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मेरठ में लड़की ने अपने साथ बनाया 70 साल के बुजुर्ग का MMS मेरठ में लड़की ने अपने साथ बनाया 70 साल के बुजुर्ग का MMS(0)

-संदीप राय||

मेरठ, अक्सर ऐसा होता है कि पुरुष महिलाओं का एमएमएस और विडियो बना कर उन्हें ब्लैकमेल करते हैं. लेकिन मेरठ में इसके ठीक उलट मामला देखने को मिला. यहां एक 20 साल की लड़की ने 70 साल के बुजुर्ग से दोस्ती की, उन्हें नशीली दवा पिलाई और अपने साथ आपत्तिजनक अवस्था में उनका विडियो बना लिया. इसके बाद वह बुजुर्ग को पैसे के लिए ब्लैकमेल करने लगी.

पहले उसने 5 लाख रुपये मांगे. इसके बाद उसने कहा कि अगर बुजुर्ग के पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है तो वह उसे अपनी किडनी दे दें. इसके बाद बुजुर्ग ने घबराकर पुलिस से मदद मांगी.

मेरठ के एसएसपी ओंकार सिंह ने शुक्रवार को बताया, “बुजुर्ग की शिकायत सुनने के बाद मैंने नौचंडी पुलिस स्टेशन को मामले की जांच करने और आफआईआर दर्ज करने के लिए कहा है.” बुजुर्ग एक रिटायर्ड बैंक एंप्लॉयी हैं और शहर के घंटानगर इलाके में अकेले रहते हैं. वह अक्सर बीमार रहा करते हैं. बुजुर्ग एक केस के सिलसिले में अक्सर कोर्ट जाया करते थे, जहां उनकी मुलाकात इस लड़की से हुई.

लड़की ने बुजुर्ग से मदद का वादा कर उससे दोस्ती कर ली. उसने बुजुर्ग से कहा कि वह उनकी बीमारी का इलाज कराएगी क्योंकि उसने एक हर्बल सेंटर में काम किया है. लड़की ने बुजुर्ग से उस हर्बल सेंटर का मेंबर बनने को कहा. बुजुर्ग ने बताया, “मैंने उसका प्रस्ताव मान लिया और 7 अप्रैल, 2014 को सेंटर का मेंबर बन गया. उसने सेंटर के मालिक और कर्मचारियों से मेरा परिचय कराया. उन्होंने मुझे दवाइयां दीं, जिन्हें मैंने 2 महीने तक लिया.”

बुजुर्ग के मुताबिक, 17 जून को लड़की ने उसे एक ‘खास दवाई’ दी जिसे लेकर वह बेहोश हो गया. जब उसे होश आया तो वह सेंटर के एक कमरे में नग्न अवस्था में पड़ा हुआ था. कुछ समय बाद वह लड़की 2 लोगों के साथ वहां आई और उसने बुजुर्ग को एक एमएमएस दिखाया. विडियो में बुजुर्ग को लड़की के साथ आपत्तिजनक अवस्था में दिखाया गया था.

बुजुर्ग ने बताया, “तीनों ने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने उन्हें पैसे नहीं दिए तो वे यह विडियो क्लिप इंटरनेट पर डाल देंगे. खुद को बदनामी से बचाने के लिए मैं चुप रहा और अपनी सेविंग्स में से उन्हें 5 लाख रुपये दे दिए. लेकिन उनकी मांग यहीं नहीं रुकी, उन्होंने मुझसे और पैसै मांगे. जब मैंने कहा कि मेरे पास देने के लिए अब कुछ नहीं है तो उन्होंने मुझसे मेरी किडनी मांगी. ”

(नभाटा)

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IS का खौफनाक चेहरा, निकाह से इनकार करने पर 150 महिलाओं को मारा IS का खौफनाक चेहरा, निकाह से इनकार करने पर 150 महिलाओं को मारा(0)

बगदाद : इसलामिक स्टेट का एक और खौफनाक चेहरा सामने आया है. इस बार इस आतंकी संगठन के निशाने पर महिलाएं आयीं. इराक में 150 महिलाओं इन्होंने सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया कि उन्होंने इनके लड़ाकों से निकाह करने से इनकार कर दिया था.

तुर्की मीडिया के मुताबिक, इराक के मानवाधिकार मंत्रालय ने मंगलवार को इस बारे में बयान जारी किया. इसके मुताबिक, आइएस के आतंकवादी अबू अनस अल-लीबी ने इराक के अल-अनबार प्रांत में इस वारदात को अंजाम दिया. इस आतंकी ने 150 से ज्यादा महिलाओं को जिहाद मैरजि के लिए बाध्य किया और जब इन महिलाओं ने इनकार किया तो इन्हें मौत के घाट उतारने के बाद फलूजा में सामूहिक तौर पर दफन कर दिया गया. इनमें से कई महिलाएं प्रेग्नेंट थीं.

इसलामिक स्टेट के लड़ाकों ने अल-अनबार प्रांत के उत्तरी कस्बे अल-वाफा में सैकड़ों परिवारों को यह कस्बा छोड़ने के लिए बाध्य किया. इन लोगों को मौत की धमकी दी गयी थी. इस आतंकवादी गुट ने बीते महीने इसी प्रांत में रमादी के रास अल-मां गांव में अल बू निम्र जनजाति के 50 लोगों को गोलियों से भून दिया था, जिसमें कई महिलाएं और बच्चे भी थे. इस जनजाति के एक बुजुर्ग ने बताया कि आतंकवादियों ने लोगों को एक लाइन में खड़ा करके गोलियों से भून दिया था.

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भस्मासुरों से कैसे बचोगे पाकिस्तान? पेशावर के स्कूल पर आतंकी हमले में सैकड़ों निरीह छात्रो की मौत.. भस्मासुरों से कैसे बचोगे पाकिस्तान? पेशावर के स्कूल पर आतंकी हमले में सैकड़ों निरीह छात्रो की मौत..(0)

तहरीक-ए- पाकिस्तान के पांच तालिबानियों ने दिन मे १२ बजे के आसपास वजीरिस्तान मे आतंकियों के खिलाफ पाक सरकार के सैन्य अभियान का बदला लेने के लिए पेशावर के सैनिक स्कूल पर धावा बोलते हुए अधाधुंध कत्लेआम मे निरीह-मासूम बच्चों को गोलियों से उड़ा दिया…१५०० छात्रों की उपस्थिति वाले इस स्कूल में अंतिम समाचार मिलने तक १०४ बच्चों की मौत हो चुकी थी कई अध्यापक भी हत हुए, सैकड़ों घायल हैं. पांच आतंकियों ने छावनी एरिया में यह दुस्साहसिक काररवाई की. एक आतंकी अंदर दाखिल होते ही खुद को उड़ा चुका था…
कश्मीर के नाम पर आतंकियों को मुजाहिदीन बताने वाला पाक अब उस स्थिति में आ चुका है जहां शेर अपनी पीठ पर सवार के गिरने का इंतजार कर रहा है…ताकि उसका भोजन कर सके. याद है न भस्मासुर की कहानी… बस यही हाल है पाक का कि जिसे बनाया, वही अब उसी को निशाने पर ले चुका है और भारत विभाजन से जनमा पाक विशुद्ध असफल राष्ट्र में तब्दील हो गया है, यह बेहिचक स्वीकार करना होगा.
आज से ३२ साल पहले मुझे पेशावर जाने का मौका मिला था. कराची से फ्लाइट लगभग दो घंटे की थी. इस दौरान मैं पाक पर्यटन विभाग की ओर से जारी पुस्तिका पढ़ कर बार बार चौंकता रहा. नहीं जानते होंगे दोस्तों आप कि पुष्पपुर का अपभ्रंश है पेशावर. हमे कभी बताया ही नहीं गया था. जी हां, कभी यह इलाका सनातन, बौद्ध और जैन धर्म का मुख्य केंद्र हुआ करता था, जहां विशाल मंदिरों के भग्नावशेष उस समय भी यत्र तत्र देखे जा सकते थे. वेदपाठ के मामले मे पश्चिमोत्तर की काशी कहा जाने वाला सूखे मेवों और किसिम किसिम के पकौड़ों ( चिड़िया के भी ) के लिए सुनाम यह शहर कितनी खुली हवा में सांस लेता था कि वहां के विश्वविद्यालय छात्र संघ की प्रेसीडेंट एक खूबसूरत छात्रा थी…! हम तीन दिनी अभ्यास मैच के दौरान वहां खूब घूमें. कबायली देशों मे एक बाड़े ही नहीं गए बल्कि आधी रात को पाकिस्तानी खुफिया विभाग की मदद से शून्य तापमान के बीच खैबर दर्रे की भी सैर कर आए. रास्ता किस्सा ख्वानी बाजार ( दिलीप कुमार का पुश्तैनी मकान भी यहीं है) से होकर खैबर जाता था. वे चार दिन मानों जन्नत की सैर के नाम थे….३२ साल बाद यही नगर किस कदर जहन्नुम में तब्दील हो चुका है, यह भी भला बताने की जरुरत है ?
पाकिस्तान के आज के हालातों पर दुष्यंत की चंद पंक्तियां याद आ रही हैं – ‘ अब इस शहर में कोई बारात हो या वारदात, किसी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां ‘..कभी अकबर इलाहाबादी ने कितना सही कहा था, ‘जब से नक्शे-जहां में दहशत गर्द हुए पैदा, हिब्लिश ने सोचा हम साहिब-ए-औलाद हो गये’

(वरिष्ठ पत्रकार पदमपति शर्मा की फेसबुक वाल से)

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Medicity and Artemis Gurgaon under R.T.I. Act Medicity and Artemis Gurgaon under R.T.I. Act(0)

-Pawan Kumar Bansal||

Gurgaon, In a significant judgement , Haryana Information Commission has held that Gurgaon based country,s leading private hospitals Medicity owned by Naresh Trehan and Artemis Hospital are public authorities  under R.T.I.Act and have to  disclose the information regarding organ transplantation  done by them. R.T.I. activists and  others concerned about racket in organ trans plantations going on in the country are jubilant over the decision as they feel it will bring transparency in the functioning of the hospitals .Both the Hospitals have started providing information.

Recalled that  a massive racket of organ transplantation is going on in the country.Gurgaon kidney racket has hit international media headlines and the Commission has also referred to it

Commission has noted that it is important to keep in mind that Organ Transplantation is a subject which must be dealt with great sensitivity  adding that although advances of medical sciences have enables the transplantation of organs with increasing success, but it is also a matte of common knowledge that there is a rampant under the table trafficking of vital organs.The trade takes place in the black market  mostly with middlemen negotiating transactions between sellers and buyers.Handsome monetary gains allure persons who are poor are jobless, with almost no assets of goods, to sell parts of their bodies. Commission has noted that Gurgaon kidney scandal is too recent  to be erased  from the public memory. The multimillionaire scandal  has shocked the nation and has put question mark over the trade, hence the transparency was the need of hour.Comission has noted that no other field of medical science has raised so many ethical , moral, legal and social issues as has organ transplantation. Transplantation of Human Organs and Tissues Act,1994 was enacted to provide for the regulation of removal, storage and transplantation of human organs and tissues for therapeutic purposes and for the prevention of commercial dealings in human organs and tissues Expressing  concern , Commission has further noted that despite having put into place a regulatory mechanism for transplantation of human organs, there has been a spate of reports in print and electronic media about thriving  human organ trade in India and consequential exploitation in civil society that the Act has not been effective  in curbing commercial transactions in organ transplantation and that it has thwarted genuine cases due to complicated and long drawn process of organ donation So the Act was amended and authorization committees were formed by the State Governments from time to time for granting approval and rejection of  the applications by the donor  and the recipient  seeking approval for removal and transplantation of the  human organ.

Harinder Dhingra has sought information from these  Hospitals  regarding fee being charged from patients, donors and done es since their inception  in case of organ transplantation He has further sought information that  under which rule the record  was destroyed

Judgement delivered recently by bench of Urvashi Gulati and Yoginder Paul Gupta  has fur her asked both the Hospitals  for making voluntary disclosures  of the information on above subject so that citizens can be enlightened as to how the provided services can be availed to  save the life of human beings.

Both the Hospitals have taken the pleas that Hospital based Authorization Committees constituted by the Govt.for deciding the cases of organ transplantation are not public authorities and the provisions of the RTI Act, are not applicable to them.But the Commission concluded that Hospital based  Authorization Committees at both the hospitals  have been created by notification issued by the appropriate Govt. and thus fall within the definition of Public authority in terms of Sections 2(H) (D) of the Act.There is no justification in not appointing  S.P.I.O  for discharging responsibility and to fulfill the aims and objects of the RTI Act as in absence  of S.P.I.O public is unable to submit  request  under the Act.

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बिहार के सहरसा में एक महिला हुई सती.. बिहार के सहरसा में एक महिला हुई सती..(0)

बिहार के सहरसा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. सहरसा जिले में एक महिला ने पति की चिता में कूदकर जान दे दी. उक्त महिला की उम्र 65 साल बतायी जा रही है. इसके बाद पूरे जिले में सनसनी फैल गयी है. सती होने का मामला सहरसा जिले के काढ़ा प्रखंड के परमिनिया गांव का है.

पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार सिन्हा ने बताया कि सती हुई महिला का नाम दहवा देवी है और उनके पति चरित्र यादव (70) की लंबे समय से कैंसर रोग से ग्रसित होने के कारण शनिवार की सुबह मौत हो गई थी.

उन्होंने बताया कि चरित्र यादव के मौत के बाद उनके रिश्तेदारों के पहुंचने पर उनके परिजन गांव के एक मंदिर के समीप उनका अंतिम संस्कार करने ले गए. शाम तक अंतिम संस्कार का कार्य पूरा हो जाने पर लोग लौटकर परमिनिया गांव स्थित एक नलकूप पर स्नान करने लगे.

उन्होंने बताया कि दहवा देवी और उनकी बहू परंपानुसार घर पर थीं. इसी बीच चरित्र यादव के पुत्र रमेश मंडल ने अपनी मां को स्नान के लिए तलाशा लेकिन वह घर पर कही भी नजर नहीं आई. इसके बाद परिजनों ने उनकी खोज खबर में जुट गए.

पुलिस अधीक्षक पंकज ने बताया कि कुछ लोगों के यह बताए जाने पर कि उन लोगों ने दहवा देवी को चरित्र यादव के दाह संस्कार स्थल की ओर जाते देखा है. इतना सुनते ही मंडल और उसके परिवार के अन्य सदस्य दाह संस्कार स्थल की ओर दौड़ पड़े लेकिन जब तक वे वहां पहुंचते, तब तक दहवा देवी अपने पति की चिता में कूद चुकी थीं. इसी वजह से उसकी भी मौत हो गई. परिजनों ने उनका भी अंतिम संस्कार उसी चिता में कर दिया.

घटना की सूचना मिलते ही मामले की छानबीन करने घटनास्थल पहुंचे पंकज ने बताया कि सहरसा इलाके में चिता का निर्माण परंपरा के अनुसार लकड़ी, चंदन की लकड़ी, गाय के गोबर से बने गोईठा और अन्य दहनशील सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है.

उन्होंने बताया कि बनाई गई चिता औसतन करीब चार फुट ऊंची होती है और उसके जलने में काफी समय लगता है. दहवा देवी जिस समय चिता में कूदी उस समय उसमें बहुत आग थी.

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ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मुंबई के 26/11 की तरह हमला.. ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मुंबई के 26/11 की तरह हमला..(0)

एक हथियारबंद व्यक्ति द्वारा आज ऑस्ट्रेलिया के चर्चित कैफे में कई लोगों को बंधक बनाए जाने के बाद ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा कड़ी कर दी गई. हथियारबंद व्यक्ति ने आज ऑस्ट्रेलिया के मार्टिन प्लेस स्थित मशहूर कैफे लिंडट चॉकलेट कैफे में अनेक लोगों को बंधक बना लिया और उसकी खिड़की पर अरबी लिपि में लिखा इस्लामी झंडा भी लहराया.

अधिकारियों ने कैफे के इर्दगिर्द की सड़कें बंद कर दी है और निकट की इमारतों से लोगों को हटा लिया. शहर के कारोबारी इलाके के मध्य में स्थित कैफे की इस घटना के बाद रेल सेवा भी निलंबित कर दी गई. सिडनी के मध्य में होने के कारण मार्टिन प्लेस को संसदीय, कानूनी और खुदरा इलाके के संगम के तौर पर जाना जाता है और इसके कारण यहां आम लोगों की गहमागहमी बनी रहती है.

टेलीविजन फुटेज में यह दिख रहा है कि कैफे की खिड़की पर काला झंडा लगा है और लोग खिड़के पे हाथ टिकाए खड़े हैं. यह इस्लामिक स्टेट झंडा नहीं है, बल्कि नमाजों में रोजाना इस्तेमाल होने वाला झंडा है. लिंडट ऑस्ट्रेलिया के कार्यकारी का कहना है कि कैफे में करीब 10 कर्मी और 30 ग्राहक फंसे हुए हैं. पुलिस ने बंधकों की संख्या के बारे में बयान देने से इनकार कर दिया.

सिडनी लाइव

दोपहर 1:20 बजे: केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि एक भारतीय भी कैफे में बंधक है, जो एक आईटी प्रोफेशनल है.

दोपहर 1:07 बजे: चैनल 7 के पत्रकार क्रिस रिजन का दावा, कैफे में 40 नहीं, बल्कि 15 बंधक हैं. रिजन ने बताया कि हमलवार सफेद शर्ट और काली टोपी पहने हुए है.

दोपहर 1:05 बजे: टीवी रिपोर्ट के अनुसार बंधकों में कोई भारतीय नहीं है.

दोपहर 12:55 बजे: एक और बंधक कैफे से भागा. बंधक बनाए गए लोगों में से अब तक कुल 6 लोग कैफे से बाहर निकले.

दोपहर 12:45 बजे: हेडले ने बताया कि मैंने बंधक को बताया कि ऐसा करना उसके और मेरे हित में नहीं होगा, क्योंकि मैं प्रशिक्षित वार्ताकार नहीं हूं. मेरे पास इसकी विशेषज्ञता नहीं है. यहां कई अन्य लोग हैं जो बंधकों और बंदूकधारी से बात करेंगे. उन्हें पता होगा कि क्या करना है. हेडले ने बताया कि उन्होंने न्यू साउथ वेल्स के पुलिस आयुक्त एंड्रयू सिपियोन को फोन कॉल के बारे में बताया, जिसके बाद सिपियोन ने उन्हें बंधक से बातचीत का प्रसारण नहीं करने के लिए कहा. हेडले ने बताया कि बंदूकधारी इसमें अन्य लोगों के शामिल होने की बात कर रहा था. हेडले ने बताया कि वे कह रहे थे कि वे मुझे एक पासवर्ड देंगे..मुझे नहीं पता कि इसका क्या मतलब था, यह किस बारे में था. मुझसे बात करने वाले युवक को पीछे से निर्देश दिए जा रहे थे, मैं इन्हें सुन रहा था.

दोपहर 12:44 बजे: सिडनी के एक रेडियो प्रस्तोता का कहना है कि उन्होंने कैफे में बंधक बनाए गए लोगों में से एक से बात की है और उन्हें बंदूकधारी की आवाज भी पीछे से सुनाई दे रही थी. एक व्यावसायिक रेडियो स्टेशन ‘2जीबी’ के रेडियो प्रस्तोता हेडले ने बताया, ”फोन पर बंधक की आवाज डरी हुई थी.” ‘सिडनी मॉर्निग हेराल्ड’ के मुताबिक, हेडले ने बताया कि बंधक से फोन पर हुई बातचीत के दौरान वह पीछे हो रही बातचीत भी सुन सकती थी. बंदूकधारी चाहता था कि बंधक रेडियो पर उसकी ओर से सीधे मुखातिब हो. हालांकि हेडले का दावा है कि उन्होंने बंदूकधारी की वह मांग नहीं मानी.

दोपहर 12:22 बजे: भारत और ऑस्ट्रेलिया के समय में 5 घंटे और 24 मिनट का फर्क है. इस समय ऑस्ट्रेलिया में शाम के 5:46 मिनट हो रहे हैं.

दोपहर 12:02 बजे: न्यू साउथ वेल्स की उपायुक्त कैथरीन बर्न ने बताया कि मार्टिन प्लेस स्थित लिंडट कैफे से बाहर आए तीन लोग पुलिस के साथ हैं. चैनल-7 पर तीन लोग – एक स्टाफ सदस्य तथा दो अन्य कैफे से भाग कर बाहर आते देखे गए. कैथरीन ने कहा, मेरे पास जो सूचना है, वह यह है कि अभी किसी को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है या घायल नहीं हुआ है. उन्होंने कहा, हम स्पष्ट तौर पर ऐसी स्थिति से निपट रहे हैं जो विकसित हो रही है और सबसे महत्वपूर्ण चीज उन बंधकों की सुरक्षा है तथा मैं मैं ऐसा कुछ नहीं करना चाहूंगी जिससे उन बंधकों की सुरक्षा पर असर पड़े. कैथरीन ने कहा कि वह कैफे में मौजूद लोगों की संख्या की पुष्टि नहीं कर सकतीं.

सुबह 11:38 बजे: भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने बैठक बुलाई.

सुबह 11:30 बजे: सिडनी के लिंड कैफे से दो महिला बंधक भागने में कामयाब, अब तक पांच लोग भागने में कामयाब हुए.

सुबह 11:18 बजे: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि ऐसी स्थितियों के लिए हमारी एक प्रक्रिया है, जिस पर हम काम कर रहे हैं.

सुबह 10:56 बजे: पुलिस ने बंदूकधारी से संपर्क स्थापित किया.

सुबह 10:42 बजे: ऑस्ट्रेलिया दौर पर गई भारतीय क्रिकेट टीम की ब्रिस्बेन में सुरक्षा बढ़ाई गई.

सुबह 10:13 बजे: सिडनी के लिंड कैफे से कुछ बंधकों के भागने की खबर. रॉयटर्स के हवाले से खबर. 3 बंधकों ने भागने में कामयाबी हासिल की.

सुबह 10:00 बजे: भारतीय गृह मंत्रालय में बैठक शुरू हुई.

सुबह 9:50 बजे: भारतीय गृह मंत्रालय में सुबह 10 बजे बैठक बुलाई गई है.

सुबह 9:45 बजे: भारतीय कांसेलुट जनरल का दफ्तर बंद किया गया. घटना वाली जगह पर ही है दफ्तर.

सुबह 9:33 बजे: आतंकवादी संगठन ‘अल नुसरा’ का इस घटना में हाथ हो सकता है. टीवी रिपोर्टस के अनुसार ‘अल नुसरा’ सीरिया का आतंकवादी संगठन है और यह अल कायदा और आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है.

सुबह 9:20 बजे: एहतियात के तौर पर पुलिस ने आसपास की बिल्डिंगें खाली करा दी हैं. इसमें चैनल सेवन का दफ्तर भी शामिल है, जो कैफे के बिलकुल सामने है. ऑस्ट्रेलिया के मीडिया से आ रही खबरों में अभी तक किसी भी तरफ से फायरिंग जैसी कोई घटना नहीं हुई है.

सुबह 9:00 बजे: सिडनी की घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान आया है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है कि ऐसी घटना अमानवीय और चिंताजनक. लोगों की सुरक्षा के लिए मैं प्रार्थना करता हूं.

सुबह 8.30 बजे: न्यू साउथ वेल्स के पुलिस कमिश्र एंड्यू सैपियॉन ने कहा है कि कैफे के अंदर कितने लोग हैं इसकी सहीं संख्या अभी नहीं पता है. कैफे के अंदर एक बंदूकधारी है. हम इस घटना से शांति से निपटना चाहते हैं. अभी तक बंधक बनाने वालों से संपर्क नहीं हुआ है. हमारी घटना के सभी पहलुओं पर नजर है और हम इस घटना को आतंकी हमले की तरह देख रहे हैं.

सुबह 8.20 बजे: प्रत्यदर्शियों के अनुसार बंदूकधारी ने आत्मघाती बेल्ट बांध रखी है.

सुबह 8.14 बजे: लेबनान मुस्लिम एसोसिएशन का कहना है कि हम किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार हैं.

सुबह 8.10 बजे: अमेरिका ने अपने दूतावास को खाली कराया और अपने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है.

सुबह 8.00 बजे: पुलिस के अनुसार जो झंडे दिखाए गए हैं, उनका शुरुआती तौर पर आईएसआईएस से संबंध नहीं लग रहा है, लेकिन पुनिस ने आतंकी हमले या आईएस का हाथ होने से इनकार नहीं किया है.

सुबह 7.41 बजे: प्रधानमंत्री टोनी एबट ने लोगों से अपील की है कि वो घबराएं नहीं और सामान्य तरीके से अपना काम करते रहें, उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और हमें पूरा भरोसा है कि हम इस घटना पर अच्छी तरह से काबू पा लेंगे.

सुबह 7.30 बजे: पुलिस ने सिडनी के कैफे में बंधक बनाए गए लोगों को छुड़ाने के लिए अपना अभियान शुरू किया.

सुबह 7:07 बजे: ऑस्ट्रेलिया में सिडनी के एक कैफे में लोग बंधक बनाए गए.

न्यू साउथ वेल्स के पुलिस कमिश्नर एंड्रयू साइपियोन ने बताया कि मामले में सिर्फ एक बंदूकधारी शामिल है. उन्होंने बताया, मैं आपको इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि शहर के मार्टिन प्लेस इलाका स्थित कैफे में एक हथियारबंद अपराधी ने परिसर के अंदर कई सारे लोगों को बंधक बना लिया है. हालांकि उन्होंने यह साफ किया कि पुलिस बंधक बनाने वाले के साथ सीधे तौर पर संपर्क में नहीं है. उन्होंने कहा, मेरा मानना है कि हमारा इस हथियारबंद व्यक्ति से संपर्क नहीं रहा है और हम अब तक यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि व्यक्ति कहां का है.

साइपियोन ने बताया कि फिलहाल पुलिस इसे बंधक मामले के तौर पर देख रही है लेकिन वह इसे आतंकवादी गतिविधि के रूप में भी देख रही है. उन्होंने बताया, जरूरत पड़ने पर हम शांति बहाल करने के लिए जब तक जरूरी होगा काम करते रहेंगे. मार्टिन प्लेस, सिडनी ओपेरा हाउस, स्टेट लाइब्रेरी और सभी अदालतों को खाली करा लिया गया है.

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री टोनी एबट ने अपने कैबिनेट के सुरक्षा मामलों के अधिकारियों के साथ बैठक की और बंधक मामले पर कार्रवाई पर चर्चा की. एबट ने कहा, जाहिर तौर पर यह गंभीर चिंता का मामला है लेकिन सभी ऑस्ट्रेलिया वासियों को मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों को बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त है तथा वे हथियारों से लैस हैं एवं वे बेहद पेशेवर अंदाज में पेश आ रही हैं.

एबट ने ऑस्ट्रेलिया की राजधानी कैनबरा में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, हमें अब तक अपराधी के उद्देश्य का पता नहीं चला है, हम नहीं जानते कि यह राजनीति से प्रेरित है हालांकि जाहिर तौर पर उसके ऐसा होने के संकेत हैं. उन्होंने कहा, हमारे समाज में भी ऐसे लोग मौजूद हैं जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहेंगे. उन्होंने कहा कि राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसा का उद्देश्य लोगों को डराना हो सकता है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया शांतिप्रिय, खुले विचारों वाला और दरियादिल लोगों का समाज है और कोई उसे बदल नहीं सकता. इसलिए मैं ऑस्ट्रेलिया वासियों से आज आग्रह करता हूं कि वे आम दिनों की तरह ही अपना काम करें.

एबट ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को अब तक किसी विशेष तथ्य का पता नहीं चल पाया लेकिन चिंता की जो बात उभरी है कि ऑस्ट्रेलिया में भी ऐसे लोग मौजूद हैं जिनकी मंशा और क्षमता लोगों में आतंक पैदा करना है. आतंकवादी हमलों के लिए प्रशिक्षित सुरक्षार्मियों, अन्य अधिकारियों सहित सैकड़ों पुलिसकर्मियों को वहां भेज दिया गया है और यातायात पुलिस अधिकारी सड़कों पर नजर बनाए हुए हैं. समूचे शहर में हजारों कर्मियों को घर जल्दी भेज दिया गया और शहर की कई प्रमुख इमारतों को खाली करा लिया गया है.

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बंगलुरु पुलिस के अनुसार मेहदी ने मानी आईएस का ट्विटर अकाउंट चलाने की बात.. बंगलुरु पुलिस के अनुसार मेहदी ने मानी आईएस का ट्विटर अकाउंट चलाने की बात..(0)

बंगलुरु पुलिस ने इराक और सीरिया में सक्रिय आतंकी गुट आईएसआईएस का ट्विटर एकाउंट चलाने वाले मेहदी विश्वास को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है. मेहदी की यह फोटो बंगलुरु सिटी पुलिस ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट की है.

बंगलुरु पुलिस के महानिदेशक एम एन रेड्डी ने आज संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह व्यक्ति पेशे से इंजीनियर है और इसने यह स्वीकार किया है कि वह इस ट्विटर अकाउंट को काफी सालों से हैंडल कर रहा था. उन्होंने बताया कि वह इस अकाउंट के जरिये आईएस के ऑनलाइन भर्ती अभियान में मददगार था. रेड्डी ने बताया कि जांच से यह बात सामने आयी है कि यह व्यक्ति कट्टर इस्लामिक सोच वाला था और अरबी भाषा में जो ट्वीट आते थे उन्हें अंग्रेजी में अनुवाद भी करता था.

ब्रिटेन के चैनल 4 न्यूज ने कल अपनी रिपोर्ट में इस ट्विटर एकाउंट से भारत की आईटी राजधानी बंगलुरु के ताल्लुक की जानकारी दी थी. इस ट्विटर अकाउंट को विदेशी जिहादी फॉलो करते हैं. चैनल ने इस ट्विटर अकाउंट संचालक का पूरा नाम नहीं बताया क्योंकि इस व्यक्ति ने कहा कि उसका जीवन खतरे में आ सकता है. गौरतलब है कि 39 भारतीय कामगार अब भी आईएस के कब्जे में हैं. चैनल 4 न्यूज की इस रिपोर्ट के बाद अकाउंट बंद कर दिया गया.

अपनी रिपोर्ट में चैनल 4 ने कल कहा था कि आईएस के ट्विटर अकाउंट का संचालक यहां एक बड़े समूह में काम करने वाला एक एग्जिक्यूटिव है. वह अब तक गुमनाम रहने और इस्लामिक स्टेट के प्रचार युद्ध में अपनी मुख्य भूमिका के बारे में सवालों को टालने में सफल रहा है. चैनल 4 न्यूज ने कहा था कि उसकी पड़ताल में खुलासा हुआ कि ट्विटर अकाउंट का संचालन करने वाले व्यक्ति को मेहदी कहा जाता है और वह बंगलुरु में एक एग्जिक्यूटिव है जो एक भारतीय समूह के लिए काम कर रहा है.

चैनल 4 ने कहा, शमी विटनेस के नाम के तहत उसके ट्वीट को हर महीने 20 लाख बार देखा गया. इससे 17,700 से अधिक फॉलोवरों के साथ शायद वह सबसे प्रभावशाली इस्लामिक स्टेट ट्विटर अकाउंट बन गया है. बंगलुरु के पुलिस आयुक्त एम एन रेड्डी ने बताया कि पुलिस ने अपनी अपराध शाखा से इस रिपोर्ट की सत्यता का पता लगाने कहा है और बंगलुरु पुलिस एनआईए एवं आईबी जैसी केंद्रीय एजेंसियों के संपर्क में है. यह खबर आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों कुछ संदिग्धों पर नजर रख रही थी.

चैनल-4 के साथ संक्षिप्त साक्षात्कार में मेहदी ने कहा था, मैंने कुछ गलत नहीं किया है. मैंने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया है. मैंने कोई कानून नहीं तोड़ा है, मैंने भारत की जनता के विरुद्ध कोई युद्ध या हिंसा नहीं छेड़ा है. मैंने भारत के किसी सहयोगी के विरुद्ध लड़ाई नहीं छेड़ी है. उसने दो मिनट 12 सेंकेंड के इस साक्षात्कार में कहा था, मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं कि जब भी समय आएगा, मैं गिरफ्तारी का विरोध नहीं करूंगा. मेरे पास किसी प्रकार कोई हथियार नहीं है. यह साक्षात्कार अचानक बीच में ही खत्म हो गया.

इस रिपोर्ट में ट्विटर अकाउंट संचालक ने कहा है कि वह इराक एवं सीरिया में आईएस में शामिल नहीं हुआ है, क्योंकि उसका परिवार उस पर आर्थिक रूप से निर्भर है. द शमी विटनेस अकाउंट से किए गए ट्वीट में जिहादी दुष्प्रचार की बातें होती थीं तथा इनमें भर्ती पाने वालों के लिए सूचना और मारे गए लड़ाकों को शहीद के रूप में महिमामंडन करते हुए संदेश होते थे.

आईएस ने अपना दुष्प्रचार फैलाने और युवकों की भर्ती तथा हत्या से संबंधित वीडियो के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का व्यापक इस्तेमाल किया है. यह पहली बार नही है कि कर्नाटक का नाम वैश्विक आतंकवाद के साथ आया है. वर्ष 2007 में लंदन के कफील अहमद विस्फोटकों से लदा एक ट्रक लेकर ग्लासगो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर घुस गया था और इस हमले में वह मर गया था. उसने बंगलुरु से ही अभियांत्रिकी में डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की थी. कर्नाटक के तटीय शहर भटकल के दो भाइयों – रियाज और इकबाल ने इंडियन मुजाहिद्दीन की स्थापना की थी, जिस पर देश में करीब 21 आतंकवादी हमलों को अंजाम देने का आरोप है. दोनों फरार हैं.

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क्या गुजरात के ये कीर्तिमान वहां सुशासन मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं .. क्या गुजरात के ये कीर्तिमान वहां सुशासन मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं ..(0)

-मनीराम शर्मा||

सरकार का प्राथमिक कर्तव्य कानून व्यवस्था बनाये रखना और नागरिकों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चिय करना है और अन्य सभी कार्य गौण होते हैं . गुजरात राज्य में सूचना का अधिकार कानून बहुत कम प्रभाव शाली है और वेबसाइट पर उपलब्ध नगण्य सूचना भी गुजराती भाषा में है ताकि अन्य राज्य का नागरिक उसे नहीं जान पाए . और यदि राज्य का कोई नागरिक ऐसी हिमाकत करे तो उससे निपटने के लिए प्रशासन और पुलिस कटिबद्ध तैयार हैं तथा शासन का उन्हें पूर्ण संरक्षण उपलब्ध है. गुजरात के कई लोगों से स्वतंत्र पूछताछ की जिसमें कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आये हैं .

गुजरात राज्य की पुलिस की कार्य शैली में भी अपने पडौसी राज्यों की पुलिस से कोई ज्यादा भिन्नता नहीं है . यद्यपि राज्य में शराब बंदी है किन्तु पुलिस थानों के पीछे ही और झुग्गी झोम्पडियों में शराब उपलब्ध है . गुजरात में शराब भगवान की तरह है । दिखती कहीं नहीं, पर मिलती हर जगह है ।आम जनता पुलिस से घृणा करती है और पुलिस में प्रत्येक काम करवाने के लिए प्रत्येक सीट की दर तय है . वे प्राप्त रिश्वत की राशि निर्भय होकर खुले रूप से बैंक में काउंटर पर केशियर की तरह गिनकर ले लेते हैं .

गुजरात में शराब बंदी का यह हाल है कि प्रशासन और पुलिस से मिलकर राजस्थान के रास्ते से पंजाब, हरियाणा से गुजरात बड़ी मात्रा में गुजरात में शराब की तस्करी होती है . मुख्य गरबा में भी लोग नशा करके आते हैं अत: स्त्रियाँ अपने घर के आसपास के छोटे मंदिरों के प्रांगणों में ही गरबा में भाग लेती हैं . उच्च न्यायालय में गरीब व्यक्ति को पैरवी के लिए गुजरात सरकार मात्र 400 रूपये की आर्थिक सहायता देती है जबकि राजस्थान में 5000 रूपये दिये जाते हैं और दूसरी ओर राजस्थान की प्रतिव्यक्ति आय गुजरात से भी आधी है.

देश में मात्र गुजरात ही एक राज्य है जहां अहमदाबाद के मजिस्ट्रेट ब्रह्मभट्ट द्वारा चालीस हज़ार रूपये के बदले भारत के राष्ट्रपति , मुख्य न्यायाधीश, एक अन्य न्यायाधीश और एक एक सुप्रीम कोर्ट के वकील के नाम वारंट जारी करने का मामला सुप्रीम कोर्ट में आया है . ठीक इसी प्रकार मात्र गुजरात राज्य से ही ऐसा अन्य मामला सुप्रीम कोर्ट में आया जहां मजिस्ट्रेट को जबरदस्ती शराब पिलाकर पुलिस ने उसका नडियाद में सरे बाज़ार जुलूस निकाला गया . ऐसे राज्य में आम नागरिक की क्या औकात और वजूद है और वह वर्दी धारी की बर्बरता से कितना सुरक्षित है . क्या गुजरात के ये कीर्तिमान वहां सुशासन मानने के लिए पर्याप्त नहीं हैं ? बम विस्फोट और साम्प्रदायिक दंगे समय समय पर गुजरात में भी होते रहते हैं. फर्जी मुठभेड़ में नागरिकों के मारे जाने के मामलों में भी गुजरात का स्थान सर्व विदित है .

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भारत में पुलिस की गोली के हजारों हर साल होते हैं शिकार.. भारत में पुलिस की गोली के हजारों हर साल होते हैं शिकार..(0)

पुलिस की गोली से भारत में हजारों, अमेरिका में 409 , जर्मनी में 3 और ब्रिटेन और जापान में शून्य व्यक्ति प्रतिवर्ष मरते है..

-मनीराम शर्मा||

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त शेषन ने एक बार कहा था कि लोकतंत्र के चार स्तम्भ होते हैं और उनमें से साढ़े तीन क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. उसके बाद आगे हुई प्रगति को देखकर वर्तमान का आकलन किया जा सकता है. वैसे भी राजनीति, पुलिस और सेना में हुक्म मानने वाले हाजरियों की जरुरत होती है जो बिना दिमाग का उपयोग किये आदेश मानते रहें.दिमाग लगाने वालों और विरोध करने वालों के लिए वहाँ अलग से उत्पीडन व उपचार केंद्र होते हैं. एक बार मैं जब ग्रामीण क्षेत्र में सेवारत था जहां बिजली, पानी, सडक, और फोन जैसी कोई सुविधा नहीं थी. मैं भाजपा के जिलाध्यक्ष के पास इन समस्याओं को लेकर चला गया तो उन्होंने बताया कि सडक का मंजूर काम तो मैंने ही निरस्त करवाया था क्योंकि वहां की विधायक अन्य पार्टी की है. मुझे उन्होंने यह भी कहा कि आप सडक के लिए क्यों आये हैं आपको चुनाव लड़ना है क्या.मैंने कहा मैं चुनाव लड़ने की तो सपने में भी नहीं सोचता लेकिन ग्रामीण लोगों की परेशानी है.

आगे उन्होंने खुलासा किया कि यदि यह सडक बना दी गयी तो बाद में इसकी मरम्मत और टूटी होने की शिकायत लेकर लोग आयेंगे इसलिए आप इसे छोड़ दें. खैर मैंने तो सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम प्रस्ताव मंजूर करवा लिया. किन्तु राजनीति का आइना मेरे सामने एकदम साफ़ हो गया था. देश में हर क्षेत्र में विदेशी निवेश और तकनीक का जिक्र किया जाता है किन्तु प्रशासन और न्याय में कभी नहीं.क्या इन क्षेत्रों में सुधार की कोई आवश्यकता नहीं है ? यदि निष्ठापूर्वक प्रतिवर्ष 1प्रतिशत भी परिवर्तन प्रतिवर्ष किया जाता तो यह प्रशासनिक, पुलिस और न्याय व्यवस्था में 67 वर्ष में 67 प्रतिशत परिवर्तन आ सकता था.

देश में कानून और न्याय कितना प्रभावी है इसका मुझे असली अनुमान तब लगा जब पाली जिले में तैनात एक अतिरिक्त मुख्य मजिस्ट्रेट ने बैंक में कार्यरत अपने एक सम्बन्धी की सहायता के लिए मुझसे आग्रह किया. शासन में उच्च प्रशासनिक और न्यायिक पदों पर दागियों को ही लगाया जाता है ताकि उनसे मनमर्जी के काम करवाए जा सकें और यदि वे सत्तासीन की इच्छानुसार नहीं चलें तो उन पर लगे दाग के आधार पर उन्हें हटाया जा सके. देश में खुफिया एजेंसियों का भी देश के लिए कम और राजनैतिक उपयोग ज्यादा होता है. इंदिरा गाँधी ने भी आपातकाल के बाद उसके चुनाव जीतने की स्थिति पर खुफिया एजेंसियों से रिपोर्ट मांगी थी और उस रिपोर्ट के आधार पर ही 77 में चुनाव करवाए गए. अभी हाल ही में मिजोरम में महिलाओं के साथ बड़े पैमाने पर सेना द्वारा बलात्कार की घटाएं सचित्र प्रकाशित करने पर एक सेना आधिकारी ने कहा कि यह आईएस आई की करतूत है. लेकिन मैंने उनसे यह प्रतिप्रश्न किया कि यदि आई एस आई भारत में आकर ऐसे घिनौने काम करने में सफल हो रही है तो फिर सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां क्या कर रही हैं और देश की सीमाओं की सुरक्षा उनके हाथों में कितनी सुरक्षित है. आज भी देश के कुल पुलिस बलों का एक चौथाई भाग ही थानों में तैनात है बाकी तो महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा और बेगार में तैनात है.देश आज भी कुपोषण , शिशु एवं मातृ मृत्यु दर , भ्रष्टाचार में विश्व में उच्च स्थान रखता है.

भारत में सरकारों का काम हमेशा ही गोपनीय रहा है व उसमें कोई जन भागीदारी नहीं रही और इ गवर्नेंस की बातें ही बेमानी है जब जनता को इन्टरनेट की स्पीड 50 के बी मिल रही है. भारत पाक का 1970 का युद्ध अमेरिका और कनाडा में सीधे प्रसारित किया था.दूर संचार विभाग की भारत में वेबसाइट भी 1970 में तैयार हो गयी थी किन्तु जनता को यह सुविधा बहुत देरी से मिली है. बलिदान देने, मरने या शहीद होने से भी इस संवेदनहीन व्यवस्था में क्या कुछ हो सकता है जब पुलिस ही प्रतिवर्ष दस हजार लोगों को फर्जी मुठभेड़ और हिरासत में मार देती है जबकि अमेरिका में यह 409 , जर्मनी में 3 और ब्रिटेन और जापान में यह शून्य है.

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हम सबमें छुपा बैठा है एक बलात्कारी.. हम सबमें छुपा बैठा है एक बलात्कारी..(0)

-चैतन्य नागर||

हर पुरुष के भीतर एक बलात्कारी भेड़िया होता है. तथाकथित सभ्य, भद्र पुरुष सिर्फ एक धैर्यवान भेड़िया होता है. उसे कोई ऐसी स्त्री दिखेगी जो असुरक्षित हो, अकेली हो, किसी सहारे की खोज में हो, तो उसका कुटिल मन सक्रिय हो जाएगा तुरंत. वह कायर हुआ, तो वह शातिर और सूक्ष्म रूप से आगे बढ़ेगा, धीरे-धीरे, रोमांस का सहारा लेकर, और अगर वह बद्तमीज़ और वल्गर है, कम ‘सॉफिस्टिकेटेड’ है, तो वह ऐसी हरकतें करेगा जिसके बारे में आप अक्सर अखबारों में पढ़ते हैं. स्त्री को देखकर पुरुष सेक्स के लिए प्रवृत्त होगा, यह एक स्वाभाविक बात है. उसकी हर कविता, प्रेम गीत, उसके हर उपहार का उद्देश्य स्त्री को अपने बिस्तर तक ले जाना होता है; बिस्तर और उसके बीच की दूरी के बीच तरह-तरह की रोमांटिक बेवकूफियां, तरह-तरह के बारीक खेल चलते रहेंगे, और इसे बड़ी आसानी से समझा जा सकता है. ये खेल जब दोनों को प्रिय लगते हैं, तो उसे प्यार की स्थिति कहते हैं.

सेक्स एक खूबसूरत चीज़ होनी चाहिए. सेक्सुअल्टी में कोई बुराई नहीं, और जो धर्म इसे अपवित्र और बुरा मानते हैं, काफी हद तक वे सेक्स से जुड़ी विकृतियों के लिए जिम्मेदार हैं. हमारा आपका भौतिक अस्तित्व ही इससे है, प्रजनन से ही कुदरत पैदा हुई है और प्रजनन के लिए सेक्स एक जरिया है. समस्या सेक्स की नहीं, हिंसा की है. आप हिंसक तरीके से भोजन भी कर सकते हैं. जरूरत से ज्यादा भकोसना, जल्दी-जल्दी खाना, जब भोजन दिखे तभी खाने लगना ये भी एक तरह का बलात्कार है खुद के साथ और भोजन के साथ भी. आप बहुत ज्यादा किसी के असर में आ जाएं, उसी की बातों को बार-बार दोहराएं, उसके लिए मरने-मारने पर उतारू हो जाएं, तो समझिए आप एक तरह का मानसिक बलात्कार स्वयं के साथ ही किए जा रहे हैं. जिस देश में ब्रह्मचर्य की बात होगी, वीर्य के संचयन की बात होगी, उससे चेहरे पर ओज बढ़ने की बात होगी वहां उसके विपरीत जन्म लेगा एक रेपिस्ट के रूप में. ब्रह्मचर्य और बलात्कार दोनों ही अस्वाभाविक बातें हैं, और मानसिक विकृति है. पशु जगत में, कुदरत में, दोनों नहीं होते. ये सिर्फ मनुष्य के बीमार दिमाग की उपज है.

एक रेपिस्ट क्या स्त्री से प्रेम करता है, और उसके साथ वह सेक्स की इच्छा रखता है या फिर यह एक पावर गेम है, एक पुरुष प्रधान समाज में स्त्री को कमजोर दिखाकर उसे यूज करना, एक चीज की तरह और उसे ‘नष्ट’ करना? इसके साथ जुड़ा है एक बहुत ही गहरा मत, और धारणा ‘इज्जत’ की. क्या इस पर विचार करना चाहिए? क्या किसी इंसान की तथाकथित इज्जत उसके शरीर के किसी अंग के साथ खिलवाड़ करने से सम्बंधित है? यह जो इज्जत की धारणा है उसे ठीक से समझकर उसे जड़ से उखाड़ फेंकने की जरूरत है. किसी स्त्री की इज्जत जाने का सवाल और उसके साथ जुड़ा एक सामाजिक कलंक. जिस स्त्री के साथ बलात्कार हुआ, उसका क्या दोष, और उसकी इज्जत कहां चली गई? किसने ले ली उसकी इज्जत, और यदि ऐसी कोई चीज है भी, जो चली गई है, तो उसमें क्या मैं और आप दोषी नहीं? जिस समाज में एक स्त्री की इज्जत गई, क्या उसके हर पुरुष की भी इज्जत नहीं चली गई? उस इलाके के पुलिस वाले, डीएम और उस राज्य के मुख्यमंत्री की इज्जत अभी बची है?

बलात्कार से आप हिंसा को निकाल कर देखें. सेक्स का भयंकर वेग और उसके साथ किसी के साथ जबर्दस्ती, हिंसक तरीके से सेक्स करना, चाहे कोई पीडोफाइल हो, बच्चे के साथ हिंसा करे, या कोई स्त्री हो या कोई पुरुष. इस हिंसा को समझने की जरूरत है. नहीं तो दो वयस्कों के बीच, यदि उनके वैवाहिक सम्बन्ध कहीं और नहीं हैं, या वैवाहिक समबन्ध होने पर भी उनके पार्टनर को उनके विवाहेत्तर सम्बन्ध से कोई आपत्ति नहीं, तो फिर समस्या सेक्स के साथ होने वाली हिंसा की है मुख्य रूप से.

यदि मेरी नैतिकता सिर्फ भय से निर्मित है, मैं भयभीत हूं, समाज से डरता हूं, अपनी ‘इज्जत’ बचाने के लिए ‘ऐसे काम’ नहीं करता, पर मेरे अंदर ये सारी कामनाएं, वासनाएं भरी हुई हैं, तो मैं कभी भी कानून के दायरे में नहीं आऊंगा, पर जो व्यक्ति ये काण्ड कर रहा है, उसमें और मुझमें कोई फर्क़ नहीं. वह कामी और दुस्साहसी है, अपनी वासनाओं के सामने तथाकथित सामाजिक नैतिकता को भूल जा रहा है, और पकड़ा जा रहा है, और ऐसा कुछ कर रहा है, जो मैं सिर्फ डर से नहीं कर रहा. तो मुझमें और उसमें क्या फर्क़ हुआ?

जिसे हम सामाजिक नैतिकता कहते हैं वह तो अतृप्त अभिलाषाओं और किसी आदिम भय की अकाल पक्व संतति मात्र है. धर्म, कानून, खाप पंचायत, नौकरी/बिरादरी/गोत्र/पार्टी से निष्कासन, और इसी तरह के भय न होते, सिर्फ कामनाओं का उद्वेलन और उनकी सरसराहट होती, तो तथाकथित अनैतिकता के खुले मैदान में कई तरह के घोड़े हिनहिनाते, मस्ताते चर रहे होते. जो नैतिक है वह कामना से मुक्त नहीं; वह तो बस भयाक्रांत, दबा-पिसा, किसी रोमांटिक सात्विकता के शिखर पर स्वयं की काल्पनिक छवि देखकर आनंदित है. भय से त्रस्त होकर और अवसर की कमी से कई लोग नैतिक बने बैठे हैं. नैतिकता किसी भी तरह से अनैतिकता की विपरीत नहीं. विपरीत तो स्वयं को ही जन्म देता है, किसी अन्य, छद्म रूप में, कि पहचाना ही न जा सके. ठोस, खरी नैतिकता विपरीत के गलियारों से बाहर ही कहीं मुक्त विचरती है. भय के दबाव से अनैतिकता कभी नैतिकता में बदल नहीं पाती; वह एक नयी तरह की प्रच्छन्न, अवगुंठित, भ्रामक नैतिकता को बस जन्म दे देती है.

कितने पुरुष हैं, पूरी दुनिया में जो अपनी पत्नी के साथ भी तभी सहवास करते हैं, जब उसकी इच्छा होती है? वे सभी बलात्कारी हैं. और अगर कोई स्त्री ऐसा करती है किसी पुरुष के साथ, सिर्फ धन और सौंदर्य के बल पर, तो वह भी बलात्कारी है. यदि मेरे मन में किसी स्त्री के साथ हिंसक तरीके से, ज़बर्दस्ती सेक्स करने की इच्छा भी है, यदि मैं पॉर्न देखकर उसका प्रयोग जबरन किसी स्त्री के साथ करने की चाह भी रखता हूं, भले ही मैंने वह इच्छा व्यक्त नहीं की हो, तो मैं भी बदायूं या कहीं भी होने वाले बलात्कार के लिए उतना ही दोषी हूं जितना वह बलात्कारी युवक.

इस हिंसा से कैसे निपटेंगे हम? “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता”. इसे रटेंगे और रटाएंगे? स्त्रियों की पूजा करके? पूजा तो हम सदियों से कर रहे हैं. बच्चों को सिखाएं कि वह स्त्रियों को मां और बहन मानें, उनके चरण छूते फिरें तो इस समस्या से मुक्ति मिलेगी? आदर्श तो हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं. गांधी जी ने ब्रह्मचर्य को आदर्श माना था और 65 की उम्र में भी अपनी वासनाओं से मुक्ति नहीं मिलने की बात कही थी. दमन से मुक्ति नहीं मिलती यह एक मनोवैज्ञानिक सत्य है. बच्चों के सामने मीडिया है, इंटरनेट है, समय से पहले उनकी यौन भावनाएं जाग जाती हैं, पॉर्न का असर उनके मन पर बहुत गहरा होता है, और फिर जिस समाज में वे रहते हैं, वहां स्थितियां बिल्कुल अलग होती हैं. उस काल्पनिक, अवास्तविक दुनिया का असर और वास्तविक समाज के हालात के बीच जो दूरी होती है, वह तरह-तरह की विकृतियों को जन्म देती है, कुंठा और हिंसा को जन्म देती है.

तो बलात्कारी के मन को कैसे बदलें? अवश्य ही प्रशासन की अपनी भूमिका है, उसे सख्त कदम उठाने चाहिए और देखना चाहिए कि ऐसा हो ही न. पर वह भी अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहा. राजनेता आमतौर पर गहरी असंवेदनशीलता के शिकार होते हैं. किसी स्त्री पर होने वाले अत्याचार से ज्यादा उन्हें अपनी भैसों की फिक्र होती है और राजनीति भी एक पुरुष प्रधान इलाका है, वहां सामंती, स्त्रीविरोधी तत्व आपको खूब मिलेंगे, उनपर पूरी ज़िम्मेदारी देना बेवकूफी होगी. तो मेरे पास जवाब नहीं, और सारे जवाबों को करीब-करीब मैं देख चुका हूं. ये सभी थोड़ा-बहुत आराम देंगे, पर समस्या दूर नहीं होगी. तो समस्या कैसे दूर हो? संवेदनशीलता कैसे जन्मे, कैसे संवर्द्धित हो? कविताएं पढ़ा कर? कीट्स और शैली, कालिदास और केदारनाथ सिंह को पढ़कर? फूल, पत्तियां और तितलियां दिखा कर? इंटरनेट और पॉर्न पर रोक लगाकर, अपने घरों में, और समाज में? लड़कियों को जीन्स की जगह सलवार-कुर्ता, या बुर्का पहनाकर? मीडिया को ज्यादा जिममेदारी देकर? बेवकूफ नेताओं की ज़ुबान पर लगाम लगाकर? ज्यादा सख्त पुलिस और प्रशासन की मदद लेकर?

ये सभी सिर्फ सवाल हैं. मेरे पास जवाब नहीं, मैं निरुत्तर हूं, आहत हूं, मेरी भी बेटियां, बहने हैं, कलेजा फटता है यह सब देख-सुनकर. पर सारे जवाब बड़े सीमित हैं. शाखाओं की काट-छांट करने जैसे हैं. कहां है इसका सही जवाब? मैं लगातार पूछ रहा हूं, खुद से भी और आप सभी से. हाथ जोड़कर, आंखें झुकाकर. सभी पुरुषों की ओर से समस्त स्त्री जाति से क्षमा मांगते हुए शर्मिंदा हूं अपने इंसान होने पर.

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दिल्ली में महिला से रेप का आरोपी ड्राइवर अब भी फरार दिल्ली में महिला से रेप का आरोपी ड्राइवर अब भी फरार(0)

नई दिल्ली, एक ग्लोबल कंपनी में काम करने वाली 25 साल की एग्जेक्युटिव से एक प्राइवेट टैक्सी सर्विस के ड्राइवर द्वारा रेप की वारदात सामने आई है. घटना शुक्रवार रात की है, जब महिला साउथ दिल्ली के वसंत विहार में एक पार्टी से अपने घर इंद्रलोक लौट रही थी. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कैब को बरामद कर लिया है और आरोपी ड्राइवर की तलाश की जा रही है. रविवार सुबह पुलिस ने मथुरा से एक शख्स को हिरासत में लिया था, मगर जांच में साफ हुआ कि वह शख्स आरोपी ड्राइवर नहीं, बल्कि कोई और है.

महिला ने पार्टी से लौटते वक्त अमेरिकी कैब कंपनी ऊबर के मोबाइल ऐप से कैब मंगवाई थी. शुक्रवार रात 11 से 12.45 बजे के बीच स्विफ्ट डिजायर कैब के अंदर यह घटना हुई. अभी तक यह नहीं पता चल पाया है कि वारदात को कहां अंजाम दिया गया. विक्टिम अंधेरे, उत्पीड़न और अपने दोस्तों के साथ थोड़ी शराब पीने की वजह से जगह की पहचान नहीं कर पा रही है.

ड्राइवर की पहचान 32 साल के शिव कुमार यादव के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के मथुरा का रहने वाला है. पुलिस ने शनिवार को मामला दर्ज करके आरोपी की धरपकड़ के लिए स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट पुलिस की टीमें बनाकर छापामारी शुरू कर दी है. खबर आई थी कि पुलिस ने उसे पकड़ लिया है, मगर अब साफ हुआ है कि वह अब भी फरार है. इससे पहले पुलिस ने एक शख्स को आरोपी समझकर हिरासत में लिया था, लेकिन वह कोई और निकला.

विक्टिम महिला ने पुलिस को बयान दिया है कि वह अपने दोस्तों के साथ गुड़गांव के एक पब में पार्टी कर रही थी. इसके बाद वह 9 बजे के करीब वसंत विहार में अपने दोस्त के यहां निकल गई. इस बीच उसने अपने स्मार्टफोन से कैब बुक करवा ली. ड्राइवर 10.20 बजे पहुंचा और वह तुरंत वह वहां से घर के लिए चल पड़ी.

महिला का कहना है कि उसे नींद आ गई और जब उसकी आंख खुली तो देखा कि ड्राइवर पिछली सीट पर उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है. उसने उसे एक तरफ धकेला और आसपास देखा. उसने मुझे थप्पड़ मारे. मैंने चीखने की कोशिश की तो उसने मेरा मुंह दबा दिया और जान से मारने की धमकी दी.

उसने कहा, ‘सरिया घुसा दूंगा पेट में अगर चिल्लाई तो.’ मैं उसके सामने गिड़गिड़ाई की प्लीज ऐसा कुछ मत करना. इसके बाद उसने रेप किया. इस दौरान ड्राइवर ने उसका फोन लिया और अपने नंबर पर मिस्ड कॉल मारी. ड्राइवर ने कहा कि अब मेरे पास तुम्हारा फोन नंबर है और अगर इस बारे में किसी को बताने की कोशिश की तो मार डालूंगा. इसके बाद उसने कहा कि चुपचाप बैठी रहो. ड्राइवर ने महिला को उसके घर के पास ड्रॉप किया और चला गया.

महिला थोड़ी होश में थी और उसने भागती हुई कैब की तस्वीर ले ली. उसने तुरंत अपने दोस्तों को आपबीती बतानी चाही. महिला ने बताया, ‘मैंने उस दोस्त को मेसेज करके बताना चाहा कि मेरे साथ क्या हुआ है, जिसे मैंने कैब में बैठने से पहले कॉल किया था. मैंने लिखा- कैब ड्राइवर ने मेरा रेप किया है. मगर वह मेसेज दोस्त के बजाय कैब ड्राइवर को चला गया, क्योंकि उसने हाल ही में अपने नंबर पर मिस कॉल दी थी.’ इसके बाद कैब ड्राइवर ने कॉल बैक किया और कहा कि तुम मरना चाहती हो क्या? इसके बाद मैंने सॉरी कहा और कॉल काटकर वहां से चली गई.

इसके बाद महिला ने 100 नंबर पर फोन किया तो पीसीआर वहां पर आई. फिर स्थानीय पुलिस ने महिला पुलिसकर्मियों को वहां भेजा, जहां से उसे सरकारी हॉस्पिटल में मेडिकल के लिए ले जाया गया. इस बीच पीड़िता के परिजनों को इन्फॉर्म कर दिया गया. सूत्रों के मुताबिक विक्टिम अपने पैरंट्स की इकलौती बेटी है और विदेश में किसी कंपनी के लिए काम करने के बाद हाल ही में भारत शिफ्ट हुई है. उसने विदेश की ही किसी यूनिवर्सिटी से एम. कॉम की है और अपने माता-पिता के साथ ही रहती है.

महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने रेप, अपहरण और हमले का केस रजिस्टर किया है. महिला एनजीओ काउंसलर्स के सामने महिला का बयान दर्ज किया गया और आरोपी को पकड़ने के लिए अभियान छेड़ दिया गया. इस काम के लिए 12 टीमों का गठन किया गया है. कैब कंपनी को फोन करके डॉक्युमेंट्स हासिल किए गए और आरोपी के घर पर छापा मारा गया, मगर वह वहां पर नहीं मिला. इसके बाद मथुरा से वारदात में इस्तेमाल कैब बरामद कर ली गई.

रविवार सुबह खबर आई थी कि पुलिस ने आरोपी को मथुरा में पकड़ लिया है, मगर अब पुलिस का कहना है कि अभी तक आरोपी गिरफ्त से बाहर है. इससे पहले जिस शख्स को पुलिस ने कैब ड्राइवर शिव कुमार यादव समझकर अरेस्ट किया था, वह कोई और निकला. पुलिस ने जब छानबीन की तो मालूम हुआ कि हिरासत में लिया गया शख्स कैब ड्राइवर नहीं, बल्कि कोई और है.

डीसीपी नॉर्थ मधुर वर्मा ने कहा, ‘महिला ने उबर पर टैक्सी बुक करवाई थी. कंपनी की तरफ से भी लापरवाही बरती गई है क्योंकि उन्होंने न तो ड्राइवर को वेरिफाई किया था और न ही कैब में जीपीएस डिवाइस लगाया था.’ टैक्सी सर्विस ऊबर ने इस घटना पर बयान जारी किया है. कंपनी ने कहा है कि उसने आरोपी ड्राइवर को सस्पेंड कर दिया है वह पुलिस की पूरी मदद कर रही है.

बहरहाल, इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा पर बहस छेड़ दी है. साल 2012 में निर्भया के साथ हुए गैंगरेप से दिल्ली समेत पूरा देश दहल गया था. नैशनल क्राइम रेकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में हर दिन रेप की 4 घटनाएं होती हैं.

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करनाल में धार्मिक डेरे की अरबों रूपये की जमीन का घोटाला, एक एडीसी समेत अनेक एच सी एस अधिकारीयों पर गाज गिरनी तय.. करनाल में धार्मिक डेरे की अरबों रूपये की जमीन का घोटाला, एक एडीसी समेत अनेक एच सी एस अधिकारीयों पर गाज गिरनी तय..(0)

हाईकोर्ट के आदेश पर एस पी करनाल ने कोर्ट में पेश की स्टेट्स रिपोर्ट.. करनाल के अतिरिक्त उपायुक्त समेत कईयों को ठहराया जमीन घोटाले का आरोपी.. पस्ताना गाँव में धार्मिक डेरे की 500 एकड़ जमीन की गलत तरीके से बंदरबांट कर चहेतों को फायदा पहुंचाने का है आरोप.. हुड्डा सरकार में हुए घोटाले को मुकाम पर ले जाना खट्टर सरकार के लिए बना चुनौती..

-अनिल लाम्बा||

करनाल, धार्मिक डेरों का जिन्न खट्टर सरकार का पीछा नहीं छोड़ रहा है ,  बरवाला का मामला अभी निपटा नहीं था एक दुसरे मामले ने खट्टर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है , मामला खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के गृह जिले करनाल के धार्मिक डेरे की जमीन से जुड़ा है. करोड़ों ही नहीं अपितु अरबों रूपये के इस जमीन घोटाले में लम्बे समय से चल रही जाँच की आंच खुद हरियाणा सरकार के अनेक वरिष्ठ अधिकारीयों तक पहुँच रही है और उनके सिर पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है.

कांग्रेस सरकार में आठ साल पूर्व इस घोटाले की नींव तब रखी गई थी जब प्रशासन ने बाबा भगवान गिरी पस्ताना के धार्मिक डेरे की सरप्लस घोषित 500 एकड़ जमीन को गलत तरीके से अयोग्य लोगों में बाँट दिया. इस बंदरबांट में करनाल के तत्कालीन पटवारी से लेकर तहसीलदार और उच्च प्रशाशनिक अधिकारीयों ने जमकर अपनी पावर का इस्तेमाल किया और जमीन बांटने में दलीय भेदभाव को दरकिनार करते हुए काग्रेस से लेकर इनेलों नेताओं तक को फायदा पहुँचाया.

जबकि नियमानुसार यह जमीन पुराने मुजारों, पिछड़ी जाति और गाँव के स्थाई तौर पर रहने वालों को दी जानी थी. लेकिन अरबो रूपये की कीमती कृषि जमीन ना केवल अपने और नेताओं के रिश्तेदारों को दे दी गई अपितु दूर दराज के लोगों को भी कौडिय़ों के भाव जमीन का आबंटन कर दिया गया जो पूरी तरह गैरकानूनी था.

हालांकि उस समय भी ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने इस मामले की आवाज उठाई लेकिन अधिकारी और मौजूदा सरकार मामले को दबाने और अपने अधिकारियों का बचाव करती रही. उस समय डेरे के संचालकों और डेरे की देखभाल करने वाले ट्रस्ट के सदस्यों ने इसकी शिकायत तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा तक से की. जिस पर मुख्यमंत्री के उडऩदस्ते ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी और अपनी जांच में सभी आरोपों को सही पाया.

वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री के उडऩदस्ते ने अपनी रिपोर्ट में खरीदारों और आबंटन करने वाले अधिकारीयों को दोषी मानते हुए कार्यवाही की सिफारिश की थी. लेकिन जमीन घोटाले में वरिष्ठ अधिकारीयों और नेताओं के रिश्तेदारों के शामिल होने के चलते इस रिपोर्ट को ठन्डे बसते में डाल दिया गया. तब से न्याय के लिए धक्के खा रहे डेरे के पैरवीकारों ने न्याय की मांग को लेकर मार्च 2013 में पंजाब हरियाना हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर एक जनहित याचिका दाखिल की जिस पर कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा.  कोर्ट का नोटिस आते ही तत्कालीन सरकार ने आनन फानन में 2 जून 2014 को करनाल के बुटाना थाने में इससे सम्बंधित ऍफ़ आई आर दर्ज करते हुए करनाल एस पी को मामले की स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने को कहा. यह वोही एक्सक्लूसिव शपथ पत्र की कॉपी जो करनाल पुलिस अधिक्षक अभिषेक गर्ग ने पिछले महीने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में दी है जिसमें साफ़ साफ़ इन आरोपी अधिकारियों के नाम लिखे हुए है, जिन्होंने यह करोड़ो रुपयों का जमीनी घोटाला किया है. पुलिस में दर्ज शिकायत में मुख्यमंत्री के उडऩदस्ते की रिपोर्ट को आधार मानते हुए जमीन लेने वाले और उन्हें जमीन अलाट करने वाले अधिकारीयों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी. कोर्ट का दबाव पडऩे के बाद सरकार के निर्देश पर अब हाल ही में करनाल एस पी अभिषेक गर्ग ने मामले में स्टेट्स रिपोर्ट पेश कर दी है जिसमे उन्होंने अन्य आरोपियों के आलावा तत्कालीन अधिकारीयों सहित वर्तमान में करनाल के अतिरिक्त उपायुक्त गिरीश अरोड़ा को दोषी मानते हुए उन्हें गिरफ्तार करने की बात कही है. अब देखने वाली बात यह होंगी की आखिर कब तक इन आरोपी भष्र्ट अधिकारियो के खिलाफ खट्टर सरकार कोई कारवाही करती है.

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- पवन कुमार बंसल ||
नवजात शिशु के लिए माँ का दूध सर्वश्रेष्ठ है. इन्फेंट मिल्क सब्सिटियुट एक्ट के मुताबिक कोई भी कंपनी बच्चो के लिए बेचने वाले अपने उत्पादों पर ऐसे लेबलिंग नहीं कर सकती, जिससे यह आभास हो कि उनका उत्पाद माँ के दूध के बराबर है. हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हूडा के गृह नगर रोहतक में जुलाई 2012 में हैल्थ महकमे के अधिकारीयों डॉ अमरजीत राठी तथा कुलदीप सिंह ने नेस्ले के डिस्ट्रीब्यूटर सतनारायण की दूकान पर छपा मारकर नेस्ले की डिब्बाबंद दूध की तीन सैम्पल लिए. टीम में फ़ूड व ड्रग महकमे की अफसर मनमोहन तनेजा तथा ओ गवाह मंगल से और अंकुर भी थे.

एक महीने बाद पानीपत की समालखा की पास पट्टी कल्याण में नेस्ले कंपनी के गोदाम पर छापा मारकर सैम्पल लिए . जाँच में पाया गया की नेस्ले की उत्पादों में इस तरह लेबलिंग की है जिस से लगे कि उनका दूध माँ की दूध की समान है . नियमानुसार विभाग को नेस्ले कंपनी के खिलाफ अदालत में इन्फेंट मिल्क सब्सिटियुट एक्ट के तहत केस दायर करना था . इसी बीच कंपनी के आला अधिकारी स्विट्जऱलैंड से चंडीगढ़ आये और हूडा से मदद की गुहार लगाई .

अधिकारियों की सलाह के बावजूद हूडा ने कंपनी की दूसरी यूनिट का न केवल उद्घाटन किया बल्कि सार्वजानिक मंच से हरियाणा में निवेश करने के लिए नेस्ले का धन्यवाद करते हुए कहा कि नेस्ले की उत्पाद विश्व स्टैण्डर्ड के है. जब हुड्डा द्वारा नेस्ले कंपनी की सार्वजनिक प्रशंसा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों की सिटी पिटी गुम हो गई. उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस मामले में धीमा चलें.

कानून के मुताबिक तीन वर्ष के अंदर केस दर्ज करना आवश्यक होता है. दो वर्ष बीत गए और इसी तरह तीन वर्ष भी बीत जाते. लेकिन इसे कंपनी का दुर्भा’य कहें कि इसी दौरान केंद में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गए. प्रधानमंत्री की न्यूट्रिशन चैलेंजिज कौंसिल के सदस्य डा. अरुण गुप्ता ने एफडीए हरियाणा के तत्कालीन आयुक्त राकेश गुप्ता को चिट्ठी लिखकर पूछा कि इस मामले में अभी तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? इधर हुड्डा की सरकार दोबारा बनने कीउम्मीद भी कम हो गई थी. उन्हीं अधिकारियों ने जो हुड्डा के इशारे पर इस मामले को दबाए बैठे थे, ने आनन फानन में रोहतक के सीजीएम की अदालत में नेस्ले कंपनी के खिलाफ केस दर्ज किया. अदालत ने कंपनी के अधिकारियों को छह जनवरी को पेश होने का आदेश दिया लेकिन पानीपत के मामले में अभी भी अदालत में केस दायर नहीं किया गया है.

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