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आखिर चाहती क्या है सरकार..?

-अभय कालरा (मीडिया दरबार साप्ताहिक आलेख प्रतियोगिता में द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित) आज देश में हर आदमी चाहे छोटा हो या बड़ा, महंगाई से बुरी तरह त्रस्त है। न सिर्फ बुनियादी जरूरत की चीजें बल्कि…

महज़ दिखावा है लोकपाल बिल पर सरकारी क़वायद

-कविता सहाय (मीडिया दरबार की साप्ताहिक आलेख प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित) देश में भ्रष्टाचार आज इतनी गहरी जडें जमा चुका है कि इसे रोकने के सारे उपाय फेल हो चुके हैं। यह एक…

क्या हो अगर लोकपाल भी भ्रष्ट हो जाए?

- कृष्ण कुमार (मीडिया दरबार आलेख प्रतियोगिता के तहत द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित) आज देश में शासन तंत्र का आलम यह है कि भ्रष्टाचार निरोधी विभाग ही भ्रष्टाचार के सबसे बड़े अड्डे बन गए हैं।…

हम काला धन क्यों वापस मंगाएं? हमारा भला…

-विजय पाटनी, नसीराबाद, राजस्थान सारा देश विदेशों में जमा काला धन भारत में लाने में लगा है , तरह तरह की बातें बताई जा रही हैं, ये धन आया तो इस देश से गरीबी मिट…

क्या संन्यासी या योग गुरु से छिन जाते…

मीडिया दरबार साप्ताहिक आलेख प्रतियोगिता के तहत प्रकाशित:- वन्दना गुप्ता - इन्सान के जन्म के साथ ही उसे उसके मौलिक अधिकार स्वतः ही प्रदान हो जाते हैं और उन्हें कोई नहीं छीन सकता फिर चाहे वो…

खोने की जरूरत कहाँ? लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही…

मीडिया दरबार आलेख प्रतियोगिता के तहत प्रकाशित:- राजीव रंजन प्रसाद - यह बुरा समय है। दिन स्याह और रात खौफनाक। सरकार लोकतांत्रिक अधिकार का ज़िबह कर रही है; लेकिन हमारी दिलफेर पीढ़ी सिनेमा ‘रेड्डी’ देखती हुई कहकहा…