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अमेरिका लोगे या पाकिस्तान..

-अशोक मिश्र|| कुछ नामी-सरनामी ठेलुओं की मंडली गांव के बाहर बनी पुलिया पर जमा थी. गांजे की चिलम ‘बोल..बम..बम’ के नारे के साथ खींची जाती, तो उसकी लपट बिजली सी चमककर पीने वाले को आनंदित…

चीन में होंगे झानझूं त्रिपाठी..

-अशोक मिश्र|| नथईपुरवा गांव के कुछ बुजुर्ग चाय की दुकान पर बतकूचन कर रहे थे. रामबरन ने चाय का कप उठाकर मुंह से लगाया और सुर्रर्र..की आवाज करते हुए थोड़ी सी चाय अंदर ढकेली और…

राजनेताओं से सीख लें गिरगिट…

-तारकेश कुमार ओझा|| राजनीति में रंग या पाला बदलने के खेल को आप नया नहीं कह सकते। छात्र जीवन में ही कुछ एेसे राजनेताओं के बारे में सुना था जिनकी ख्याति ’ सदामंत्री ‘के तौर पर थी। यानी…

वैदिकी गप, गप न भवति…

वेद प्रताप वैदिक को जो लोग अर्से से जानते हैं कि वे न केवल रीढ़विहीन हैं बल्कि तर्क विहीन भी हैं...वैदिक साहब का प्रिय शगल है अपने बारे में ख़ुद ही बढ़ा चढ़ा कर बताना...एक…

तहं तहं भ्रष्टाचार..

-ओम थानवी|| एक पुस्तक चर्चा में शिरकत का मौका मिला. सतीश अग्निहोत्री का व्यंग्य संग्रह है, 'तहं तहं भ्रष्टाचार' (राजकमल प्रकाशन). अग्निहोत्रीजी ने कई शासन-प्रशासन देखे हैं. पुस्तक में यों तो कई दिलचस्प रूपक हैं,…

सर्कस में नकली शेरखान…

-दिनेशराय द्विवेदी|| आम आदमियों के मुखिया ने सर्कस का शो जारी रहते शेरखान को चिढ़ा कर अनुशासन भंग किया था. शेरखान को चिढ़ाना कोई अनुशासनहीनता नहीं, लेकिन सर्कस का शो शुरू होने के बाद इस…

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सर्कस लाइव : झगड़ा नहीं, नया आईटम..

-दिनेशराय द्विवेदी||  ‘द ग्रेट इंडियन सर्कस’ का प्रीमियर शो हिट हो गया. यूं तो सर्कस में हर बार वही सब कुछ होता है, फिर भी सर्कस लोकप्रिय हैं. उन्हें हर बार अच्छे खासे दर्शक मिल…

कत्ल होने के बोनांजा ऑफर्स…

-संध्या नवोदिता|| मेरे पास मारे जाने के तरीकों के इतने आफरों की बाढ़ आ गयी है कि मैं हैरान हूँ. मतलब अतीत में मरने के तरीके इतने जोर शोर से प्रचारित नहीं किये गये वरना…

पब्लिक कहेगी तो दूल्हा भी बन के दिखा…

-दिनेशराय द्विवेदी|| पींईँईँईँ... पिपिप्पींईँईँ ... हो गया, हो गया, हो गया. आज सुबह, साढ़े दस बजे ‘दी ग्रेट इंडियन सर्कस’ का शुभारंभ हो गया. करोड़ों लोगों और हजारों नेतागणों को जिसका इन्तजार था वह शुरु…

ऊँ गणेशाय नमः के बाद साहिब का नाम…

-दिनेशराय द्विवेदी|| वाह साहब¡ मान गए आप को. क्या बात कही है? आज तक किसी ने इस तरह से नहीं सोचा, न बताया, जो व्यापारियों को बताया. वैसे एक गलती कर गए. इत्ता बड़ा ट्रेड…

खबरदार! जो वेलेंटाइन डे पर विश किया..

-अशोक मिश्र|| मैं लगभग बारह-तेरह साल की उम्र में ही ‘पंडित’ हो जाना चाहता था. तब मैं छठवीं या सातवीं कक्षा में था. स्कूल के अध्यापक-अध्यापिकाओं से पढ़ाई को लेकर रोज पिट जाता था. अध्यापक-अध्यापिकाएं…

तोहार कवन बान राजा…

-अशोक मिश्र|| संपादक जी मुझे हौंक रहे थे, ‘यार! कभी तो कोई अच्छी स्टोरी कर लिया करो. हर बार तुम अपनी स्टोरी में कोई न कोई ऐसा नुक्स छोड़ ही देते हैं जिसके चलते अगली…