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सीवान, शहाबुद्दीन और एक हताश पिता का संघर्ष..

90 के दशक की शुरुआत में सीवान की एक नई पहचान बनी.वजह बाहुबली नेता शहाबुद्दीन थे.. वे अपराध की दुनिया से राजनीति में आए थे. 1987 में पहली बार विधायक बने और लगभग उसी समय…

शहाबुद्दीन जेल से रिहा, 1300 गाड़ियों के काफिले…

बिहार के बाहुबली आरजेडी नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन शनिवार को जेल से रिहा हो गया. सीवान के चर्चित तेजाब कांड में हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद शनिवार सुबह वह जेल से रिहा हुए. शहाबुद्दीन…

आखिर भाकपा ने माना: सिंगूर भूमि अधिग्रहण गलती..

हैदराबाद। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भाकपा ने स्वीकार किया कि पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार ने प्रस्तावित टाटा मोटर्स परियोजना के लिए सिंगूर में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में ‘‘गलती’’ की थी जिससे ममता बनर्जी को…

बलूचिस्तान नहीं, पाकिस्तान की मदद..

- हामिद मीर॥ यह अप्रैल 2014 का किस्सा है. एक जानलेवा हमले के बाद मुझे कराची के आगा ख़ान अस्पताल में भर्ती कराया गया था. कराची हवाईअड्डे से जिओ टीवी के दफ्तर जाने के दौरान…

अखिलेश की भृकुटि तनी तो जी-टीवी को मिला…

बहुत खफा थे अखिलेश “ कैराना को कश्मीर बनाने वाले चैनलों ! तेरा मुंह काला हो “ वाली खबर पर.. 16 जून की दोपहर को थमाया गया था आरओ, शाम को जारी कर दिया गया…

सरला मिश्रा की जली लाश को आज भी…

-आनन्द मिश्र|| भोपाल : नाम सरला मिश्रा। आयु ४१ वर्ष। शिक्षा डबल एम.ए.,एम.एड.,एल.एल.बी. स्नातक पत्रकारिता। परिचय म.प्र. कांग्रेस की दबंग नेता एवं स्वतन्त्रता सेनानी की पुत्री, पौत्री। पद, राजनीति, म.प्र. युवक कांग्रेस की संयुक्त सचिव।…

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दोष समरथ का और समरस भोजन दलित के…

-रवीश कुमार|| सवाल किसी दलित के घर नई चमकती थाली में लौकी का कोफ़्ता खाने का नहीं है। सवाल यह भी नहीं है कि कभी राहुल गांधी ने ऐसे ही खाया था तो प्रधानमंत्री नरेंद्र…

नहीं कहा भाजपा सरकार से सरकारी बंगले का…

प्रियंका गांधी वाड्रा ने इन दावों को खारिज कर दिया कि लुटियंस दिल्ली में उनके सरकारी बंगले का मासिक किराया उनके अनुरोध पर कम कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस राशि का निर्धारण…

कन्हैया तुम बहक गये, दंगे और दमन को…

-मुकेश कुमार सिंह॥ जेएनयू छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को मिली पहचान ही शायद अब उसकी दुश्मन बन चुकी है। प्रसिद्धि ने उसे अहंकारी बना दिया। अहंकार ने उसका विवेक-हर लिया। कन्हैया कोई पहला शख़्स…

नायक नहीं आंदोलन महत्वपूर्ण है..

मसीहा की तलाश में पागल हमारा समाज केजरीवाल से कन्हैया तक के कंधों पर अपनी उम्मीदों का बोझ डालने को बेकरार है. लेकिन इतिहास बताता है कि समाज जनता बदलती है. आंदोलन नेता पैदा करते…

‘भक्त’, ‘अभक्त’ और कन्हैया..

इक्कीस महीनों से इक्कीसवीं सदी के इस महाभारत का चक्रव्यूह रचा जा रहा था. अब जा कर युद्ध का बिगुल बजा. लेकिन चक्रव्यूह में इस बार अभिमन्यु नहीं, कन्हैया है. तब दरवाज़े सात थे, इस…

देशभक्ति का नंगा नाच..

-कृष्णकांत॥ देश अपनी भक्ति को लेकर इतना शर्मिंदा कभी नहीं था. मुसीबतें थीं, अपार थीं, हम ​सब मिलकर लड़ते रहे, संघर्ष करते रहे और आगे बढ़ते रहे. अब हम पीछे लौटने लगे हैं. जो चीजें…