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कारपोरेट मीडिया और खबरों की विश्वसनीयता..

-के.पी. सिंह|| मीडिया कारपोरेट हुआ तो एचआर पालिसी बनी जिसके मुख्य घटकों में ट्रेनिंग, ट्रांसफर, इन्क्रीमेंट व एलाउंस शामिल हैं. जिलों में पहले वहां के इतिहास, भूगोल से सुपरिचित संवाददाता कामयाब माने जाते थे लेकिन ट्रांसफर पालिसी के तहत तय हुआ कि जिले में बाहर से पत्रकार को भेजा जायेगा और वह भी मात्र दो […]

उपजा का दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन 26-27 को इलाहाबाद में..

-आशीष वशिष्ठ|| उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) का दो दिवसीय अधिवेशन आगामी 26 एवं 27 को इलाहाबाद में आयोजित होगा. अधिवेशन के दौरान प्रदेश कार्यकारिणी का द्विवार्षिक चुनाव भी संपन्न होगा. उपजा के महामंत्री सर्वेश कुमार सिंह ने बताया कि, उपजा का दो दिवसीय प्रांतीय अधिवेशन आगामी 26 एवं 27 अक्टूबर को इलाहाबाद के केपी […]

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पत्रकार ने सच बोला तो मिली सजा ए मौत…

-अब्दुल रशीद|| लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के सिपाही का जनसम्पर्क अधिकारी के सामने जहर खाकर पहुँचना और जहर खाने से पहले डी जी पी को अपने ख़ुदकुशी की जानकारी एसमएस के माध्यम से भेजना इस बात की तस्दीक करता है कि वह मरना नहीं चाहता था लेकिन उसके पास मौत के सिवा कोई विकल्प नहीं […]

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माल-ए-मुफ्त और मुफ्तखोर पत्रकार…

-डॉ. महर उद्दीन खां|| नेता और अफसर कुछ पत्रकारों को मुफ्तखोरी की ऐसी आदत डाल देते हैं कि वह अपने मित्रों को भी आसामी समझने लगते हैं. कई बार तो ऐसे भी दृश्य देखने को मिले कि बड़ी शर्म महसूस होती थी.मुम्बई की हवाई यात्रा में नाश्ता दिया गया. नाश्ते के बाद मेरे साथ बैठे […]

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प्रमोद सिंह के बहाने मीडिया की पड़ताल…

ऐसे मीडिया की वजह से क्यूं मरे कोई…? -निरंजन परिहार|| प्रमोद सिंह नहीं रहे. उन्होंने आत्महत्या कर ली. अपन सन्न हैं. सन्न इसलिए, क्योंकि प्रमोद सिंह जैसे प्रतिभाशाली रिपोर्टर के इस दुनिया से चले जाने के तरीके ने हम सबको एक बार फिर से मीडिया में हमारे काम, उस काम को करते रहने के तरीके, […]

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अब दैनिक भास्कर में छंटनी का दौर शुरु…

-विनीत कुमार|| अब दैनिक भास्कर में छंटनी का दौर शुरु. 1 सितंबर से शायद बंद हो जाए दिल्ली संस्करण. दर्जनों पत्रकार फिर से दूसरे अखबारों और संस्थानों में जाकर वहां काम कर रहे लोगों के लिए संकट पैदा करेंगे. मैंने अबकी बार सड़क पर आ जाएंगे शब्द का प्रयोग नहीं किया क्योंकि नेटवर्क-18 मामले में […]

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एम.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन विवादों के घेरे में…

-दिवाकर गुप्ता ||  भोपाल. एम. पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (आईएफडब्ल्यूजे) के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने आई. एफ. डब्ल्यू. जे. के राष्ट्रीय सचिव कृष्णमोहन झा की सहमति से प्रदेश की पूर्व की जिला एवं संभाग की इकाईयों को भंग कर दिया है. अब प्रदेश में नए सिरे से तहसील, जिला एवं संभाग इकाईयों का गठन किया […]

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छंटनी के विरोध में एकजुट हुए पत्रकार…

बीते 16 अगस्त को दो समाचार चैनलों आईबीएन7 और सीएनएन आईबीएन से बिना किसी पूर्व सूचना के लगभग 320 पत्रकारों को निकाले जाने के विरोध में आज जर्नलिस्ट सोलिडेरिटी फोरम (जेएसएफ) ने दोनों चैनलों के गेट के सामने प्रदर्शन किया. इस प्रदर्शन में भारी संख्या में पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं […]

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बाज़ार पहले आपको खरीदता है, फिर नीलाम कर देता है…

-मयंक सक्सेना|| आईबीएन 7 और सीएनएन आईबीएन यानी कि नेटवर्क18 के न्यूज़ मीडिया वेंचर्स के लगभग 300 कर्मचारियों की छंटनी को जो लोग विदाई कह रहे हैं, उनको पहले अपनी भाषा पर काम करना होगा कि दरअसल ये विदाई है या नहीं, क्योंकि विदाई की एक रस्म होती है जो बाज़ार की इस रस्म से […]

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मेनस्ट्रीम मीडिया के मीडिया स्कूल एकमुश्त बेरोजगारों की फौज खड़ी करते हैं…

करीब करीब हर बड़े मीडिया संस्थान ने मीडिया स्कूल खोल रखे हैं जिसका दिखावटी मकसद तो होता है, नए ट्रेंड पत्रकार और मीडियाकर्मी तैयार करना मगर पर्दे के पीछे यह मीडिया संस्थान बंधुआ मज़दूर हासिल कर रहे होते हैं और साथ ही यह मीडिया स्कूल नामक दुकाने लाखों रुपये बतौर फीस लेकर अपने संस्थानों के लिए […]

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