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निर्मल बाबा, ये हथकडी क्यों आपकी तरफ आ रही है? निर्मल बाबा, ये हथकडी क्यों आपकी तरफ आ रही है?(4)

लगता है कि निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा पर सभी शक्तियों की किरपा समाप्त हो गयी है. जिसके चलते मध्य प्रदेश की एक अदालत में निर्मल बाबा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने से निर्मल बाबा के जेल जाने का रास्ता साफ हो गया है.

दरअसल मध्य प्रदेश में सागर जिला के बीना के रहने वाले सुरेन्द्र विश्वकर्मा ने बीना की एक अदालत में निर्मल बाबा के खिलाफ एक मुकद्दमा दायर किया था और आरोप लगाया था कि उसने टीवी पर निर्मल बाबा का समागम देखा जिसमें वे सभी टी वी दर्शकों को कह रहे थे कि काला पर्स रखो, जिसे किरपा आएगी और धन सम्पति की बढ़ोतरी होगी. इस पर मैं उनके बहकावे में आ गया और काला पर्स खरीद कर उसमें पैसे रखने लगा. एक दिन मेरे पर्स में दो हज़ार रुपये रखे थे और मेरी जेब से वह पर्स पता नहीं कहाँ गिर गया. पर्स के साथ मेरे मेरे दो हज़ार रुपये भी खो गए. मेरे लिए यह रुपये बहुत महत्वपूर्ण थे. निर्मल बाबा की सलाह मुझ पर भारी पड़ गयी और मुझे उनकी सलाह मानने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो गया.

बीना की अदालत ने इस मामले पर बीते दो जून को एक्शन लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया और निर्मल बाबा को 25 जून को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए. इसी के बाद निर्मल बाबा ने अपने वकीलों के जरिये अदालत में अग्रिम जमानत लेने के लिए याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि “निर्मल बाबा पूरे जनमानस को भ्रमित कर रहे थे. ऐसे में निर्मल बाबा को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा.”

निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ चार सौ बीसी सहित कई धाराओं में दर्ज इस मामले में अब उच्च न्यायालय जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और यदि निर्मल बाबा को वहाँ भी कोई राहत नहीं मिली तो उनके पास जेल जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं होगा.

गौरतलब है कि सबसे पहले मीडिया दरबार ने ही इस ढोंगी की पोल खोली थी और एक पाठक की मदद से निर्मल बाबा का पूरा इतिहास खोज निकाला था. इस पर निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा ने मीडिया दरबार को अपने वकीलों के जरिये कानूनी नोटिस भेज कर डराने का प्रयास किया था. मगर हमने डरने के बजाय निर्मलजीत नरूला के ढोंग के खिलाफ जबरदस्त मुहिम चला दी. जिसे फेसबुक पर भी अच्छा खासा समर्थन मिला. इसके बाद पूरा थर्ड मीडिया भी मीडिया दरबार के अभियान से जुड गया और कुछ टीवी चैनलों को भी मजबूरीवश निर्मल विरोध में उतरना पड़ा और मीडिया दरबार कि मुहिम का नतीजा है कि देश भर के कई शहरों में निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे और इस ठग की असली जगह अब कुछ क़दमों की दूरी पर रह गयी है.

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तनया एवं आदित्‍य ठाकुर की याचिका पर सुनाया फैसला

सीजेएम, लखनऊ राजेश उपाध्याय ने गोमतीनगर थाने को आदेशित किया है कि दिल्ली स्थित कथित धार्मिक गुरु निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी विवेचना करें. सीजेएम ने बुधवार को यह आदेश तनया ठाकुर (कक्षा बारह की छात्रा) और आदित्य ठाकुर (कक्षा दस के छात्र) द्वारा धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत प्रस्तुत याचिका पर दिया. तनया और आदित्य आईपीएस अधिकारी अमिताभ और सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन के बच्चे हैं. रोहित त्रिपाठी और नीरज कुमार याचीगण के वकील थे.

सीजेएम उपाध्याय ने कहा कि तनया और आदित्य द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर संज्ञेय अपराध बनता है और पर्याप्त आधार है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय श्री भगवन समर्ध बनाम आंध्र प्रदेश सरकार का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी प्रकार से एक कथित धार्मिक व्यक्ति द्वारा बच्ची के इलाज़ में ठगी की जा रही थी. तनया और आदित्य ने आवेदन किया था कि निर्मल बाबा द्वारा तमाम लुभावने वादों से आम आदमी को ललचाने और फंसाने तथा अत्यंत सरलीकृत समाधान प्रस्तुत कर लोगों को ठगते का काम किया जाता है. यह धारा 417, 419, 420 आईपीसी के तहत चीटिंग और धारा 508 में ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर गलत लाभ लेना है. अतः मामले में एफआईआर दर्ज की जाए.

तनया एवं आदित्‍य ने 10 अप्रैल 2012 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में एफआईआर के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और डीआईजी लखनऊ एवं एडीजी, ला ऑर्डर के स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत याचिका दायर किया गया था. इसके विपरीत थानाध्यक्ष, गोमतीनगर के 24 अप्रैल की आख्या में यह कहा गया था कि तनया और आदित्य इस मामले से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हैं. यह भी कहा था कि उनके द्वारा ठगी और धोखाधड़ी के बारे में कोई साक्ष्य एवं साक्षी नहीं दिया जा सका है, अतः कोई पुष्ट एवं स्पष्ट साक्ष्य नहीं होने के फलस्वरूप थाना स्थानीय पर अभियोग पंजीकृत नहीं किया जा सकता. (भड़ास4मीडिया)

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निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV(4)

 

निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया। एक हफ्ते में 4.7 अंको की उछाल के साथ इंडिया टीवी नंबर वन पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया टीवी को ये ताज़ा बढ़त बाबा के पोल-खोल की वजह से मिली है, लेकिन चैनल के कर्ता-धर्ता इसे रुटीन बता रहे हैं।निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया।

इंडिया टीवी के न्यूज़ डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने मीडिया दरबार से बातचीत में यह माना कि निर्मल बाबा के पोल-खोल को लोकप्रियता मिल रही है, लेकिन नंबर वन पर आने के लिए इसे आधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया टीवी पिछले साल ही नंबर वन पर पहुंच गया था और तब से महीनों इस पोज़ीशन पर जमा रहा था। उस समय तो बाबा का कोई कार्यक्रम नहीं चलता था।

उधर निर्मल बाबा के खिलाफ सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले आजतक को दर्शकों ने दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया है। उसे करीब दो अंकों का नुक़सान पहुंचा है। ग़ौरतलब है कि इंडिया टीवी ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बाबा के कारनामों की पोल-पट्टी खोली थी। ज़ी न्‍यूज़ को भी बाबा विरोध की किरपा मिली और उसने न्‍यूज़-24 को झटका देकर पांचवें पायदान पर पहुंचा दिया है। ज़ी न्यूज़ 1.2 अंकों की बढ़त के साथ 9.7 की टीआरपी हासिल करने में कामयाब रहा है।

इस बार न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने एक बार फिर अच्‍छी बढ़त के साथ एक बार फिर टॉप टेन में वापसी कर ली है। ग़ौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में न्यूज़ एक्सप्रेस ही पहला ऐसा चैनल है जिसने निर्मल बाबा का विज्ञापन चलाने से मना कर दिया था और पोल-खोल की शुरुआत की थी। निर्मल बाबा के पक्ष में खबर दिखाने वाले पी7 को दर्शकों ने नकार दिया है और न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस दसवें पायदान पर पहुंच गया है। मात्र नौ महीनों में ही टॉप टेन चैनलों में शुमार होना न्यूज़ एक्सप्रेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने साबित कर दिया है कि अच्‍छा कंटेंट दिखाकर भी टीआरपी पाई जा सकती है।

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डरपोक बाबा ने मीडिया को समागम से बाहर किया, भक्तों से कहा: ‘‘चैनलों को फोन करो” डरपोक बाबा ने मीडिया को समागम से बाहर किया, भक्तों से कहा: ‘‘चैनलों को फोन करो”(8)

खबर है कि दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में निर्मल बाबा के समागम के बाहर बाबा के समर्थकों ने पत्रकार से बदसलूकी की है। आरोप है कि बाबा के समर्थकों ने चैनल वन के पत्रकार नागेंद्र भाटी के साथ बाबा के समर्थकों ने धक्का मुक्की की और जबरन भीतर ले जाने की कोशिश की। नागेंद्र ने बिना पुलिस वालों के भीतर जाने से मना किया जिसको लेकर बहुत देर तक बाहर में विवाद हुआ। बाद में जब पुलिस की टीम पहुंची तो नागेंद्र और बाबा के समर्थक को पुलिस थाने ले गई। बाबा के समर्थकों के खिलाफ शिकायत की गई है। बाबा के समर्थकों की बदसलूकी के शिकार पत्रकार नागेंद्र भाटी का कहना है कि उन्होंने थाने में शिकायत की. उनका कहना है कि बाबा के समर्थक उनके साथ मारपीट करने पर उतारू थे।

उधर बाबा ने खुद मोर्चा संभाला तालकटोरा स्टेडियम के भीतर जहां उन्होंने भक्तों से पुछवाया कि क्या उन्हें पैसे मिले हैं? भक्तों ने कहा कि उन्हें पैसा नहीं मिला है। वे तो खुद अपनी मर्ज़ी से बाबा का गुणगान कर रहे हैं। यह अलग बात थी कि बाबा ने कुछ चुने हुए भक्तों से ही सवाल-जवाब किया। यह वीडियो यू ट्यूब पर डाल दिया गया है और इसका लिंक फेसबुक पर भी पड़ा हुआ है।

इसके अलावे बाबा ने अपनी वेबसाइट पर भी अपने भक्तों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और सभी चैनलों में फोन करके उन्हें होने वाले लाभ के बारे में बताएं। दिलचस्प बात यह है कि वेबसाइट पर प्रवचन प्रसारित करने वाले चैनलों की सूची में उनसे पंगा लेने वाले स्टार न्यूज़ का नाम अभी भी सबसे उपर लिखा है।

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निर्मल बाबा को जिस मीडिया ने आसमान पर चढ़ाया, वही रसातल में उतार रहा है निर्मल बाबा को जिस मीडिया ने आसमान पर चढ़ाया, वही रसातल में उतार रहा है(17)

यदि वाकई स्टार न्यूज को चमत्कारी बाबाओं का महिमा मंडन किए जाने पर ऐतराज रहा है, तो यह उसे अब कैसे सूझा कि ऐसे विज्ञापन नहीं दिखाए जाने चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो विज्ञापन की रेट को लेकर विवाद हुआ होगा या फिर ये लगा होगा कि जितनी कमाई बाबा के विज्ञापन से हो रही है, उससे कहीं अधिक का फायदा तो टीआरपी बढऩे से ही हो जाएगा।”

-तेजवानी गिरधर-

समागम के नाम पर दरबार लगा कर अपने भक्तों की समस्याओं का चुटकी में कथित समाधान करने की वजह से लोकप्रिय हो रहे निर्मल बाबा स्वाभाविक रूप से संस्पैंस बढऩे के कारण यकायक इलैक्ट्रॉनिक मीडिया के निशाने पर आ गए हैं। स्टार न्यूज ने अपने क्राइम के सीरियल सनसनी पर एक विशेष रिपोर्ट प्रसारित कर उनका पूरा पोस्टमार्टम ही कर दिया है। अब तक उनके बारे में कोई विशेष जानकारी किसी समाचार माध्यम पर उपलब्ध नहीं थी, उसे भी कोई एक माह की मशक्कत के बाद उजागर किया है कि आखिर उनकी विकास यात्रा की दास्तान क्या है। इतना ही नहीं उन पर एक साथ दस सवाल दाग दिए हैं। दिलचस्प मगर अफसोसनाक बात ये है कि ये वही स्टार न्यूज चैनल है, जो प्रतिदिन उनका विज्ञापन भी जारी करता रहा है और अब न्यूज चैनलों पर विज्ञापनों के जरिए चमत्कारों को बढ़ावा देने से की प्रवृत्ति से बचने की दुहाई देते हुए बड़ी चतुराई से बाबा के करोड़ों रुपए कमाने पर सवाल खड़े कर रहा है। इतना ही नहीं अपने आप को ईमानदार जताने के लिए विज्ञापन अनुबंध की तय समय सीमा समाप्त होने के बाद वह इसका प्रसारण बंद करने की भी घोषणा कर रहा है।

सवाल उठता है कि यदि वाकई स्टार न्यूज को चमत्कारी बाबाओं का महिमा मंडन किए जाने पर ऐतराज रहा है, तो यह उसे अब कैसे सूझा कि ऐसे विज्ञापन नहीं दिखाए जाने चाहिए। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो विज्ञापन की रेट को लेकर विवाद हुआ होगा या फिर ये लगा होगा कि जितनी कमाई बाबा के विज्ञापन से हो रही है, उससे कहीं अधिक का फायदा तो टीआरपी बढऩे से ही हो जाएगा। वजह स्पष्ट है कि जब सारे चैनल किसी के गुणगान में जुटे हों तो जो भी चैनल उसका नकारात्मक पहलू दिखाएगा, दुनिया उसी की ओर आकर्षित होगी। इसी मसले से जुड़ी एक तथ्यात्मक बात ये भी है कि स्टार न्यूज ने बाबा के बारे में जो जानकारी बटोरने का दावा किया है, वह सब कुछ तो सोशल मीडिया पर पहले से ही आने लग गई थी। उसे लगा होगा कि जब बाबा की खिलाफत शुरू हुई है तो कोई और चैनल भी दिखा सकता है, सो मुद्दे को तुरंत लपक लिया। मुद्दा उठाने को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रस्तावना तक दी, जिसकी भाषा यह साबित करती प्रतीत होती है, मानो चैनलों की भीड़ में अकेला वही ईमानदार है।

असल में निर्मल बाबा चमत्कारी पुरुष हैं या नहीं या उनका इस प्रकार धन बटोरना जायज है या नाजायज, इस विवाद को एक तरफ भी रख दिया जाए, तो सच ये है कि उन्हें चमत्कारी पुरुष के रूप में स्थापित करने और नोट छापने योग्य बनाने का श्रेय इलैक्ट्रॉनिक मीडिया को जाता है। बताते हैं कि इस वक्त कोई चालीस चैनलों पर निर्मल बाबा के दरबार का विज्ञापन निरंतर आ रहा है। जब बाबा भक्तों से कमा रहे हैं तो भला इलैक्ट्रॉनिक मीडिया उनसे क्यों न कमाए? माना कि चैनल चलाने के लिए धन की जरूरत होती है, मगर इसके लिए आचार संहिता, सामाजिक सरोकार, नैतिकता व दायित्वों को तिलांजलि देना बेहद अफसोसनाक है। ऐसे में क्या यह सवाल सहज ही नहीं उठता कि निर्मल बाबा के विज्ञापन देने वाले चैनल थोड़ा सा तो ख्याल करते कि आखिर वे समाज को किस ओर ले जा रहे हैं? क्या जनता की पसंद, जनभावना और आस्था के नाम पर अंधविश्वास को स्थापित कर के वे अपने दायित्व से च्युत तो नहीं हो रहे?

कैसी विडंबना है कि एक ओर जहां इस बात पर जोर दिया जाता है कि समाचार माध्यमों को कैसे अधिक तथ्यपरक व विश्वनीय बनाया जाए और उसी के चलते चमत्कार से जुड़े प्रसंगों पर हमले किए जाते हैं, वहीं हमारे मीडिया ने कमाने के लिए चमत्कारिक व्यक्तित्व निर्मल बाबा की कमाई से कुछ हिस्सा बांटना शुरू कर दिया। सच तो ये है कि इलैक्ट्रॉनिक मीडिया की ही बदौलत पिछले कुछ वर्षों में एकाधिक बाबा अवतरित हुए हैं। वे इसके जरिए लोकप्रियता हासिल करते हैं और धन बटोरने लग जाते हैं। दोनों का मकसद पूरा हो रहा है। सामाजिक सरोकार जाए भाड़ में। बाबा लोग पैसा खर्च करके लोकप्रियता और पैसा बटोर रहे हैं और चैनल पैसे की खातिर बिकने को तैयार बैठे हैं।

थोड़ा सा विषयांतर करके देखें तो बाबा रामदेव की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनसे भी बेहतर योगी हमारे देश में मौजूद हैं और अपने छोटे आश्रमों में गुमनामी के अंधेरे में काम कर रहे हैं, मगर बाबा रामदेव ने योग सिखाने के नाम पर पैसा लेना शुरू किया और उस संचित धन को मीडिया प्रबंधन पर खर्च किया तो उन्हें भी इसी मीडिया ने रातों रात चमका दिया। यद्यपि उनके दावों पर भी वैज्ञानिक दृष्टि से सवाल उठाए जाते हैं, मगर यदि ये मान लिया जाए कि कम से कम चमत्कार के नाम तो नहीं कमा रहे, मीडिया की बदौलत ऐसे चमके हैं कि उसी लोकप्रियता को हथियार बना कर सीधे राजनीति में ही दखल देने लग गए हैं।

अन्ना हजारे का मामला कुछ अलग है, मगर यह सौ फीसदी सच है कि वे भी केवल और केवल मीडिया की ही पैदाइश हैं। उसी ने उन्हें मसीहा बनाया है। माना कि वे एक अच्छे मकसद से काम कर रहे हैं, इस कारण मीडिया का उनको चढ़ाना जायज है, मगर चमकने के बाद उनकी भी हालत ये है कि वे सीधे पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को ही चुनौती दे रहे हैं। आज अगर उनकी टीम अनियंत्रित हो कर दंभ से भर कर बोल रही है तो उसके लिए सीधे तौर यही मीडिया जिम्मेदार है। अन्ना और मीडिया के गठजोड़ का ही परिणाम था कि अन्ना के आंदोलन के दौरान एकबारगी मिश्र जैसी क्रांति की आशंका उत्पन्न हो गई थी।
लब्बोलुआब इलैक्ट्रॉनिक मीडिया जितना धारदार, व्यापक व प्रभावशाली है, उतना ही गैर जिम्मेदाराना व्यवहार कर रहा है। सरकार व सेना के बीच कथित विवाद को उभारने का प्रसंग इसका ज्वलंत उदाहरण है। इसे वक्त रहते समझना होगा। कल सरकार यदि अंकुश की बात करे, जो कि प्रेस की आजादी पर प्रहार ही होगा, तो इससे बेहतर यही है कि वह बाजार की गला काट प्रतिस्पर्धा में कुछ संयम बरते और अपने लिए एक आचार संहिता बनाए।

 

 

 

(तेजवानी गिरधर राजस्थान के जाने माने पत्रकार हैं। उनसे मोबाइल नंबर 07742067000 या उनके ई-मेल ऐड्रेस : tejwanig@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।)

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निर्मल बाबा का जादू हुआ खत्म, पहुंचने लगे शिवलिंग और भगवान वापस घरों में निर्मल बाबा का जादू हुआ खत्म, पहुंचने लगे शिवलिंग और भगवान वापस घरों में(2)

-नरेंद्र दीक्षित-

नैमिषारण्य, (सीतापुर)।। शिवलिंग को अपने घर में न रखने और मंदिर में छोड़ आने की सलाह देने वाले निर्मल बाबा से लोगों का मोहभंग होने लगा है। अब लोग मंदिरों में छोड़े गए शिवलिंग वापस घर ले जाने लगे हैं।

सीतापुर के नैमिषारण्य के प्रसिद्ध चक्र कुंड में लोगों ने सैकड़ों शिवलिंग छोड़ दिए थे। स्नान करने वाले लोगों के पांवों में शिवलिंग न लगे इस कारण पुजारी उन्हें बाहर निकाल कर रख देते थे और कुछ दिनों पहले तक 150-200 शिवलिंग इकट्ठा हो गए थे। ललिता देवी मंदिर के पुजारी श्री हरि प्रसाद जी का कहना है कि शिवलिंग घर से बाहर रखने के कारण उन्हें फायदा होने की बजाय नुकसान ही हुआ है। उनकी गाड़ी का कुछ ही दिनों पहले ऐक्सीडेंट हो गया था।

मंदिर के पुजारी बताते हैं कि कुंडों, तालाबों और घाट आदि समेत पूजास्थलों पर लाकर रखे गए शिवलिंग व देवी देवताओं की मूर्तियों को पिछले कुछ दिनों में भक्त वापस घर ले गए हैं।

टीवी के अनेक चैनलों के जरिए निर्मल बाबा अपने भक्तों को सुख सम़द्धि लाने के लिए जो तरीके बताते थे उनमें से एक यह भी था कि शिवलिंग को घर में न रखा जाए। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों ने अपने घरों से शिवलिंगों व देवी देवताओं की मूर्तियों को मंदिरों में रख दिया था। इनकी बढ़ती तादाद से मंदिर के पुजारी और प्रबंधक भी हैरान-परेशान थे।

लेकिन भला हो इंटरनेट और टीवी चैनलों का जिनकी वजह से पिछले कुछ दिनों से लोग अपनी मूर्तियों को खोजते हुए मंदिर पहुंच रहे हैं। कुछ को तो मूर्तियों वापस मिल गईं,लेकिन कुछ खाली हाथ लौट रहे हैं। करीब महीने भर पहले अपने घर का शिवलिंग कुंड में छोड़ने वाले सीतापुर के राजेश त्रिपाठी का कहना है कि उन्होंने निर्मल बाबा की बातों में आकर ऐसा कर दिया था, लेकिन अब कुछ बेचैनी लग रही है। एक बुजुर्ग महिला भी अपने घर में बरसों से रखा शिवलिंग दोबारा वापस लेने आई थीं जिसे उन्होंने पंद्रह दिनों पहले यहां छोड़ दिया था।

उधर शीतला माता मंदिर के पुजारी प्रदीप दीक्षित ने बताया कि निर्मल बाबा के कहने से शिवलिंग छोड़ने आने वालों को वेद व पुराण के हवाले से शिवलिंग का महत्व समझाया जा रहा है और उन्हें ऐसा करने से रोका जा रहा है। एक अन्य मंदिर के  पुजारी शिवशंकर शुक्ला ने बताया कि जो मूर्तियां बच जाएंगी उन्हें भक्तों को दे दिया जाएगा या शुभ मुहूर्त देखकर विसर्जित कर दिया जाएगा। अभी भी इच्छुक भक्तों को मूर्तियां व शिवलिंग सौंपे जा रहे हैं, ताकि उनके हाथों देवी-देवताओं की पूजा हो सके।

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गुणगान से ज्यादा लोकप्रिय है निर्मल बाबा का विरोध, स्टार न्यूज़ की TRP आसमान पर गुणगान से ज्यादा लोकप्रिय है निर्मल बाबा का विरोध, स्टार न्यूज़ की TRP आसमान पर(8)

निर्मल बाबा की ‘किरपा’ उन्हें चाहने और उनका गुणगान करने वाले चैनलों को जितनी लोकप्रियता उनके प्रवचन वाले प्रोग्राम से मिल रही थी, उससे कहीं ज्यादा लोग उनके पोल-खोल को देख रहे हैं। पिछले हफ्ते की टीआरपी रिपोर्ट में स्टार न्यूज़ को जबर्दस्त उछाल मिला है। बाबा का कच्चा चिट्ठा खोलने वाले अखबार प्रभात खबर के पाठकों की संख्या में भी ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी हुई है। इतना ही नहीं, मीडिया दरबार को भी इंटरनेट यूजरों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला है।

टैम द्वारा 15वें सप्ताह में जारी की गई सू्ची में हालांकि आजतक अभी भी नंबर वन बना हुआ है, लेकिन स्टार न्यूज़ तीसरे स्थान से तकरीबन चार अंक उछल कर नंबर 2 पर आ गया है। स्टार न्यूज़ की ‘किरपा का कारोबार’ मुहिम की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इसके कारण चैनल की टीआरपी 12.6 से बढ़ कर 16.3 पहुंच गई। हालांकि स्टार न्यूज़ ने इस मुहिम को न्यूज़ एक्सप्रेस के बाद शुरु किया था, लेकिन डिस्ट्रीब्यूशन में आगे होने के कारण उसे फायदा मिल गया। पिछले हफ्ते जिन तीन चैनलों को बढ़त मिली उनमें आजतक, और स्टार न्यूज के साथ सिर्फ न्यूज एक्सप्रेस ही रहा।

हालांकि बाबा जी की आजतक को दी गई सफाई को कई हलकों में ‘स्पॉन्सर्ड’ करार दिया गया, लेकिन एक्सक्लूलिव होने के कारण उसे भी खासी लोकप्रियता मिली। बाबा के खोखले और बेहूदा तर्कों के साथ-साथ किरपा की रट भरा इंटरव्यू दिन भर चला कर आजतक ने 3.2 अंकों की टीआरपी बढ़ाई और चैनल की कुल टीआरपी 19.8 पहुंच गई। ग़ौरतलब है कि खबरिया चैनलों को ऐसी जबर्दस्त लोकप्रियता किसी बहुत बड़ी घटना के समय मिलती है।

हालांकि दोनों नावों में सवार रहने वाले या अपना रुख साफ न रखने वाले चैनलों को दर्शकों ने नकार दिया है। ज़ी न्यूज़ और इंडिया टीवी ने भी निर्मल बाबा की पिछली जिंदगी और उनके प्रवचनों से जुड़े कई कार्यक्रम पेश किए, लेकिन न तो उनका उद्देश्य स्पष्ट था और न ही उनमें कोई संदेश था। दोनों ही चैनलों को कोई फायदा नहीं हुआ, अलबत्ता उनकी लोकप्रियता 0.1 प्रतिशत गिर गई। न्यूज़ एक्सप्रेस, स्टार न्यूज़ और आजतक को छोड़ कर सभी समाचार चैनलों की टीआरपी गिरी है।

झारखंड के अखबार प्रभात ख़बर के सर्कुलेशन में भी जबर्दस्त इज़ाफा हुआ है। अखबार के संपादक हरिवंश ने मीडिया दरबार को बताया कि उन्होंने हमेशा जन सरोकार के मुद्दों को तरज़ीह दी है और इसका फायदा होता रहा है। निर्मल बाबा के पोल-खोल पर भी ऐसा ही हुआ। उनका कहना है कि उनके अखबार ने जब से पोल-खोल की रिपोर्ट छापनी शुरु की तब से हर सेंटर पर अधिक कॉपियों की मांग आने लगी और पाठक अभी तक इससे जुड़ना जारी रखे हुए हैं। प्रभात खबर की देखा-देखी  बाबा-विरोधी लहरों पर सवार होने के लिए दैनिक भाष्र्कर और जागरण जैसे अखबारों ने भी अपने अखबारों में निर्मलजीत नुरला की कहानियों को प्रकाशित किया, उन्हें भी थोड़ी-बहुत लोकप्रियता मिली, लेकिन प्रभात खबर जितनी नहीं।

वेब मीडिया पर तो बाबा के निंदकों की भारी किरपा रही। पिछले एक महीने में पहले से ही नंबर वन रहे मीडिया पोर्टल भड़ास4मीडिया.कॉम की लोकप्रियता में पिछले महीने 32 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। विष्फोट.कॉम की लोकप्रियता भी 70 प्रतिशत बढ़ गई। सबसे ज्यादा किरपा तो सबसे पहले नोटिस पाने वाले हमारे पोर्टल मीडिया दरबार को हुई। इसकी लोकप्रियता में पिछले एक महीने में औसतन 280 प्रतिशत की व़द्धि हुई है।

बाबा के अंधविश्वास भरे अभियान के साथ-साथ पोल-खोल भी ज़ारी है। उम्मीद की जाती है कि इस अभियान से निर्मल बाबा के अंधभक्तों की आंखे कुछ हद तक खुली जरूर होंगी।

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-जगमोहन फुटेला-

कवि ओमप्रकश आदित्य की एक कविता सुनी थी कोई पैंतीस साल हुए रुद्रपुर के एक कवि-सम्मलेन में. शीर्षक था, “कोई मेरो का कल्लेगो” (कोई मेरा क्या कर लेगा). अब वो कविता शब्दश: याद नहीं. लेकिन उस कविता का पात्र दुनिया भर की हरामज़दगी करने की बात कहता है. इस चुनौती के साथ कि खुद भ्रष्ट और कुछ करने को अनातुर व्यवस्था उसका कर क्या पाएगी. निर्मल बाबा वही हैं. व्यवस्था भी वैसी. सारे देश को बुद्धू बना रहा है वो सरेआम. मगर व्यवस्था है कि कुछ करने को आतुर नहीं है. आज वो इस स्थिति में है कि व्यवस्था को अपनी रखैल बना सके.

रुद्रपुर में ही मेरा एक दोस्त कहा करता था, दुनिया में मूर्ख बनने वालों की कमी नहीं है, बस बनाने वाला चाहिए (उसने तो मूर्ख की जगह कुछ और कहा था, लेकिन मैं शालीनता की खातिर उस से मिलते जुलते इस शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूँ). निर्मल बाबा ने वो कर के दिखा दिया है. उस की कलाकारी देखिए कि जिन चैनलों पे उस के खिलाफ(?) बोला जाता है उन्हीं पे उस की प्रशंसा के कार्यक्रम चलते हैं. भले ही विज्ञापन के रूप में. उसके चालू और चैनल के भड़भूजेपन का आलम ये है कि वो खुद अपने इश्तहारी कार्यक्रम में अपनी आलोचना कराता है और फिर उसी में अपना गुणगान. ऊपर कोने में चैनल का लोगो है ही. लगता है कि चैनल पे जो आलोचना हुई थी वो चैनल ने अपनी तरफ से तारीफ़ में बदल दी है. मज़े की बात ये है कि जब तारीफ़ वाला हिस्सा आता है तो ऊपर विज्ञापन भी लिखा नहीं होता. ‘विज्ञापन’ शब्द भी लगातार नहीं है. कभी आता है, कभी जाता है. चैनल चापलूस हो गया है. इतना दम है बाबा के पैसे में कि वो उसके आगे बोरी बिछा के लेटने को तैयार है. निर्मल बाबा का विरोध भी चैनल भड़वागिरी के तरीके से कर रहे हैं. सच तो ये है कि बाबा के खिलाफ(?) इस तरह के प्रचार से उसका प्रसार और ज्यादा हो रहा है. सुना है बाबा अपने भक्तों में वो सीडियां बंटवा रहा है. ये बता के देखो जिन चैनल वालों ने उसके खिलाफ दुष्प्रचार किया वो खुद अब उसकी तारीफ़ कर रहे हैं. लोग और ज्यादा बेवकूफ बन रहे हैं. भीड़ बढ़ रही है. आमदनी भी और इस उपकार के बदले में चैनलों को मिलने वाली विज्ञापन-राशि भी.

अब कोई चमत्कार ही हो जाए तो बात लगा है वरना आप नोट कर के रख लो. बाबा का कुछ नहीं बिगड़ने वाला. खासकर उसके खिलाफ हो दर्ज हो रही इस तरह की शिकायतों के बाद. अपन को तो ये शिकायतें भी फर्जी और अपने खिलाफ खुद दर्ज कराई लगती हैं. बेतुकी और बेसिरपैर की. मिसाल के तौर पर कि मैंने बाबा के कहने से खीर खाई. मुझे शुगर हो गई. अब इस एक शिकायत को ही सैम्पल केस मान लें. क्या सबूत है कि बाबा ने मीठी खीर खाने को कहा ही था? खीर क्या कोई ज़हर है? माना कि डायबिटीज़ हो तो नहीं खानी चाहिए. मगर क्या बाबा को बताया गया था कि भक्त मधुमेह का मरीज़ है? और अगर वो पहले से है तो उसने फिर भी क्यों खाई? खानी ही थी तो जिस डाक्टर का इलाज चल रहा था उस की राय के अनुसार क्यों नहीं खाई? और फिर ये क्या पता कि बाबा के यहाँ हो आने के बाद आपने मीठी खीर के अलावा और भी कोई बदपरहेज़ी की थी या नहीं? की या नहीं की, क्या आप लगातार अपने ब्लड शुगर की माप करते हो? करते हो तो तुरंत खीर खानी बंद कर दवा क्यों नहीं ली और नहीं करते हो तो क्या वो बाबा आ के करेगा? वकीलों दलीलों के द्वंद्व में भी जीतेगा बाबा ही. भक्त अगर भक्त है तो वैसे ही भाग जाएगा. और अगर सच में ही दुखी है तो नीचे निचली अदालत तक के वकील की फीस भी नहीं चुका पाएगा. बाबा उसको ले के जाएगा सुप्रीम कोर्ट तक.

अगर सिर्फ पेट सिकोड़ लेने की कला के साथ बाबा रामदेव बरसों पुरानी योग की पद्धति के साथ सौ पचास रूपये की दवाइयां बेच सकते हैं तो निर्मल नरूला तो सिर्फ समोसे और उस से भी सस्ते मंदिर में स्नान भर की बातें कह रहे हैं. एक आदमी को बीडी पी लेने की नसीहत भी उन ने दी. और भैया हिंदुस्तान में जो बिना पैसे के इलाज करता हो उसको लोग पूजते और वो मरे तो उसकी समाधि या मज़ार तक बना लेने तक के आदी हैं. फिर भले ही वो किसी हाईवे के बीचोंबीच किसी जानलेवा मोड़ का कारण ही क्यों न हो!

दुर्भाग्य इस देश का ये है कि वो सरासर बेवकूफों सी बातें कर के बेवकूफ बनाता जा रहा है. समझ उसके खेल को हर कोई रहा है. मगर कर कोई कुछ नहीं पा रहा. इसकी वजह भी सिर्फ कुछ न करने की इच्छा ही नहीं है. वजह ये भी है कि संतों और भक्तों के इस पावन देश में अपनी पवित्रतम नदी में कुत्तों तक की सड़ी गली लाश बहाना भी पुण्य की परिभाषा में आता है और संतई की आड़ में छोटे छोटे बच्चों के साथ भी जो कुकर्म कर डाले लोग उसे बापू (xxराम) समझ कर पूजते रहते हैं. किसी भी सरकार या प्रशासन में संतई या सुधार की आड़ में देश को शोषित या भ्रमित करने वाले ऐसे किसी भी दुश्चरित्र के खिलाफ कुछ करने साहस नहीं रहा है जिस के पीछे भक्तों क्या, महज़ तमाशबीनों की भीड़ भी हो. और निर्मल बाबा के मामले में तो भारत की दंड विधान संहिता भी जैसे मौन है. कहाँ लिखा है कि खीर खाने को कहना या धारीदार लुंगी पहनने को कहना अपराध माना जाएगा? दो हज़ार रूपये समागम में आने की फीस बाबा पहले से बता के लेता है. दसवंध लेने भी बाबा या उसके बंदे किसी के घर जाते नहीं. राम रहीम की तरह सिर पे कलगी लगा के वो अपने आप को किसी गुरु का अवतार भी नहीं बता रहा कि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हों. क्या कह के पकड़ ले जायेगी पुलिस उसे? किस दफा में चालान पेश होगा? किस कुसूर की सजा मिलेगी उसे? लाख टके का सवाल ये है कि बाबाओं को भी ढोंगी मान सकने का प्रबंध और क़ानून की किताबों में वो अनुबंध ही कहाँ है जिस के न होने से निर्मल बाबा जैसे लोग लगातार जनता का शोषण और धनोपार्जन ही नहीं कर रहे. इस देश की सत्ता, व्यवस्था और आस्था का मज़ाक भी उड़ा रहे हैं. कोई मेरो का कल्लेगो की स्टाइल में!

ये व्यवस्था ऐसे ही चली तो वो दिन दूर नहीं जब किसी भी राम रहीम और रामदेव की तरह दुनिया अपने पीछे लगाए निर्मल बाबा भी आपको नेता अपने क़दमों में बिठाए मिलेंगे.

(जगमोहन फुटेला वरिष्ठ पत्रकार हैं और वर्तमान में जर्नलिस्टकम्युनिटी.कॉम के संपादक हैं।)

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लुधियाना [श्रीधर राजू]। विवादों के चलते एकाएक चर्चा में आए निर्मल बाबा के लुधियाना में रहने वाले बड़े भाई मंजीत सिंह नरूला और उनके परिजन धर्म संकट में हैं। दरअसल, निर्मल बाबा के खिलाफ उनके ही सगे जीजा एवं वरिष्ठ राजनेता इंदर सिंह नामधारी ने मोर्चा खोल रखा है। ऐसे में मंजीत सिंह नरूला और बाकी परिवार के सदस्यों के सामने अजीब धर्म संकट है कि वह निर्मल बाबा और इंदर सिंह में से आखिर किसका समर्थन करें। वहीं, मंजीत सिंह की बीमार माता [94] भी अपने छोटे बेटे निर्मल के इस प्रकरण से अंजान हैं।

शहर के मॉडल टाउन के नजदीक पॉश इलाके में रहने वाले उद्यमी मंजीत सिंह नरूला बातचीत को इसी शर्त पर राजी हुए कि उनके घर के पते का उल्लेख नहीं किया जाए। तस्वीरें भी नहीं खींचने का आग्रह करते हुए उन्होंने भावुक होकर कहा कि उनका परिवार मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं होना चाहता। उन्होंने बताया कि आज भी ज्यादातर पड़ोसी, दोस्त आदि यह नहीं जानते कि निर्मल बाबा उनके सगे छोटे भाई हैं। उनको लेकर विवाद तो अब पैदा हुआ, पहले जब लोग उनसे मिलने को बेकरार रहते थे, तब भी परिवार ने कभी उनसे अपने रिश्ते जान-बूझकर जगजाहिर नहीं किए थे।

नरूला ने निर्मल बाबा से अपने रिश्तों को उजागर नहीं करने को लेकर तर्क दिया कि दरअसल उनके परिवार ने कभी निर्मल बाबा के नाम को भुनाने का लालच नहीं रखा। नरूला ने बताया कि लगभग पांच साल पहले एक पारिवारिक समारोह में निर्मल से मुलाकात हुई थी। खुद कभी बुजुर्ग माता का हाल जानने के मकसद से वही [निर्मल] फोन करते हैं। मां भी निर्मल से लगभग दस साल से नहीं मिली। इसकाएक कारण निर्मल का बाबा के रूप में व्यस्त हो जाना है।

नरूला परिवार के सभी सदस्यों ने भले ही बाबा बनाम नामधारी [जीजा-साले] में वैचारिक मतभेद के मद्देनजर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन इतना जरूर कहा निर्मल बाबा के व्यक्तित्व में कुछ तो है, वर्ना इतने लोग उनके भक्त कैसे बन गए। नामधारी के विरोध के सवाल पर पूरे परिवार ने कोई टिप्पणी नहीं की। बताया जाता है कि निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह नरूला का जन्म पटियाला के समाना में हुआ था। पिता की मौत के बाद वर्ष 1962 में पूरा परिवार लुधियाना शिफ्ट हो गया था। निर्मल बाबा ने लुधियाना के गवर्नमेंट कॉलेज से 1972 में बीए की डिग्री ली थी।

मंजीत सिंह ने बताया कि निर्मल पढ़ाई में काफी होशियार था और पढ़ाई करने के तत्काल बाद ही वह व्यवसाय करने के लिए लुधियाना छोड़ कर डाल्टनगंज [झारखंड] अपनी बहन के घर चले गए थे।

(जागरण)

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निर्मल बाबा नामक इस ढोंगी को इस काम में लाने वाला कौन है? अगर रिपोर्टों की ही मानें तो पता चलता है कि निर्मल ब्यापार में पूरी तरह दीवालिया हो चुका था। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वो इस बाबागिरी के कारोबार को शुरू कर सके। बाबागिरी के इस कारोबार को शुरू करने के लिए करोड़ों रुपए की पूंजी लगी होगी।

इस बात की भी जांच होनी चाहिए कि यह सारी पूंजी लगाने वाला आखिर कौन है, अब यह बात तो जगजाहिर हो चूका है की निर्मल शुरू में स्टूडियो किराये पर लेकर फिल्म और टीवी कलाकारों की टीम से समागम की फिल्म बनवा कर चैनलों पर बिज्ञापन चलवाता था।

उसने अपने इस बाबागिरी के कारोबार को जमाने का जो काम किया है, इसमें करोड़ो रुपए की पूंजी आखिर किसने लगाई होगी यह जाँच का मामला है। मेरा तो मानना है कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जाँच भारत सरकार को करानी चाहिए। निर्मल के पीछे जो पूंजी लगाने वाला ब्यक्ति है वो भी पकड़ में आना चाहिए।

निर्मल शुरू में एक साधारण इन्सान था उसे इस मुकाम तक लाने वाले ब्यक्ति को भी तलाश कर समाज के सामने लाना चाहिए। इस नाजायज कारोबार में निर्मल का साथ देने वाले तमाम लोग भी कसूरवार हैं। उनकी भी खोज होनी चाहिए।

निर्मल दरबार के खाते से जिन दूसरे लोगो के खाते में पैसा गया है उनको भी कानून की गिरफ्त में लेना चाहिय क्योकि यह पैसे का ट्रांसफर आयकर कानून के विरुद्ध हुआ है। भारत सरकार और आयकर बिभाग को तुरंत कार्रवाई शुरू करनी चाहिए। निर्मल दरबार और इससे जुड़े लोगो के बैंक कारोबार पर तुरंत रोक लगाने की जरूरत है।

यह पैसा देश के आम लोगो का है और इस पैसे को जब्त कर सरकारी खजाने में जमा करने की करवाई करनी चाहिए। टीवी चैनल, जिन पर निर्मल का विज्ञापन चल रहा है या चलता था, उनके विरुद्ध भी तत्काल भारत सरकार को करवाई करनी चाहिए क्योंकि ये तमाम टीवी चैनल विज्ञापन को समाचार या कार्यक्रम के प्रसारण की तरह चला रहे थे। यह भी कानून की दृष्टि से अपराध है।

-कैलाश साहू, रांची (झारखंड)

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निर्मल बाबा मंदिर बनाना चाहते हैं या फाइव स्टार होटलों की चेन? निर्मल बाबा मंदिर बनाना चाहते हैं या फाइव स्टार होटलों की चेन?(5)

-सुग्रोवर||

विवादास्पद निर्मल बाबा दो – दो हज़ार रुपये लेकर अपने दरबार में आये दुखियारों पर कथित ‘किरपा’ बरसा पाए या नहीं लेकिन समागम में आने वालों से वसूले जाने वाले रुपये से होटल चेन बना रहें हैं. पिछले दिनों आजतक पर दिए अपने इंटरव्यू में बाबा ने साफ कहा था कि वे अपने भक्तों से पैसे इसलिए वसूल रहे हैं कि उन्हें किरपा बरसाने वाली शक्तियों का  का प्रचार करने के लिए एक मंदिर बनाने के लिए इसकी जरूरत है।

हमारे एक सुधी पाठक संजीव ने हमें मेल के जरिए ध्यान दिलाया कि निर्मलजीत नरुला उर्फ निर्मल बाबा एक होटल चला रहे हैं. हमने जब इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि निर्मल बाबा ने निर्मलहोटल.कॉम वेब साईट भी बनाई है. इस साईट पर इसे पञ्च सितारा होटल बताया जा रहा है. इस वेब साईट का डोमेन दो अक्तूबर उन्नीस सौ ग्यारह को नेट फॉर इण्डिया के जरिये पंजीकृत करवाया गया. जब हमने इस डोमेन के मालिक का पता लगाया तो हम हक्का बक्का रह गए क्योंकि ये डोमेन निर्मलजीत नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा हैं.
इस वेबसाइट के अनुसार होटल की लोकेशन E 66, ग्रेटर कैलाश एक है. जहाँ एक्ज़ीक्यूटिव डबल रूम छह हज़ार रूपये का है तो डीलक्स रूम 5500 रुपये में उपलब्ध है.

वेबसाइट के अनुसार इंदिरा गाँधी हवाई अड्डे से 5 कि.मी. दूर स्थित इस वातानुकूलित बेहतरीन बुटीक होटल में एलसीडी उपग्रह टेलीविजन, सीधे डायल टेलीफोन, 24 घंटे कॉफी शॉप की पेशकश मल्टी भोजन मेनू, 24 घंटे कक्ष सेवा, कक्ष में चाय-कॉफी मेकर मशीन, डीवीडी प्लेयर जैसी सुविधाओं के साथ वाई-फाई युक्त वातानुकूलित कमरे उपलब्ध कराता है.

जब हमारी टीम ने होटल जाकर वहां के स्टाफ से इस बारे में जानना चाहा तो वहां सभी ने चुप्पी साध ली. हालांकि आस-पास के लोगों ने साफ कहा कि ये होटल किसी बाबा का ही है. समाचार चैनल स्टार न्यूज से बातचीत में इस होटल के पूर्व मालिक अश्विनी कपूर ने बताया है कि निर्मल बाबा होटलों की एक श्रृंखला शुरू करना चाहते थे. इसी क्रम में सितंबर 2011 के पहले सप्ताह में इस होटल की डील की. बाबा के पास जाने से पहले इसका नाम अक्षरा होटल था. अश्विनी कपूर कंपिटेंट होल्डिंग के प्रमुख हैं.

अब आप ही तय करें कि ये निर्मल बाबा जो आजतक पर कथित साक्षात्कार के दौरान कहते हैं कि वे भक्तों से मिलाने वाली राशि से एक विशाल मंदिर बनाना चाहते हैं. अब आप खुद अंदाज़ा लगा लें वे कौन सा मंदिर बना रहें है
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‘किरपा’ के कारोबारी निर्मल बाबा की मुसीबतें बढ़ने लगी हैं। उन्‍होंने शुक्रवार को ‘आज तक’ को दिए गए इंटरव्यू में बड़े ही बोल्ड तरीके से कहा था कि उनका सालाना टर्न ओवर 235-238 करोड़ रुपये के आसपास का है और वह पूरी रकम पर इन्कम टैक्‍स भी देते हैं। लेकिन शनिवार को रांची के अखबार ‘प्रभात खबर’ ने उनके खातों से जुड़ी जो जानकारी सार्वजनिक की है, उससे बाबा का दावा झूठा लग रहा है। अखबार के मुताबिक निर्मल बाबा के दो खाते हैं। पहला खाता निर्मल दरबार के नाम से है जिसका नंबर टीवी पर चलता रहता है। दूसरा निर्मलजीत सिंह नरूला के नाम से है जिसका नंबर है 1546000102129694। इस खाते का नंबर टीवी पर नहीं दिखाया जाता, लेकिन इस खाते में चार जनवरी 2012 से 13 अप्रैल 2012 के बीच करीब 123 करोड़ (कुल 1,23,02,43,974) रुपये जमा हुए। इस राशि में से 105.56 करोड़ की निकासी भी हुई। 13 अप्रैल को इस खाते में 17.47 करोड़ रुपए बचे थे।

निर्मल बाबा को विभिन्न प्रकार की नकदी जमा पर 13 मई 2011 से 31 मार्च 2012 तक के बीच ब्‍याज के रुप में 85.77 लाख रुपये मिले थे। बाबा की कमाई पर अब इनकम टैक्‍स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की भी नजर है। संभव है, जल्‍द ही बाबा को इनके सामने सफाई भी देनी पड़ेगी। आयकर विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फाइनांशियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) इस बात पर नजर रखे हुए है कि निर्मल बाबा कितना कमाते हैं और कहां खर्च करते हैं।बाबा ने 25 करोड़ की एफडी भी करा रखी है।

इस बीच बाबा पर भक्‍तों की ‘किरपा’ घटती दिख रही है। ‘प्रभात खबर’ ने आज खबर छापी है कि निर्मल दरबार के नाम से आईसीआईसीआई बैंक के उस खाते (संख्या 002-905-010-576) में शुक्रवार को सिर्फ 34 लाख रुपये जमा किए गए हैं जिसमें पहले हर रोज औसतन एक करोड़ रुपये जमा हो रहे थे। पहले जहां औसतन चार से साढ़े चार हजार लोग प्रतिदिन निर्मल बाबा के खाते में राशि जमा कर रहे थे, वहीं शुक्रवार शाम पांच बजे तक यह संख्या 1800 भी नहीं पहुंच पाई।

बाबा को लेकर लोगों में संदेह बढ़ने की बात इंटरनेट सर्च ट्रेंड से भी साबित हो रही है। पहले जहां गूगल पर निर्मल बाबा का नाम सर्च क लोग बड़ी संख्‍या में गूगल पर निर्मल बाबा फ्रॉड की वर्ड डाल कर सर्च कर रहे हैं।

बाबा पुलिस और अदालत के शिकंजे में भी फंस सकते हैं। उनके खिलाफ चार शहरों में शिकायतें भी दर्ज हो गई हैं और लोग सड़कों पर भी उतर रहे हैं। नागपुर में अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने निर्मल बाबा के विरोध में प्रदर्शन किया। कार्याध्यक्ष उमेश चौबे व महासचिव हरीश देशमुख के नेतृत्व में मोर्चा निकाला गया। केंद्र सरकार से मांग की गई कि निर्मल बाबा के विरुद्ध धोखाधड़ी का प्रकरण चलाए। प्रदर्शन में फिरा के उपाध्यक्ष व तर्कशील संस्था पंजाब के अध्यक्ष बलविंदर बरनाला के अलावा अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। समिति बाबा को अपनी चमत्‍कारिक शक्ति दिखाने की चुनौती भी दे चुका है।

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निर्मल बाबा के विज्ञापन की टीआरपी से नंबर वन बने न्यूज़ चैनल आजतक ने निर्मल बाबा पर लग रहे आरोपों का जवाब उनसे ही मांगा. अभिसार शर्मा ने निर्मल बाबा से खूब करारे सवाल किए और बाबा ने सबका जवाब देने की कोशिश की ‘किरपा’ के सहारे।

अभिसार ने बाबा से जब उनके पैसे का हिसाब मांगा तो उन्होंने साफ कहा कि वे कोई ट्रस्ट या एनजीओ बनाने के पक्ष में नहीं है। पैसा जनता ने दिया है, लेकिन वे टैक्स देते हैं। जब अभिसार ने प्रभात खबर में छपी खबर का हवाला देते हुए पूछा कि वे 109 करोड़ रुपए का क्या कर रहे हैं तो उन्होंने बड़े ही बोल्ड लहजे में कहा, ‘मैं आपके आंकड़ों को दुरुस्त कर दूं.. मेरा सालाना टर्नओवर 238 करोड़ के आसपास का है.. 109 करोड़ का नहीं..”

बाबा ने साफ किया कि वे पैसा इसलिए इकट्ठा कर रहे हैं कि इसी पैसे से सभी चैनल उनका प्रवचन दिखाते हैं, उनका पेड प्रोग्राम दिखाते हैं। अब बारी अभिसार के जवाब देने की थी, जब बाबा ने साफ शब्दों में पूछा कि क्या कोई चैनल उनका प्रवचन मुफ्त में प्रसारित करने को तैयार है? सवाल का उत्तर नहीं मिल पाया।

दरअसल बाबा अब खुल कर मैदान में उतर आए हैं। उन्होंने अब तक विज्ञापन के दम पर सभी चैनलों का मुंह बंद रखा, लेकिन लगता है उनके मैनेजरों के बस में सभी चैनल नहीं रह पाए। फिर सबको साधने के झमेले से बेहतर उन्होंने समझा कि कम से कम उस चैनल पर तो बोला ही जाए जिसने अब तक हमला नहीं शुरु किया है।

बाबा ने अपने बयान से कम से कम एक बात तो साफ कर दिया। जिसने उन्हें पैदा किया वो कोई और नहीं इन्हीं चैनलों का लालच है जो अब उनके भाष्मासुर बन जाने पर अपना सर छुपाते भाग रहे हैं। कहना गलत न होगा कि पैसे के लालच में न्यूज चैनलों ने अपने नियम, सिद्धांत, कायदे और नैतिकता सबको बेच डाला है।

हालांकि अभिसार ने कई सवाल ऐसे ढंग से पूछे जिनसे लग रहा था कि वे वास्तव में बाबा को कठघरे में रखना चाहते हों, लेकिन जिसने भी इंटरव्यू देखा उसने यही कहा कि ये तो रजत शर्मा के आपकी अदालत से भी ज्यादा हो गया जहां न सिर्फ बाबा को बेदाग साबित कर दिया गया बल्कि उनका महिमामंडन भी हो गया। आसानी से समझा जा सकता है कि अब बाबा के प्रवचन का कॉन्ट्रैक्ट आजतक पर रिन्यू हो या नहीं, उनकी ‘किरपा’ तो बरस ही चुकी है।

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