Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

अपराध back to homepage

पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर लतियाया.. पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर लतियाया..(0)

 

 

 

-कुमार सौवीर।।

बसपा के पूर्व मंत्री और रसड़ा-बलिया से पूर्व विधायक घूरा राम को कल बलिया की जनता ने जमकर हूर दिया। जनता ने घूरा राम को पचासों चपत-झांपड़ और सैकड़ों लात-घूसे रसीद किये। गुण्‍डई पर आमादा घूरा राम और उनके गुण्‍डों ने इसके पहले ट्रक चालकों को बेवजह पीटा थ्‍ाा, नतीजा घूरा की इस हरकत पर नाराज ट्रक चालकों को भी गुस्‍सा आ गया और उन लोगों ने घूरा और उनके गुण्‍डे-साथियों को दबोचा और सरेआम उन्‍हे जमकर हूर दिया। बताते हैं कि घूरा की तेज रफ्तार स्‍कार्पियों गाड़ी किसी ट्रक से भिड गयी थी, जिसके चलते उनकी गाड़ी पर कुछ डेंट आ गया था। इस पर घूरा राम और उनके साथियों ने ट्रक चालक और उसके साथियों को दौड़ा-दौड़ा कर सडक पर पीटा था। लेकिन इसी बीच ट्रक चालक के कुछ साथी और आसपास के नागरिक भी ट्रक चालक के समर्थन में आ गये और उन्‍होंने घूरा राम व उनके साथियों को जमकर हूर दिया।


काफी देर तक आक्रोशित चालकों और नागरिकों की भीड़ को बाद में पुलिस ने बल प्रयोग कर तितर-बितर किया। बाद में कुछ चालकों को पुलिस ने हंगामा करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
जन-चर्चाओं के अनुसार घूरा राम जब भी सत्‍ता में आते हैं तो इसी नशे में हमेशा सरेआम लोगों को पीटते-पिटवाते रहते हैं। इतना ही नहीं, उनका परिवार भी इसी नशे में रहता है। और उनके पट्टीदार भी कटहे कुत्‍ते की तरह जनता को काटते-पीटते रहते हैं। पिछली सरकार में उन्‍होंने एक सरकारी चिकित्‍सक को भी बुरी तरह धुन दिया था, जिसको लेकर पूरे जनपद में आक्रोश था, लेकिन चूंकि तब बसपा की सरकार थी, इसलिए कोई चूं तक नहीं कर पाया था। सूत्र बताते हैं कि घूरा राम हमेशा जातिवादी आधार पर बाकी जातियों के प्रति हिंसा के प्रति आमादा रहते हैं। लेकिन इसके बावजूद इस बार घूरा राम को पहले जनता ने हूर कर विधायकी से हटाया, फिर कल भरे सड़क जनता ने हाथ-लात से हूर दिया।
अब आखिरी बात। नेता जी, अब होशियार। आपकी गुण्‍डई का जवाब देने के लिए अब जनता ने भी कमर कस ली है। सम्‍भल जाइये। कहीं ऐसा न हो कि अगला खाता आपका ही खुल जाए
( चित्र परिचय:- तीन फोटो में जनता घूरा राम को सम्‍मानित कर रही है और बाकी फोटो में ट्रक चालक और उनके समर्थन में जुटी जनता घूरा राम को हूर रही है।

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
यूपी के मुख्यमंत्री और डीजीपी के नम्बरों से कॉल स्पूफिंग की, अरबों ठगे सपा नेता ने.. यूपी के मुख्यमंत्री और डीजीपी के नम्बरों से कॉल स्पूफिंग की, अरबों ठगे सपा नेता ने..(0)

कभी मुख्यमंत्री तो कभी डीजीपी के क्लोन्ड फ़ोन नंबरों से बात करता था जालसाज

राज्य के दो पूर्व पुलिस महानिदेशकों सहित कई अफसरों के करोड़ों रुपए डकारे

जालसाजी और जुगाड़ से 14 गनर ले रखे थे सफेदपोश नेता ने.. आगरा के दो दरोगाओं से दस लाख की जालसाजी में पकड़ा गया.. कॉल स्पूफिंग के जरिये मुख्यमंत्री आवास से न्यूजीलैंड दूतावास को फ़ोन किया..

-अनुराग तिवारी।।

लखनऊ, एक साथ 14-14 गनर रखने वाले सपा के एक कथित नेता ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के सरकारी आवास के टेलीफोन नंबर से न्यूजीलैंड के दिल्ली स्थित दूतावास से कई बार बात की, राज्य के दो पूर्व पुलिस महानिदेशकों से आलू में मोटी कमाई के नाम पर करोड़ों-करोड़ों रूपये हथियाए. कई और आईपीएस अफसरों से निवेश के नाम पर लम्बी रकम वसूली और पुलिस महानिदेशक अरविन्द कुमार जैन के सीयूजी नंबर से दर्जनों फ़ोन किये लेकिन पकड़ा गया दो दरोगाओं से जालसाजी के मामले में. एक वक़्त सफ़ेद कुर्ता-पायजामा पहनकर डीजीपी दफ्तर में धड़ल्ले से आने-जाने वाला शैलेन्द्र अग्रवाल फिलहाल आगरा पुलिस की गिरफ्त में है.

सरकारी जानकारी फिलहाल इतनी है कि डीजीपी बनकर फ़ोन पर दो दरोगाओं को धमकाने और उनसे दस लाख रूपये वसूलने के आरोप में इस जालसाज को पकड़ा गया है. लेकिन गोपनीय रिपोर्टके मुताबिक कॉल स्पूफिंग यानि इन्टरनेट के जरिए दूसरों के मोबाइल और लैंडलाइन नंबर की फेक कॉल के माहिर इस सफेदपोश अपराधी ने कई बड़े लोगों से पचासों करोड़ की ठगी की है. ठगे जाने वालों में इसी सरकार के कार्यकाल में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक रहे दो सेवानिवृत आईपीएस अधिकारी बताये जाते हैं, जिनसे इसने 36 फीसदी ब्याज दर की शर्त पर करोड़ों रूपये का निवेश आलू भंडारण के लिए कराया. एक अफसर से तो 14 करोड़ रूपये का निवेश आलू के नाम पर कराने के बाद यह जालसाज मुकर गया. उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो गहराई से जांच में कई बड़े राज खुलेंगे. वैसे उच्च स्तर पर इस बात के कयास लगाये जा रहे हैं कि करोड़ों रूपये गंवाने वाले कई रिटायर्ड और मौजूदा पुलिस अधिकारी किसी तरह अपना नाम इस बड़े जालसाजी मामले से दूर रखेंगे.

सूत्रों के मुताबिक़ आगरा के विभवनगर कॉलोनी में रहने वाला शैलेन्द्र अग्रवाल समाजवादी पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में अक्सर सक्रिय दिखता रहा है और सत्तारूढ़ दल के कई कद्दावर नेताओं से भी इसका मिलना-जुलना तस्दीक हुआ है. कॉल स्पूफिंग के जरिये शैलेन्द्र अग्रवाल ने मुख्यमंत्री आवास 5, कालिदास मार्ग के लैंडलाइन नंबर 22366985 का इस्तेमाल दर्जनों बार किया है. इसने खुद को मुख्यमंत्री तैनात सीनियर अफसर बताकर दिल्ली स्थित न्यूजीलैंड दूतावास के अधिकारीयों से भी कई बार बात की है. इस बात की प्रबल आशंका है कि अग्रवाल ने कई काम निकालने के लिए राज्य के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के मोबाइल नंबर की भी क्लोनिंग की है. अग्रवाल के जालसाजी प्रकरण की जांच जैसे जैसे गहरी होगी, वैसे वैसे कई वरिष्ठ अधिकारियों की संलिप्तता के राज खुलेंगे.

जानकारी के मुताबिक़ शैलेन्द्र अग्रवाल ने कॉल स्पूफिंग का इस्तेमाल करते हुए डीजीपी, शासन के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री के घर और दफ्तर के नम्बरों के झांसे में कई जिलों के डीएम और एसपी को अर्दब में रखा था. इसी के चलते अग्रवाल के पास अलग-अलग जिलों से कुल 14 गनर की तैनाती का पता चला है. डीजीपी के सीयूजी मोबाइल नंबर 9454400101 और लैंडलाइन नंबर 2208085 की भी कॉल स्पूफिंग कई बार किये जाने की पुष्टि हुई है. इसी नम्बर की कॉल स्पूफिंग से उसने जीआरपी के दरोगा विजय सिंह और उसके एक और साथी दरोगा धीरजपाल सिंह को डीजीपी बनकर हडकाया और जब उधर से उलटी कॉल आई तो मामला पकड़ में आया.

दरअसल खुद को सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का उपाध्यक्ष बताने वाले अग्रवाल ने धोखाधड़ी के इस तरीके से सैकड़ों लोगों को बेवकूफ बनाया और करोड़ों रूपये इकठ्ठा किये. 36 परसेंट ब्याज का भरी मुनाफ़ा पाने की लालच में फंसे लोगों को जब एक भी पैसा नहीं मिला तो उन्होंने शैलेन्द्र अग्रवाल के घर तगादे शुरू किये. ज्यादातर फंसे लोग गनरों की भरी फ़ौज की तलाशी के चक्कर में अग्रवाल से मिल भी नहीं पाते थे. आगरा पुलिस से जानकारी मिली है कि राजामंडी चौकी पर तैनात रहे जीआरपी दरोगा विजय सिंह और उनके साथी उपनिरीक्षक धीरजपाल सिंह की शैलेंद्र अग्रवाल से वर्ष 2013 में मुलाकात हुई थी. उसने दोनों दरोगा को अपना परिचय सपा प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप में दिया था.मथुरा के मूल निवासी शैलेंद्र अग्रवाल का ताजगंज के विभव नगर स्थित एक अपार्टमेंट में फ्लैट है.

दो साल पहले अग्रवाल ने दोनों दरोगाओं से आलू में मोटी कमाई होने का हवाला देते हुए कर्ज के रूप में पांच-पांच लाख रुपये ले लिए, मगर वापस करने में आनाकानी करने लगा. पुलिस ने बताया कि अग्रवाल ने 16 अप्रैल को दरोगा विजय सिंह के मोबाइल पर डीजीपी के सीयूजी तथा पीएनटी नंबर से इंटरनेट फेक कॉल किया और धोखाधड़ी के मामले में डीजीपी बन पूछताछ करने लगा. बातचीत के दौरान शक होने पर दरोगा ने डीजीपी मुख्यालय फोन कर जानकारी ली, जहां से पता चला कि कोई कॉल नहीं किया गया है.

दरोगा विजय सिंह द्वारा शुक्रवार को डीआईजी के यहां दिए प्रार्थनापत्र पर ताजगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. देर रात पुलिस ने छापा मार शैलेंद्र अग्रवाल को गिरफ्तार कर फ्लैट की तलाशी ली. वहां से सचिवालय के पास और अन्य कागजात बरामद हुए. सदर इलाके के सीओ असीम चौधरी ने बताया सपा नेता शैलेंद्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है.

हत्यारोपी है यह सपा नेता
शैलेंद्र को दस वर्ष पूर्व न्यू आगरा से एक आयकर अधिकारी की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसकी ह्त्या कर उसका शव फीरोजाबाद में फेंका गया था.

क्या है कॉल स्पूफिंग
स्पूफिंग वह तकनीक है जिसके द्वारा किसी के भी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके किसी भी अन्य मोबाइल पर कॉल की जा सकती है या मेंसेज भेजा जा सकता है। इस तकनीक में दोनों पक्ष यानि कि जिसका नंबर प्रयोग किया जा रहा हो वह और जिसे कॉल या मैसेज किया गया हो, वह इससे अनजान रहते हैं कि कॉल या मेसेज भेजने वाला आखिर है कौन।

(तहलका न्यूज़)

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
आतंकी बता कर फ़र्ज़ी एनकाउंटर.. आतंकी बता कर फ़र्ज़ी एनकाउंटर..(0)

-ज़ाहिद।।
भारत को आजाद हुए 68 वर्ष हो गये और इतने वर्षों में लगभग पूरा परिदृश्य बदल गया है नहीं बदला तो सड़ा गला अंग्रेजों की बनायी पुलिस संस्कृति ।वो चाहे हाशिमपुरा में हो , गुजरात में हो दिल्ली में हो या और कहीं पुलिस अंग्रेजों के जमाने की पुलिस आज भी बनी हुई है जिसमें क्रुरता है असंवेदनशीलता है और भ्रष्ट संस्कृति है जो रही सही कमी थी वह धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव ने पूरी कर दी ।

अंग्रेज़ी पुलिस की तरह ही इनके पास इतने अधिकार हैं कि यह किसी की भी हत्या करके मुठभेड़ दिखा देगें और मौके वारदात पर मौजूद सबूत मिटा देगें और गढ़ी गई झूठी कहानी के आधार पर सबूत गढ़ देगें ।उसके बाद पुलिस इन्क्वायरी होगी जिसमे इन्ही के साहबान इन सबको दोष मुक्त कर देगें या जो बचा खुचा सबूत होगा उसे मिटा कर सत्य का अंतिम संस्कार कर देंगे।अधिक दबाव हुआ तो और कोई इन्क्वायरी ।30-35 वर्ष मुकदमे चलते हैं साथ में नौकरी भी और अंत में अधिकांश पुलिसकर्मी हाशिमपुरा की तरह बाईज्जत बरी हो जाएंगे।तुलसी प्रजापति हो सोहराबुद्दीन हो इशरत जहां हो बाटला हाउस हो या ऐसे ही अन्य तमाम फर्जी मुठभेड़ों की यही कहानी है , यह हकीक़त है कि पुलिस आपको या हमें रात के अधेरे में सोते हुए घरों से उठा सकती है और आत्मसुरक्षा के नाम पर फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर सकती है कुछ अवैध हथियार मृत हाथों में पकड़ा सकती है और मुकदमा दर्ज कर सकती है कि आतंकवादी मारा गया और हमारा आपका परिवार कुछ नहीं कर सकता , उन्हीं पुलिस वालों के सामने गिड़गिड़ाएगा रोएगा और दबाव बनाकर पुलिस वाले आपका बयान लेकर अपने को बचा लेंगे , हो गया मानवाधिकार और न्याय और आप या हम कुछ नहीं उखाड़ सकते क्योंकि पुलिस यहां न्यायाधीश से अधिक शक्तिशाली है ।यही हुआ आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी ।पर बात पहले तेलंगाना की ।

पांच संदिग्ध आतंकी तेलंगाना के नालगोंडा जिले में मारे गए थे। इन्हें 17 मेंबर्स वाली सिक्यॉरिटी टीम ने मारा। वे इन्हें एक पुलिस वैन में वारांगल जेल से हैदराबाद कोर्ट ले जा रहे थे। वारांगल से हैदराबाद कोर्ट 150 किमी. दूर है।

पुलिस का कहना है कि उनमें से एक संदिग्ध आतंकी विकारुद्दीन अहमद ने उनसे हथकड़ी खोलने के लिए कहा क्योंकि उसे टॉइलट जाना था। वापस लौटने पर उसने उनसे हथियार छीनने की कोशिश की। सिक्यॉरिटी टीम का कहना है बाकियों ने भी उनसे हथियार छीनकर भागने की कोशिश की। इसके बाद सिक्यॉरिटी टीम ने उन पर गोलियां चला दीं जिसमें पांच संदिग्ध आतंकी मारे गए।अब पुलिस की इस झूठी कहानी पर ध्यान दें कि वारांगल से हैदराबाद की दूरी 150 किमी है और यह घटना वारंगल से कोई 60-65 किमी दूर हुई जो एक डेढ़ घंटे के रास्ते पर है , जेल से कैदी जब पेशी पर आते हैं तो उन्हें पूर्व सूचना होती है तो वह टायलट नहाना धोना सब जेल से ही करके आते हैं तो यह एक झूठा तर्क है और यदि सच भी है तो एक संदिग्ध आतंकवादी की हथकड़ी खोलना किस कानून या पुलिस के नियम में है ? 17 हथियार बंद पुलिस के दस्ते से एक व्यक्ति हथियार छीनने का प्रयास करेगा यह हास्यास्पद लगता है और एक मजेदार तथ्य देखें कि सभी मृतकों के हाथों में हथकड़ियां हैं ।दरअसल आप हर ऐसी मुठभेड़ को देख लें पुलिस का 19-20 यही कहानी रहती है कि हथियार छीनने का प्रयास किया या पुलिस पर जानलेवा हमला किया ।

ऐसा ही कुछ हुआ आन्ध्राप्रदेश के जंगल में चंदन तस्कर के नाम पर 20 लोगों को मुठभेड़ में मारा गया ।वहाँ भी लगभग ऐसी ही कहानी बनाई गई परन्तु जो रिपोर्ट आरही हैं वह बता रही हैं कि सभी को सर के उपर गोली मारी गई है ।अब मुठभेड़ में सर के उपर कैसे गोली लग सकती है यह एक शोध का विषय है ।बाटला हाउस मुठभेड़ में भी यही हुआ और जिनको मुठभेड़ के नाम पर मारा गया था उनके सर के उपर बीचोंबीच मे गोलियां मारी गईं और मैने स्वयं उसकी लाश को आजमगढ़ में देखा था क्युँकि 12 वीं पास करके गया वह बच्चा दिल्ली में कम्पटीशन की तैयारी के लिए कुछ दिन पहले ही गया था और मेरे ससुराल का पडोसी था ।बाटला हाउस मुठभेड़ का सच जो भी हो पर वह बच्चा आतंकवादी नहीँ हो सकता इतना तो मैं दावे के साथ कह सकता हूँ क्योंकि जो बच्चा किसी को एक थप्पड़ ना मारा हो वह दिल्ली जाकर 12 दिन में आतंकवादी कैसे बन सकता है ।सवाल यह है कि भारत की जिस न्याय व्यवस्था का यह मूल हो कि 10 अपराधी भले झूट जाएं परन्तु किसी एक बेगुनाह को सजा ना मिले उस व्यवस्था में पुलिस कैसे किसी की हत्या कर सकती है जिसकी जिम्मेदारी है अपराधी को अदालत के सामने प्रस्तुत करने की ।कहीं कहीं पुलिस सही भी हो सकती है तो क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था , कार्यप्रणाली और नियमों में सुधार की जरूरत नहीं है ? आखिर 68 वर्षों तक उच्चतम न्यायालय हो या सरकार ऐसी सड़ी गली अंग्रेजों की पुलिस व्यवस्था को क्युँ नहीं बदलती, जहाँ अंग्रेजों की पुलिस स्वतंत्रता सेनानियों को उठाकर ऐसे ही हत्याएँ करती थीं वैसे ही आज की पुलिस धार्मिक , जातिगत अथवा व्यक्तिगत आधार पर हत्याएँ करती हैं करती रहेंगी ।आज यह एक कड़वा सच है कि किसी के दरवाज़े पर दो पुलिस वाले आजाएं तो आपकी अपने मुहल्ले में मिट्टी पलीद तय है फिर आप देते रहिए सफाई ।

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
सत्यम घोटाले में रामलिंगा राजू समेत 10 आरोपी दोषी करार, कल सजा मिलेगी.. सत्यम घोटाले में रामलिंगा राजू समेत 10 आरोपी दोषी करार, कल सजा मिलेगी..(0)

त्यम कंप्यूटर सर्विसेज लिमिटेड (SCSL) में करोड़ों रुपये के लेखा घोटाले में रामलिंगा राजू समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी माना गया है. मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत शुक्रवार को सजा का ऐलान करेगी. केस की जांच सीबीआई ने की है.
सभी आरोपियों को आईपीसी की धारा 120बी और 420 के तहत दोषी पाया गया है. रामलिंगा राजू पर धारा 409 के आरोप भी साबित हुए हैं. देश की सबसे बड़ी लेखा में धोखाधड़ी का मामला 7 जनवरी, 2009 को तब सामने आया, जब कंपनी के फाउंडर और चेयरमैन अध्यक्ष बी रामलिंगा राजू ने कथित तौर पर अपनी कंपनी के बहीखाते में हेराफेरी और वर्षों तक करोड़ों रुपये का मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने की बात कबूल की.

अपने भाई रामराजू और अन्य के साथ फर्जीवाड़े की बात कथित तौर पर स्वीकार करने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस के अपराध जांच विभाग ने राजू को गिरफ्तार किया था. मामले में सभी 10 आरोपी अभी जमानत पर थे. करीब छह साल पहले शुरू हुए मामले में लगभग 3000 दस्तावेज जमा किए गए और 226 गवाहों से पूछताछ हुई.

ये हैं 10 आरोपी
1. रामलिंगा राजू, फाउंडर, पूर्व चेयरमैन
2. बी रामा राजू, रामलिंगा के भाई और सत्यम के पूर्व प्रबंध निदेशक
3. वदलामणि श्रीनिवास, पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी
4. सुब्रमणि गोपालकृष्णन, पूर्व पीडब्लूसी ऑडिटर
5. टी श्रीनिवास, पूर्व पीडब्लूसी ऑडिटर
6. बी सूर्यनारायण राजू, राजू के एक अन्य भाई
7. जी रामकृष्ण, पूर्व कर्मचारी
8. डी वेंकटपति राजू, पूर्व कर्मचारी
9. श्रीसाईलम, पूर्व कर्मचारी
10. वी एस प्रभाकर गुप्ता, सत्या के पूर्व आंतरिक मुख्य ऑडिटर

आमदनी बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने, खाता में हेरफर, फर्जी सावधि जमा के साथ ही विभिन्न आयकर कानूनों का उल्लंघन करने के सिलसिले में राजू और अन्य पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत गलत रिटर्न भरने, फर्जीवाड़ा, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया था.

फरवरी 2009 में सीबीआई ने जांच का जिम्मा संभाला और तीन आरोप पत्र (7 अप्रैल 2009, 24 नवंबर 2009 और 7 जनवरी 2010) दाखिल किया, जिसे बाद में एक साथ मिला दिया गया.

 

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
ढह रहे हैं सुब्रतो राय के किले, सहारा कर्मचारी कर रहे हैं आत्महत्या.. ढह रहे हैं सुब्रतो राय के किले, सहारा कर्मचारी कर रहे हैं आत्महत्या..(0)

-कुमार सौवीर।।

सुब्रत राय की सुनहरी ऐयाशियों की अट्टालिका जब ढहने लगी तो अब शुरू हो गया है।
सहारा इंडिया में आत्‍महत्‍याओं का भयावह दौर। सूत्र बताते हैं कि शुरूआत में यह दौर कर्मचारियों की आत्‍महत्‍याओं का है, इसके बाद तो सामान्‍य निवेशकों का दौर शुरू होगा जिन्‍होंने अपनी जीवन की सारी जमा-पूंजी सुब्रत राय के दिखाये सुनहले सपनों पर न्‍योछावर कर दिया है।

खबर है कि अकेले लखनऊ में सहारा के कम से कम तीन कर्मचारियों ने आत्‍महत्‍या कर ली। सबसे दर्दनाक मौत तो हुई प्रदीप मण्‍डल की, जिसने सहारा इंडिया के सहारा टॉवर की नौवीं मंजिल से कूद कर अपनी मौत के चीथड़े बिखेर दिये। पिछले 6 महीनों से वह बिना वेतन के न जाने कैसे जी रहा था। भूखे बच्‍चे और असहाय बीवी की पीड़ा जब सहन नहीं कर पाया 47 बरस का प्रदीप मण्‍डल, तो उसने इहलीला खत्‍म कर दी। समय सहारा के कर्मचारी लक्ष्‍मीनारायण तिवारी गोरखपुर के रहने वाले थे, लेकिन उनकी तैनाती लखनऊ में थी। वेतन मिलना बंद हो गया तो परिवार में तबाही के लक्षण दिखने लगे। बताते हैं कि उसने कई बार अपने मित्रों से कहा था कि हालत न ठीक हुए तो वह आत्‍महत्‍या कर लेगा। और आखिरकार पिछले दिनों तिवारी ने खुद को खत्‍म ही कर दिया।हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि यह हार्ट अटैक का मामला था। लेकिन अगर ऐसा ही था, तो भी बेचारा दिल आखिरकार कितनी दिन बर्दाश्‍त कर पाता। बताते हैं कि सहारा स्‍टेट में उसके घर के बाहर सहारा वालों ने अपने गार्ड तैनात कर दिये हैं, ताकि कोई खबर न लीक हो जाए।

उधर दिल्‍ली में तैनात और गोरखपुर का रहने वाला अमित पाण्‍डेय सहारा समय में सब एडीटर के पद पर तैनात था। छह महीनों तक जब वेतन नहीं मिला तो वह अपने घर लौटने के लिए लखनऊ होते गोरखपुर की ओर बढ़ा। सूत्र बताते हैं कि अचानक उसकी तबियत खराब हुई। शायद उसने कुछ जहरीली सामग्री खा ली थी। वह सहारा अस्‍पताल की ओर भागा, लेकिन पैसा न होने के चलते उसको एडमिट नहीं किया गया। आखिरकार उसके कुछ मित्र उसे लेकर जनता अस्‍पताल ले गये, लेकिन रास्‍ते में ही उसकी मौत हो गयी।
यह खबर मिलते ही आनन-फानन सहारा के आला अफसरों ने उसकी लाश गोरखपुर की ओर रवाना की और उसका सारा बकाया पैसा फौरन अदा कर दिया। बीती दोपहर उसका ब्रह्मभोज सम्‍पन्‍न हो गया है।
हे ईश्‍वर। इस बेशर्म सुब्रत राय के सहारा इंडिया में आत्‍महत्‍याओं का दौर आखिर यह कब तक चलेगा ?

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
जाके पाँव न फटी बिवाई वह क्या जाने पीर पराई.. जाके पाँव न फटी बिवाई वह क्या जाने पीर पराई..(0)

-चन्द्रशेखर करगेती||
रामनगर जिला- नैनीताल के वीरपुर लच्छी गांव में राज्य आंदोलनकारी, पत्रकार एंव सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात ध्यानी तथा मुनीश कुमार अग्रवाल पर हुए जानलेवा हमले व स्टोनक्रेशर के संचालकों द्वारा स्थानीय बुक्सा जनजाति बहुल समुदाय पर किये जा रहें अत्याचार के विरोध में हुई महापंचायत में ग्रामीणों का ठीक माफिया के साम्राज्य के नीचे उसके दमन के विरुद्ध एकजूट होना भी इस बात का सुखद संकेत माना जा सकता है कि जनता अब थोड़ी बहुत जागरूक हो रही है.
इस महापंचायत में जहाँ राज्य गठन के सरोकारों से वास्ता रखने वाला राज्य के हर कौने से कोई ना कोई व्यक्ति उपस्थित ही नहीं था, बल्कि राज्य में खनन माफिया को दिए जा रहे सरकारी संरक्षण के खिलाफ जबरदस्त गुस्से में भी था, इस महापंचायत में अगर कोई उपस्थित नही थे तो वे थे राज्य की सत्ता और विपक्ष में बारी-बारी से बैठने वाले राजनैतिक दल कांग्रेस-भाजपा का स्थानीय नेतृत्व.
इस महापंचायत में कांग्रेस-भाजपा के किसी भी नेता के न आने से यह तो स्पष्ट हो ही गया है कि इन दोनों सत्ता लोलुप पार्टियों के लिये समाज के दमित वर्ग की महज एक वोट बैंक से ज्यादा और अहमियत नही है, उस वर्ग के सुख-दुःख से उनका कोई वास्ता नहीं है, वे इस वर्ग के द्वार पर तभी आते हैं जब कोई चुनाव सर पर होता हैं l यह वीरपुर लच्छी गांव की ही बात नहीं पुरे राज्य में जहाँ दमित वर्ग के सरोकारों की बात हो, ये दोनों ही राजनैतिक दल वहाँ से हमेशा नदारद रहें हैं, इस बात की पुष्टि बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने आन्दोलन से हो सकती है, इस बात की पुष्टि वीर भड माधो सिंह भंडारी की कर्मस्थली रही मलेथा में स्टोन क्रेशर लगाने के विरुद्ध ग्रामीणों के आन्दोलन से हो सकती है,इस बात की पुष्टि पिथोरागढ़ जिले के डूंगरा गाँव में हो रहे स्टोन केशर के विरोध से हो सकती है.
ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या सच में ही उत्तराखण्ड का वोटर इतना बुद्धिहीन हो गया है, जो अपने आने वाले कल को भी नहीं देख पा रहा है, आखिर क्या जवाब दोगे अपनी आने वाली पीढ़ी को ? क्या अब भी सम्भल पायेगा राज्य के ये वोटर, आखिर राज्य की बदहाली का असल गुनाहगार तो वही है, जो राजनैतिक माफिया की पहचान भी नही कर पा रहा है !!

वीरपुर लच्छी गाँव के सरोकारों के सवाल पर जितने लठ प्रभात ध्यानी और मुनीष अग्रवाल पर खनन माफिया के गुर्गों ने बरसाये, काश उतने ही कांग्रेस-भाजपा के किसी नेता पर भी ग्रामीणों ने उनके कुकर्मों के लिये बरसाये होते तो इस राज्य की दशा ही आज कुछ और होती, तब उत्तराखण्ड हमारे तुम्हारे सपनों का उत्तराखण्ड बना होता.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
नग्न हालत में मिले युवक युवती के शव, ऑनर किलिंग का शक़.. नग्न हालत में मिले युवक युवती के शव, ऑनर किलिंग का शक़..(0)

हरियाणा के सोनीपत में युवक और युवती के निर्वस्त्र अवस्था में शव मिले हैं। दोनों के शव अलग-अलग बक्सों में पाए गए हैं। पुलिस के अनुसार प्रथमदृष्टया मामला अॉनर किलिंग लगता है। शवों को कब्जे में लेकर पुलिस छानबीन में जुट गई है। शव दिल्ली के करीब सोनीपत में नेशनल हाइवे-1 पर बने ताऊ देवीलाल पार्क में मिले हैं।

बताया जा रहा है कि युवती के हाथों में ऐसी चूड़िया थीं जो सामान्य तौर पर नवविवाहिताएं पहनती हैं। युवक के पैर भी काटे हुए हैं। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी प्रवीण कुमार का कहना है कि शवों की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस को शक है कि हत्या किसी और स्थान पर की गई और शवों को लाकर यहां फेंका गया।

पुलिस जांच में दिल्ली और यूपी पुलिस से भी मदद ले रही हैं। मामले की जांच कर रहे पुलिस अधिकारी ने बताया कि दोनों की हत्या गला दबाकर की गई है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टामार्टम के बाद पता चल सकेगा कि दोनों की हत्या कैसे की गई है।

बता दें कि शवों के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला है जिससे पुलिस को केस के छानबीन में मदद मिल सके। शुरुआती कार्रवाई में पुलिस आसपास के थानों के लापता लोगों की लिस्ट खंगाल रही है।

 

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
फैब इंडिया हिडन कैमरा मामले में चारों आरोपियों को जमानत.. फैब इंडिया हिडन कैमरा मामले में चारों आरोपियों को जमानत..(0)

पणजी। गोवा पुलिस ने राज्य के तटीय गांव कलंगुट के एक नामी शोरूम को सीसीटीवी कैमरे से ट्रायल रूम की वीडियो रिकार्डिंग करने के आरोप में गिरफ्तार चारों आरोपियों को अदालत ने जमानत दे दी है। गोवा में अपने पति के साथ छुट्टियां मना रहीं केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी जब शोरूम में गईं, तो इस मामले का खुलासा हुआ था।
इस घटना के बाद पूरे गोवा में खलबली मची हुई है। प्रदेश सरकार ने सभी शोरूम में जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही इस मामले की जांच सीआइडी कर रही है।

पुलिस इंस्पेक्टर नीलेश राणे ने बताया कि केंद्रीय मंत्री शुक्रवार को कलांगुटे के फैब इंडिया शोरूम में कपड़े पहन कर देख रही थीं। इसी बीच, उनके एक सहायक की नजर छिपाकर लगाए गए सीसीटीवी कैमरे पर पड़ी और उसने शोरगुल मचाना शुरू कर दिया। स्मृति ने भी इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कलांगुटे के भाजपा विधायक माइकल लोबो को घटनास्थल पर बुला लिया।
लोबो ने बाद में कहा कि चेंजिंग रूम में कैमरा बहुत ही शरारतपूर्ण ढंग से लगाया गया था। हमें पिछले तीन-चार महीने के दौरान महिलाओं के कपड़े बदलने के वीडियो फुटेज मिले हैं। उन्होंने बताया कि कंप्यूटर और हार्ड डिस्क की जांच करने पर हमने पाया कि कमर से ऊपर की हर चीज रिकार्ड की जा रही थी। यह निहायत आपत्तिजनक है। हमें लगता है कि कोई इन रिकार्डिंग को देखा करता था।
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने बेंगलुरु गए गोवा के मुख्यमंत्री लक्ष्मीकांत पारसेकर ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। लोबो ने बताया कि कैमरा इस तरह लगाया गया था कि इसका रुख सीधे चेंजिंग रूम की ओर था और यह आसानी से नजर नहीं आ रहा था।
चार कर्मचारी गिरफ्तार
लोबो की शिकायत पर पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर फैब इंडिया शोरूम के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक उमेश गांवकर ने बताया कि धारा 354-सी (छिपकर देखने) और 509 (निजता का हनन) के तहत मामला दर्ज किया गया है। स्मृति ने भी पुलिस में अपना बयान दर्ज कराया है। सूत्रों ने बताया कि राज्य पुलिस की अपराध शाखा को मामले की जांच करने के लिए कहा गया है। उत्तरी जिला पुलिस ने राज्य के तटीय इलाके के सभी शोरूम में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच के लिए विशेष टीम का गठन किया है।

कांग्रेस ने बड़ा राज बताया
इस बीच, कांग्रेस ने दावा किया है कि चेंजिंग रूम कांड गोवा का सबसे बड़ा राज है। खास तौर पर पर्यटन केंद्रित तटीय इलाकों में। कांग्रेस के प्रवक्ता दुर्गादास कामत ने कहा कि सिर्फ यही शोरूम नहीं, इस तरह की सुविधाओं वाले सभी शोरूमों की जांच की जानी चाहिए। एक केंद्रीय मंत्री कम-से-कम अधिकारियों को सचेत कर सकता है, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर सकते।

फैब इंडिया की सफाई
इस पूरे मामले में फैब इंडिया ने सफाई देते हुए कहा है कि कैमरा ट्रायल रूम पर फोकस नहीं था। फैब इंडिया के प्रबंध निदेशक विलियम बिसेल ने कहा कि पूरे स्टोर में सुरक्षा कारणों से कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन ट्रायल रूम में नहीं। उन्होंने कहा कि चेंजिंग रूम में क्या हो रहा है, इसे कोई नहीं देख सकता। जिन स्थानों से चोरी की आशंका हो सकती है, उन सभी स्थानों पर कैमरे लगाए जाते हैं। आरोपों पर उन्होंने कहा कि अभी इसकी जाँच होनी है।

 

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
फर्जी आईडी पर ट्रेनिंग लेने वाली IAS रूबी खुदकुशी की धमकी के बाद गिरफ्तार.. फर्जी आईडी पर ट्रेनिंग लेने वाली IAS रूबी खुदकुशी की धमकी के बाद गिरफ्तार..(0)

देहरादून. आईएस अफसरों को ट्रेनिंग देने वाले संस्थान लालबहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (एलबीएसएए) में फर्जी दस्तावेज के आधार पर करीब छह महीने ट्रेनिंग लेने वाली रूबी चौधरी को गिरफ्तार कर लिया गया है. पुलिस रूबी को किसी अज्ञात स्थान पर ले गई है. गिरफ्तार होने से पहले रूबी चौधरी ने धमकी दी थी कि अगर इस मामले में उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी.

रूबी की गिरफ्तारी एसपी (सीआईडी) शाहजहां अंसारी की अगुवाई वाली एसआईटी ने की. इससे पहले एसआईटी रूबी चौधरी को लेकर एलबीएसएए पहुंची और संस्थान के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन से पूछताछ की. इस दौरान रूबी से संबंधित तस्वीरें, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेज कब्जे में लिए गए. सौरभ जैन ने लिखित बयान जारी कर रूबी के आरोपों को सिरे से खारिज किया है. बयान में उन्होंने कहा कि वह रूबी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे.

सात घंटे तक छानबीन करती रही पुलिस
शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे एसआईटी रूबी को लेकर एलबीएसएए, मसूरी पहुंची. सूत्रों के अनुसार टीम ने अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन के साथ ही सुरक्षा कर्मियों, अधिकारियों और कर्मचारियों से भी पूछताछ की. टीम करीब सात घंटे तक छानबीन करती रही. जांच टीम की इंचार्ज शाहजहां अंसारी ने जांच के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार करते हुए कहा कि पूरी रिपोर्ट सीनियर अफसरों को भेजी जाएगी.
होटल में ठहराया
गुरुवार देर रात पुलिस ने रूबी से पांच घंटे पूछताछ करने के बाद उसे होटल में ठहराया था. हालांकि, एक पुलिस टीम उस पर निगरानी रखे हुए थी. देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुष्पक ज्योति ने बताया कि फिलहाल जांच जारी है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं.

डिप्टी डायरेक्टर के पक्ष में उतरा एलबीएसए
एलबीएसएए प्रशासन डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन के पक्ष में खड़ा है. एलबीएसएए के ज्वॉइंट डायरेक्टर नरेला ने प्रेस को जारी बयान में रूबी के आरोपों को बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा कर्मचारी को आवंटित मकान में रूबी अवैध रूप से रह रही थीं. नरेला के मुताबिक जैसे ही रूबी के अवैध रूप से अकादमी में रहने का पता चला अकादमी प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए मामले की जांच के आदेश दिए और पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराई.

पुलिस पर लगाए आरोप
मसूरी जाने से पहले एक बार फिर रूबी मीडिया से मुखातिब हुई और पुलिस पर आरोप लगाए. उसका कहना है कि पुलिस अकादमी के दबाव में काम कर रही है. रूबी का आरोप है कि तहरीर देने के बावजूद उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई. उसने अपनी जान पर खतरा भी बताते हुए कहा कि ‘मैं मानसिक तनाव में हूं और पुलिस मेरी मदद नहीं कर रही.’ गौरतलब है कि छह माह तक अकादमी में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रहने वाली रूबी ने गुरुवार को मीडिया के सामने डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन पर नौकरी के लिए बीस लाख रुपए मांगने के आरोप लगाए थे.

इंसाफ नहीं मिला तो कर लूंगी खुदकुशी: रूबी
आईएस अफसरों को ट्रेनिंग देने वाले मसूरी स्थित संगठन लालबहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में फर्जी दस्तावेज के आधार पर रहने वाली रूबी चौधरी ने गिरफ्तार होने से पहले कहा था कि अगर इस मामले में उसे न्याय नहीं मिला तो वह आत्महत्या कर लेंगी. रूबी के मुताबिक, इस मामले में उसे दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन से भी पूछताछ होनी चाहिए. रूबी ने कहा, ‘इस मामले में मेरी कोई गलती नहीं है. मुझे फरार बताए जाने और मेरे खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद मैं खुद सामने आई हूं. पूरी अकादमी इस मामले में दोषी अधिकारी को बचाने में जुटी हुई है. जो भी कुछ हुआ, उसमें अकादमी के अधिकारियों की मिली-भगत है.’ रूबी चौधरी ने आरोप लगाया था कि अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन को बचाने की कोशिश की जा रही है. रूबी ने कहा था कि अगर जैन दोषी नहीं हैं तो वे सामने क्यों नहीं आ रहे हैं?

डिप्टी डायरेक्टर पर लगाए थे गंभीर आरोप
रूबी ने बताया था कि वह लाइब्रेरियन की नौकरी के लिए मसूरी आई थी. अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर सौरभ जैन ने 20 लाख रुपए लेकर उन्हें नौकरी देने की बात कही थी. रूबी का कहना है कि वह सौरभ जैन को 5 लाख रुपए एडवांस दे चुकी हैं. रूबी ने कहा कि सौरभ जैन ने उसका अकादमी का फर्जी आईकार्ड और गेट पास बनवाया था. उसने कहा था कि अकादमी को सब कुछ पता था. यह गेट पास सौरभ जैन ने ही बनवाया था. रूबी यह आरोप लगा चुकी है कि सौरभ जैन ने उसे मामला रफा-दफा करने के लिए पांच करोड़ रुपए देने की पेशकश की थी.

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
फैब इंडिया के प्रबंध निदेशक विलियम बिसेल से भी होगी पूछताछ.. फैब इंडिया के प्रबंध निदेशक विलियम बिसेल से भी होगी पूछताछ..(0)

फैबइंडिया के ट्रायल रूम में कैमरा होने के मामले में गोवा पुलिस की अपराध शाखा कंपनी के प्रबंध निदेशक विलियम बिसेल सहित अन्य शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है. फैबइंडिया के शोरूम में कथित तौर पर सीसीटीवी कैमरा होने के मामले में गोवा पुलिस ने इसके चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. पुलिस अधीक्षक (अपराध) कार्तिक कश्यप ने शुक्रवार देर शाम बताया, “हम शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ करेंगे.”

फैबइंडिया के शोरूम में कैमरा होने का खुलासा शुक्रवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने किया था, जब वह कपड़े पहनकर देख रही थीं. उनके एक सहायक की नजर कैमरे पर पड़ी, जिन्होंने उन्हें इस बारे में बताया.

मामले की जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि फैबइंडिया के शीर्ष अधिकारियों से पूछताछ जरूरी है, ताकि इसके स्टोर में सीसीटीवी प्रोटोकॉल के अनुपालन और अन्य सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी जुटाई जा सके.

इस सिलसिले में शुक्रवार को गिरफ्तार चार लोगों की पहचान करीम लखानी, प्रशांत नाईक, राजू पंचे और परेश भगत के रूप में की गई है. उनके खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 354 सी, 509 और धारा 66 ई के तहत मामला दर्ज किया गया है.

ये है पूरा मामला

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी शॉपिंग कर रही थीं. उन्होंने कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम का इस्तेमाल किया. इसी बीच उनके किसी सहायक की नज़र सीसीटी कैमरे पर पड़ी जिसका मुंह ट्रायल रूम की ओर था.

उन्होंने इस बात की जानकारी स्थानीय पुलिस को दी. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए स्टोर को सील कर दिया और जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की है.

पुलिस अधीक्षक (उत्तरी गोवा) उमेश गांवकर ने कहा कि मामले के संबंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है. स्मृति ईरानी ने भी कलांगुते पुलिस थाने में अपना बयान दर्ज कराया.

कैलंगुट से भाजपा विधायक मिसेल लोबो ने कहा कि राज्य की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है. लोबो ने कहा, “मैं पुलिस के साथ फिलहाल हार्ड डिस्क की छानबीन कर रहा हूं. कैमरा बहुत ही गलत जगह लगाया गया था, और पिछले तीन से चार महीनों की फुटेज मिली है जिसमें महिलाएं कपड़े बदल रही हैं.”

कांग्रेस ने इसी बीच दावा किया कि ‘चेंजिंग रूम कांड’ गोवा का सबसे बड़ा राज है, खास तौर पर पर्यटन केंद्रित तटीय इलाकों में. कांग्रेस के प्रवक्ता दुर्गादास कामत ने कहा, “केवल यही बुटीक नहीं, इस तरह की सुविधाओं वाली सभी बुटीकों की जांच की जानी चाहिए. एक केंद्रीय मंत्री कम से कम अधिकारियों को सचेत कर सकता है, लेकिन ज्यादातर लोग ऐसा नहीं कर सकते.”

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
अपर निदेशक पर रूबी चौधरी ने लगाये नौकरी के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप.. अपर निदेशक पर रूबी चौधरी ने लगाये नौकरी के नाम पर रिश्वतखोरी के आरोप..(0)

मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी का मामला- उत्तराखंड पुलिस पर पड़े छींटे.. मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी की आरोपी महिला को एस पी सिटी अजय सिंह ने विधान सभा के सामने स्थित गेस्ट हाउस में क्यों रुकवाया हुआ था और उसके फरार होने का समाचार उडाया हुआ था..

-चंद्रशेखर जोशी||

जिस महिला के नाम पर मसूरी के लाल बहादुर अकादमी में जासूसी व अवैध तरीके से रहने का आरोप था उसी महिला रूबी चौधरी को एस पी सिटी अजय सिंह पर विधानसभा के सामने गेस्ट हाउस में रुकवाने के आरोप महिला ने लगाये हैं महिला ने आरोप लगते हुए कहा कि संस्थान के अपर निदेशक सौरभ जैन ने नौकरी लगाने के नाम पर उसने 20 लाख रुपयों में सौदा किया था, जिसमे से 5 लाख रुपये वो अग्रिम ले चुका था. महिला रूबी चौधरी पर संस्थान ने छह महीने से अवैध तरीके से रहने और फर्जी आई डी रखने का आरोप लगाया था रूबी चौधरी ने कहा कि वह अवेध तरीके से नहीं रही बल्कि सौरभ जैन के की थी मेरे रुकने की व्यवस्था.

मामले के खुल जाने पर उत्तराखंड पुलिस पर भी छींटे पड़े हैं कि आखिर जिस महिला रूबी चौधरी पर मसूरी थाने में अपराधिक मामला दर्ज किया गया था उसको एस पी सिटी अजय सिंह ने विधान सभा के सामने स्थित गेस्ट हाउस में क्यों रुकवाया. पत्रकार राजेन्‍द्र जोशी की रिपोर्ट के अनुसार लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में छह माह तक एक महिला फर्जी एसडीएम बनकर जासूसी करती रही और किसी को खबर तक नहीं हुई. अकादमी के एक आला अधिकारी के मौखिक निर्देशों के बाद अकादमी में दाखिल हुई महिला गार्ड रूम में रहती थी और अकादमी के कैंपस में लाइब्रेरी समेत अन्य जगहों पर आती-जाती थी. पहचान पत्र फर्जी होने के खुलासे के बाद महिला को आसानी से भागने दिया गया. महिला के अकादमी से जाने के आठ दिन बाद सुरक्षा अधिकारी की तहरीर पर उसके खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है.

पत्रकार शिव प्रसाद सती के अनुसार अकादमी के सुपरिंटेंडेंट ट्रेनिंग विक्रम सिंह ने 7 अगस्त 2012 को मसूरी थाने में इलेक्ट्रानिक उपकरणों से अश्लील चित्र और सूचना प्रकाशित करने का मामला आईटी एक्ट में दर्ज कराया था. यह मामला भी तब काफी चर्चा में रहा, लेकिन पुलिस जांच न तो आगे बढ़ी न ही इसका कोई निष्कर्ष निकल पाया. ताजा प्रकरण के भी इसी तरह का हश्र होने की आशंका जताई जा रही है.

मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्‍त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी में छह माह से रह रही फर्जी महिला आईएएस गुरुवार को नए खुलासा किया. खुद को आईएएस अधिकारी बताने वाली रूबी चौधरी ने मीडिया को बताया कि उसके किसी रिश्तेदार ने एकेडमी में लाइब्रेरियन की नौकरी दिलाने के लिए 20 लाख रुपए की मांग की थी. जिसमें से वह दस लाख रुपए दे चुकी है. इसलिए ही रूबी एकेडमी में रह रही थी. रूबी ने बताया कि इस बारे में संस्‍थान के डायरेक्ट, डिप्टी डायरेक्टर से लेकर कई अधिकारियों को पता था. डायरेक्टर ने ही उसे एंट्री कार्ड उपलब्‍ध करवाया था. वह कोई जासूस नहीं है और न ही कोई अपराधी है. वह दो दिन से एसपी सिटी के संपर्क में है. रूबी ने कहा कि यदी वह अपराधी होती तो कब की फरार हो गई होती. रूबी ने मीडिया के जरिए मांग की कि इस मामले में जो भी दोषी हैं उन्हें सजा दी जाए. रूबी ने कहा ‌कि अगर मैं दोषी हूं तो मुझे भी दंड मिलना चाहिए.

-बीएस सिद्धू, डीजीपी यह कह रहे थे कि मामला बेहद संगीन है. जरूरत पड़ी तो पुलिस मुख्यालय की विशेष टीम भी जांच में लगाई जाएगी. फिलहाल, जिला पुलिस इसकी जांच कर रही है. एसएसपी को इस मामले में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी गई है.

रूबी चौधरी पुत्री सत्यवीर सिंह निवासी कुतबी गांव मुजफ्फरनगर सितंबर 2014 में अकादमी में आई थी. तब रूबी ने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान (एटीआई) नैनीताल से जारी पहचान पत्र दिखाया था, जिस पर उसे एसडीएम दर्शाया गया था. बताया जा रहा है कि अकादमी के ही एक आला अधिकारी के कहने पर महिला को सुरक्षा गार्ड देव सिंह के कमरे में ठहराया गया. तब से लेकर मार्च तक महिला वहीं रही. इस दौरान अकादमी में राष्ट्रपति से लेकर अन्य वीवीआईपी के दौरे हुए.

बावजूद इसके सुरक्षा अधिकारियों को महिला पर शक नहीं हुआ. महिला अकादमी की उस लाइब्रेरी में भी बेरोकटोक जाती रही, जिसमें जाने से पहले कई औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं. इस बीच अकादमी में महिला की मौजूदगी पर सवाल उठने लगे तो उसके आईकार्ड सहित अन्य दस्तावेजों की जांच की गई तो उसका पहचान पत्र फर्जी पाया गया. 23 मार्च को जब मालूम हुआ कि महिला का पहचान पत्र फर्जी है तो उसे आनन-फानन में हटा दिया गया.

बताया जा रहा है कि उसके भगाने में सुरक्षा गार्ड देव सिंह की अहम भूमिका रही. यही वजह है कि देव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है. मंगलवार को सुरक्षा अधिकारी प्रशासन सत्यवीर सिंह की तहरीर पर पुलिस ने महिला के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. एसआई पवन भारद्वाज को मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है. महिला के पहचान पत्र फर्जी होने के खुलासे के आठ दिन बाद उसके खिलाफ तहरीर देना भी सवाल खड़े कर रहा है. आखिर सुरक्षा अधिकारियों ने उसी दिन पुलिस को क्यों जानकारी नहीं दी? महिला को आसानी से अकादमी से कैसे जाने दिया गया? जब महिला मसूरी छोड़ चुकी है तब तहरीर क्यों दी गई? यदि मामले का खुलासा होते ही पुलिस को तहरीर दी जाती तो उसे तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता था.
राष्ट्रीय अकादमी में फर्जी पहचान पत्र पर महिला का रहना वहां के सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठा रहा है. महिला गार्ड रूम में रही, बावजूद इसके जांच पड़ताल नहीं की गई. इसके अलावा वह आला अधिकारी कौन था, जिसकी शह पर महिला अकादमी में दाखिल हुई? अकादमी की सुरक्षा ऐसी है कि बाहरी व्यक्ति भीतर प्रवेश ही नहीं कर सकता. रोज अंदर जाने वाले कर्मचारियों को भी सुरक्षा के मानकों से गुजरना पड़ता है. संदिग्ध युवती रूबी को किसने अंदर प्रवेश दिलाया और कौन उसे संरक्षण दे रहा था, -

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
चीन ने उतारे भारतीय बाजार में प्लास्टिक के चावल.. चीन ने उतारे भारतीय बाजार में प्लास्टिक के चावल..(0)

नई दिल्‍ली। चीनी सामान के लिए भारत एक बड़ा बाजार है। इस बात का फायदा उठाते हुए चीन हमारे देश में अब प्‍लास्‍टि‍क की अन्‍य चीजों के साथ ही चावल भी भेज रहा है।

एक अंग्रेजी वेबसाइट की खबर के अनुसार, कुछ निर्माता आलू, शकरकंद और चीनी पॉलीमर मिलाकर प्‍लास्‍टि‍क के चावल बना रहे हैं और इसे भारत भेज रहे हैं। इन्‍हें देखकर असली चावल से अलग करना मुश्किल है।

हालांकि, पकाते वक्‍त यह चावल कड़क ही रहते हैं लेकिन इनमें से निकलने वाले द्रव की वजह से प्‍लास्टिक की एक खोल बन जाती है। इस चावल को खाने की वजह से गंभीर गेस्‍ट्राइटिस और पेट की अन्‍य बीमारियां हो सकती हैं।

सूत्रों के अनुसार, यह चावल अभी दक्षिण भारत के कई शहरों में दुकानों पर देखे गए हैं। ग्राहकों ने भी बताया कि प्‍लास्टिक के चावलों के पैकेट्स को असली चावल के साथ इस तरह रखा जाता है कि उनकी पहचान नहीं हो पाती। ऐसा माना जा रहा है कि यह चावल चीन या सिंगापुर के बाजारों से यहां आयात किए गए हैं।

कैसे बनता है यह चावल

इसे बनाने के लिए पहले आलू को चावल के आकार में ढाल लिया जाता है। इसके बाद इसमें इंडस्ट्रियल सिंथेटिक रेजिन मिलाकर अंत में इन्‍हें तब तक अच्‍छी तरह मिलाया जाता है जब तक ये पूरी तरह चावल की तरह नजर नहीं आने लगते।

 

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं
पंचायती खांप ने बलात्कारी को 5 जूत्ते मार माफ़ किया.. पंचायती खांप ने बलात्कारी को 5 जूत्ते मार माफ़ किया..(0)

हरियाणा के यमुनानगर जिले के कस्बा रंजीतपुर स्थित गांव भगवानपुर में पंचायत ने दलित लड़की से रेप के आरोपी को अनोखा फैसला सुना दिया। पंचायत ने रेप की सजा महज 5 जूते मारने की सुनाई वह भी पंचायत के बीच। हैरत इस बात की है कि यह फैसला गांववालों ने भी स्वीकार कर लिया। हालांकि पीड़ित लड़की और उसका परिवार इंसाफ के लिए पुलिस के पास पहुंचा, लेकिन पुलिस इस मामले को महज एक झगड़ा बताकर पल्ला झाड़ रही है।

अब गांव के सभी लोगों ने चुप्पी साधी रखी है। गांव की गलियों में पुलिस की गाड़ी चक्कर काट रही है। आरोप है कि गांव के एक दलित परिवार की एक लड़की के साथ गांव के ही एक युवक ने 25 मार्च को रेप किया। लड़की ने जब घर पर बात बताई तो पहले परिजन चुप रहे लेकिन बाद में लड़की के गूंगे पिता से बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने पत्नी के साथ जाकर पुलिस में शिकायत की। अब पुलिस पर भी आरोप है कि मामले को गांव में ही निपटाने की बात कही क्योंकि गांव की पंचायत ने यही इशारा किया था।

कुछ दिन पहले गांव में एक पंचायत हुई जिसमें आरोपी युवक काला को भी बुलाया गया और पंचायत ने गांव का मामला बताते हुए आरोपी को रेप की सजा 5 जूते मारने की सुना दी। ग्रामीण मायाराम का कहना है कि इस पर गांव के लोगों ने भी ऐतराज नहीं जताया और वहीं भरी पंचायत में आरोपी को 5 जूते मारकर उसका गुनाह माफ कर दिया। लेकिन इस मामले की भनक जब मीडिया को लगी तो केस रफादफा कराने के लिए पुलिस से लेकर गांव के लोग भी एकजुट हो गए।

आरोप है कि पुलिस भी नहीं चाहती थी कि यह मामला बाहर आए, लेकिन मंगलवार को जब मीडिया के कुछ लोग रंजीतपुर पुलिस चौकी में पहुंचे तो वहां पहले से ही बिलासपुर एसएचओ और डीएसपी यमुनानगर आए हुए थे। जिन्होंने इस पूरे मामले को महज पानी के लिए हुआ झगड़ा बता दिया। हालांकि गांव के लोग दबी जुबान में यह मान रहे हैं कि आरोपी को जूते मारने की सजा पंचायत में सुनाई गई थी और सरपंच और पुलिस भी वहीं मौजूद थे। गांव के लोगों का यह भी मानना है कि ऐसी बातें छुपाई नहीं जातीं। गांव के लोगों के बीच में ही पंचायत हुई थी और वहीं सारा मामला निपट गया था। अब मामला खुलकर सामने आने से गांव के लोग डरे हुए हैं और कोई भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है।

चर्चा है दबंगई के चलते पुलिस भी इस मामले को एक तरफ तो झगड़ा बता रही है, वहीं गांव जाकर लगातार जांच में जुटी हुई है। गांव सरपंच महिपाल, एसएचओ रणधीर सिंह और डीएसपी से लेकर चौकी प्रभारी भी इस मामले की जांच में जुट गए हैं। डीएसपी मदनलाल ने केवल यही कहा है कि मामला मारपीट का था और इनका आपस में समझौता हो गया है। इस बीच, खेल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है पंचायत को ऐसा फैसला लेने का अधिकार नहीं है, सरकार इस पर संज्ञान लेगी और इस मामले में पुलिस अपना काम करेगी। उधर, महिला आयोग ने भी इस केस में संज्ञान लिया है।

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

ताज़ा पोस्ट्स

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.
%d bloggers like this: