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मीडिया में दलाल-तंत्र..

-मुकेश कुमार॥ अगुस्ता वेस्टलैंड घोटाले में अँग्रेजी के बीस पत्रकारों (हिंदी या अन्य भारतीय भाषाओं के पत्रकारों को इस लायक नहीं समझा जाता) को चालीस करोड़ की रिश्वत देने की ख़बर सच है या कोरी…

बोलो अच्छे दिन आ गये..

-आरिफा एविस॥ देश के उन लोगों को शर्म आनी चाहिए जो सरकार की आलोचना करते हैं और कहते हैं कि अच्छे दिन नहीं आये हैं. उनकी समझ को दाद तो देनी पड़ेगी मेमोरी जो शोर्ट…

हरेक बात पर कहते हो घर छोड़ो..

-आरिफा एविस || घर के मुखिया ने कहा यह वक्त छोटी-छोटी बातों को दिमाग से सोचने का नहीं है. यह वक्त दिल से सोचने का समय है, क्योंकि छोटी-छोटी बातें ही आगे चलकर बड़ी हो जाती…

पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं..

-आरिफा एविस॥ पुल गिरा है कोई पहाड़ नहीं गिरा जो इतनी आफत कर रखी है. रोज ही तो दुर्घटनाएं होती हैं. अब सबका रोना रोने लगे तो हो गया देश का विकास.और विकास तो कुरबानी…

मास मीडिया में बिना डिग्री डिप्लोमा के नहीं…

इस समय आरएनआई में पंजीकृत 90 प्रतिशत मुद्रकों के पास पत्रकारिता की योग्यता नहीं, फर्जी पत्रकारों की मश्कें कसने की तैयारी में भी सरकार.. -मोदस्सिर कादरी (साई)|| नई दिल्ली । देशभर में समाचार पत्रों की…

पुरस्कार का मापदंड..

-आरिफा एविस|| पुरस्कार किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के कर्मो का फल है बिना पुरस्कार के किसी भी व्यक्ति को श्रेष्ठ नहीं माना जाना चाहिए. बिना पुरस्कार व्यक्ति का जीवन भी कुछ जीवन है? जैसे “बिन…

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भारत माता की जय: व्यंग्य

-आरिफा एविस|| जब सवाल देशभक्ति का हो तो कभी पीछे नहीं हटना चाहिए. हम जिस देश में रहें और उसके प्राचीन सामन्ती विचारों की कोई कदर न करें और उसके प्रति निष्ठा न रखें ये…

सच बोलोगे तो मारे जाओगे..

-महेंद्र दुबे॥ 21 मार्च को शाम लगभग 5 बजे पुलिस द्वारा उठाये गए हिंदी दैनिक "पत्रिका" से संबद्ध और ईटीवी न्यूज से हाल ही में हटाये गये बस्तर क्षेत्र के युवा और निर्भीक पत्रकार प्रभात…

विभूति नारायण राय और अभिरंजन कुमार सम्मानित..

सामाजिक संस्था “भोर” और सुगौली प्रेस क्लब, मोतिहारी द्वारा 4 और 5 मार्च को संयुक्त रूप से आयोजित “भोर लिटरेचर फेस्टिवल - 2016” में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय को प्रथम रमेश चंद्र झा स्मृति…

ज़ी न्यूज़ के पत्रकार ने JNU मामले में…

हम पत्रकार अक्सर दूसरों पर सवाल उठाते हैं लेकिन कभी खुद पर नहीं. हम दूसरों की जिम्मेदारी तय करते हैं लेकिन अपनी नहीं. हमें लोकतंत्र का चौथा खंभा कहा जाता है लेकिन क्या हम, हमारी…

यकीन मानो कि तुम पत्रकार नहीं, घुटे दलाल…

तुमने अपना जमीर बेच दिया, अब दांव पर लगा दी पत्रकारिता.. जितने भी कुकृत्य हैं, सार्वजनिक हो चुके हैं तुम्हारे चेहरे पर.. तुमसे लाख बेहतर हैं गांव-कस्बे के पत्रकार, तुम तो निकृष्ट हो.. -कुमार सौवीर॥…

पत्रकारिता में बढ़ा हार्ट-अटैक व ब्रेन-स्‍ट्रोक का हमला..

हम अपने दोस्‍तों की सिर्फ तेरहीं-बरसी ही बनाते रहेंगे? गैर-मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकारों के प्रति सतर्कता की जरूरत सन्दर्भ: संतोष ग्वाला और सुरेन्द्र सिंह की असमय मौत -कुमार सौवीर॥ लखनऊ: कितनी अनियमित होती है आम पत्रकार की…