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पुण्य का प्रताप या पाप..

By   /  September 29, 2018  /  मीडिया  /  No Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..-अतुल चौरसिया|| डिजिटल मीडिया की क्रांति में खबरों की उम्र कम हो गई है. स्मार्टफोन धारकों के लिए सुबह का अख़बार 70-80 प्रतिशत बासी हो चुका होता है. लिहाजा आज से 50 दिन पहले घटी कोई घटना तो लगभग इतिहास का ही हिस्सा हो जाती है. लेकिन सौभाग्य […]


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दूध मांगा तो खीर देंगे, काश्मीर मांगा तो चीर देंगे…

By   /  September 16, 2013  /  देश  /  No Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें.. भारत, भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद-6 -दीप पाठक|| अगर ओमप्रकाश केजरीवाल साब की बात मानें तो पच्छिम का कहना था “भारत के पास अतीत है, इतिहास नहीं. “यहां तो वाचिक परंपरा थी और इतिहास बोध के नाम पर मिथकों का महिमामंडन था. अगर सर विलियम जोंस के अथक […]


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नफरत और द्वेष की राजनीति की जड़ें बहुत गहरी हैं…

By   /  September 14, 2013  /  राजनीति  /  2 Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..भारत भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद-5 -दीप पाठक|| भारत का अधिकांश जनमानस समझता है कि कांग्रेस ही पुरानी और राजनीतिक पार्टी है और वही देश की राजनीतिक पहचान है. पर सच तो यह है कि इस देश की नफरत और द्वेष की राजनीति की जड़ें भी बहुत गहरी हैं, […]


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हिंदी का खून किया संस्कृत के कठमुल्लाओं ने…

By   /  September 13, 2013  /  देश  /  1 Comment

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..भारत, भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद-4 -दीप पाठक|| एक समय फिल्मों में शुद्ध हिंदी के गानों को लिखने की कोशिश बड़े जतन से की गयी, कुछ बन पाए और कुछ हास्यास्पद हो गये. “यक चतुर नार..” हो या “प्रिय प्राणेश्वरी..”. भाषायी बौद्धिक उलटबांसियों का यही हश्र होता है. लोक […]


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सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: चाल, चरित्र और चेहरे…

By   /  September 12, 2013  /  राजनीति  /  No Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..भारत, भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद-भाग-3 -दीप पाठक|| पुरानी फिल्मों मेँ अंत तक खलनायक का चरित्र सुधर जाया करता था और इफ्तिखार टाईप पुलिस आफीसर पुलिस डिपार्टमेंट को एक जिम्मेदार छवि प्रदान करता था. फिल्मों में मुस्लिम चरित्र समरस भाव लिये होते थे और गणित की किताबों सवालों में […]


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इतिहास महज सन तारीख नहीं बल्कि एक रंगमंच है…

By   /  September 7, 2013  /  देश  /  No Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..भारत, भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद  …2 -दीप पाठक|| सहिष्णुता का दावा करने वाले हिंदूओं की अभी तक मौजूद एक पीढ़ी ने आधी सदी पहले सन् 47 में भयंकर रक्तपात देखा है जिसमें 7 लाख लोग मारे गये थे. श्याम श्वेत मूक फिल्मों में हम रेल में भरे मुसाफिर […]


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भारत, भाजपा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद – भाग एक..

By   /  September 6, 2013  /  राजनीति  /  No Comments

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इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..-दीप पाठक|| आजादी के आंदोलन से लेकर आज तक हिंदूवादी देशभक्ति का विघ्नसंतोषी विचार एक लंबा सफर तय कर चुका है. भारतीय इतिहास के पिछले छ सौ सालों में भारतीय जैसी कोई चीज इस उपमहाद्वीप में बन ही नहीं पायी. मुगलों के पतन और अंग्रेजों के आगमन के […]


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