामूहिक बलात्कार के बाद गुप्तांगों में डाली लकड़ियां और खा गए नोच नोच के..(6)

बाड़मेर के रतेऊ गाँव में समाज से बहिष्कृत एक परिवार की 2 सगी बहनों के स्कूल से लौटते समय उनके साथ उन्ही के 3 पड़ौसी दरिंदो ने पहले उन्हें साथ सामूहिक बलात्कार किया और फिर भी हवस की प्यास नहीं बुझी तो दरिंदों ने उनके गुप्तअंगो में लकड़ियाँ भर दी और पूरे शरीर को जगह-जगह से काट-काट खा गए.

2 दिन पूर्व इस घटना में न्याय ना मिलने के बाद दोनों पीड़िता आज बाड़मेर पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा से मिली तथा उन्हें अपने साथ हुई इस खौफनाक अत्याचार के बारे में अवगत कराया। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने तुरंत कार्यवाही के आदेश देते हुवें एक वहसी दरिन्दे को गिरफतार कर लिया है और बाकी के दरिंदों की तलाश जारी है.

पंचो ने किया था समाज से बहिष्कृत

पीड़ित बच्चियों का मेडिकल करवाया जा रहा है. एक हत्या के प्रकरण में पीडि़ताओं के भाई-बहन को संदेह के आधार पर आरोपी बना कर पुलिस ने गिरफ्तार कर रखा है और वर्तमान में दोनों जेल में हैं. ऐसे में समाज के पंचो ने परिवार को समाज से बहिष्कृत कर दिया है. इनके कहीं आने जाने, सार्वजनिक स्थान पर पानी भरने पर भी रोक लगाई हुई है.

समाज की सबसे बड़ी समस्या है, महिलाओं के प्रति पुरुषों की विकृत मानसिकता और औरत को अपनी हवस का साधन समझने की सोच. बाड़मेर में दुष्कर्म के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और पुलिस भी पिछले कुछ सालो में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलो के कारण स्तब्ध हैं. कई आरोपी जेल जा चुके हैं लेकिन बलात्कारियों की तादाद बढ़ती जा रही हैं.

बलात्कार कर नोंच-नोंच कर खाया

12वीं कक्षा में पढ़ने वाली इन दोनों बलात्कार पीड़िताओं ने तो इस बात की कल्पना भी नहीं की होगी कि उसके इर्द-गिर्द हैवान और शैतान भी बसते हैं. इस पूरे मामले के संबंध में बुधवार को दोनों पीड़िताओं ने ने पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा को बताया कि वे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बाटाडू गांव में पढ़ती है तथा 2 दिन पूर्व स्कूल से छुट्टी होने के बाद अपने गांव रतेवू आ रही थी, इसी दौरान घर से एक किलोमीटर पूर्व उसके पड़ौस में रहने वाले रामाराम जाट, रामचन्द्र जाट व सवाई राम जाट ने दरिन्दगी की सभी हदे पार कर उनके साथ ना केवल बलात्कार किया, वरन पूरे शरीर को जगह-जगह से दांतो से कांट डाला और तो और इन तीन दरिन्दो ने उनके गुप्तांगो में लकड़ी डाली व उन्हें घसीटते हुवें लहुलुहान कर डाला.

लापरवाह पुलिस

इन्होंने इस मामले की शिकायत गिड़ा थाने में दर्ज करवाई थी लेकिन कोई कार्यवाही ना होते देख वे पुलिस अधीक्षक के पास पहुंची हैं.

बच्चियों की मेडिकल जाँच

पुलिस अधीक्षक हेमन्त शर्मा ने इस मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं तथा मेडिकल जांच करवाने के भी निर्देश दिए हैं. उन्होंने स्वीकार किया कि दरिंदों ने दरिंदगी की सभी हदे पार कर दी हैं तथा पीडि़ता के शरीर पर काफी जगह चोट के निशान हैं उसका मेडिकल करवाया जा रहा हैं.

2 आरोपी अभी भी फरार

इस मामले में अभी तक एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया हैं तथा बाकी की तलाश की जा रही हैं. उन्होंने बताया कि एसटी एससी सेल के पुलिस उपाधीक्षक को इस प्रकरण में बयान दर्ज करने के निर्देश दिए हैं.

नहीं देखी कभी ऐसी दरिंदगी

दूसरी तरफ युवतियों के अधिवक्ता कन्हैया लाल जैन के अनुसार उन्होंने अपने 30 सालों के वकालत के जीवन में इतनी दरिंदगी पहली बार देखी हैं जो मानवता पर दाग हैं. अधिवक्ता के अनुसार लड़कियों को दरिंदो ने सिर्फ इस लिए निशाना बनाया क्यूंकि वो समाज से बहिष्कृत हैं. इस पूरे मामले में अपराधियों में कानून का भय कहीं पर भी यहां नजर नहीं नहीं आता.

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नई दिल्ली: बदायूं में दो चचेरी बहनों की हत्या के मामले में एक नया मोड़ आ गया है, क्योंकि हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायगनोस्टिक्स (सीडीएफडी) ने उन दोनों नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की बात को खारिज कर दिया है, जिनके शव पेड़ से लटके हुए पाए गए थे।

सीबीआई सूत्रों ने कहा कि इस प्रतिष्ठित सरकारी प्रयोगशाला से यह महत्वपूर्ण जानकारी मिलने के बाद दोनों चचेरी बहनों की हत्या से पहले यौन उत्पीड़न की बात को लेकर कई संदेह अब दूर हो गए हैं तथा अब शक की सुईं बच्चियों के परिवार के सदस्यों की ओर चली गई है। सूत्रों ने कहा कि वे इसे झूठी शान के नाम पर हत्या का मामला मानने से इनकार नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में बच्चियों पर यौन हमले की आशंका को खारिज किया गया है और इस रहस्यमयी हत्या के मामले में एक राय बनाने के लिए इस रिपोर्ट को तीन-सदस्यीय चिकित्सा दल के पास भेजा जाएगा। सीबीआई के सूत्रों ने कहा कि यौन हमले की आशंका के खारिज होने, आरोपियों के लाइ-डिटेक्टर टेस्ट पास कर जाने और गवाहों के बयानों में तालमेल के अभाव से अब संदेह परिवार के सदस्यों पर चला गया है।

सूत्रों ने कहा कि वे इस मामले में झूठी शान के नाम पर की गई हत्या के पहलू से इनकार नहीं कर रहे, लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने कहा कि अब शवों को कब्र से बाहर नहीं निकाला जाएगा, क्योंकि सीडीएफडी से पर्याप्त फोरेंसिक सबूत मिले हैं, जिनसे मामले में फायदा हो सकता है। सूत्रों ने कहा कि पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाओं का विरोध नहीं किया जाएगा, क्योंकि इनके खिलाफ सीबीआई के पास कोई स्पष्ट सबूत नहीं है।

कानून के मुताबिक अगर सीबीआई 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं कर पाती है, तो आरोपी जमानत ले सकता है। इस मामले में तीन महीने की मियाद 28 अगस्त को पूरी हो रही है।

इसी साल मई में बदायूं में एक पेड़ से दो चचेरी बहनों के शव लटके हुए पाए गए थे। इस मामले को लेकर काफी चर्चा हुई थी और कानून-व्यवस्था को लेकर समाजवादी पार्टी की खासी आलोचना हुई थी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एएल बनर्जी ने दावा किया था कि लड़की के साथ बलात्कार नहीं हुआ और अपराध के पीछे का कारण संपत्ति विवाद हो सकता है।

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हत्यारी बहनों को फांसी, पहली बार महिला को मिली ये सजा.. हत्यारी बहनों को फांसी, पहली बार महिला को मिली ये सजा..(2)

दो बहनें, जिन्होंने तेरह बच्चों को अगवा कर के उनसे जेब कतरों का काम करवाया और फिर मौत के घाट उतार दिया, भारत में फांसी की सजा पाने वाली महिलाएं बनेंगी.रेणुका शिंदे और सीमा गावित भारत में पहली बार फांसी की सजा पाने वाली महिलाएं हैं जिन्हें तेरह बच्चों की जघन्य सीरियल किलिंग के मामले में दोषी पाया गया है. इन्हें तेरह हत्याओं और दस अपहरण का दोषी पाया गया है. साल 2001 में पकडे जाने के तरह साल बाद ये फैसला आया है. इन्हें राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका ख़ारिज किये जाने के बाद पुणे की यरवदा जेल में फांसी दी जाएगी.

इस  फैसले ने उन घटनाओ की याद ताज़ा कर दी है जिसमें इन दोनों ने हत्याओं की झड़ी लगा दी थी. इनमें एक दो वर्षीया बालक की बिजली के खम्भे पर पटक कर की गयी निर्मम हत्या भी है.

हत्या के सिलसिले  सिलसिले शुरू करने वाली बहने उस वक़्त खुद भी बालिग नहीं थीं. उनकी उम्र 15 और 17 साल थी. इन्हें इनकी माता के द्वारा अपराध की दुनिया में जोड़ा गया था और ये सभी मिल कर महाराष्ट्र की छोटे शहरों में जेब काटने का काम किया करती थी. इसके बाद ये पुणे, नासिक, कोल्हौर आदि बड़े शहरों में जा कर जेब काटने लगी और यही पर उन्होंने बच्चे अगवा करने का काम शुरू किया. इन बहनों का आखिरी शिकार इनकी माँ की बनाई योजना का शिकार था. जिसे  इन्होने बदला लेने के मकसद से अपने पिता, जिसने इनकी माँ के कारनामों से दुखी हो कर उसे त्याग कर दूसरी महिला से विवाह कर लिया था, के नौ वर्षीया बच्चे को अगवा कर के क़त्ल कर दिया था. इसके बाद पीड़ित महिला के शक ज़ाहिर करने पर इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया जहां कुछ समय बाद जेल में इनकी माँ अंजनाबाई की मौत हो गयी थी.

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पत्नी को खुश करने के लिए पड़ोसन से किया दुष्कर्म.. पत्नी को खुश करने के लिए पड़ोसन से किया दुष्कर्म..(1)

बेंगलुरु. पत्नी की लाइव सेक्स देखने इच्छा की पूर्ति के लिए 27 साल के केबल ऑपरेटर के पड़ोसन का कथित तौर पर रेप करने का मामला सामने आया है. घटना बेंगलुरु की है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पत्नी ‘लाइव सेक्स’ देखना चाहती थी और वारदात को अंजाम देने का सारा इंतजाम भी उसी ने किया. पीड़ित महिला आरोपी की पत्नी की सहेली है. पुलिस ने आरोपी दिलीप और उसकी पत्नी आशा को गिरफ्तार कर मामला दर्ज कर लिया है.

पुलिस के अनुसार घटना 27 जुलाई की है और इसे आरोपी ने अपने ही घर में अंजाम दिया. पीड़ित ने 11 अगस्त को इस बारे में तब पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जब घटना पति के संज्ञान में आ गई. जांच अधिकारी का कहना है कि पॉर्न को लेकर आशा के चर्चे आस-पड़ोस में रहे हैं. पीड़ित आशा की करीबी दोस्त भी थी और पास वाले घर में ही रहती थी. आशा अपनी फैन्टसी को लेकर पहले भी उससे चर्चा करती रहती थी. घटना की जानकारी रखने वाले कई लोगों का कहना है कि आशा पीड़ित को अकसर पॉर्न देखने के लिए कहती रहती थी. आशा ने पीड़ित को पहले भी ‘लाइव सेक्स’ देखने की इच्छा बताई थी. इसके बाद से पीड़ित ने आशा से दूरी बरतनी शुरू कर दी थी.

आशा ने 27 जुलाई को रात नौ बजे घर में किसी काम के बहाने पीड़ित को बुला लिया. आशा ने पीड़ित से उसके पति के साथ ‘सहयोग’ करने के लिए कहा ताकि वह ‘लाइव सेक्स’ देख सके. आरोपी पति-पत्नी ने पीड़ित को एक कमरे में बंद कर दिया और उसका रेप किया. आरोपी दंपती ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उसके पति की हत्या कर दी जाएगी. इसके बाद आशा ने आरोपी दंपती से दूरी बना ली. लेकिन 11 अगस्त को एक बार फिर आशा ने पीड़ित को ‘सहयोग’ करने के लिए कहा. इस बार पीड़ित ने सारा मामला अपने पति के बता दिया. इसके बाद पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई और अगले ही दिन पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया. आरोपी दंपती के खिलाफ आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच की जा रही है.

(भास्कर)

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साध्वी प्रज्ञा के प्रति यौन आकर्षण के चलते हुयी थी संघ प्रचारक जोशी की हत्या.. साध्वी प्रज्ञा के प्रति यौन आकर्षण के चलते हुयी थी संघ प्रचारक जोशी की हत्या..(0)

संघ प्रचारक सुनील जोशी की साल 2007 में हुयी हत्या के सिलसिले में जांच करने वाली राष्ट्रीय  जांच एजेंसी(एनआईए)  की टीम ने एक सनसनीखेज खुलासा किया है. एनआईए के अनुसार हत्या की वजह जोशी के साध्वी के प्रति यौन आकर्षण हो सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसी मामले में अगले हफ्ते चार्जशीट दाखिल करने वाली है और इसमें साध्‍वी का नाम बतौर आरोपी शामिल किया जा सकता है. मध्य प्रदेश पुलिस देवास में साध्वी का नाम 2008 के मालेगांव बम धमाकों के आरोपी के तौर पर पहले ही दर्ज आकर चुकी है.

एनआईए ने कहा कि जोशी का प्रज्ञा ठाकुर के प्रति तीव्र यौन आकर्षण था जो उनकी मौत की वजह बना. इसके अलावा आतंकी योजनाओं में राजदार होना भी उनके खिलाफ गया. एनआईए मामले में जो चार्टशीट दाखिल करने वाली है उसमें इस बात का जिक्र हो सकता है कि अजमेर ब्‍लास्‍ट के बारे में जोशी द्वारा जानकारियों को सार्वजनिक करने से रोकने के लिए प्रज्ञा ने आनंदराज कटारिया को करीब 10 दिनों तक अपने घर में रखा था. गौरतलब है कि देवास पुलिस ने कटारिया को आरोपी बनाया था, लेकिन जोशी मर्डर मामले में एनआईए की अंतिम लिस्‍ट में उनका नाम शामिल नहीं किया गया था.

जोशी हत्या मामले में मालेगांव ब्लास्ट से सम्बंधित गिरफ्तारियों के बाद साल 2011 में नया मोड़ आया जब मध्य प्रदेश के महू से गिरफ्तारिय हुयी और देवास पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की. एनआईए गिरफ्तार किए गए चार लोगों- राजेंद्र चौधरी, लोकेश शर्मा, जीतेंद्र शर्मा (भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता) और बलबीर सिंह को अब प्रज्ञा ठाकुर के साथ जोशी हत्‍याकांड मामले में आरोपी बनाएगी. जांच एजेंसी का दावा है कि राजेंद्र और लोकेश ने ही 29 दिसंबर 2007 की रात जोशी का कत्‍ल किया था. जीतेंद्र शर्मा ने इसके लिए पिस्‍तौल मुहैया कराई थी और बलबीर सिंह ने इसे छिपाया था. यही नहीं एनआईए के अनुसार लोकेश, राजेंद्र और जोशी एक बड़ी साजिश रच रहे थे और मुसलमानों को निशाना बनाने की फ़िराक में थे.

 

 

 

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