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साहेब के नाम एक ख़त..

-रीमा प्रसाद|| थोड़ी उलझन में हूँ .. अपने खत की शुरूआत किस संबोधन से करूं. सिर्फ शहाबुद्दीन कहूंगी तो ये आपकी महानता पर सवाल होगा. शहाबुद्दीन जी या साहेब कहूंगी तो मेरा जमीर मुझे धिक्कारेगा.…

देशभक्ति की ओवरडोज़..

-आरिफा एविस॥ नए भारत में देशभक्ति के मायने औए पैमाने बदल गये हैं. इसीलिए भारतीय संस्कृति की महान परम्परा का जितना प्रचार प्रसार भारत में किया जाता है शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो…

मुद्रा राक्षस की मौत और हिंदी साहित्य का…

-नवीन कुमार जब से मुद्रा राक्षस के निधन की ख़बर आई है मुझे रह-रहकर युसूफ मियां याद आ रहे हैं। युसूफ मियां लखनऊ की एक फुटपाथ पर जूते-चप्पलों की मरम्मत करके घर चलाते थे। जून…

बोलो अच्छे दिन आ गये..

-आरिफा एविस॥ देश के उन लोगों को शर्म आनी चाहिए जो सरकार की आलोचना करते हैं और कहते हैं कि अच्छे दिन नहीं आये हैं. उनकी समझ को दाद तो देनी पड़ेगी मेमोरी जो शोर्ट…

हरेक बात पर कहते हो घर छोड़ो..

-आरिफा एविस || घर के मुखिया ने कहा यह वक्त छोटी-छोटी बातों को दिमाग से सोचने का नहीं है. यह वक्त दिल से सोचने का समय है, क्योंकि छोटी-छोटी बातें ही आगे चलकर बड़ी हो जाती…

पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं..

-आरिफा एविस॥ पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं गिरा जो इतनी आफत कर रखी है. रोज ही तो दुर्घटनाएं होती हैं. अब सबका रोना रोने लगे तो हो गया देश का विकास.और विकास तो कुरबानी…

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पुरस्कार का मापदंड..

-आरिफा एविस|| पुरस्कार किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के कर्मो का फल है बिना पुरस्कार के किसी भी व्यक्ति को श्रेष्ठ नहीं माना जाना चाहिए. बिना पुरस्कार व्यक्ति का जीवन भी कुछ जीवन है? जैसे “बिन…

भारत माता की जय: व्यंग्य

-आरिफा एविस|| जब सवाल देशभक्ति का हो तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. हम जिस देश में रहें और उसके प्राचीन सामन्ती विचारों की कोई कदर न करें और उसके प्रति निष्ठा न रखें ये…

विभूति नारायण राय और अभिरंजन कुमार सम्मानित..

सामाजिक संस्था “भोर” और सुगौली प्रेस क्लब, मोतिहारी द्वारा 4 और 5 मार्च को संयुक्त रूप से आयोजित “भोर लिटरेचर फेस्टिवल - 2016” में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय को प्रथम रमेश चंद्र झा स्मृति…

अगर हम लेखकों के विरोध को नहीं समझ…

-प्रियदर्शन॥ जिन्हें सरकार और उसके लोग बेहद मामूली, अनजान से लेखक बता रहे हैं, उनका विरोध इसलिए महत्वपूर्ण है कि हमारी बहुत सारी विफलताओं से प्रतिरोध का जो स्वर मर गया था, वह अचानक सांस…

वर्ष 2014 का बिहारी पुुरस्‍कार श्री ओम थानवी…

प्रसिद्ध लेखक एवं पत्रकार श्री ओम थानवी की पुस्तक ’मुअनजोदड़ो’ को वर्ष 2014 के बिहारी पुरस्कार के लिए चुना गया है। के.के. बिरला फाउंडेशन के कार्यकलापों के अन्तर्गत डॉ. कृष्‍ण कुमार बिरला ने 1991 में…

बोली पर ब्रेक..

-तारकेश कुमार ओझा|| चैनलों पर चल रही खबर सचमुच शाकिंग यानी निराश करने वाली थी. राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मातहतों को आगाह कर दिया था कि गैर जिम्मेदाराना बयान दिए बच्चू तो कड़ी कार्रवाई झेलने को…