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इंटरपोल की मदद से पकड़ा गया अरबों की ठगी करने वाला गोल्ड सुख का मैनेजिंग डायरेक्टर इंटरपोल की मदद से पकड़ा गया अरबों की ठगी करने वाला गोल्ड सुख का मैनेजिंग डायरेक्टर(0)

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हास्यास्पद हसीन सपना पूरा करने के “केजरीवाली” हथकंडे हास्यास्पद हसीन सपना पूरा करने के “केजरीवाली” हथकंडे(21)

-सतीश चन्द्र मिश्र ||

अन्ना टीम, खासकर उसका सबसे शातिर खिलाडी अरविन्द केजरीवाल पिछले कुछ महीनों से टी.वी.कैमरों के समक्ष जब-तब अपने तथाकथित जनलोकपाली रिफ्रेंडम की धौंस देता रहता है. हर बात पर सर्वे करा लेने की चुनौतियाँ धमकियों की तरह देता रहता है. लेकिन फेसबुक के मित्रों ने उसको लेकर एक ऐसा सर्वे कर डाला जो अन्ना टीम के इस सबसे शातिर और मंझे खिलाडी के प्रति देश की सोच का खुलासा करता है..

दरअसल इस अरविन्द केजरीवाल ने अपने कुछ चम्मच-कटोरियों के माध्यम से स्वयम को इस देश के प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करवाया था क्योंकि अगस्त महीने में दिल्ली के रामलीला मैदान में अन्ना टीम द्वारा लगाये-सजाये गए जनलोकपाली मजमे की तिकड़मी सफलता के बाद बुरी तरह बौराए अरविन्द केजरीवाल ने संभवतः इस देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक पद पर कब्ज़ा करने का दिवास्वप्न देखना पालना प्रारम्भ कर दिया था. अपने इस दिवास्वप्न के सम्बन्ध में देश की राय/थाह लेने के लिए अपने कुछ चमचों के द्वारा इसने फेसबुक पर “kejriwal for PM “https://www.facebook.com/ArvindK.PM नाम से एक पेज बनवा दिया था.

इस टीम की करतूतों से अत्यंत कुपित किसी व्यक्ति ने इसके जवाब में फेसबुक पर ही एक पेज Kejriwal For Peon Posthttps://www.facebook.com/groups/281688305200131/  बना डाला था, और गज़ब देखिये कि P.M. के पद के लिए टीम अन्ना के इस शातिर खिलाड़ी अरविन्द केजरीवाल को 1308 लोगों ने उपयुक्त माना तो इससे लगभग 110% अधिक लोगों ने अर्थात 2708 लोगों ने अन्ना टीम के इस शातिर खिलाडी को PEON के पद के ही उपयुक्त माना. अतः अन्ना टीम के इस शातिर खिलाडी की छवि के विषय में देश क्या सोचता है इसका लघु उदाहरण है उपरोक्त दोनों सर्वे…!!!!!!!!!!!!

देश को जनलोकपाल बिल की लोकलुभावनी किन्तु काल्पनिक लोरी सुनाने वाले गायक के रूप में अपनी लोकप्रियता को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनने की सीढ़ी बनाने की इसकी कोशिश को देश ने करारा जवाब दिया है.

दरअसल सिर्फ यह पेज ही नहीं, बल्कि खुद को पूरी तरह अराजनीतिक बताने-कहने वाले “अन्ना टीम के ” के इस सबसे शातिर सियासी खिलाड़ी ने शेखचिल्लियों सरीखी अपनी इस मानसिक उड़ान की सफलता के लिए हर वो धूर्त हथकंडा जमकर आजमाया जो इस देश की दूषित हो चुकी राजनीति के कीचड़ में डूबा हर शातिर नेता आजमाता है.

टीम अन्ना का यह शातिर खिलाड़ी भ्रष्टाचार की खिलाफत का झंडा उठाये उठाये धर्मनिरपेक्षता बनाम साम्प्रदायिकता का सर्वाधिक निकृष्ट एवं निम्न स्तरीय सियासी पहाड़ा जोर-जोर से उसी तरह पढता दिखाई दिया, जिस तरह इस देश के कुछ महाभ्रष्ट राजनेता सत्ता की लूट में हिस्सेदारी के लिए खुद द्वारा किये जाने वाले अजब गज़ब समझौतों  को सैद्धांतिक सिद्ध करने के लिए धर्मनिरपेक्षता बनाम साम्प्रदायिकता का पहाड़ा देश को पढ़ाने-सुनाने लगते हैं. इसीलिए टीम अन्ना के इस सबसे शातिर सियासी खिलाड़ी ने मौलानाओं को खुश करने के लिए सबसे पहले अपने मजमे के मंच से भारतमाता के चित्र को हटाया फिर सिर्फ अन्ना हजारे को छोड़ कर बाक़ी खुद समेत बाकी सभी खिलाडियों  ने “वन्देमातरम्” तथा “भारतमाता की जय” सरीखे “मन्त्रघोषों” को अलविदा कहा. इसके बाद बाबा रामदेव और साध्वी ऋतंभरा से लेकर संघ परिवार और नरेन्द्र मोदी एवं हर उस संस्था और व्यक्ति तक को जमकर गरियाया कोसा जो तन मन और कर्म से हिंदुत्व की प्रतिनिधि हो. फिर ज़ामा मस्ज़िद के घोर कट्टरपंथी मौलाना के चरण चुम्बन के लिए किरन बेदी के साथ उसके घर जाकर रोया गया. इसके अतिरिक्त  “अन्ना टीम” के इस शातिर खिलाड़ी ने कट्टर धर्मान्धता के एक से एक धुरंधर खिलाड़ियों सरीखे लखनऊ के नामी-गिरामी मौलानाओं से मिलने के लिए विशेष रूप से लखनऊ आकर उनकी मान-मनौवल जमकर की.  इसका जी जब इस से भी नहीं भरा तो मुंबई में अपना जनलोकपाली मजमा लगाने से पहले ये बाकायदा दुपल्ली टोपी लगाकर मुंबई के कट्टरपंथी मौलानाओं के घर खुद चलकर गया था और उनकी प्रार्थना-अर्चना के बाद उनसे पक्का वायदा भी कर आया था की अपने जनलोकपाली सर्कस का शो खत्म होते ही ये खुद और इसका गैंग देश में साम्प्रदायिकता के खिलाफ धुआंधार मोर्चा खोलेगा.

अर्थात संघ भाजपा और नरेन्द्र मोदी के खिलाफ. यह टीम अपनी पिछली करतूतों से यह स्पष्ट कर ही चकी है.
लेकिन हाय री किस्मत केजरीवाल की……….. मौलाना फिर भी नहीं रीझे…
और बाकी देश ….?
इसका जवाब मुंबई MMRDA और दिल्ली के रामलीला मैदान में 27 और 28 दिसम्बर को लोटते दिखे कुत्तों ने दे ही दिया है.

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न्यूज़ चैनल खोलने का दावा किया था, चिटफंडिए भाग गए बैंकाक न्यूज़ चैनल खोलने का दावा किया था, चिटफंडिए भाग गए बैंकाक(0)

मल्टीलेवल मार्केटिंग के माध्यम से रुपए निवेश कराकर तीन साल में धन दस गुना देने का दावा करने वाली गोल्ड सुख कंपनी के ऑफिस पर मंगलवार को ताला नजर आया। कंपनी की वेबसाइट सस्पेंड है और डायरेक्टरों के फोन बंद।

नाराज निवेशकों ने सिविल लाइंस फाटक के समीप स्थित ऑफिस पर हंगामा खड़ा कर दिया। सिक्योरिटी गार्ड ने बंदूक तानी तो निवेशकों ने उसकी भी जमकर पिटाई कर दी। बाद में, सूचना पर पहुंची विधायकपुरी पुलिस ने गुस्साए लोगों को वहां से हटाया।

दरअसल कंपनी के निदेशक करीब एक महीने पहले ही लापता हो चुके थे। गोल्ड सुख के चार संचालक नरेन्द्र सिंह, मानवेन्द्र सिंह, महेन्द्र सिंह व प्रमोद शर्मा थे। मुख्य प्रबंधक कौशलेन्द्र सिंह था। अभियुक्तों ने 12 दिसम्बर 2008 को कम्पनी का रजिस्टे्रशन करवाने के बाद चार स्कीमों के जरिए लोगों को फंसाना शुरू किया था।

उसके मुताबिक ज्यादातर कंपनियां एजेंटों के माध्यम से चल रही हैं और सीधे तौर पर आरोपी बनने से बच जाती हैं। इसके बाद केंद्र के कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और रिजर्व बैंक ने एमएलएम फर्मो को रेगुलेट करने के लिए नए नियम बनाने के लिए कमर कसी है।

इस कंपनी के एक इन्वेस्टर के मुताबिक कंपनी के कई शहरों में तकरीबन 2 लाख सदस्य हैं जिन्होंने कम से कम 6000 रुपए तो इन्वेस्ट किए ही होंगे। यानी यही रकम तकरीबन 120 करोड़ बैठती है जबकि कई लोगों ने तो लाखों रुपए लगा रखे हैं।

एक निवेशक ने बताया कि उन्होंने किसी परिचित की बातों में आकर कंपनी में दो माह पहले 22 हजार 9 सौ रुपए जमा कराए थे। तब उन्हें तीन वर्ष बाद कंपनी की ग्रोथ बढ़ने पर 26 लाख रुपए देने का दावा किया था, लेकिन उन्हें इन दो माह में ग्रोथ का एक रुपया भी नहीं मिला। दूसरे निवेशक ने बताया कि उन्होंने दोस्त के कहने पर करीब एक वर्ष पहले कंपनी में 22 हजार 9 सौ रुपए जमा कराए थे। उन्हें भी तीन वर्ष बाद 26 लाख रु. देने का वादा किया था।

कई देशों में तो मल्टीलेवल मार्केटिंग या पिरामिड मार्केटिंग प्रतिबंधित है, लेकिन भारत के हर शहर में हजारों की तादाद में ये कंपनियां मौजूद हैं। देश में इस प्रकार की ठगी के नियंत्रण के लिए कोई ठोस कानून नहीं है हालांकि केंद्र के सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने देश में एमएलएम कंपनियों का एक मूल्यांकन कॉर्पोरेट अफेयर्स मंत्रालय को दिया है।

अभी कुछ महीनों पहले पकड़ में आए स्पीक एशिया कंपनी के फ्रॉड के पर्दाफाश के बावजूद सरकार और निवेशकों ने कोई सबक नहीं लिया। यह तकरीबन 2400 करोड़ की ठगी थी, जिसने निवेशकों को कुल 30 हजार करोड़ के फायदे के सपने दिखाए थे। निवेशकों का कहना था कि कंपनी संचालक का रसूखदारों से सम्पर्क था और कंपनी कार्यक्रमों में वह आते भी थे। रसूखदारों की कार्यालय में फोटो भी लगी हुई है। इन्हीं रसूखदारों को फोटो व कार्यक्रमों में आता देख निवेशकों ने कंपनी पर विश्वास किया। जयपुर के सांसद महेश जोशी, पुलिस कमिश्नर बी.एल. सोनी, महापौर ज्योति खण्डेलवाल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीडी कल्ला, कम्पनी की तरफ से आयोजित रक्तदान शिविर में मुख्य अतिथि बनकर आए थे। विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास ने कम्पनी के शोरूम का उद्घाटन किया था।

निवेशकों के मुताबिक कम्पनी के राजस्थान के अलावा जम्मू-कश्मीर, यूपी, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, असम, गुजरात, छत्तीसगढ़ में कार्यालय खोले। इसके अलावा कम्पनी के कोटा, बारां, अजमेर, सीकर, हनुमानगढ़ आदि जिलों में भी ब्रांच खोल रखी थी। कंपनी ने एक अखबार भी चला रखा था और एक न्यूज़ चैनल खोलने की घोषणा भी की थी।
पिछले साल दो निवेशकों ने जयपुर में कंपनी के खिलाफ एफआईआऱ भी लिखवाई थी, लेकिन पुलिस ने छानबीन कर कोई अपराध न होने की रिपोर्ट लगा दी। नवंबर 2010 में इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की इन्वेस्टिगेशन विंग ने गोल्ड सुख के जयपुर में 5 ठिकानों पर छापा मारा था जिसमें कंपनी ने 23.35 करोड़ की अघोषित आय विभाग को सरेंडर की थी। इसके अलावा अजमेर, आगरा, अहमदाबाद, चंडीगढ़ और सीकर में भी कई जगहों पर सर्च ऑपरेशन किए गए थे।

पुलिस में रिपोर्ट नहीं की पीड़ित व आरोपी नेविधायकपुरी थानाप्रभारी चंद्र पुरोहित का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ठगी हुई है, तो वे शिकायत करने पर मुकदमा दर्ज कर लेंगे। लेकिन, अभी तक किसी पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत नहीं दी है। यहां तक मारपीट के शिकार सुरक्षा गार्ड की ओर से शिकायत दर्ज नहीं हुई है। मामले का पता चलने पर पुलिस ने मौके पर लोगों को शांत कराकर मुकदमा दर्ज कराने को कहा था, लेकिन कोई सामने नहीं आया।

सितंबर 2009 में रिजर्व बैंक ने एक सर्कुलर जारी कर बैंकों को चेताया था कि अगर किसी प्रकार की मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनियां जो बहुत बड़े रिटर्न का दावा कर रही हैं, उनके खातों का तुरंत रिव्यू किया जाए। वक्त-वक्त पर बैंकों को ऐसा करते रहना चाहिए। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने बैंकों को अपनी आंतरिक पॉलिसी को सख्त करने व फ्रॉड रिस्क मैनेजमेंट और फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन फंक्शन को मजबूत करने की सलाह दी थी। लेकिन बीते दो सालों में प्रदेश और अन्य राज्यों में ऐसे मामले बढ़ते जा रहे हैं।

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पत्रकार देवब्रत वशिष्ठ को भिवानी गौरव सम्मान, दिल्ली में हुआ रंगारंग आयोजन पत्रकार देवब्रत वशिष्ठ को भिवानी गौरव सम्मान, दिल्ली में हुआ रंगारंग आयोजन(0)

भिवानी. चेतना अखबार के मालिक और वरिष्ठ पत्रकार देवब्रत वशिष्ठ को पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भिवानी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया है। देवब्रत वशिष्ठ को यह सम्मान हरियाणा के सहकारिता मंत्री सतपाल सांगवान ने पीतमपुरा स्थित दिल्ली हाट में आयोजित एक रंगारंग कार्यक्रम में दिया। इस सम्मान समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के मुख्य संसदीय सचिव अनिल भारद्वाज, शालीमार बाग से विधायक रविन्द्र बंसल, वजीरपुर से विधायक हरि शंकर गुप्ता सहित दिल्ली और भिवानी जिले की कई जानी मानी हस्तियों ने भी शिरकत की।

 

 

 

 

इस मौके पर सहकारिता मंत्री सतपाल सांगवान ने कहा कि दिल्ली के विकास में हरियाणा के साथ भिवानी का महत्वपूर्ण योगदान है। सांगवान और अनिल भारद्वाज ने सम्मान समारोह का आयोजन करने वाली संस्था भिवानी परिवार मैत्री संघ को अपना पूरा सहयोग देने का वादा किया। समारोह की अध्यक्षता  भिवानी परिवार मैत्री संघ के संरक्षक पुष्पेंद्र गोयल ने की। पुष्पेंद्र गोयल ने बताया कि भिवानी गौरव सम्मान हर साल दिल्ली की स्वयं सेवी संस्था भिवानी परिवार मैत्री संघ की तरफ से दिए जाते हैं। उनकी संस्था समाज में उल्लेखनीय काम करने वाले लोगों को यह सम्मान देती है जिन्होंने भिवानी जिले का नाम रौशन किया हो।

 

 

 

ये पुरस्कार भी भिवानी जिले के प्रतिष्ठित महानुभावों के नाम पर शुरू किये गए हैं। स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकी राम शर्मा के नाम पर देश सेवा, चौधरी बंसी लाल लोक प्रशासन, मास्टर बनारसी दस गुप्ता पत्रकारिता, राम कृषण गुप्ता शिक्षा, लाला फ़कीर चंद समाज सेवा जैसे कुल आठ सम्मान दिए जाते हैं। सम्मान पाने वाले लोगों में भिवानी जिले के मूल निवासी लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) जेबीएस यादव, नीमडी गाँव के सरपंच शेरसिंह आर्य, राजेन्द्र स्वरूप राजन ,नरेन्द्र्जीत सिंह रावल,  देवब्रत वशिस्ठ, हरिचरण पीटीआई रेड क्रॉस के सचिव श्याम सुन्दर और पं शिव नारायण शास्त्री शामिल हैं। इस मौके पर नारायणी देवी महावीर प्रसाद भग्ग्नका की स्मृति में हरियाणवी कलाकारों द्वारा रंगा रंग कार्यक्रम भी पेश किया गया।

प्रेस विज्ञप्ति

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जब अपने मंच पर चार-पांच ईमानदार भी नहीं जमा कर पाए अन्ना, तो भ्रष्टाचार से क्या खाक लड़ेंगे? जब अपने मंच पर चार-पांच ईमानदार भी नहीं जमा कर पाए अन्ना, तो भ्रष्टाचार से क्या खाक लड़ेंगे?(37)

काले धन पर बाबा रामदेव की सिफारिशें नहीं मानेगी सरकार, अन्ना ने कहा कोई बात नहीं से आगे..

-सतीश चंद्र मिश्रा।।

मीडिया में जिस अग्निवेश की बदनीयती और बेईमानी के बेनकाब होने के बाद उसको अन्ना हजारे ने अपने से अलग किया है उस भगवाधारी के पाखंड की करतूतों का काला चिटठा दशकों पुराना है. लेकिन इसके बावजूद वह अन्ना हजारे की टीम का अत्यंत महत्वपूर्ण सदस्य बना हुआ रहा. प्रशांत भूषण-शांति भूषण के ” सदाचार ” के किस्से दिल्ली पुलिस को CFSL से मिली CD की जांच रिपोर्ट तथा इलाहाबाद के राजस्व विभाग एवं नोएडा भूमि आबंटन के सरकारी दस्तावेजों में केवल दर्ज ही नहीं हैं बल्कि सारे देश के सामने उजागर भी हो चुके हैं. अपनी नौकरी से इस्तीफे तथा खुद पर बकाया सरकारी देनदारी के विषय में लगातर 4 दिनों तक झूठे दावे करने के पश्चात स्वयम द्वारा 4 वर्ष पूर्व विभाग को लिखी गयी एक चिट्ठी में अपने दोषी होने की बात स्वीकारने की सच्चाई एक समाचार पत्र के माध्यम से उजागर होने के पश्चात अरविन्द केजरीवाल को वह सच भी स्वीकरना पडा जो खुद केजरीवाल द्वारा लगातार बोले गए झूठ को तार-तार कर बेनकाब कर रहा था.

सबसे गंभीर प्रश्न तो यह है कि जो अन्ना हजारे महीनों तक साथ घूमने के पश्चात् अपने इर्द-गिर्द पूरी तरह पाक-साफ़ पांच ईमानदार लोगों को एकत्र नहीं कर सके वो अन्ना हजारे किस जादू की कौन सी छड़ी से पूरे देश में हजारों ईमानदार “नेताओं” की फौज खडी कर देंगे…? चुनावी मैदान में उतरे व्यक्तियों में से किसी को भी बेईमान और किसी को भी ईमानदार घोषित करने का अधिकार केवल अन्ना हजारे के पास क्यों और किस अधिकार के तहत होगा…?  चुनावी मैदान में उतरे व्यक्तियों में से किसी को भी बेईमान और किसी को भी ईमानदार घोषित करने का उनका आधार,उनका मापदंड क्या होगा…?  उनके ऐसे निर्णयों का स्त्रोत क्या और कितना विश्वसनीय होगा…? ऐसा करते समय क्या अन्ना हजारे और टीम अन्ना के सदस्य  स्वयं पर उठी उँगलियों और लगने वाले आरोपों का भी तार्किक तथ्यात्मक स्पष्टीकरण सत्यनिष्ठा के साथ देने की ईमानदारी दिखायेंगे या फिर इन दिनों की भांति केवल यह कहकर पल्ला झाडेंगे कि हमको परेशान करने के लिए ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं इसलिए हम इन सवालों का जवाब नहीं देंगे.

अन्ना हजारे ने 13 सितम्बर को ही टाइम्स नाऊ न्यूज़ चैनल के साथ हुई अपनी बातचीत के दौरान बाबा रामदेव से कोई सम्पर्क सम्बन्ध नहीं रखने, उनका कोई सहयोग-समर्थन नहीं करने का ऐलान भी किया, इसी के साथ लाल कृष्ण अडवाणी द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी रथयात्रा निकाले जाने की घोषणा को मात्र एक शिगूफा कहकर अन्ना हजारे ने उसका जबर्दस्त विरोध भी किया. आखिर कौन है ये अन्ना हजारे जो कभी ग्राम प्रधान का चुनाव लड़कर जनता की अदालत का सीधा सामना करने का साहस तो नहीं जुटा सका लेकिन देश में कोई भी व्यक्ति या कोई भी दल या कोई भी संगठन किसी मुद्दे पर क्या करे.? क्या ना करे.? इसका फैसला एक तानाशाह की भांति सुनाने की जल्लादी जिद्द निरंकुश होकर कर रहा है.

लाल कृष्ण अडवाणी या किसी भी अन्य राजनेता या राजनीतिक दल द्वारा केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार के विरोध में किये जाने वाले धरना, प्रदर्शनों, आन्दोलनों एवं आयोजनों का विरोध कर उनके खिलाफ ज़हर उगल कर अन्ना हजारे और टीम अन्ना ने केंद्र सरकार के रक्षा कवच की भूमिका में उतरने का सशक्त सन्देश-संकेत दिया है. अन्ना गुट की यह करतूत केवल और केवल इस देश की राजनीतिक प्रक्रिया-परम्परा को बंधक बनाकर उसकी मूल आत्मा को रौंदने-कुचलने का कुटिल षड्यंत्र मात्र तो है ही साथ ही साथ वर्तमान सत्ताधारियों के भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने वाली किसी भी आवाज़ का गला घोंटने का अत्यंत घृणित षड्यंत्र भी है.

स्वयम अन्ना के नेतृत्व वाली टीम अन्ना द्वारा लोकपाल बिल की स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य सांसदों के घर के बाहर धरना देकर उनपर निर्णायक दबाव बनाने की घोषणा भी इसी षड्यंत्र के अंतर्गत रची गयी कुटिल रणनीति का ही एक अंग है. क्योंकि इसी देश में 1.76 लाख करोड़ की 2G घोटाला लूट में प्रधानमंत्री और तत्कालीन वित्तमंत्री चिदम्बरम की संलिप्तता साक्ष्यों के साथ प्रमाणित करने वाली पीएसी की रिपोर्ट को नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर कूड़े की टोकरी में फिंकवा चुके उसी पीएसी के सदस्य रहे कांग्रेस तथा उसके सहयोगी सत्तारूढ़ दलों के 11 संप्रग सांसदों के खिलाफ अन्ना हजारे और टीम अन्ना ने इसी तरह दबाव बनाना तो दूर उनके खिलाफ आजतक एक शब्द भी क्यों नहीं बोला…?

क्या 2G घोटाले के द्वारा की गयी 1.76 लाख करोड़ की सनसनीखेज सरकारी लूट अन्ना हजारे की “भ्रष्टाचार की परिभाषा” में नहीं आती है…? यदि ऐसा है तो अन्ना हजारे इस देश को बताएं कि 1.76 लाख करोड़ की सरकारी राशि की सनसनीखेज लूट को वो भ्रष्टाचार क्यों नहीं मानते हैं.?  और यदि मानते हैं तो उस भ्रष्टाचार का भांडा फोड़ने वाली पीएसी की रिपोर्ट की धजियाँ उड़ाने वाले सांसदों पर दबाव बनाने, उनको धिक्कारने से मुंह क्यों चुरा रहे हैं.? क्या अन्ना हजारे और टीम अन्ना के स्वघोषित दिग्गज ऐसे किसी धरने/मुहिम और उसके जिक्र से भी इसलिए मुंह चुरा रहे हैं , क्योंकि ऐसे किसी धरने/मुहिम का निशाना केवल सत्तारूढ़ कांग्रेस और उसके सहयोगी दल ही बनेंगे तथा मनमोहन सिंह और चिदम्बरम को “तिहाड़” में ए राजा, कनिमोझी, के पड़ोस में भी रहना पड़ सकता है.? जबकि मनमोहन को तो स्वयं अन्ना हजारे आज भी सीधा-सच्चा-ईमानदार मानते हैं…!

ज्ञात रहे कि 1.76 लाख करोड़ के 2G घोटाले, 70 हज़ार करोड़ के CWG घोटाले या KG बेसिन घोटाले में रिलायंस के साथ मिलकर की जाने वाली लगभग 30 हज़ार करोड़ की सनसनीखेज लूट तथा बाबा रामदेव द्वारा उठाये जा रहे 400 लाख करोड़ के कालेधन की वापसी सरीखे सर्वाधिक सवेंदनशील मुद्दों पर अन्ना हजारे और टीम अन्ना के अन्य सेनापति गांधी के तीन बंदरों की भांति अपने आँख कान मुंह बंद किये हैं, तथा अपनी चुप्पी और उपेक्षा कर इन मुद्दों पर देश का ध्यान भी केन्द्रित ना होने देने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं. अपनी इस कुटिल रणनीति के पक्ष में अन्ना हजारे और उनकी टीम यह कह रही है कि अभी हमारा ध्यान केवल जनलोकपाल पर केन्द्रित है. अन्ना हजारे और उनकी टीम के दिग्गजों का यह कुतर्क क्या पुलिस के उस भ्रष्ट और बेशर्म सिपाही की याद नहीं दिलाता जो अपनी आँखों के सामने हो रही लूट या क़त्ल की घटना को अनदेखा कर उपेक्षा के साथ यह कहते हुए आगे बढ़ जाता है कि ये घटना मेरे थाना क्षेत्र में नहीं घटित हुई है.

अतः पाठक स्वयं निर्णय करें कि स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य सांसदों के घर के बाहर धरना देकर सस्ती लोकप्रियता वाहवाही लूटने को आतुर खुद अन्ना हजारे तथा उनकी फौज के सेनापति भ्रष्टाचार के हमाम में देश के सामने पूरी तरह नंगे हो चुके पीएसी के उन 11 सदस्य सांसदों की करतूत के जिक्र से भी क्यों मुंह चुरा रहे है…?
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काले धन पर बाबा रामदेव की सिफारिशें नहीं मानेगी सरकार,

अन्ना ने कहा कोई बात नहीं

(लेखक सतीश चंद्र मिश्र लखनऊ के जाने माने पत्रकार हैं।)

प्रशांत भूषण उवाच: कश्मीर को भारत से आज़ाद कर देना चाहिए…देखें विडियो 

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-सतीश चंद्र मिश्रा।।

केंद्र सरकार ने रामदेव को मनाने के लिए केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष की अगुआई में जो उच्चस्तरीय समिति गठित की थी उसने  23 सितम्बर को हुई अपनी बैठक में स्पष्ट कर दिया कि समिति योग गुरु के एक भी प्रमुख सुझाव पर अमल करने नहीं जा रही है। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता तथा समिति काले धन की समस्या से निपटने के लिए कोई नया कानून बनाने के भी खिलाफ है. आश्चर्यजनक रूप से अन्ना हजारे और टीम अन्ना ने इस समाचार पर गांधी जी के तीन बंदरों की तरह का रुख अपनाया। इस से पूर्व बीते 21 सितम्बर को प्रधान मंत्री को लिखे गए अपने पत्र में अन्ना हजारे ने लोकपाल पर सरकार के आश्वासन की तारीफ करते हुए लिखा था, ”भ्रष्टाचार की रोकथाम की दिशा में यह एक अच्छी पहल है।”

पहले इंदिरा फिर राजीव और अब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार की प्रशंसा, विशेषकर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के संदर्भ में, अन्ना द्वारा दिए जा रहे राजनीतिक संकेतों-संदेशों का चमकता हुआ दर्पण है. अन्ना हजारे इस से पूर्व अडवाणी की रथयात्रा, मोदी के अनशन तथा भाजपा की मंशा पर तल्ख़ तेवरों के साथ अपने तीखे प्रश्नों के जोरदार हमले कर चुके हैं.

12 सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से नरेन्द्र मोदी विरोधियों के मुंह पर पड़े जोरदार थप्पड़ के तत्काल पश्चात् 13 सितम्बर को अन्ना हजारे की सक्रियता अचानक ही गतिमान  हो गयी थी. IBN7 के राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत में अन्ना हजारे ने स्पष्ट किया था कि कांग्रेस यदि भ्रष्टाचार में ग्रेजुएट है तो भाजपा ने पी.एच.डी. कर रखी है. अन्ना का यह निशाना 2014 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर साधा गया था. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त निर्णय के पश्चात् 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद के भाजपा के प्रत्याशी के रूप में नरेन्द्र मोदी के उभरने की प्रबल संभावनाओं को बल मिला था. अतः अन्ना हजारे को ऎसी किसी भी सम्भावना पर प्रहार तो करना ही था.

अन्ना का यह कुटिल राजनीतिक प्रयास इतने पर ही नहीं थमा था. उसी बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी गैर कांग्रेसी-गैर भाजपा दल का समर्थन करेंगे. बातचीत में अन्ना ने मनमोहन सिंह को सीधा-साधा ईमानदार व्यक्ति बताया तथा ये भी कहा कि देश को आज इंदिरा गाँधी सरीखी “गरीब-नवाज़” नेता की आवश्यकता है. ज़रा इसके निहितार्थ समझिए एवं गंभीरता से विचार करिए कि अन्ना हजारे को यह कहते समय क्यों और कैसे यह याद नहीं रहा कि इंदिरा गाँधी ने ही दशकों पहले भ्रष्टाचार को वैश्विक चलन बताते हुए इसको कोई मुद्दा मानने से ही इनकार कर दिया था तथा भ्रष्टाचार का वह निकृष्ट इतिहास रचा था जिसकी पतित पराकाष्ठा “आपातकाल” के रूप में फलीभूत हुई थी.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इंदिरा गांधी को चुनावी भ्रष्टाचार का दोषी घोषित किया था. लेकिन अन्ना हजारे का शायद ऎसी कटु सच्चाइयों वाले कलंकित इतिहास से कोई लेनादेना नहीं है. हजारे की ऐसी घोषणाओं का सीधा अर्थ यह है कि उनके नेतृत्व में टीम अन्ना केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस गठबंधन सरकार के विरोधी मतों को देश भर में तितर-बितर कर उनकी बन्दरबांट करवाने के लिए कमर कस रही है. उसकी यह रणनीति मुख्य विपक्षी दल भाजपा को हाशिये पर पहुँचाने का अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करेगी. टीम अन्ना ऐसा करके किसकी राह आसान करेगी यह अनुमान लगाना कठिन नहीं है. आश्चर्यजनक एवं हास्यस्पद तथ्य यह है कि यही अन्ना और उनकी टीम कुछ दिनों पहले तक देश की जनता की चुनावी अदालत का सामना करने से मुंह चुराती नज़र आ रही थी. इसके लिए यह लोग भांति-भांति के फूहड़ तर्क दे रहे थे.

यहाँ तक कि देश के मतदाताओं पर एक शराब की बोतल और कुछ रुपयों में बिक जाने का घृणित आरोप सार्वजनिक रूप से निहायत निर्लज्जता के साथ लगा रहे थे. अतः केवल कुछ दिनों में ही देश में ऐसा कौन सा महान राजनीतिक-सामाजिक परिवर्तन हुआ देख लिया है इस अन्ना गुट ने? जो अन्ना खुद के चुनाव लड़ने पर देश के मतदाता को केवल  एक शराब की बोतल और कुछ रुपयों में बिक जाने वाला बता उसे लांक्षित-अपमानित करने का दुष्कृत्य कर अपनी जमानत तक गंवा देने की बात कर रहे थे वही अन्ना हजारे अब पूरे देश में केवल अपने सन्देश के द्वारा ईमानदार नेताओं की एक पूरी फौज तैयार कर देने का दम्भी दावा जोर-शोर से कर रहे हैं. खुद अन्ना के अनुसार जो मतदाता पिछले 64 सालों से केवल एक शराब की बोतल और कुछ रुपयों में बिकता चला आ रहा था, उसमें अचानक अनायास ऐसा हिमालयी परिवर्तन हजारे या उनकी टीम को किस आधार पर होता दिखा है ?

आगे पढ़ें.. जब अपने मंच पर चार-पांच ईमानदार नहीं जमा कर पाए अन्ना तो भ्रष्टाचार से क्या खाक लड़ेंगे?

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राजनीति से भी ऊपर होती है राष्ट्र-नीति, इसी माहौल की है देश को जरूरत : नरेन्द्र मोदी राजनीति से भी ऊपर होती है राष्ट्र-नीति, इसी माहौल की है देश को जरूरत : नरेन्द्र मोदी(3)

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का तीन दिवसीय अनशन कार्यक्रम सोमवार  को समाप्त हो गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस उपवास के जरिए मोदी ने न सिर्फ गुजरात में बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपना कद बड़ा किया है। अपने समापन भाषण में भी उन्होंने क्षेत्रीय मुद्दों की बजाय राष्ट्रीय मुद्दों पर ज्यादा चर्चा की:

भारत माता की जय,

मंच पर विराजमान आदरणीय सुषमा जी, आदरणीय वैंकेया जी, पूजनीय भैयू जी महाराज, सभी संप्रदाय के पूजनीय धर्मगुरु, मंच पर विराजमान सभी महानुभाव, भाइयो और बहनों।

मैंने एक पत्र लिखा था कुछ दिन पहले जो अखबारों में छपा था। उसमें मैंने कहा था कि मैं 17 तारीख को अनशन का प्रारंभ करूंगा 19 तारीख को अनशन समाप्त करूंगा। अनशन भले समाप्त होते हों लेकिन यह मिशन तेज गति से आगे बढ़ने का आज प्रारंभ है। पूर्णता की ओर जाने का ये उपक्रम है जिसे हम आगे बढ़ाना चाहते है। भाइयो और बहनों किसी ने कल्पना नहीं की होगी कि सद्भावना मिशन का एक कार्य विचार न सिर्फ गुजरात को पूरे देश को आंदोलित कर देगा। किसी ने नहीं सोचा होगा।

क्या कारण है पूरे देश में सद्भभावना मिशन आखिर क्या करना चाहता है, गुजरात आखिर क्या करना चाहता है इस पर चारो तरफ एक जिज्ञासा एक अपनापन एक लगाव क्यों? मित्रों इन  सवालों के जवाब हम जानते हैं। कुछ दिन पहले अन्ना हजारे जी के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को बल मिला। क्या कारण कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा देश उमड़ पड़ा क्यों? जवाब हम सब जानते हैं। देश के आम आदमी के मन में जो कुछ भी हो रहा है उससे वो परेशान है। वो अपने आप को अलग थलग महसूस करता है। पीड़ा  सबके भीतर बडी़ है पर प्रकटीकरण का अवसर नहीं मिलता है। कोई आसरा नहीं मिलता है। और जब कहीं उसको कोई जगह दिखाई दे उसकी भीतरी आशा का जन्म होता है। वो शायद इस रास्ते से कुछ निकल आएगा इस उम्मीद से जुड़ जाता है।

ये पहली बार नहीं हुआ है। हर दस साल में हिंदुस्तान में कभी न कभी ऐसे अवसर आए हैं। जनता जनार्दन मौका देखते ही सत्य के साथ जुड़ने के लिए तैयार हो जाती है। मैं उन सारे अवसरों की गिनती कराने नहीं जा रहा हूं। हमने अपनी पूरी जिंदगी जनता की सेवा में खपाई है।
हमने घर इसलिए नहीं छोड़ा था कि सिंहासन पर बैठने के कोई सपने थे। लड़कपन में घर छोड़ा था। एक सपना लेकर छोडा़ था। किसी दुखियारे के काम आएंगे। ये जिंदगी देश के लिए काम आए। ये तन मन अपने लिए नहीं है। औरों के लिए है। ये राजनीति से नहीं होता है। माँ भारती  की भक्ति से होता है। दुखियारों के दर्द को जब देखते हैं तब पीड़ा होती है। इसलिए भाइयों और बहनों हर चीज को राजनीति से जोड़कर देखने की जरूरत नहीं है। हर चीज को राजनीति के तराजू से तोलने की जरूरत  नहीं है।

राजनीति से भी ऊपर राष्ट्रनीति होती है। इस अनशन, सदभावना मिशन की प्रेरणा राष्ट्रनीति है राजनीति नहीं है। मित्रों, हमारा देश, हम लोग अगर गौर से सुने तो दुनिया क्या कहती है? सारे अध्यनशील लोगों का भारत पर एक आरोप है। और मैं चाहता हूं कि भारत के नागरिकों के नाते हम उस आरोप को गंभीरता से ले। विश्व में ऊंचाई पर पहुंचें। लोगों का कहना है कि पता नहीं क्या कारण है कि भारत आगे जाने के सपने नहीं देखता है।

चीन को लगता है कि हम ये करना चाहते हैं, यूरोप को लगता है कि हम ये करना चाहते हैं, अमेरिका को लगता है कि हम ये करना चाहते हैं। क्या कारण है कि हम सिकुड़ गए हैं। यदि हम ये नहीं सोच रहे हैं कि हमें क्या करना है। सपने ही नहीं है तो संकल्प की संभावना कहां से आएगी। और यदि संकल्प ही नहीं है तो जीवन को जोड़ने की इच्छा कहां से आएगी। मित्रों देश के लिए जरूरी है सपनों को संजोना। देश के लिए जरूरी है संकल्प के साथ अपने आप को खपाने की इच्छा।

ये माहौल बनाने की देश को आवश्यक्ता है। मैं गुजरात के अनुभव से कह रहा हूं। हम भी रूटीन में सरकार चला सकते थे। औरों ने भी सड़के बनाई हैं हम भी बना लेते। औरों ने भी अस्पताल बनाए हैं हम भी बना लेते। लेकिन हमने ऐसा नहीं सोचा। हमने कहा कि यह सार्वजनिक रूप से चलने वाला काम है। उसे ऐसे ही आगे बढ़ाने से कुछ नहीं होगा। हमें कुछ परिवर्तन करना है। उसके लिए हमें कुछ करना होगा। अलग। उसके लिए हमने रास्ता खोजा। 6 करोड़ गुजरातियों को जोड़ना। जब से मैंने कार्यभार संभाला है मेरे मुंह से एक मंत्र निकला है। मेरे लिए 6 करोड़ गुजराती बोलना शब्द नहीं है। यही मेरा भाव है। यही मेरी शक्ति है। इसी शक्ति से मैं गुजरात को आगे बढ़ाने के सपने देखता हूं।

हमने सपने अकेले नहीं देखे। हमने 6 करोड़ सपनों को जांचने, परखने की कोशिश की और उन 6 करोड़ सपनों से एक नई दुनिया बसाने का सोचा। हर नागरिक  की आंखों में एक सपना है। वहीं सपना आपका है वही मेरा है। इसलिए हमने विकास की जो धारणा बनाई इसी आधार पर बनाई।

मैं एक कटु घटना आपको सुनाना चाहता हूं। कुछ साल पहले भारत सरकार ने जस्टिस सच्चर कमेटी का गठन किया था अल्पसंख्यकों के विकास का अध्ययन  करने के लिए। जस्टिस सच्चर कमेटी की टीम ने गुजरात आकर भी अध्ययन किया। जस्टिस सच्चर की पूरी टीम की मेरे साथ एक मीटिंग हुई। उन्होंने मुझसे पूछा कि आप अपने राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए क्या करते हैं। मैंने उनसे कहा मेरी सरकार अल्पसंख्यकों के लिए कुछ भी नहीं करती है। वो चौंक गए। ऐसा बेबाक उत्तर कोई दे सकता है। मैंने साफ साफ कहा मेरी  सरकार अल्पसंख्यकों के लिए  कुछ नहीं करती। मैंने कहा एक और वाक्य लिख लीजिए। मेरी सरकार बहुसंख्यकों के लिए भी कुछ नहीं करती। मेरी सरकार 6 करोड़ गुजरातियों के लिए काम करती है। यहां कोई भेदभाव नहीं है।

हर चीज को माइनारिटी-मैजोरिटी के तराजू पर तौलना। आए दिन  वोट बैंक की राजनीति करना। ये रास्ता मेरा नहीं है। मेरे राज्य के सभी नागरिक मेरे हैं। उनका दुख मेरा दुख है।

मित्रों देश का दुर्भाग्य रहा है। 60 साल का ये क्रम रहा है कि सरकारें बनती हैं और बनने के बाद अगला चुनाव जीतने के लिए पांच साल उसी में खोए रहते हैं। हर कार्यक्रम, बजट को कैसे खर्च करना, विकास करना तो कैसे करना, लेकिन इस सबके बीच एक ही सवाल नेताओं के मन में रहता है कि काम कैसे करे कि अगला चुनाव जीते। यही चलता आ रहा है।

वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित अर्थरचना चलने लगी है। वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित होकर विकास योजनाएं बन रही है। उसका असर ये हुआ कि देश में विकास नहीं हुआ। छुटपुट हो रहे हैं। देश का पूरा हेल्थ सेक्टर सुधारना है कोई नहीं सोच रहा है।

ये 6० साल हमारे बर्बाद हो गए हैं। गुजरात इस सोच से बाहर निकला है। हमने सोचा कि हम चुनाव जीतने के लिए सरकार नहीं चलाएंगे। मित्रों इसके लिए बहुत ताकत लगती है। मैं भाग्य वाला इंसान हूं मुझे कोई परवाह नहीं है।

तब हम फैसले ले पाए। यदि मुझे कृषि विकास करना है तो हर किसान की वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए  सोचना होगा कि हम क्या कर सकते हैं।  मई जून के 44 डिग्री तापमान में हमारी राज्य सरकार के कर्मचारी किसानों के पास जाते हैं। यह इसी का परीणाम है कि गुजरात जो कभी अकाल पीडि़त था वो अब कृषि विकास में अग्रणी है।

वर्ल्ड बैंक की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि विकास के लिए यदि मॉडल के रूप में देखना है तो गुजरात को देखिए। अगर हम सिर्फ राजनीतिक तौर तरीकों से सोचते रहते तो स्थितियां नहीं बदलती।

उद्योग गुजरात में अनिवार्य कर दिया गया है। कुछ लोगों को रोजी रोटी मिल रही है। औद्योगिक क्षेत्र में विकास कैसे होता था। कोई आ गया है तो ठीक है नहीं आया तो ठीक है। हमने एक अभियान चलाया कि जाओगे तो कहां जाओगे, गुजरात ही आना पड़ेगा। हमने ऐसा माहौल बनाया कि सभी उद्योगों को गुजरात आना पड़ा।

हमने एक मूलभूत बात जो की है वो हिंदुस्तान की किसी भी सरकार से अलग है उसमें कोई आसमान से तारे लाने वाला विज्ञान नहीं है। छोटी सी समझ की बात है। यदि विकास करना है तो सरकारों से नहीं होगा। जनता जनार्दन को जोड़ दो अपने आप सब बढ़ जाएगा। हमने कोई काम ऐसा नहीं किया कि जनता एक ओर चलती हो सरकार दूसरी ओर चलती है। हमने सिर्फ जनता को जोड़ा। गुजरात की तेज गति से प्रगति की मूल ताकत जनभागिदारिता है।

देश युवा है हम कहते हैं लेकिन वो देश  के काम आ रहा है क्या। युवा देश के काम आए ऐसा हम कुछ कर पाए क्या। यदि बीसवी शताब्दी के अंत से पहले ऐसा कुछ सोच लिया होता तो आज भारत कहां का कहां होता।

प्लानिंग कमीशन की हर मीटिंग में मुझसे एक सवाल जरूर पूछा जाता है। मोदी जी जनभागीदारी में कोई नया काम किया हो तो जरूर बताकर जाइये। मेरी प्लानिंग कमीशन में एक भी बैठक ऐसी नहीं हुई जब मुझसे यह प्रश्न नहीं पूछा जाता। जब मैं जनभागीदारिता की बात करता हं तो 6 करोड़ गुजराती मेरे लिए भगवान होते हैं। मैं पुजारी की तरह उनकी पूजा में लगा होता हूं।

एक सवाल किया जा रहा है कि सद्भावना मिशन में सभी संप्रदायों के लोग कैसे आए ये प्रश्न पूछा जा रहा है। ये प्रश्न इसलिए हैं क्योंकि पिछले दस साल में उ न्हेंने सत्य नहीं देखा। वो झूठ में जी रहे थे। ये सभी संप्रदाय के लोग यहां हैं। यह विश्वास रातों रात पैदा नहीं हुआ है। हमने दस साल तपस्या की है। 6 करोड़ गुजरातियों के मंत्र का हमने दिन रात जाप किया है तब यह संभव हो सका है। नरेंद्र मोदी वोट बैंक की राजनीति नहीं करते हैं लेकिन हमारी चिंता सबसे ज्यादा करते हैं यह भरोसा हमने दिया है।

आम आदमी को चाहिए शांति। यहां किसी मैजोरिटी की शांति का बात नहीं हो रही है। शांति सबको चाहिए। गरीब को और ज्यादा चाहिए। अशांति होती है तो गरीबों की रोजी रोटी मर जाती है। उनके बच्चे भूखे सोते हैं। सुख चैन की जिंदगी आज हर गुजराती जी रहा है। इससे भरोसा पैदा हुआ है। राज्य का मुख्यमंत्री घर घर जाकर कह रहा है कि अपनी बेटी को पढ़ाओ। वो नहीं देखता कि वो किस संप्रदाय के घर में है। शत प्रतिशत- जब शत प्रतिशत की बात होती है तो कोई विशेष नहीं होता है ।

सबका साथ सबका विकास नारा नहीं है।  हम एक दशक इस पर चले हैं। सद्भभावना मिशन की आत्मा यही है। कुछ लोग सवाल कर रहे हैं कि आज ही जरूरत क्यों पड़ी। हम तो इस पर चलते आए हैं। लेकिन सफलता मिलने के बाद लगा कि इस मॉडल को उजागर करने की जरूरत है। गुजरात के विकास के मॉडल की चर्चा सभी लोग करते हैं।

गुड गवर्नेंस के विषय में भी गुजरात पर  सवाल नहीं उठते हैं। सबको लगता है कि गुड गवर्नेंस है विकास है। अब सवाल नहीं उठते हैं। लेकिन इसके पीछे के राज पर किसी का ध्यान नहीं जाता था। इस सद्भभावना मिशन से मैं उस ताकत के बारे में दुनिया को बताना चाहता हूं जिससे गुजरात का विकास हुआ है। इस सद्भभावना मिशन पर हम दस साल से चल रहे हैं। सबको साथ जोड़कर चलते चलते जो हासिल किया है मैं आज नम्रतापूर्वक तीन दिन के अनशन के बाद मन की पवित्रता के साथ देश के विकास में सोचने वाले लोगों को निमंत्रण देता हूं अपने साथ जुड़ने का। जैसे सुषमा जी कह रही थी कि हमारे विरोधी दल के लोग तारीफ कर रहे हैं। सबका भला सहज प्रक्रिया है। मैं आग्रह करता हूं कि देश और दुनिया गुजरात को देखे तो हमारे सद्भभावना मिशन को भी देखे। ये ऐसा मॉडल है जिसमें जनशक्ति और विकास की यात्रा को जोड़कर के चलना है। लेकिन कभी कभी क्या होता है। हम कितना भी काम क्यों न करे जब तक विराट के दर्शन न हो दुनिया के गले के नीचे चीजें उतरती नहीं है। ये तीन दिन का अनशन  दुनिया को उस विराट के दर्शन कराने का छोटा सा कदम था। अगर ये मैं न करता, अपनी सात्विक शक्ति को उसके साथ न जोड़ता। लाखों लोगों का मुझे आशीर्वाद न मिलता तो दुनिया का ध्यान  इस ओर जाने वाला नहीं था।

एक्‍शन बोलता है और मैं एक्‍शन में विश्वास करता हूं। लीडरशिप की कसौटी एक्‍शन पर निर्भर करती है। आज हमने दुनिया को दिखाया कि ये रास्ता है। सबको जोड़ने का सबको साथ लेकर चलने का। जब तक हम वोट बैंक की राजनीति से ऊपर नहीं उठते हम देश का विकास नहीं कर सकते।

मेरे दिल में बहुत पीड़ा है। जब तक मैं सरकार में नहीं था तब तक मैं भी ओरों की तरह सोचता था क्या करोगे अपना देश तो ऐसा ही है। लेकिन दस साल के अनुभव से कह सकता हूं कि यही सरकार, यही अफसर, यही फाइलें…यदि उसके बाद भी इस सब के साथ जनता को जोड़ दे तो विकास किया जा सकता है। गुजरात ने करके दिखाया। हमको इसी रास्ते पर आगे बढ़ना है।

इन दिनों गेमचेंजर शब्द का खूब प्रयोग हो रहा है। मैं अपने हर गांव के हर व्यक्ति को गेमचेंजर बनाना चाहता हूं। सद्भभावना मिशन से मैंने अपना प्रयास शुरु किया है। एक मॉडल दुनिया के सामने रखा है। ये सद्भभावना मिशन आगे बढ़ने वाला है।

मैं जिम्मेदारी के साथ ये घोषणा कर रहा हूं कि जैसे मैंने ये तीन दिन का अनशन किया मैं इसी तरह सभी जिलों में जाउंगा हर जिले में एक-एक दिन बैठूंगा। सुबह से शाम तक बैठूंगा। जनता के बीच में बैठूंगा। और जैसे ये तीन दिन मैंने देखा है हर जिले में इस भाव को और शक्तिशाली  करूंगा। और भूखे रह कर करूंगा। क्योंकि मैंने इसके फल देखे हैं। एकता, शांति, भाईचारा इसके फल को मैंने महसूस किया है। इस सद्भभावना को और अधिक ताकतवर बनाना मेरा सपना है। मैं आप सब को जोड़ कर, सभी जिलों में जाकर के इस भाव को और अधिक मजबूत करना चाहता हूं। जैसे जैस कार्यक्रम बनेगा आप सबको जानकारी दी जाती रहेगी।

मेरे सबसे बड़ी शक्ति ही मेरा कमिटमेंट हैं। कई लोगों को लगता है गुजरात में बहुत कुछ हो गया लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं। मुझे गुजरात को और आगे ले जाना है। और नए सपने संजोंने हैं। और नई शक्ति जुटानी है। उसी को लेकर आगे बढ़ना है।

हिंदुस्तान में जो निराशा का माहौल है उसके गुजरात ने बदला है। जो हो नहीं सकता उसे गुजरात ने करके दिखाया है। ये लोकतंत्र है। हर एक की अपनी राय होती है अपनी अभिव्यक्ति होती है। लेकिन हमने हमारे लक्ष्य को कभी भी ओझिल नहीं होने देना है। हमे अपने लक्ष्य को हमेशा हमेशा अपनी आंखों में रखना है।

हम जो कुछ भी कर रहे हैं उसमें हमारा मंत्र रहा है भारत के विकास के लिए गुजरात का विकास। भले उद्योग गुजरात में मिले लेकिन रोजगार देशभर के लोगों को मिलता है। अगर गुजरात का किसान कपास पैदा करता है तो वो कोयमबटूर में प्रोसेस होकर वहां के लोगों को भी रोजगार देता है।

भारत मां की सेवा करने के लिए हम गुजरात का विकास करके मां भारती के चरणों में अर्पित करना चाहते हैं। मुझे जनता का आशीर्वाद चाहिए। मुझे संतों महात्माओं का आशीर्वाद चाहिए। इस सद्भभावना मिशन को आगे बढ़ाने के लिए मैं राज्य के हर जिले में जाने वाला है। मैं दुनिया को दिखाना चाहता हूं कि हमने जनशक्ति को कैसे जोड़ा है। मैं दुनियाभर को लोगों को गुजरात का अध्यन करने के लिए आमंत्रित करता हूं। नकारात्मकता पर हमारा ध्यान नहीं है। हम सपनों को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

मैंने सोचा भी नहीं था कि देशभर से लोग आएंगे। अब पूरा देश जुड़ रहा हैं। मैं मानता हूं कि विकास जनआंदोलन बनना चाहिए। यदि विकास जनआंदोलन बनता है तो दुनिया की कोई ताकत हमें नहीं रोक सकती। हम इंतेजार नहीं कर सकते। हमे नई ऊंचाइयों को छूना है। आईये हम विकास की नई यात्रा की शुरुआत करे।

मैं व्यक्तिगत रूप से आपका आभारी हूं कि आपने मुझे प्रेम दिया, आशीर्वाद दिया, शक्ति दी। इसी शक्ति को नमन करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

जय-जय गुजरात।

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मध्य प्रदेश का सूचना केंद्र या भाजपा का अपना पीआईबी कार्यालय? मध्य प्रदेश का सूचना केंद्र या भाजपा का अपना पीआईबी कार्यालय?(0)

-लिमटी खरे।।

  • सुषमा स्वराज की पीआर में जुटा एमपी जनसंपर्क का दिल्ली कार्यालय
  • सरकारी विज्ञप्तियों की बजाए सांसदों की विज्ञप्तियों में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहा है सूचना केंद्र
  • सेवानिवृत्ति के पहले मलाईदार पद सुनिश्चित करना चाह रहे मुलाजिम!

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके कनॉट प्लेस की बाबा खड़क सिंह मार्ग पर एम्पोरिया हाउस स्थित मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग का सूचना केंद्र पिछले कुछ दिनों से पत्रकारों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार की इमेज बिल्डिंग, सरकारी नीतियों रीतियों एवं सरकार की कार्यप्रणाली को मीडिया तक पहुंचाने के लिए पाबंद यह कार्यालय पिछले एक साल से अपने मुख्य काम से हटकर सांसद विधायकों की सेवा टहल में लगा हुआ है जो कि शोध का विषय भी बन गया है।

शुक्रवार 2 सितम्बर को मध्य प्रदेश के विदिशा से सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष श्रीमति सुषमा स्वराज के नेतृत्व में भाजपाई सांसदों ने भ्रष्टाचार समाप्त करने और विशेष न्यायालय विधेयक तथा आतंकवादी अधिनियम को स्वीकृति देने की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।

एमपी सूचना केंद्र द्वारा भेजे गए आधिकारिक समाचार में कहा गया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं मध्यप्रदेश की सांसद श्रीमती सुषमा स्वराज के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के सांसदों ने राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल से भेंट की और उनसे मध्यप्रदेश के सात लंबित विधेयकों को स्वीकृति देने का आग्रह किया। मध्यप्रदेश के सांसदों ने राष्ट्रपति को एक ज्ञापन दिया जिसमें मध्यप्रदेश के सात लंबित विधेयकों की सूची दी गयी।

समाचार में आगे कहा गया है कि राष्ट्रपति महोदया से आग्रह किया गया कि वे मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय विधेयक 2011 को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करें जिसमें प्रदेश में भ्रष्टाचार से निपटने के लिए शासकीय सेवकों के खिलाफ कारगर ढंग से कार्रवाई की जा सकेगी। इस विधेयक के अंतर्गत भ्रष्ट शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इकट्ठा की गयी सम्पत्ति को सरकार राजसात कर सकेगी और उस सम्पत्ति को सार्वजनिक सेवाओं में उपयोग कर सकेगी। इससे पारदर्शी प्रशासन की स्थापना में मदद मिलेगी। इसी प्रकार आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने और उसके प्रभावी नियंत्रण के लिए मध्यप्रदेश आतंकवादी एवं उच्छेदक गतिविधियां तथा संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2010 भी लंबित है।

यह विधेयक स्वीकृत हो जाने से प्रदेश में आतंकवाद और संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध संशोधन विधेयक 2010 भी लंबित है। इस विधेयक के लागू हो जाने पर गौवध पर पूरी तरह से बंदिश लगायी जा सकेगी। मध्यप्रदेश के छतरपुर में महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना के संबंध में मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2011 भी लंबित है। इन विधेयकों के अलावा तीन और अन्य विधेयक स्वीकृति के लिए लंबित हैं जिन्हें शीघ्र स्वीकृति प्रदान की जाए।

मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के दिल्ली स्थित एमपी सूचना केंद्र की खबर में आगे कहा गया है कि श्रीमती स्वराज ने राष्ट्रपति महोदया का ध्यान आकर्षित किया कि भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए मध्यप्रदेश विशेष न्यायालय विधेयक 2011, बिहार द्वारा बनाये गये विशेष न्यायालय अधिनियम 2009 के अनुरूप है जिसे राष्ट्रपति महोदया द्वारा अनुमति दी जा चुकी है। इसलिए मध्यप्रदेश के इस विधेयक को भी अनुमति दी जाय।

राष्ट्रपति महोदया से भेंट करने वाले भारतीय जनता पार्टी के सांसदों में   श्री प्रभात झा, श्री कैलाश जोशी, श्री नरेन्द्र सिंह तोमर, श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया, श्री विक्रम वर्मा, श्री कप्तान सिंह सोलंकी, श्री गणेश सिंह, श्री रघुनंदन शर्मा, श्री मेघराज जैन, श्रीमती माया सिंह, श्री चंदन मित्रा, श्री नारायण सिंह केसरी, सुश्री अनुसुइया उइके, श्री अनिल माधव दवे, श्री वीरेन्द्र कुमार, श्री अशोक अर्गल, श्री राकेश सिंह, श्री गोविंद मिश्रा, श्री भूपेन्द्र सिंह, श्रीमती ज्योति धुर्वे, श्री के.डी. देशमुख, श्री माखन सिंह और श्री शिवराज भैया शामिल थे।

यहां उल्लेखनीय होगा कि मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग का काम मध्य प्रदेश सरकार से संबंधित खबरों का प्रचार प्रसार करना है ना कि किसी पार्टी विशेष की राजनैतिक गतिविधियों का प्रचार प्रसार करना। अगर मामला सांसदों से संबंधित है तो इसके लिए केंद्र सरकार के सूचना प्रसारण मंत्रालय का पत्र सूचना कार्यालय जवाबदेह माना जा सकता है। इस तरह के मामलों में भाजपा शासित मध्य प्रदेश सरकार के इस कार्यालय द्वारा भाजपा के सांसदों की राजनैतिक गतिविधियों को जारी करने का औचित्य समझ से परे ही है।

गौरतलब है कि इसके पहले भी राज्य सरकार के जनसंपर्क विभाग के दिल्ली कार्यालय द्वारा पूर्व में भारतीय जनता पार्टी के अनुषांगिक संगठनों की विज्ञप्तियों का वितरण एवं समाचार छापने के लिए मीडिया पर दवाब बनाए जाने के आरोप लगते रहे हैं। कुछ दिनों पूर्व तो विभाग ने हद ही कर दी जब किसी निजी कलाकार जो कि जनसंपर्क विभाग के आला अधिकारी के परिजन थे, की कला प्रदर्शनी का समाचार भी इस कार्यालय द्वारा आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया था।

इस कार्यालय पर आरोप लगते रहे हैं कि यहां से भाजपा के पार्टी स्तर के कार्यक्रमों की प्रेस विज्ञप्ति को प्रसारित किया जाता है। बताया जाता है कि मीडिया के लिए निर्धारित वाहनों को पत्रकारों को उपलब्ध न कराकर यहां पदस्थ अधिकारियों द्वारा इन्हें एमपी से आने वाले सांसदों व विधायकों की सेवा टहल के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पिछले दिनों सूचना केंद्र द्वारा जारी सरकारी विज्ञप्तियों को देखकर मध्य प्रदेश को कवर करने वाले पत्रकार असमंजस में पड़ गए कि यह सरकारी कार्यक्रम था या पार्टी स्तर का प्रोग्राम। हाल ही में जनसंपर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे। ‘शिक्षा का ध्येय समग्र विकास‘ शीर्षक से आयोजित इस राष्ट्रीय सम्मेलन में जनसंपर्क मंत्री शर्मा के द्वारा दिए गए भाषण को मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के सूचना केंद्र ने बाकायदा प्रेस नोट बनाकर जारी किया। इसकी तस्वीरें भी विभाग द्वारा जारी की गईं।

उस दरम्यान गुजरात सूचना केंद्र के एक अधिकारी ने इस बारे में आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह पार्टी का कार्यक्रम था इसकी विज्ञप्ति सरकारी तौर पर जानी नहीं की जानी चाहिए थी। इतना ही नहीं, इसके उपरांत दिल्ली में मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग के एक आला अधिकारी के रिश्तेदार की कला की प्रर्दशनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी की खबर को भी मध्य प्रदेश सूचना केंद्र द्वारा सरकारी स्तर पर जारी कर दिया गया।

मजे की बात तो यह है कि जनसंपर्क विभाग के दिल्ली कार्यालय द्वारा इन दोनों ही गैर सरकारी कार्यक्रमों की विज्ञप्तियों को मध्य प्रदेश सरकार के जनसंपर्क विभाग ने न तो सरकारी तौर पर बांटा और न ही सरकारी वेब साईट में अपलोड किया। दोनों ही कार्यक्रमों की पब्लिसिटी से जनसंपर्क संचालनालय ने पर्याप्त दूरी बनाकर रखी गई जिससे साबित हो जाता है कि दिल्ली स्थित मध्य प्रदेश सूचना केंद्र द्वारा इस तरह के निजी कार्यक्रमों विशेषकर पार्टी बेस्ड प्रोग्राम्स की पब्लिसिटी में ज्यादा दिलचस्पी ली जा रही है।

मध्य प्रदेश की जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से वसूले गए करों से वेतन पा रहे मध्य प्रदेश सूचना केंद्र के सरकारी अफसरान द्वारा सरकार के कार्यक्रमों को छोड़ भारतीय जनता पार्टी और जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के रिश्तेदारों की चौखटों पर माथा रगड़कर उनकी पब्लिसिटी करवाने की बात दिल्ली में मीडिया के गलियारों में तरह तरह की शक्ल अख्तियार कर चुकी है।

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क्या आप सोचते हैं मीडिया है आपके लिए सही करीयर? जरा एक नज़र डालें इधर भी क्या आप सोचते हैं मीडिया है आपके लिए सही करीयर? जरा एक नज़र डालें इधर भी(2)

फेसबुक पर एक ग्रुप है “ऑल इंडिया यंग जर्नलिस्ट एसोशिएशन“। करीब दो महीने पुराने इस ग्रुप में लगभग सवा पांच सौ युवा मीडियाकर्मी जुड़े हैं। कुबेरनाथ नाम के एक सदस्य ने वॉल पर लिखा- “एक मित्र ने बहस के दौरान कहा कि मीडिया दो तबके के ही लोगों के लिए है…एक तो आर्थिक रुप से बहुत कमजोर…और दूसरा जो आर्थिक तौर पर मजबूत है…और तीसरा तबका जो मध्यवर्गीय है..और मजबूर भी…वो मीडिया में आ तो जाता है…लेकिन अपने को भंवर में फंसा महसूस करता है…इस बात से आप कहां तक सहमत हैं. ”

 

हालांकि उस पोस्ट पर अभी बहुत ज्यादा टिप्पणियां ज्यादा नहीं आईं हैं, लेकिन उसी समय दिलीप मंडल के वॉल पर किसी दूसरे पोस्ट पर Er Bhanwar Singh Jat  की एक टिप्पणी आई.. इसमें काफी हद तक कुबेरनाथ के सवाल का जवाब छिपा है। आप भी देखें-

 

 

-अरुंधती रॉय, प्रणय रॉय (नेहरु डायनेस्टी टीवी- NDTV) की भांजी हैं।
-प्रणय रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशन्स” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं।
-इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अम्बानी।
-प्रणय रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय।
-राधिका रॉय, वृन्दा करात की बहन हैं।
-वृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं।
-प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे।
-एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे।
-इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”।
-CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती।
-सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं।
-बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं।
-बरखा दत्त की माँ हैं श्रीमती प्रभा दत्त।
-प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं।
-राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं
-राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष।
-सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष।
-सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं।
-रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं।
-सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं।
-अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं।
-CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है।
-GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है।
-NDTV भारत का एकमात्र चैनल है को “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है।
-दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं।
-दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा।
-जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ भी PIPFD की सदस्य हैं।
-तीस्ता सीतलवाड़ के पति हैं जावेद आनन्द।
-जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं।
-इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर।
-जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी।
-करण थापर ITV के मालिक हैं।
-ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है।
-करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)।
-करण थापर मरहूम बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्र रहे हैं।
-करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है।
-नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं।
-विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं।
-मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं।
-नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं।
-अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्या हैं।
-अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्या हैं।
-PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है।
-अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो।
-FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू।
-राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं।
-खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं।
-खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं।
-अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं।
-एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं।
-नरसिम्हन राम (एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं।
-एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन।
-सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं।
-विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं।
-एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं।
-त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है।
-जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं।
-जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं।
-केएम रॉय “मंगलम” पब्लिकेशन के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं।
-मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है।
-केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है।
-“ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल।
-जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल”(AICC) के सचिव भी हैं।
-AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा।
-जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है।
-दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)।
-OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी।
-कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
-OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार।
-OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं।
-OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है।
-DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं।
-विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है।
-DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं।
-उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं।
-जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था।
-जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं।
-उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं।
-उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।
-सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं।
-सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं।
-सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं।

-रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव।
-रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं।
-रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं।
-रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं।

-डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी।
-रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं।
-एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं।
-एमजे अकबर कांग्रेस सांसद भी रह चुके हैं।
-एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़।
-मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं।

-वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की।
-सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये।
-सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला।
-शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं।
-सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं।
-जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं।
-भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं।
-करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं।
-चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था।
-लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है।
-एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं।
-एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं।
-पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं।
-सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन
-कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं।
-कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन।
-दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे।
-पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।
-दयानिधि और कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन।
-मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)।
-करुणानिधि ने “कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया।
-कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी।
-एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं।
-करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन।
-स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया।
-कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं।
-कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं।
-कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं।
-स्टार विजय एक तमिल चैनल है।
-विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है।
-स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।
-Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी।
-शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं।
-“अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर।
-के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे।
-पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला।
-हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं।
-हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।
-हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं।
-अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोर-शोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई।
-कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं।
-फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं।
-मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार
-वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से)
-केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है।
-शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं।
-चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे।
-चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन की अध्यक्षता की।
-शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं।
-कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं।
-शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं।
-परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं।

-शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्ष हैं।
-शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं
-शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था।
-शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है।
-शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं।
-करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं।

-न्यूज़ 24 की चेयरमेन है अनुराधा प्रसाद
-अनुराधा प्रसाद कांग्रेस नेता (और अब मंत्री बने) राजीव शुक्ला की पत्नी है
-राजीव शुक्ला राजनीति में आने से पहले  हिंदी में झोला छाप पत्रकार थे
-राजीव शुक्ला ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को मीडिया में किसी भी तरह लाने के लिए पत्रकारिता के सारे मूल्यों और सिद्धान्तों को ताक पर रख दिया था
-उसके इनाम में राहुल गाँधी ने उन्हें राज्य सभा का सदस्य और BCCI का वाइस प्रेसिडेंट ऐर मंत्री बना दिया
-कुछ दिन पहले राहुल गाँधी के काफिले से एक आदमी घायल हो गया था
-राहुल गाँधी ने 100 नंबर पर कॉल करके अम्बुलेंस बुला लिया
-न्यूज़ 24 ने इसे “राहुल गाँधी की महानता ” के तौर पर दो दिन तक दिखाया
-प्रभु चावला पहले इंडिया टुडे ग्रुप में थे
-प्रभु चावला के बेटे के नाम है अंकुर चावला
-अंकुर चावला दिल्ली में सत्ता न जाना माना दलाल है
-नीरा राडिया टेप में प्रभु चावला का भी नाम आया
-प्रभु चावला के कारण सोनिया गांधी इंडिया टुडे से नाराज़ थी
-नाराजगी की वजह थी जैन कमीशन की रिपोर्ट लीक होना, जिसके कारण कांग्रेस समर्थित सरकार गिर गई थी
-प्रभु चावला के कार्यक्रम सीधी-बात में यूपीए सरकार का एक भी कांग्रेसी मंत्री नहीं आया
-टुडे ग्रुप को कांग्रेस और सरकार के विज्ञापन मिलने भी बंद हो गए थे
-इंडिया टुडे ने प्रभु चावला की जगह एमजे अकबर को रख लिया है
-अभी प्रभु चावला ETV में है

-अब सबकुछ ठीक-ठाक है

हालांकि उपर लिखे पोस्ट में कई त्रुटियों की शिकायतें भी मिली हैं, लेकिन इनमें से 99 प्रतिशत बातें तथ्यपूर्ण हैं। अपने कई पत्रकार मित्र इस बात से हतोत्साहित हो सकते हैं कि उनके इतने हाई-फाई कनेक्शन नहीं हैं तो वे मीडिया में कैसे टिकेंगे.. लेकिन कईयों का ये भी कहना है कि इस नेक्सस का हिस्सा बनने में भी कुछ बुराई नहीं है। आखिर हर कोई चांदी का चम्मच लेकर ही तो पैदा नहीं होता ना..?

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नोएडा में पत्रकार की रहस्यमय मौत नोएडा में पत्रकार की रहस्यमय मौत(0)

अभी मुंबई में क्राइम रिपोर्टर की मौत की गुत्थी सुलझी भी नहीं थी कि दिल्ली से सटे नोएडा में एक और पत्रकार की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। शहर के वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र भाटी को 13 जून, सोमवार की रात नोएडा स्थित एक फैक्टरी के बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाया गया.

नरेन्द्र भाटी नोएडा में एक स्थानीय हिन्दी दैनिक वीर शिवाजी के संपादक थे और कई राष्ट्रीय अखबारों के लिए बतौर संवाददाता कार्यरत थे. उनकी लाश सोमवार की रात नोएडा सेक्टर -8 की एक फैक्टरी के बाहर खड़ी उनकी ही कार में मिली.

नरेन्द्र भाटी अनेकों पत्रकार संगठनों से भी जुड़े थे. वे राष्ट्रीय प्रेस क्लब के संस्थापक मैनेजिंग ट्रस्टी थे तथा उपजा और श्रमजीवी पत्रकार संघ जैसी संस्थाओं के पदाधिकारी भी रह चुके थे.

पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से कहा कि पत्रकार नरेन्द्र भाटी नोएडा के सेक्टर आठ में रात दस बजे के करीब अपनी कार से जा रहे थे. फैक्टरी के सुरक्षा गार्ड ने कहा कि उसने पत्रकार को अचेत अवस्था में पड़ा पाया. भाटी को कैलाश अस्पताल ले जाया गया जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने बताया कि नरेन्द्र भाटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.

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