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फेसबुक पर लडकी को नग्न फोटो भेजे, युवक गिरफ्तार… फेसबुक पर लडकी को नग्न फोटो भेजे, युवक गिरफ्तार…(0)

फेसबुक पर भी लड़कियों के साथ अश्लील हरकतों में बड़ी तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है. हाल ही में एक युवक ने फेसबुक पर एक युवती को नग्न और अश्लील फोटो भेज दिए. युवती की शिकायत के बाद पुलिस ने आईटी एक्ट समेत कई धाराओं में मामला दर्ज कर सीमापुरी निवासी मुकेश (25) को गिरफ्तार कर लिया है.

पुलिस के मुताबिक पीड़ित ममता (21)(बदला हुआ नाम) परिवार के साथ कल्याणपुरी इलाके में रहती है.

करीब एक साल पहले ममता एक होटल में काम करती थी वहां मुकेश भी नौकरी करता था. कुछ समय बाद ममता का ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया. लगभग दो माह पहले फेसबुक पर दोनों की दोबारा मुलाकात हुई.

हालांकि मुकेश ने ममता की फेसबुक वाल पर अपनी अश्लील फोटो पोस्ट करनी शुरू कर दी. यही नहीं आरोपी ने ममता के घर और उसके फोन नंबर का भी पता लगा लिया तथा उसके फोन पर अश्लील बातें करने के अलावा ममता का पीछा करने की कोशिश करने लगा.

साथ ही कई बार सड़क पर छेड़छाड़ का प्रयास भी किया. परेशान होकर ममता ने मामले की शिकायत कल्याणपुरी थाने में की. छानबीन के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी मुकेश को दबोच लिया.

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कैमरों का कैरेक्टर कैमरों का कैरेक्टर(0)

-आलोक पुराणिक||

इंसानों के कैरेक्टर से भरोसा उठने की बात होती है. अब तो सीन ये हैं कि सीसीटीवी कैमरों के कैरेक्टर से भरोसा उठ रहा है.

बिहार में महाबोधि मंदिर में बम धमाके हुए, वहां के सीसीटीवी कैमरों ने ऐसा कुछ ना कैद किया, जिससे जांच को एक ठोस दिशा मिलती.

और इधर दिल्ली की मेट्रो में सीसीटीवी कैमरों ने एक जोड़े के अंतरंग क्षण कैद कर लिये, इन कैमरों को आशिकमिजाज कहना तो आशिकमिजाजी की बेइज्जती है, पर इन सीसीटीवी कैमरों को छिछोरा जरुर कहा जा सकता है.

महाबोधि मंदिर के कैमरों का कैरेक्टर कतई निकम्मे पांडु हवलदार का सा था, तो दिल्ली मेट्रो के सीसीटीवी कैमरों ने कतई शक्ति कपूराना छिछोरी हरकत की है.

जहां सक्रिय और मुस्तैद होना चाहिए था, वहां तो वो सक्रिय और मुस्तैद ना हुए, कहीं और ही उनकी सक्रियता और मुस्तैदी दिखी.

बात नेताओं की नहीं हो रही है, सीसीटीवी कैमरों की हो रही है.

वैसे एक बात ये भी सामने आ रही है कि परस्पर अंतरंगता दिखा रहे युवा और युवती की यह सीसीटीवी कैमरा फुटेज दिल्ली मेट्रो की नहीं है. कहीं और बाहर की है, उसपे चेपाचापी करके दिल्ली मेट्रो के खाते में डाली जा रही है. मैं इस बात से भी सहमत हूं. सरकारी सीसीटीवी कैमरों की महान परंपरा में कैमरे कुछ खास रिकार्ड ही नहीं करते. अगर सीसीटीवी कैमरों ने कुछ खास रिकार्ड कर लिया है, तो शक स्वाभाविक है कि सीसीटीवी कैमरे सरकारी ना हो सकते, वो मेट्रो के ना रहे होंगे.

खैर मसला सिर्फ कैमरों के कैरेक्टर का भी नहीं है. यू- ट्यूब पर 10 जुलाई, 2013 को सुबह दस बजकर 38 मिनट तक इस मेट्रो-प्रेम-प्रसंग फुटेज को डेढ़ लाख से ज्यादा लोग देख चुके थे. अभी एक डाक्टर मेरे पास भुनभुना रहता था कि डेंगू, मलेरिया, तमाम आपदाओं से बचाने के लिए उसने बहुत अच्छा वीडियो तमाम वैबसाइटों पर अपलोड किया है, कोई ना देख रहा उसे.

मैंने डाक्टर को सुझाव दिया है कि अपने डेंगू विरोधी वीडियो में आगे-पीछे ये मेट्रो प्रेम-प्रसंग लगा ले. चुंबनों की सीरिज के बीच-बीच में डेंगू-आपदा का अभियान भी दबादब देख लेगी पब्लिक.

(आलोक पुराणिक की फेसबुक वाल से)

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हीरोइन करीना को जन्मदिन का तोहफा मिलेगा…? हीरोइन करीना को जन्मदिन का तोहफा मिलेगा…?(3)

-अर्णब बनर्जी||

मधुर भंडारकर अपनी फिल्मों के स्क्रीनप्ले के एक खास अंदाज के लिए जाने जाते हैं.चांदनी बार (जिसमें एक डांस बार लड़की की कहानी) से लेकर हीरोइन तक उन्होंने अपनी फिल्मों के मुख्य किरदारों के आपसी विवादित और जटिल रिश्तों को परदे पर उतारा है. पेज 3, कॉरपोरेट और फैशन जैसी अपनी फिल्मों की कामयाबी के बाद वो लेकर आए हैं फिल्म हीरोइन जिसमें एक महत्त्वाकांक्षी बॉलीवुड हीरोइन के फिल्मी सफर की कहानी बताई गई है. लालच, स्वार्थ और अपने प्रतिद्वंद्वी से आगे निकलने की गलाकाट प्रतिस्पर्धा में अपने आपको बरबाद कर देने की कहानी है हीरोइन.
निराशाजनक प्लॉट

फिल्म शुक्रवार 21 सितंबर को रिलीज हुई है. इसी दिन करीना कपूर का जन्मदिन भी है. सवाल ये है कि क्या उनके प्रशंसक उन्हें जन्मदिन का तोहफा देंगे. हीरोइन की कहानी के साथ समस्या ये है कि इसका सहज ही पूर्वानुमान लगाया जा सकता है.

अगर आप इस फिल्म के जरिए फिल्मी दुनिया की हकीकत किसी चश्मदीद के नजरिए से देखने की उम्मीद लगाकर गए हैं तो आप बुरी तरह से निराश होंगे. भंडारकर, शुरुआत की कुछ रील्स में ही फिल्म का प्लॉट खो देते हैं और जिस इंडस्ट्री का वो खुद ही हिस्सा हैं उसी इंडस्ट्री की कहानी उन्होंने बेहद ही सतही तरीके से परोस दी है.

बीते कुछ सालों में इंडस्ट्री के कुछ ऐसे सीक्रेट या ऐसे विवाद जो खबरों का हिस्सा बने उन्हें फिल्म में पेश करने के लिए एक बहादुरी की जरूरत थी. मधुर भंडारकर की फिल्म को बॉलीवुड पर एक व्यंग्य कहना बेहद अतिशयोक्ति होगी.

फिल्म निर्माताओं, पीआर मशीनरी की ओछी हरकतों से लेकर मीडिया पर कटाक्ष कसने का भंडारकर का प्रयास बिना किसी खास रिसर्च के अधपकी कोशिश सा प्रतीत होता है.

फिल्म की कहानी

करीना कपूर फिल्म के कई सींस में काफी प्रयास करती हुई सी लगती हैं.

कहानी एक सुपरस्टार माही अरोड़ा (करीना कपूर) की है. जिसने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दी हैं, लेकिन फिर भी तमाम कामयाबियों के बाद भी वो अपने आपको तन्हा महसूस करती है.

वो अपनी ही स्टारडम की गुलाम बन जाती है. फिर नई हीरोइनों के आने के बाद उसकी कामयाबी में जैसे ग्रहण सा लग जाता है वो एक हिट फिल्म के लिए तरस जाती है.

माही तरह तरह के हथकंडे अपनाकर अपनी प्रतिद्वंद्वी हीरोइनों से आगे निकलने की कोशिश करती है.

वो अपने सह कलाकार आर्यन खन्ना (अर्जुन रामपाल) से बेहद मोहब्बत भी करती है जो पहले से ही शादीशुदा है. एक तरफ तो माही आर्यन के लिए कुछ भी करने को तैयार है तो दूसरी तरफ आर्यन बेहद प्रेक्टिल इंसान है और उसके लिए करियर ही सब कुछ है. इन सब वजहों से माही की जिंदगी में एक के बाद मुश्किलें पेश आने लगती हैं.

उसके पास फिल्मों का अकाल पड़ने लगता है. वो निर्माताओं के घर जाकर उनसे फिल्में देने की गुजारिश करने लगती है. मानसिक अवसाद की वजह से उसका करियर तबाह होने लगता है लेकिन तमाम विवादों में रहने की वजह से वो खबरों में बनी रहती है. हीरोइन के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि ये फिल्मी दुनिया के सिर्फ ‘अनैतिक’ पहलू को बेहद ही सतही तरीके से दिखाने की कोशिश करती है.

हम सभी को मालूम है कि ना सिर्फ फिल्मी दुनिया बल्कि हर जगह ऐसे लोग होते हैं जो ओछे तरीकों से अपनी स्वार्थ सिद्धि में लगे रहते हैं.

क्या ये बुरा पहलू ही फिल्म इंडस्ट्री का आईना है. आम तौर पर फिल्म इंडस्ट्री को लेकर लोगों के मन में जो धारणा है, मधुर अपनी इस फिल्म में लोगों की इस सोच को बदलने की कोई कोशिश नहीं करते. वो भी इसी पारंपरिक सोच के शिकार हो गए लगते हैं.

माही, अगर महत्वाकांक्षी है, कामयाब है, तो जरूरी तो नहीं कि वो ड्रग्स या शराब का शिकार हो जाएगी.

मधुर भंडारकर और उनकी लेखकों की टीम जिनमें अनुराधा तिवारी, मनोज त्यागी और निरंजन अयंगार शामिल हैं ने इस स्क्रीनप्ले में ऐसी घटनाओं, ऐसे गॉसिप का जिक्र किया है जो हम तमाम फिल्मी पत्रिकाओं और समाचार चैनलों में देखते सुनते और पढ़ते चले आए हैं. इसी वजह से हीरोइन फिल्मी दुनिया का एक सस्ता सा मोंटाज बन कर रह गई है.

कैसा है अभिनय
करीना कपूर ने अपने किरदार को निभाने के लिए खासी मेहनत की है, लेकिन समस्या ये है कि वो कुछ दृश्यों में ये कोशिश करती हुई नजर आ जाती हैं. हालांकि फिल्म के बाकी दृश्यों में उन्होंने मजबूती से अपने किरदार को निभाया है. दिक्कत ये है कि इस तरह की फिल्मों में जिस गहराई की जरूरत होनी चाहिए वो गहराई करीना नहीं ला पाई हैं.

दूसरी तरफ दिव्या दत्ता (जिन्होंने करीना की पीआर मैनेजर का किरदार निभाया है) और शहाना गोस्वामी (फिल्म में जिन्होंने बंगाली अभिनेत्री प्रोतिमा का किरदार निभाया है) कहीं ज्यादा सशक्त लगी हैं.

फिल्म के पुरुष कलाकारों की बात करें तो रणदीप हुडा माही के प्रेमी और एक क्रिकेटर के किरदार में नजर आए हैं, वही अर्जुन रामपाल को देखकर लगता है कि मानो उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि कब, कैसे और कहां पर कौन से भाव लाने हैं.

फिल्मी दुनिया के प्रशंसक जो बॉलीवुड के बारे में और नजदीक से जानना चाहते हैं उन्हें निश्चित तौर पर हीरोइन निराश करेगी. मधुर भंडारकर की ये फिल्म, परदे के पीछे की हकीकत को दिखाने के प्रयास में बस छूकर निकल गई सी लगती है.
(BBC)

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करीना बनी अर्जुन रामपाल के साथ डर्टी गर्ल…. करीना बनी अर्जुन रामपाल के साथ डर्टी गर्ल….(0)

करीना कपूर ने “हीरोइन” फिल्म में खुदको “डर्टी  पिक्चर्स” की विद्या बालन से ज्यादा “डर्टी गर्ल” के रूप में प्रचारित करने के कारण लम्बे समय से दर्शकों के जेहन में छायी हुई है. शुक्रवार 21 सितम्बर को इस फिल्म का प्रदर्शन होने जा रहा है. जिस प्रकार से इस फिल्म को प्रचारित व प्रसारित किया गया है और करीना की शादी की तैयारियों के बीच उसे अर्जुन रामपाल के साथ हमबिस्तर होते देखने के लिए दर्शकों को बॉक्स ऑफिस की तरफ खींच सकती है.

हालाँकि करीना कपूर ने जो कुछ इस फिल्म में किया है वह उसे कई बार अपनी पिछली फिल्मों में कर चुकी हैं. एकमात्र नया काम जो उनके द्वारा किया गया है वह है फिल्म के नायकों के साथ इंटीमेंट दृश्य देना. लेकिन इन दृश्यों पर सेंसर बोर्ड की कैंची चल गई है इसलिए ऎसा भी नहीं है कि युवा, जो सिनेमा का सबसे बडा दर्शक वर्ग है, सिर्फ करीना को आंसू बहाते या फिर सिगरेट के धुएं के छल्ले बनाते हुए देखने के लिए नहीं आ सकता. सच्चाई यह है कि करीना कपूर से ज्यादा मेहनत इस फिल्म के निर्देशक मधुर भंडारकर ने की है.

उन्होंने इस फिल्म की पटकथा को बार-बार अपनी नायिकाओं के कारण बदला है. इसके साथ ही यह उनके करियर की अब तक की सबसे महंगी फिल्म है. इस फिल्म के लिए करीना कपूर ने दो करोड के परिधान पहने हैं, जबकि इतने बजट में तो मधुर ने अपनी पहली दोनों फिल्में चांदनी बार और पेज थ्री का निर्माण कर लिया था. ट्रेड में इस फिल्म का इतना क्रेज है कि इसके सामने किसी भी निर्माता ने अपनी फिल्म को उतारने की जहमत नहीं उठायी है. इसका फायदा वितरकों को मिला है जिन्हें अपनी फिल्म को प्रदर्शित करने के लिए अपनी पसन्द और संख्या के सिनेमाहाल मिल गए हैं.

अगर मधुर की पिछली फिल्मों के बजट पर नजर डाली जाए तो हीरोइन उनके अब तक के करियर की सबसे महंगी फिल्म है. इस फिल्म को हॉट बनाने के मकसद से उन्होंने पिछले साल टोरंटो फिल्म फेस्टिवल के दौरान ऎश्वर्या को लेकर हीरोइन का पहला पोस्टर भी लॉन्च किया, लेकिन इसी बीच ऎश के मां बनने की खबर ने मधुर को जड तक हिला दिया जिसके चलते मधुर को करीना कपूर को अप्रोच करना पडा. हालांकि, मधुर इस बात से इनकार करते है कि दोबारा करीना को लीड रोल में लेने के लिए उन्हें पटकथा में कुछ परिवर्तन करने पडे, लेकिन जानकारों का कहना है कि बेबो ने फिल्म अपनी टर्म्स और मुंहमांगी फीस पर साइन की है. इस फिल्म के लिए मधुर ने रणदीप हुड्डा, अर्जुन रामपाल व शहाना गोस्वामी को पहले से साइन किया हुआ था.

वहीं मधुर कैंप से जुडीं मुग्धा गोडसे ने भी फिल्म में एक खास किरदार निभाया है. अपनी पिछली फिल्मों की तरह मधुर को इस फिल्म के कुछ सींन के लिए भी सेंसर कमिटी से उलझना पडा. पहली बार मधुर ने अपनी इस फिल्म को देश-विदेश में प्रमोट किया. इस प्रमोशन में जहां फिल्म के दूसरे स्टार्स गायब रहे, वहीं करीना दिल्ली से लेकर दुबई तक मधुर के साथ नजर आई. सिनेमा मालिकों में इस हॉट और सेक्सी हीरोइन का जबर्दस्त क्रेज है. उन्हें इंतजार है तो सिर्फ दर्शकों को इस फिल्म को सफल बनाने के साथ-साथ उनके यहां भी व्यवसाय बढाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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क्या सेक्स और हिंसा  की चाशनी में डूबी फ़िल्में दर्शकों को भा रही है ? क्या सेक्स और हिंसा की चाशनी में डूबी फ़िल्में दर्शकों को भा रही है ?(3)

- मीनाक्षी शर्मा||

पिछले दिनों रिलीज़ हुई पूजा भट्ट की फिल्म “जिस्म-२” से फिल्म निर्माण  के क्षेत्र में  एक नयी बहस शुरू हो गयी है कि हम दर्शकों को किस तरह की फ़िल्में दिखा रहे हैं. अश्लील सिनेमा की आड़ में हम युवा दर्शकों को कहीं न्यूडिटी तो नही दिखा रहे ? पहले जब कभी एडल्ट फ़िल्में रिलीज़ होती थी तो उनका कुछ मकसद होता था, कुछ सन्देश भी होता था उन फिल्मों में, जबकि आज के समय एडल्ट फिल्मों का मतलब होता है बेडरूम सीन. अब तो हद ही हो गयी है कि फिल्म निर्माता सनी लियोन जैसी पोर्न फिल्मों की नायिका को बोलीवुड की नायिका बना रहे हैं इस फिल्म से सनी का ग्राफ जरुर बढ़ गया होगा क्योंकि अब वो बोलीवुड की नायिका हैं जबकि दर्शकों ग्राफ जरुर गिर गया है.

क्या अगर कोई ए ग्रेड स्तर का निर्माता “जिस्म-२” जैसी फिल्म बनाए तो उसे हमें किस श्रेणी की फिल्म में शामिल करना चाहिए. समझ नही आता. इसी तरह फिल्म “क्या सुपर कूल हैं हम” भी ऐसी फिल्म है जिसमें ऐसे – ऐसे संवाद हैं जिसे सुनने में भी शर्म आये. इस फिल्म ने तो कुत्तों को भी नही छोड़ा. ऐसी ही एक फिल्म पिछले दिनों रिलीज़ हुई थी ‘हेट स्टोरी’, निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की यह फिल्म भी कुछ ऐसी ही फिल्म थी.

एक समय था कान्ति शाह और दादा कोंडके जैसे निर्माता निर्देशक इस तरह की फ़िल्में बनाते थे तब उनकी फिल्मों के दर्शक बहुत ही सीमित होते थे जबकि आज समय बदल गया है क्या आज प्रचार व माकेर्टिंग का समय है इसलिए ऐसी फिल्मों को दर्शक मिल रहे हैं या आज सेक्स और हिंसा की चाशनी में डूबी फ़िल्में दर्शकों को भा रही है या फिर पैसा कमाने की होड में लगे हैं निर्माता निर्देशक.

भट्ट कैम्प की तो फिल्मे जब भी रिलीज़ होती हैं दर्शकों  को लगता है कि अब सेक्स ही देखने को मिलेगा जबकि एक समय था इसी कैम्प ने एक से एक अच्छी फ़िल्में अपने दर्शकों को दी हैं. आश्चर्य की बात तो तब होती है जब सेक्स से भरपूर फिल्मों को बनाने वाले निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों को क्लासिक फिल्मों का दर्जा देते हैं और कहते हैं इस तरह की फिल्म बना कर वो निर्देशक के तौर पर एक नयी ऊँचाई को छू लेगें.

क्या आगे आने वाले समय में दर्शकों को इसी तरह की फिल्में देखने को मिलेगीं या कुछ बेहतर फ़िल्में देख सकेगें दर्शक ? वैसे तो निर्देशक पूजा भट्ट ने फिल्म “जिस्म – ३” का भी एलान भी कर ही दिया है.

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करीना की डर्टी पिक्चर ‘हीरोइन’… करीना की डर्टी पिक्चर ‘हीरोइन’…(1)

-मीनाक्षी शर्मा||

विद्या बालन की डर्टी पिक्चर के बाद लगता है कि करीना को डर्टी गर्ल बनने का शौक चर्राया है. तभी तो करीना ‘हिरोइन’ फिल्म में एक ऐसी युवती का किरदार अदा कर रही है जो दो युवकों के साथ अन्तरंग सम्बन्ध बनाने से नहीं चूकती. अभिनेत्री करीना कपूर फिल्म ‘हीरोइन’ में मुख्य भूमिका में हैं और दो हीरो अर्जुन रामपाल और रणदीप हुडा उनके साथ हैं. दोनों के साथ करीना के  इंटिमेट सीन भी हैं. कहने का मतलब यह है कि फिल्म ‘हीरोइन’ में करीना ने वो सब किया है जो उन्होंने आज तक नही किया फिल्मों में. इससे पहले उन्होंने फिल्म ‘कुर्बान’ में ‘लव मेकिंग’ सीन किये थे, लेकिन यह सीन उन्होंने सैफ के साथ किये थे, जबकि इस फिल्म में करीना ने अर्जुन व रणदीप हुडा दो नायको के साथ ‘लव मेकिंग’ सीन किये हैं.

माही नाम हीरोइन की भूमिका अभिनीत कर रही हैं करीना फिल्म में. यही नहीं“हलकट जवानी” नाम का एक हॉट आयटम नंबर भी किया है उन्होंने और इसके अलावा सिगरेट के कश तो लगाए ही हैं गालियाँ भी दी हैं यानि करीना पूरी तरह विद्या बालन के पद चिन्हों पर चल रही हैं कहीं उनके पद चिन्हों पर चलकर राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल करने की तैयारी तो नही उनकी, क्योंकि विद्या ने भी ‘डर्टी पिक्चर’ में एक दक्षिण भारतीय डांसर जो की बाद में नायिका भी बनी की लाजवाब भूमिका अभिनीत की और सभी की वाह वाही ली. करीना भी बॉलीवुड की कई नायिकाओं के चरित्रों को अभिनीत कर रही हैं. विद्या के साथ फिल्म में तीन नायक थे जबकि करीना के साथ दो नायक हैं.

उस फिल्म को भी सेंसर ने बहुत सारे सीन एडिट करके ही रिलीज़ किया जबकि टी वी पर तो फिल्म को सेंसर ने दिखाने की अनुमति भी नही दी. फिल्म ‘हीरोइन’ के प्रोमो के साथ भी यही हुआ है. सुना है दो तरह के प्रोमो बनाए गए हैं. एक तो ठीक ठाक सा है जो सब देख सके जबकि दूसरा हॉट प्रोमो है, जिसमें बहुत कुछ ऐसा है जिसे केवल एडल्ट दर्शक ही देख सकते हैं.

कहीं फिल्म ‘हीरोइन’ करीना की डर्टी पिक्चर तो नही है वो “डर्टी पिक्चर’’ जो की सबको पसंद आयी. जो भी हो मधुर भंडारकर की फिल्म का सबको इंतज़ार रहता है क्योंकि उनकी फ़िल्में महिलाओं पर केंद्रित होती हैं.

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कोई भी एक-दूसरे के सवालों का जवाब नहीं दे पाया, न आजतक और न निर्मल बाबा कोई भी एक-दूसरे के सवालों का जवाब नहीं दे पाया, न आजतक और न निर्मल बाबा(18)

निर्मल बाबा के विज्ञापन की टीआरपी से नंबर वन बने न्यूज़ चैनल आजतक ने निर्मल बाबा पर लग रहे आरोपों का जवाब उनसे ही मांगा. अभिसार शर्मा ने निर्मल बाबा से खूब करारे सवाल किए और बाबा ने सबका जवाब देने की कोशिश की ‘किरपा’ के सहारे।

अभिसार ने बाबा से जब उनके पैसे का हिसाब मांगा तो उन्होंने साफ कहा कि वे कोई ट्रस्ट या एनजीओ बनाने के पक्ष में नहीं है। पैसा जनता ने दिया है, लेकिन वे टैक्स देते हैं। जब अभिसार ने प्रभात खबर में छपी खबर का हवाला देते हुए पूछा कि वे 109 करोड़ रुपए का क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बड़े ही बोल्ड लहजे में कहा, ‘मैं आपके आंकड़ों को दुरुस्त कर दूं.. मेरा सालाना टर्नओवर 238 करोड़ के आसपास का है.. 109 करोड़ का नहीं..”

बाबा ने साफ किया कि वे पैसा इसलिए इकट्ठा कर रहे हैं कि इसी पैसे से सभी चैनल उनका प्रवचन दिखाते हैं, उनका पेड प्रोग्राम दिखाते हैं। अब बारी अभिसार के जवाब देने की थी, जब बाबा ने साफ शब्दों में पूछा कि क्या कोई चैनल उनका प्रवचन मुफ्त में प्रसारित करने को तैयार है? सवाल का उत्तर नहीं मिल पाया।

दरअसल बाबा अब खुल कर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने अब तक विज्ञापन के दम पर सभी चैनलों का मुंह बंद रखा, लेकिन लगता है उनके मैनेजरों के बस में सभी चैनल नहीं रह पाए। फिर सबको साधने के झमेले से बेहतर उन्होंने समझा कि कम से कम उस चैनल पर तो बोला ही जाए जिसने अब तक हमला नहीं शुरु किया है।

बाबा ने अपने बयान से कम से कम एक बात तो साफ कर दिया। जिसने उन्हें पैदा किया वो कोई और नहीं इन्हीं चैनलों का लालच है जो अब उनके भाष्मासुर बन जाने पर अपना सर छुपाते भाग रहे हैं। कहना गलत न होगा कि पैसे के लालच में न्यूज चैनलों ने अपने नियम, सिद्धांत, कायदे और नैतिकता सबको बेच डाला है।

हालांकि अभिसार ने कई सवाल ऐसे ढंग से पूछे जिनसे लग रहा था कि वे वास्तव में बाबा को कठघरे में रखना चाहते हों, लेकिन जिसने भी इंटरव्यू देखा उसने यही कहा कि ये तो रजत शर्मा के आपकी अदालत से भी ज्यादा हो गया जहां न सिर्फ बाबा को बेदाग साबित कर दिया गया बल्कि उनका महिमामंडन भी हो गया। आसानी से समझा जा सकता है कि अब बाबा के प्रवचन का कॉन्ट्रैक्ट आजतक पर रिन्यू हो या नहीं, उनकी ‘किरपा’ तो बरस ही चुकी है।

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क्या स्टार ने विज्ञापन करार रिन्यू न होने पर छेड़ी निर्मल बाबा के खिलाफ़ मुहिम? क्या स्टार ने विज्ञापन करार रिन्यू न होने पर छेड़ी निर्मल बाबा के खिलाफ़ मुहिम?(10)

सौरभ नाम के एक पाठक ने मेल के जरिए दावा किया है कि स्टार न्यूज़ और निर्मल बाबा के संस्थान के बीच जो करार चल रहा था उसके टूट जाने पर ही चैनल ने बाबा का पोल-खोल अभियान शुरु किया है. करार  11 अप्रैल को रिन्यू करना था जो निर्मल बाबा ने नहीं किया. मेल के मुताबिक स्टार की मार्केटिंग टीम ने कॉन्ट्रैक्ट रिन्यू करने की काफी कोशिश की, लेकिन ऐसा कराने में सफल नहीं हुए.

दरअसल बाबा की मार्केटिंग टीम ने स्टार की टाइमिंग को लाखों रूपये मूल्य के लायक नहीं समझा क्योंकि स्टार न्यूज ने बाबा के लिए तड़के 5:40 का समय दिया था, वह भी भारी भरकम फीस पर. उधर बाबा के प्रबंधकों को लगा कि सुबह इतने सवेरे प्रवचन  देखने वाले कम लोग होते हैं. आखिरकार जब करार टूट गया तो थक-हार कर स्टार ने इसके खिलाफ बोलना अब शुरू किया है.

ख़ैर पूरा सच क्या है, यह तो राम ही जाने, लेकिन बात पूरी तरह गलत भी नहीं मालूम पड़ती. स्टार न्यूज़ की खबर में कुछ ऐसी बातें हैं जिससे शक और गहराता है. चैनल कल से लेकर आज सुबह तक निर्मल बाबा पर लगातार खबरें चला रहा था. खबर के दौरान यह भी कहा जाता है कि पिछले एक महीने से स्टार न्यूज़ पड़ताल कर रहा है. लेकिन इस एक महीने की पड़ताल में स्टार न्यूज़ ने ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया जो कुछ अलग हो. स्टार न्यूज़ जो दिखा रहा है वो सब वेब मीडिया के जाबांज पहले ही प्रचारित – प्रसारित कर चुके हैं. स्टार न्यूज़ बाबा के खिलाफ खबरें दिखा रहा है, यह काबिलेतारीफ है, लेकिन एक महीने की जांच-पड़ताल वाली बात हजम नहीं हो रही. यदि वाकई में एक महीने स्टार न्यूज़ ने छान-बीन की है तो सवाल उठता है कि स्टार न्यूज़ के रिपोर्टर छान – बीन कर रहे थे या फिर झक मार रहे थे. यह काम तो वेब मीडिया ने एक हफ्ते में कर दिया और निर्मल बाबा के पूरे इतिहास – भूगोल को खंगाल डाला.

बात साफ है कि निर्मल बाबा के खिलाफ स्टोरी चलाना और विज्ञापन को बंद करना स्टार न्यूज़ की विवशता है, इसमें सरोकार वाली कोई बात है, इसपर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता. बिहार में एक कहावत है – ‘जात भी गंवाया और भात भी नहीं खाया’. स्टार न्यूज़ की स्थिति कुछ वैसी ही हो गयी है.

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निर्मल बाबा के गुर्गों ने किया मीडिया दरबार पर साइबर हमला, 3 घंटे तक ट्रैफिक गड़बड़ाया निर्मल बाबा के गुर्गों ने किया मीडिया दरबार पर साइबर हमला, 3 घंटे तक ट्रैफिक गड़बड़ाया(10)

मीडिया दरबार शुरुआत से निर्मल बाबा के राज खोलने में जुटा है और इसीलिए उनके वकीलों ने हमें लीगल नोटिस भी भेजा। हमारे अभियान ने न सिर्फ़ देश भर के मीडिया चैनलों में एक नई बहस छेड़ दी बल्कि बाबा को पूरी तरह बेनकाब करके रख दिया है।

जब निर्मल बाबा की मीडिया दरबार पर चलाये गए पोल खोल अभियान ने निर्मल बाबा की जिंदगी में तूफ़ान ला दिया और इस ढोंगी बाबा ने कई तरीकों से मीडिया दरबार के इस अभियान को रोकने का हर संभव प्रयास किया मगर निर्मलजीत सिंह नरूला का दुर्भाग्य कि जिस किरपा को वह खुद दूसरों कि समस्याओं को सुलझाने के लिए टीवी के रिमोट के जरिए सारी दुनिया में बैठे उनके भ्रामक विज्ञापन के दर्शकों को बाँटने का दावा करता है, मीडिया दरबार के मामले में खुद उसपर ही किरपा बंद हो गयी।

आखिरकार वही हुआ जिसका अंदेशा था। इस फर्जी और ढोंगी बाबा ने तंग आकर मीडिया दरबार पर सायबर हमला करवा दिया जिसके चलते शुक्रवार शाम सात बजे से रात दस बज़ कर तीस मिनट तक मीडिया दरबार पर आने वाले विजिटर्स को वेब साईट खोलने में दिक्कत होती रही और विजिटर्स निराश हो कर हमें मेल करते रहे. ज्ञात हो कि मीडिया दरबार को होस्ट करने के लिए चार बड़े सर्वर्स को आपस में जोड़ा गया है, इसी कारण साईट तो डाउन नहीं हुई मगर कई जगह खुल भी नहीं पाई.

एक वक्त तो ऐसा आया कि मीडिया दरबार पर करीब पांच लाख आईपी से अटैक शुरू हो गया मगर हमारे सर्वर प्रबंधकों ने लगातार सर्वर अप रखने के लिए इन आई पी’ज को ब्लॉक करने में अपनी जी जान लगा दी और तीन घंटे के अथक प्रयासों से इस सायबर हमले को नाकाम कर दिया.

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‘‘आप तो खा-म-ख्वाह पीछे पड़ गए, ‘सिर्फ’ 70 लाख ही तो हर रोज़ कमाते हैं निर्मल बाबा” ‘‘आप तो खा-म-ख्वाह पीछे पड़ गए, ‘सिर्फ’ 70 लाख ही तो हर रोज़ कमाते हैं निर्मल बाबा”(21)

निर्मल बाबा की एक दिन की कमाई कितनी है? कुछ लाख, करोड़, दो करोड़ या चार करोड़?

मीडिया दरबार ने ये बहस शुरु की तो तरह तरह के जवाब मिले। भक्तों ने कहा कि तालकटोरा इंडोर स्टेडियम की क्षमता ही साढ़े तीन हज़ार की ही है तो उस हिसाब से महज़ 70 लाख ही हुए। किसी ने कहा, लखनऊ में 22-23 हज़ार लोग आए थे, वहां तो साढ़े चार करोड़ के आस-पास कमाई हो गई होगी। किसी ने लिखा, पटना में बाबा को साढ़े तीन करोड़ की कमाई हुई थी। तो किसी ने कहा, आपने तो चार करोड़ बहुत कम रकम बताई है। इतनी रकम तो गुप-चुप तौर पर दसवंद में ही आ जाती होगी। कुछ भक्त हमें गालियों भरा मेल भेज रहे हैं तो कुछ अधर्म के खिलाफ़ इस जंग में हमारे साथ खड़े होने का भरोसा दिला रहे हैं।

बाबा जी की एक भक्त (या सलाहकार) ने तो फोन करके इस पेज को हटाने के लिए भी कहा, लेकिन जब हमने उनसे पूछा कि असल कमाई वे ही बता दें, तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बाबा के वकील ने तो बाकायदा कानूनी नोटिस भेजा और हमारे उठाए मुद्दे को गलत, आधारहीन और उनके मुवक्किल का अपमान करने वाला बताया, लेकिन सच्चाई क्या है ये किसी ने नहीं बताया।

दरअसल तमाम टीवी चैनलों पर ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ के नाम से बाबा का विज्ञापन दिन-रात प्रसारित हो रहा है। इस विज्ञापन में बाबा जी कहते हैं कि टीवी पर उन्हें देखने से भी किरपा आ जाती है। जैसे जैसे ये विज्ञापन लोकप्रिय हो रहा है वैसे-वैसे उनके समागम की लोकप्रियता भी बढ़ रही है. निर्मल बाबा के किसी भी समागम में शामिल होने के लिए भक्तों को 2000 रुपये की फीस चुकानी पड़ती है (दो साल से उपर के बच्चे का रजिस्ट्रेशन जरूरी है). फीस महीनों पहले जमा हो जाती है।

बुकिंग का तरीका निर्मल बाबा की वेबसाइट nirmalbaba.com पर लिखा है। साथ ही दर्ज़ है समागम की जगह और तारीख. इसी सूची के आगे लिखा रहता है ओपेन या क्लोज्ड और स्टेटस यानी बुकिंग चालू है या बंद हो चुकी है. आने वाले महीनों के सभी समागम कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग फिलहाल बंद दिखाई दे रही है. वेबसाइट के पहले ही पन्ने पर इसकी फीस और इसे जमा कराने का तरीका भी दर्ज है. फीस जमा कराने के लिए वेबसाइट पर निर्मल दरबार के दो एकाउंट नंबर भी दिए गए हैं. ये एकाउंट नंबर टीवी के थर्ड आई ऑफ निर्मल दरबार कार्यक्रम के दौरान भी प्रचारित किए जाते हैं.

निर्मल दरबार सिर्फ समागम से कमाई नहीं करता. दसवंद नाम से एक और जरिया है पैसे वसूलने का। बाबा का कहना है कि उनकी कृपा से किसी समस्या के समाधान हो जाने पर भक्त को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दसवंद के तौर पर देना होता है लेकिन इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जाता. अलबत्ता कई विज्ञापनों में निर्मल बाबा ये कहते हुए जरूर सुनाई पड़ते हैं कि अगर अपनी कमाई या लाभ का दसवां हिस्सा हर महीने पूर्णिमा से पहले नहीं जमा करवाओगे तो नुकसान होना भी शुरु हो जाता है। ग़ौरतलब है कि सिख धर्म में दसवंद गुरुद्वारों में जमा करने की पुरानी परंपरा रही है, लेकिन वहां भक्तों को अपने
दान के खर्च पर नज़र रखने का भी अधिकार होता है।

पंजाब नैशनल बैंक इन बाबा जी का प्रिय बैंक है। इसका अकाउंट नंबर वेबसाइट पर और चैनलों पर भी प्रसारित होता है। इस अकाउंट में नगद, डिमांड ड्राफ्ट या फिर निर्मल दरबार के विशेष चालान से फीस जमा की जाती है। बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि देश भर की उनकी शाखाओं में बाबा जी दिन भर चर्चा का मुद्दा बने रहते हैं। बैंक की सभी शाखाएं इंटरनेट से जुड़ी हैं और वरिष्ठ अधिकारी इसका स्टेटस देख सकते हैं। हर रोज बाबा जी का लाखों-करोड़ों में बढ़ता बैलेंस पूरी शाखा में गॉसिप का केंद्र बना रहता है। खास बात ये है कि बाबा जी के अकाउंट से नियमित अंतराल पर ये पैसे ‘कहीं और’ ट्रांसफर भी होते रहते हैं।

आज ही झारखंड के एक प्रमुख अखबार ने बाबा जी के दो अकाउंटों का हवाला देते हुए राजफाश किया है कि उसमें कल यानि 12 अप्रैल 2012 को सोलह करोड़ रुपए जमा हुए थे। ग़ौरतलर्ब है कि निर्मल दरबार अपने विज्ञापन में कम से कम तीन अकाउंटों का प्रचार करता है।  बाबाजी से उनकी कमाई और खर्चे को लेकर उनसे कई सवाल पूछे गए, लेकिन कभी कोई जवाब नहीं मिला। उन्हें मेल भेजने पर ऑटो रिप्लाई के जरिए उनका अकाउंट नंबर ही आ जाता है तथा फोन पर कोई जवाब भी नहीं मिलता।

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लोगों की हर परेशानी दूर करने का दावा करने वाले निर्मल बाबा के बारे में ‘प्रभात खबर’ ने सनसनीखेज खुलासा किया है। ‘प्रभात खबर’ ने निर्मल बाबा के दो खातों की जानकारी दी है। अखबार का है कि जनवरी 2012 से अप्रैल 2012 के पहले हफ्ते तक खाते में 109 करोड़ रूपए जमा हुए हैं। यानी हर रोज एक करोड़ 11 लाख रूपए जमा हुए। खाते में पैसे पूरे देश से जमा किए गए।

सिर्फ 12 अप्रैल यानी कल 14 करोड़ 93 लाख 50 हजार 913 रुपए 89 पैसे जमा किए गए हैं। वो भी सुबह साढ़े 9 बजे से दोपहर एक बजे तक। शाम तक कुल 16 करोड़ जमा किए गए। यह रकम निर्मल दरबार नामक खाते में जमा किए गए। एक और बैंक में बाबा के नाम पर 25 करोड़ की एफडी है।

अखबार के मुताबिक निर्मल बाबा खुद दो तरह के खातों का संचालन करते हैं। एक बैंक खाता अपने नाम निर्मलजीत सिंह नरूला और दूसरा खाता निर्मल दरबार के नाम से हैं। निर्मल दरबार के खातों में भक्तों के रुपया जमा कराये जाने के बाद बाबा उसे अपने खाते में ट्रांसफर कर देते हैं।

खातों में सुषमा नरूला नॉमिनी हैं। सुषमा निर्मल बाबा की पत्नी हैं। बाबा ने अपने इसी बैंक में जमा रुपयों में से मार्च के पहले हफ्ते में 53 करोड़ रुपये एक निजी बैंक में ट्रांसफर कर दिये। मार्च में ही नीलम कपूर के नाम से 1 करोड़ 60 लाख रुपये ट्रांसफर किये गये।

निर्मल बाबा के एक प्रमुख बैंक के एकाउंट नंबर पर जमशेदपुर से एक साल में गये हैं 3 करोड़ 89 लाख। हर दिन 30 से 40 लोग उनके एकाउंट में रुपये डालने के लिए आते हैं। कोई एक हजार रुपये डालता है, तो कोई 10 हजार। तो कोई पचास हजार रुपये तक डाल चुका है। बैंक ड्राफ्ट के जरिये भी लोग अपना दसवंद सीधे निर्मल बाबा को भेज रहे हैं।

(स्टार न्यूज़)

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भक्तों पर कृपा करते-करते निर्मल बाबा बने करोड़पति

निर्मल बाबा आजकल काफी चर्चा में हैं. निर्मल बाबा देश के अलग-अलग शहरों में समागम करते हैं. इन समागमों में वे अपने भक्तों के दुख दूर करने का दावा करते हैं. इस समागम में बाबा लोगों को चौंकाने वाले उपाय बताते हैं लेकिन निर्मल बाबा की इन बातों पर उठ रहे हैं सवाल. हर कोई जानना चाहता है निर्मल बाबा उर्फ निर्मल सिंह नरूला का पूरा सच. स्टार न्यूज़ ने पड़ताल की और पता की निर्मल बाबा की हकीकत.

निर्मल बाबा की कमाई

तमाम टीवी चैनल पर दिखने वाला ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ कार्यक्रम जैसे जैसे लोकप्रिय हो रहा है वैसे-वैसे उनके समागम कार्यक्रम की शोहरत भी बढ़ रही है. निर्मल बाबा के किसी भी समागम कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भक्तों को दो हजार रुपये की फीस चुकानी पड़ती है और वो भी महीनों पहले. जिसे जरूरत हो और यकीन भी, वो कीमत चुकाए और निर्मल बाबा के दरबार में पहुंच जाए.

निर्मल बाबा की आधिकारिक वेबसाइट nirmalbaba.com खोलते ही आपको बाईं ओर नजर आ जाएगी समागम कार्यक्रमों की ये सूची, जिसमें दर्ज है समागम की जगह और तारीख. इसी सूची के आगे लिखा रहता है ओपेन या क्लोज्ड और स्टेटस यानी बुकिंग चालू है या बंद हो चुकी है. आने वाले महीनों के सभी समागम कार्यक्रमों की एडवांस बुकिंग फिलहाल बंद दिखाई दे रही है. वेबसाइट के पहले ही पन्ने पर इसकी फीस और इसे जमा कराने का तरीका भी दर्ज है.

समागम कार्यक्रम के लिए 2000 रुपये प्रतिव्यक्ति जमा कराने होते हैं. समागम में आने वाले दो साल की उम्र से बड़े बच्चों से भी इतनी ही रकम ली जाती है. ये फीस निर्मल दरबार के नाम पर ली जाती है. फीस जमा कराने के लिए वेबसाइट पर निर्मल दरबार के दो एकाउंट नंबर भी दिए गए हैं. ये एकाउंट नंबर टीवी के थर्ड आई ऑफ निर्मल दरबार कार्यक्रम के दौरान भी प्रचारित किए जाते हैं.

इन एकाउंट्स में नगद, डिमांड ड्राफ्ट या फिर निर्मल दरबार के विशेष चालान से फीस जमा की जा सकती है, लेकिन समागम की फीस के लिए चेक नहीं लिए जाते हैं. अब ऐसे समागम कार्यक्रम से निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार को होने वाली कमाई का अनुमान भी लगा लीजिए. निर्मल बाबा के एक समागम में करीब पांच हजार भक्त शामिल होते हैं. 2000 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से एक समागम से कमाई हुई करीब एक करोड़ रुपए. हर महीने औसतन सात से दस समागम कार्यक्रम होते हैं. वेबसाइट की सूची पर नजर डालें तो अप्रैल महीने में ही सात समागम कार्यक्रम हो रहे हैं.

इस हिसाब से सात समागमों की कमाई हुई सात करोड़ रुपये. अनुमान है कि साल भर में 84 करोड़ रुपये की कमाई हो रही है.हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है.

दसवंद कार्यक्रम से कमाई

आप अगर ये अनुमान देखकर चौंक गए हों तो आपको बता दें कि निर्मल दरबार सिर्फ समागम ही आयोजित नहीं करता. निर्मल दरबार दसवंद नाम से एक और कार्यक्रम भी आयोजित करता है. निर्मल बाबा की कृपा से किसी समस्या के समाधान हो जाने पर भक्त को अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दसवंद के तौर पर देना होता है लेकिन इसके लिए कोई दबाव नहीं डाला जाता. निर्मल बाबा के लिए आस्था रखनेवाले लोग अपनी कमाई या लाभ का दसवां हिस्सा हर महीने पूर्णिमा से पहले जमा करवा देते हैं.

इसके अलावा अगर आप निर्मल दरबार की वेबसाइट पर मौजूद निर्मल दरबार का बैंक चालान देखेंगे तो पाएंगे कि भक्तों को निर्मल बाबा की कृपा पाने के लिए हर मौके पर जेब ढीली करनी पड़ती है.

निर्मल दरबार का खर्च

समागम कार्यक्रम किसी बड़े हॉल या इंडोर स्टेडियम में आयोजित किए जाते हैं. इनका किराया और कार्यक्रम के पूरे आयोजन पर पैसे खर्च होते हैं. इसके अलावा निर्मल दरबार परिवार ‘थर्ड आई ऑफ निर्मल बाबा’ के नाम से विज्ञापन बनवाता है जिसमें समागम कार्यक्रमों की झलकियां होती हैं.

विज्ञापनों के प्रसारण के लिए उसे पैसे खर्च करने पड़ते हैं. इसके अलावा निर्मल बाबा की संस्था निर्मल दरबार के दफ्तर और वेबसाइट जैसी गतिविधियों को चलाने का खर्च भी है. लेकिन किस मद में कितना खर्च हो रहा है और भक्तों से हुई बाकी कमाई का लेखा-जोखा क्या है इसका कोई खुलासा निर्मल बाबा की वेबसाइट पर नहीं है, हांलाकि निर्मल बाबा के करीबी रिश्तेदार और चातरा से निर्दलीय सांसद इंदर सिंह नामधारी के मुताबिक निर्मल बाबा अपनी कमाई पर टैक्स चुका रहे हैं.

स्टार न्यूज ने निर्मल बाबा की संस्था से साल भर में होने वाले समागम कार्यक्रमों, उनमें आने वाले भक्तों के साथ-साथ सालाना कमाई के बारे में जानकारी भी मांगी लेकिन फिलहाल निर्मल बाबा या निर्मल दरबार के किसी प्रतिनिधि ने स्टार न्यूज से बात नहीं की है.

(स्टार न्यूज़ की वेबसाइट से साभार)

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आखिरकार मीडिया दरबार की मुहिम रंग ले ही आई। न्यूज एक्सप्रेस के बाद टॉप फाइव चैनलों ने भी बाबा का भंडाफोड़ शुरु कर दिया है। शाज़ी जमां की अगुवाई में स्टार न्यूज ने एक जोरदार मुहिम छेड़ दी है। खास बात ये है कि स्टार न्यूज़ पर बाबा का विज्ञापन रूपी कार्यक्रम भी चल रहा है। ऐसे में अपने क्लाइंट के खिलाफ़ मुहिम छेड़ना निस्संदेह एक साहसिक फैसला है।

दरअसल शाजी जमां टीवी मीडिया माध्यम के बेहतरीन संपादकों में से हैं जिन्होंने कभी दबाव में काम करना उचित नहीं समझा। स्टार न्यूज ने निर्मल बाबा के विज्ञापन रूपी कार्यक्रम को 12 मई से बंद करने का भी ऐलान किया है। शायद विज्ञापन एजेंसी का करार होगा।

ज़ी न्यूज़ ने भी अपने नेटवर्क पर चल रहे विज्ञापनों की परवाह न करते हुए बाबा के खिलाफ़ लखनऊ में दायर हुए पुलिसिया मामले की ख़बर काफी देर तक चलाई। ज़ी न्यूज़ ने निर्मल बाबा के बहनोई इंदर सिंह नामधारी का इंटरव्यू भी लिया है जिसे प्रसारित करने का फैसला किया है।

आज के बाजार प्रधान युग में विज्ञापन और फ़ायदे के लिए जूझ रहे खबरिया चैनलों का यह बदला हुआ रवैया स्वागत योग्य है। कोई बड़ा न्यूज चैनल अगर पाखंड व अंधविश्वास के फलते फूलते कारोबार को रोकने के लिए कोई पहल करता है, भले ही देर से सही, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उम्मीद है दूसरे चैनल इससे सबक लेते हुए अपने चैनलों पर भी बाबावाद खत्म करने की दिशा में कोई कदम जरूर उठाएंगे।

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