Last updated by at .

Home » Posts tagged with » पत्रकार

डमी मीडिया का समाजवाद…

-विकास कुमार गुप्ता|| पत्रकार-सर हम ब्यूरो चीफ है। स्त्रैण आवाज में बोलते हुए ”सर हम आपकी पत्रिका से जुड़ना चाहते है।“ मैगजीन देखने के बाद और फिर आवाज को थोड़ा मजबूत करते हुए, ”आपकी मैगजीन में तो विज्ञापन दिख ही नहीं रहा। आप इस पत्रिका और अखबार को देखियें। यह अखबार तो चलता भी नहीं। [...]

दैनिक अखबारों की तो ठीक मगर साप्ताहिक की डगर कठिन- मयंक

-दिलीप सिकरवार|| वरिष्ठ पत्रकार मयंक भार्गव ने माना कि दैनिक समाचार पत्र का प्रकाशन मुश्किल भरा होता है किन्तु नामुमकिन नही. क्योंकि सरकार की रहम दृष्टी से डेली अखबार चल जाते है, मगर साप्ताहिक समाचार पत्र का सम्पादन घास के ढेर में अंगूठी तलाशने जैसा है. कोई सालों से साप्ताहिक अखबार चला रहा है तो [...]

Read More

किराये के भवन में बन रहे पत्रकार, पहचान तलाशता कर्मवीर विद्यापीठ

-शेख शकील|| मध्य प्रदेश में पत्रकारिता के पितृ  पुरुष  कहे जाने वाले पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि खंडवा में उनके नाम पर राजनीति करने वालो ने अपनी दूकान तो ज़माली लेकिन उनके नाम से चल रहे पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय खंडवा में ही अपनी पहचान तलाश रहा है ।  माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के विस्तार परिसर [...]

Read More

मंत्री के आदेश पर बनेगी पत्रकारों की कुंडली..

-दिलीप सिकरवार|| मध्य प्रदेश शासन के जनसंपर्क विभाग को उन्ही के मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने फरमान भेजा है. जिसके मुताबिक अब तहसील स्तर तक के कलम घिसने वाले भाइयों की कुंडली तैयार की जाये. इससे अहसास हो रहा है कि चुनाव करीब हैं और ऐसे में मीडिया की अनदेखी सरकार को भारी न पड़ जाये, [...]

Read More

देहरादून मीडिया सेंटर में कैद कर दिए पत्रकार

-नारायण परगाई|| देहरादून के सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में आज दोपहर पत्रकारों को कमरे में कैद कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद कई पत्रकारों में हड़कम्प मच गया. हुआ यूं कि रोजाना की तरह सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में पत्रकार अपना काम निपटा रहे थे और उसके बाद करीब आधे घंटे तक पत्रकारों के कमरों में बाहर से [...]

Read More

पत्रकारिता की वेश्याओं का एक और चेहरा पवन कुमार भूत…

पुलिस और पब्लिक के बीच सामंजस्य स्थापित करने तथा भारत को अपराध मुक्त बनाने के उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही मासिक पत्रिका ‘‘पुलिस पब्लिक प्रेस’’ के मालिक और सम्पादक पवन कुमार भूत द्वारा की जा रही ठगी को लखन सालवी ने उजागर किया था. लखन सालवी द्वारा लिखे गए लेख (नटवर लाल भी कुछ नहीं पवन [...]

Read More

किस ओर जा रहा है पत्रकारिता का भविष्य…

-प्रदीप राघव|| मैं बदला, तुम बदले, समाज बदला, और तो और आधुनिक युग में लोगों की मानसिकता तक बदली तो भला पत्रकारिता क्यों ना बदलती. कुर्ता पायजामा पहने, दाढी बढ़ाए, माथे पर अजीब सी शिकन, हाथ में झोला लिए एक साहब से मुलाकात हुई. मैं उन्हें देखकर ही भांप गया कि वो एक पत्रकार हैं. [...]

Read More

खुद मीडिया लिख रहा है अपना मृत्युलेख…

-प्रणय विक्रम सिंह|| मीडिया की भूमिका समाज में चौकीदार की है। जो दिन-रात जागते रहो की आवाज लगा कर सोते समाज को जगाने की कोशिश करता है। हमें समझना चाहिए कि समाज के समस्त परिवर्तनों में सूचना सम्प्रेषण ने केन्द्रीय भूमिका निर्वाहित की है। प्रत्येक जन आन्दोलन सूचना सम्प्रेषण की गतिशीलता व प्रमाणिकता का सहोदर [...]

Read More

शिक्षा और दवा के कोष को डकार गए बिहार के सरकारी कुत्ते…

भारत और भारत में पत्रकारिता – एक “खुला बाज़ार” जहाँ “शब्दों को वाक्यों में ढालने की प्रतियोगिता नहीं, बल्कि अपने-अपने कनेक्शन से कौन कितना धन एकत्रित करने की क्षमता रखता है जो लालाओं को खुश रख सके? भारत की संसद से सौ कदम दुरी पर रफ़ी-मार्ग पर स्थित आई एन एस बिल्डिंग के नीचे ईंट-पत्थर [...]

Read More

पत्रकार हैं या मवाली जो रिवाल्वर चाहिए…

एक मेल द्वारा प्राप्त इस खबर की सच्चाई जानने के लिए जब मीडिया दरबार ने अमर उजाला के इस कथित पत्रकार से फोन पर यह जानना चाहा कि उसे किससे जान का खतरा है जो अखिलेश यादव से रिवाल्वर का लाइसेंस मांग रहे हो तो इसका कहना था का कि आग्नेय शस्त्र रखना इटावा की [...]

Read More