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निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा बेतुके उपाय बताना बंद करे: दिल्ली हाईकोर्ट निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा बेतुके उपाय बताना बंद करे: दिल्ली हाईकोर्ट(3)

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निर्मलजीत नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा के खिलाफ क्या कार्रवाई की, दिल्ली पुलिस से पूछा कोर्ट ने.. निर्मलजीत नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा के खिलाफ क्या कार्रवाई की, दिल्ली पुलिस से पूछा कोर्ट ने..(0)

निर्मलजीत नरूला उर्फ़ निर्मल बाबा पर देश भर में शिकायतें दर्ज़ होने के बावजूद ढोंगी निर्मल बाबा का कुछ नहीं बिगड़ा मगर अब दिल्ली की एक अदालत ने निर्मल बाबा पर लोगों को धोखा देने और उनके साथ विश्वासघात करने के आरोप में दर्ज शिकायत पर अब तक की गई कार्रवाई के बारे में पुलिस से रिपोर्ट मांगी है.

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट नीरज गौर ने वकील प्रेम शंकर शर्मा की शिकायत पर कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने निर्देश दिल्ली पुलिस को दिया है. इस वकील ने पुलिस को निर्मल सिंह नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है.

अदालत ने इस मामले में सुनवाई के लिए 10 सितंबर की तारीख तय करते हुए कहा है कि संबंधित थाने के एसएचओ से कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी जाए. प्रेम शंकर शर्मा ने अपनी शिकायत में निर्मल बाबा पर कथित तौर पर लोगों को धोखा देने, उनका विश्वास तोड़ने और लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप लगाते हुए उन पर मुकदमा चलाने का निर्देश देने की मांग की है.

प्रेम शंकर शर्मा ने बाबा के खिलाफ ड्रग और मैजिक अधिनियम के तहत अपराधों के आरोप में भी प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की. इसके लिए टीवी चैनलों पर लोगों की बीमारी सही करने के लिए कथित आपत्तिजनक विज्ञापनों का उल्लेख किया गया.

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निर्मल बाबा, ये हथकडी क्यों आपकी तरफ आ रही है? निर्मल बाबा, ये हथकडी क्यों आपकी तरफ आ रही है?(4)

लगता है कि निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा पर सभी शक्तियों की किरपा समाप्त हो गयी है. जिसके चलते मध्य प्रदेश की एक अदालत में निर्मल बाबा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो जाने से निर्मल बाबा के जेल जाने का रास्ता साफ हो गया है.

दरअसल मध्य प्रदेश में सागर जिला के बीना के रहने वाले सुरेन्द्र विश्वकर्मा ने बीना की एक अदालत में निर्मल बाबा के खिलाफ एक मुकद्दमा दायर किया था और आरोप लगाया था कि उसने टीवी पर निर्मल बाबा का समागम देखा जिसमें वे सभी टी वी दर्शकों को कह रहे थे कि काला पर्स रखो, जिसे किरपा आएगी और धन सम्पति की बढ़ोतरी होगी. इस पर मैं उनके बहकावे में आ गया और काला पर्स खरीद कर उसमें पैसे रखने लगा. एक दिन मेरे पर्स में दो हज़ार रुपये रखे थे और मेरी जेब से वह पर्स पता नहीं कहाँ गिर गया. पर्स के साथ मेरे मेरे दो हज़ार रुपये भी खो गए. मेरे लिए यह रुपये बहुत महत्वपूर्ण थे. निर्मल बाबा की सलाह मुझ पर भारी पड़ गयी और मुझे उनकी सलाह मानने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो गया.

बीना की अदालत ने इस मामले पर बीते दो जून को एक्शन लेते हुए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया और निर्मल बाबा को 25 जून को अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए. इसी के बाद निर्मल बाबा ने अपने वकीलों के जरिये अदालत में अग्रिम जमानत लेने के लिए याचिका दायर की थी जिसे अदालत ने यह कहते हुए ख़ारिज कर दिया कि “निर्मल बाबा पूरे जनमानस को भ्रमित कर रहे थे. ऐसे में निर्मल बाबा को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा.”

निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ चार सौ बीसी सहित कई धाराओं में दर्ज इस मामले में अब उच्च न्यायालय जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है और यदि निर्मल बाबा को वहाँ भी कोई राहत नहीं मिली तो उनके पास जेल जाने के सिवाय कोई विकल्प नहीं होगा.

गौरतलब है कि सबसे पहले मीडिया दरबार ने ही इस ढोंगी की पोल खोली थी और एक पाठक की मदद से निर्मल बाबा का पूरा इतिहास खोज निकाला था. इस पर निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा ने मीडिया दरबार को अपने वकीलों के जरिये कानूनी नोटिस भेज कर डराने का प्रयास किया था. मगर हमने डरने के बजाय निर्मलजीत नरूला के ढोंग के खिलाफ जबरदस्त मुहिम चला दी. जिसे फेसबुक पर भी अच्छा खासा समर्थन मिला. इसके बाद पूरा थर्ड मीडिया भी मीडिया दरबार के अभियान से जुड गया और कुछ टीवी चैनलों को भी मजबूरीवश निर्मल विरोध में उतरना पड़ा और मीडिया दरबार कि मुहिम का नतीजा है कि देश भर के कई शहरों में निर्मलजीत नरूला उर्फ निर्मल बाबा के खिलाफ मामले दर्ज होने लगे और इस ठग की असली जगह अब कुछ क़दमों की दूरी पर रह गयी है.

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निर्मल बाबा को फिर सता रहा है गिरफ्तारी का डर, पहुंचे इलाहाबाद हाई कोर्ट निर्मल बाबा को फिर सता रहा है गिरफ्तारी का डर, पहुंचे इलाहाबाद हाई कोर्ट(0)

सीजेएम, लखनऊ के आदेश पर गोमतीनगर थाने में दर्ज एफआईआर के खिलाफ निर्मल बाबा उर्फ निर्मलजीत सिंह नरूला ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच में रिट याचिका संख्या 4473/201 दायर किया है.

गोमतीनगर थाने में यह एफआईआर संख्या 165/2012 धारा 417, 419, 420 आईपीसी आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर और  सामाजिक कार्यकर्ता नूतन के बच्चों तनया और आदित्य के प्रार्थनापत्र के आधार पर लिखी गयी थी. गोमतीनगर थाने द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं करने पर ये बच्चे सीजेएम कोर्ट गए थे जहाँ सीजेएम कोर्ट ने कहा था कि प्रस्तुत आवेदन पर संज्ञेय अपराध बनता है और एफआईआर दर्ज करने के पर्याप्त आधार है.

अब निर्मल बाबा की ओर से दायर रिट याचिका में कहा गया है कि वे एक प्रख्यात धार्मिक व्यक्ति हैं और इस मामले में पूर्णतया निर्दोष हैं. उन्होंने सीजेएम के आदेश को गलत बताते हुए इस एफआईआर को निरस्त करने और इस दौरान गिरफ़्तारी रोकने की मांग की है. उन्होंने कहा है कि 16 मई 2012 को इस अभियोग के विवेचक राजेश कुमार सिंह ने 160 सीआरपीसी में कई बिंदुओं पर उन्हें 24 मई तक अपना बयान दर्ज कराने को नोटिस भेजा था.

निर्मल बाबा की ओर से नीरज जैन और तनया और आदित्य की ओर से नीरज कुमार और त्रिपुरारी त्रिपाठी अधिवक्ता हैं. मामले की सुनवाई कल जस्टिस अश्वनी कुमार  सिंह और जस्टिस सईद उज्ज़मा सिद्दीकी के समक्ष होगी. (विष्फोट.कॉम)

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अब क्या ‘FRAUD’ कहने के लिए नरेंद्र मोदी पर मानहानि का दावा करेंगे निर्मल बाबा? अब क्या ‘FRAUD’ कहने के लिए नरेंद्र मोदी पर मानहानि का दावा करेंगे निर्मल बाबा?(7)

बीजेपी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी को अपने कदमों में झुकाने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब संबोधन किया तो उनकी बातों में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। भाषण शुरू करते ही उन्‍होंने सीधे केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने निशाने पर लिया। मोदी ने कहा कि हर बात पर सरकार गठबंधन की आड़ में बचने की फिराक में लगी रहती है।

महंगाई की समस्या पर नरेंद्र मोदी ने कहा कि अगर एनडीए की सरकार बनी तो इसे दो दिन में काबू में कर लिया जाएगा। उन्‍होंने चुटकी लेते हुए कहा कि केंद्र में कई निर्मल बाबा जैसे ठग बैठे हैं और दिल्‍ली में बैठी केंद्र सरकार निर्मल दरबार बन गई है। मोदी ने कहा कि वादे तो सब करते हैं लेकिन करके कोई नहीं दिखाता। समझा जाता है कि अपने इस वक्तव्य से उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं को निर्मल बाबा की तरफ झुकने के प्रति भी आगाह कर दिया है।

केंद्र पर झूठे वादे करने आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ राज्‍यों की मेहनत पर ऐश कर रही है केंद्र सरकार। देश में बिजली की समस्‍या पर मोदी ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के कारण देश में बिजली की कमी है, साथ ही कोयला घोटाले की वजह से देश में बिजली की कमी हो गई है।
एनसीटीसी की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि एनसीटीसी राज्‍यों से अधिकार छीनने की साजिश है और राज्‍यों के अधिकार छीने जा रहे हैं। मोदी ने केंद्र पर संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया।

सेना प्रमुख की उम्र पर पिछले दिनों हुए विवाद की चर्चा करते हुए मोदी ने सरकार पर सेना से भिड़ने का आरोप भी लगाया। मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री अक्‍सर सरकार की उप‍लब्धियां गिनवाते रहते हैं लेकिन वास्‍तव में सरकार के पास विकास का कोई मॉडल नहीं है। मोदी ने यह भी कहा कि आतंकवाद से निपटने में केंद्र सरकार नाकाम रही है।

अब ग़ौर करने वाली बात यह है कि ठगी का प्रतीक बन चुके निर्मल बाबा वैसे तो उनके खिलाफ़ आलेख या रिपोर्ट लिखने वाली वेबसाइटों और मीडिया घरानों को तो नोटिस भिजवा देते हैं, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय ठग घोषित करने के लिए क्या वे नरेंद्र मोदी को भी कानूनी नोटिस भिजवाएंगे?

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मिलिए निर्मल बाबा के भी गुरु ‘महामंडलेश्वर स्वामी’ कुमारानन्द सरस्वती उर्फ ‘झोला छाप डॉक्टर’ से मिलिए निर्मल बाबा के भी गुरु ‘महामंडलेश्वर स्वामी’ कुमारानन्द सरस्वती उर्फ ‘झोला छाप डॉक्टर’ से(20)

-धीरज श्रीवास्तव||

समागम के जरिए दुख दूर करने वाले निर्मल बाबा ने टीवी कलाकारों से अपना गुणगान करवाया था या नहीं ये तो अभी भी मीडिया और बाबा के बीच बहस का मुद्दा बना हुआ है, लेकिन आज हम आपको मिलवाने जा रहे हैं एक ऐसे स्वामी से जो इस फन का इस्तेमाल बरसों से अपने भक्तों को लुभाने और अपनी झोली भरने के लिए करते आ रहे हैं। बताया जाता है कि निर्मल बाबा ने इन स्वामी जी से काफी कुछ सीखा है और यहां तक कहा जाता है कि उनके किराए के भक्तों का प्रिय डायलॉग बाबा जी के ‘चरणों में कोटी-कोटी प्रणाम’ का भी ऑरिजनल कॉपीराइट इन्हीं का है।

निर्मल बाबा के इन कथित गुरु का असली नाम क्या है ये कम ही लोगों को पता है, लेकिन वे खुद को श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर ब्रह्मर्षि स्वामी कुमारानन्द सरस्वती जैसे भारी भरकम नाम से संबोधित करवाना पसंद करते हैं। इन कथित स्वामी जी के समागम का प्रसारण फिलहाल सोनी टीवी, ज़ी टीवी समेत ग्यारह चैनलों पर होता है।

कुछ ही साल पहले तक कुमारानन्द सरस्वती उर्फ़ कुमारस्वामी दिल्ली और एनसीआर में मोटापा कम करने की गोलियां बेचा करते थे। तब वे खुद को डॉक्टर के. कुमार के नाम से बुलाते थे और अपने तथाकथित आयुर्वेदिक क्लीनिक का नाम अरिहंता रखा था। यह अलग बात है कि डॉक्टर साहब ने कोई चिकित्सकीय डिग्री या डिप्लोमा भी नहीं हासिल किया है।

कुमार स्वामी का प्रिय शगल है बिना शब्दों का अर्थ जाने बार बार कुछ शब्दों को अपने भाषण में दोहराते रहना जैसे प्रारूप, महाप्रारूप, आलोक, महाआलोक, अनन्त अनन्त आदि। अगर इन महाशय जी का भाषण ध्यान से सुना जाए तो हिन्दी के बड़े-बड़े जानकारों तक को शब्दकोष की शरण लेनी पड़ जाएगी। अगर इन महाशय जी के द्वारा प्रयुक्त ‘अनन्त’ शब्द के अर्थ पर ही ध्यान दिया जाए तो शब्दकोष के रचयिता तक का सर चकरा जाए। कुमारस्वामी अपने परिचय में कहते हैं, ”मैं अनन्त अनन्त राष्ट्रों के अनन्त अनन्त राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रपतियों, प्रधानमन्त्रियों का निजी चिकित्सक रहा हूँ।”

खास बात ये है कि खुद को अनन्त पीएम और प्रेसीडेंट के ‘प्राइवेट डॉक्टर’ बताने वाले इन महाशय को ‘प्रेसीडेंट ऑफ लायंस क्लब, भांडुप’ भी अपना चिकित्सक मानने को राजी नहीं हैं। इन महाराज से उनके सभी मौखिक दावों का प्रामाणिक सबूत कई बार ई-मेल और फोन के जरिए मांगा गया लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

निर्मल बाबा के विपरीत स्वामी जी ने कई संस्थाएं बना रखी हैं। उनके बारे में कुछ जानकारियां उनके आधिकारिक वेबसाइट www.cosmicgrace.org और www.bslnd.org पर मौजूद है। वेबसाइटों पर तरह तरह के दावे किए गए हैं। स्वामी जी ने अपने भक्तों की संख्या 500 मिलियन यानि 50 करोड़ से भी ज्यादा बताई है। उन्हीं वेबसाइटों पर कहीं 150 तो कहीं 170 देशों में भक्तों का मौजूद होना बताया गया है।

स्वामी जी अक्सर अपने भ्रामक विज्ञापन देश के प्रमुख अखबारों में भी प्रकाशित करवाते रहते हैं। इनमें से अधिकतर इस तरह प्रकाशित होते हैं मानों वे खबरें हों। कोई ‘समाचार’ नई दिल्ली ब्यूरो, कोई लंदन ब्यूरो तो कोई न्यूयॉर्क ब्यूरो से प्रकाशित होता है। कुछ अखबार तो विज्ञापन को प्रमोशनल फीचर जैसे भ्रामक नाम देकर स्वामी जी का काम आसान कर देते हैं, और कुछ अखबार तो ये भी नहीं लिखते। लोगों को यही लगता है कि कुमारस्वामी एक अंतर्राष्ट्रीय हस्ती हैं। उत्तर भारत के लगभग सभी प्रमुख अखबार में स्वामी जी का फुल पेज ऐड छप चुका है और कोई भी इनके खिलाफ़ लिखने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाता। (जारी..)

 

इस ढोंगी स्वामी के कुछ विज्ञापन यहां प्रदर्शित हैं। आप ही तय कीजिए कि ये विज्ञापन हैं या खबरें..?

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बाबा रे बाबा… ये क्या हो गया? लखनऊ में दर्ज़ हुआ निर्मलजीत नरुला के खिलाफ़ FIR बाबा रे बाबा… ये क्या हो गया? लखनऊ में दर्ज़ हुआ निर्मलजीत नरुला के खिलाफ़ FIR(4)

सीजेएम कोर्ट के आदेश के बाद निर्मल बाबा के खिलाफ गोमतीनगर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई। निर्मलजीत सिंह नरुला उर्फ़ निर्मल बाबा पर धोखाधड़ी और आस्था के नाम पर ठगी का आरोप है। आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की बेटी तनया ठाकुर और बेटे आदित्य ठाकुर के आवेदन पर निर्मल बाबा के खिलाफ धारा पुलिस ने आईपीसी की धारा 417, 419, 420 के तहत धोखाधड़ी व अन्य आरोपों और धारा 508 के तहत एफआईआर दर्ज की है।

पुलिस ने बताया कि निर्मल बाबा के खिलाफ धोखाधड़ी, बरगलाने और समाज में अंधविश्वास पैदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि तनया और आदित्य ने 10 अप्रैल 2012 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में निर्मजीत सिंह नरूला के विरुद्ध एफआईआर के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, परन्‍तु पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद दोनों लखनऊ के एसएसपी/डीआईजी आशुतोष पांडेय और एडीजी, लॉ ऑर्डर से भी रिपोर्ट दर्ज कराने की गुहार लगाई, लेकिन यहां भी उनकी शिकायत को अनसुना कर दिया गया।

इसके बाद दोनों बच्चों ने धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत याचिका दायर कर के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले पर सुनवाई के बाद अदालत ने एफआईआर दर्ज करने का पर्याप्‍त सबूत मानते हुए पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

अगर निर्मल बाबा पर लगे सभी आरोप कोर्ट में सही साबित होते हैं तो बाबा की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। आरोप सिद्ध होने पर निर्मल बाबा को सात साल तक की सजा हो सकती है। इस मामले पर उनके पक्ष का बयान भी आ गया है। निर्मल बाबा के प्रवक्ता अशोक मेहता ने एफआईआर दर्ज होने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि केस दर्ज कराने वालों को भगवान का डर होना चाहिए। निर्मल बाबा के वकील अमन लेखी ने कहा है कि यह कानून का दुरुपयोग है।

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अदालत ने पुलिस को कहा, दर्ज़ करो निर्मल बाबा के खिलाफ़ ठगी और धोखाधड़ी का मामला अदालत ने पुलिस को कहा, दर्ज़ करो निर्मल बाबा के खिलाफ़ ठगी और धोखाधड़ी का मामला(2)

तनया एवं आदित्‍य ठाकुर की याचिका पर सुनाया फैसला

सीजेएम, लखनऊ राजेश उपाध्याय ने गोमतीनगर थाने को आदेशित किया है कि दिल्ली स्थित कथित धार्मिक गुरु निर्मल बाबा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर उसकी विवेचना करें. सीजेएम ने बुधवार को यह आदेश तनया ठाकुर (कक्षा बारह की छात्रा) और आदित्य ठाकुर (कक्षा दस के छात्र) द्वारा धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत प्रस्तुत याचिका पर दिया. तनया और आदित्य आईपीएस अधिकारी अमिताभ और सामाजिक कार्यकर्ता डा. नूतन के बच्चे हैं. रोहित त्रिपाठी और नीरज कुमार याचीगण के वकील थे.

सीजेएम उपाध्याय ने कहा कि तनया और आदित्य द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर संज्ञेय अपराध बनता है और पर्याप्त आधार है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय श्री भगवन समर्ध बनाम आंध्र प्रदेश सरकार का भी उल्लेख किया, जिसमें इसी प्रकार से एक कथित धार्मिक व्यक्ति द्वारा बच्ची के इलाज़ में ठगी की जा रही थी. तनया और आदित्य ने आवेदन किया था कि निर्मल बाबा द्वारा तमाम लुभावने वादों से आम आदमी को ललचाने और फंसाने तथा अत्यंत सरलीकृत समाधान प्रस्तुत कर लोगों को ठगते का काम किया जाता है. यह धारा 417, 419, 420 आईपीसी के तहत चीटिंग और धारा 508 में ईश्वरीय नाराजगी का भय दिखा कर गलत लाभ लेना है. अतः मामले में एफआईआर दर्ज की जाए.

तनया एवं आदित्‍य ने 10 अप्रैल 2012 को थाना गोमतीनगर, लखनऊ में एफआईआर के लिए प्रार्थना पत्र दिया था और डीआईजी लखनऊ एवं एडीजी, ला ऑर्डर के स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं होने पर कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के अंतर्गत याचिका दायर किया गया था. इसके विपरीत थानाध्यक्ष, गोमतीनगर के 24 अप्रैल की आख्या में यह कहा गया था कि तनया और आदित्य इस मामले से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हैं. यह भी कहा था कि उनके द्वारा ठगी और धोखाधड़ी के बारे में कोई साक्ष्य एवं साक्षी नहीं दिया जा सका है, अतः कोई पुष्ट एवं स्पष्ट साक्ष्य नहीं होने के फलस्वरूप थाना स्थानीय पर अभियोग पंजीकृत नहीं किया जा सकता. (भड़ास4मीडिया)

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‘सबसे ऊपर’ तक पहुंच है पॉल बाबा की, मंतरी-संतरी की क्या बिसात? ‘सबसे ऊपर’ तक पहुंच है पॉल बाबा की, मंतरी-संतरी की क्या बिसात?(2)

यूपीए की जीत और बजट शांति पूर्वक चलने के लिए भी प्रार्थना करते हैं पॉल बाबा और उनके इस  उपकार के लिए भारत सरकार के मंत्री भी उन्हें देते हैं धन्यवाद भरा पत्र

-लिमटी खरे-

अभी हाल के दिनों में निर्मल बाबा अचानक चर्चा में आये हैं. उनके ऊपर मुख्य आरोप यह है कि वे धर्म के नाम पर अंधश्रद्धा फैला रहे हैं और पैसा कमा रहे हैं. लेकिन निर्मल बाबा अकेले ऐसे आदमी नहीं है जो यह काम कर रहे हैं. लंबे समय से एक ईसाई धर्मप्रचारक पॉल दिनाकरन यही काम कर रहा है. पॉल की पहुंच कितने ऊपर तक है इसका अंदाजा इसी से लग जाता है कि उसके अंधविश्वासी मायाजाल में केवल आम आदमी ही नहीं बल्कि ऊंची रसूखवाले लोग भी फंसते हैं जिनमें सोनिया गाँधी और उनके कुछ मंत्रियों तथा सांसदों के नाम भी शामिल है.

पॉल का दावा है कि उनके पिता ने ईसा मसीह को साक्षात ना केवल देखा है वरन् उन्हें भी शिक्षा ईसा मसीह के माध्यम से ही दिलवाई है. इस ईसा आशीर्वाद को पॉल ने व्यापार में तब्दील करते हुए पांच हजार करोड़ का साम्राज्य खड़ा कर लिया है. लेकिन धर्मप्रचारकों के इस धंधे में खुद सोनिया गाँधी शामिल हों यह थोड़ा चौंकानेवाला है. देश के जल संसाधन और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री का एक पत्र इसी बात का प्रमाण प्रस्तुत करता है. सोनिया घांदी के इशारे पर कुछ सांसदों के पॉल का विशेष सत्र आयोजित किया गया जिसके बाद सरकारी तौर पर पत्र लिखकर न सिर्फ पॉल दिनाकरऩ को धन्यवाद दिया गया बल्कि यह भी कहा गया कि आगे इस तरह की कक्षाएं और आयोजित की जाएंगी.

पॉल दिनाकरन एक संदिग्ध व्यक्तित्व है। वह अंधविश्वास का फायदा उठाकर लोगों से पैसे ऐंठता है। 4 सितम्बर 1962 को जन्मे पॉल दावा करते हैं कि उनके अंदर अपने पिता के जरिए ईसा की आत्मा समा गई है। हालांकि वे एमबीए के विद्यार्थी रहे हैं लेकिन धर्म का उनका धंधा जोरदार है। शायद एमबीए में अर्जित विद्या को उन्होंने धर्म का कारोबार बढ़ाने के लिए बखूबी किया है. उनकी धर्म सभा में महज तीन हजार रूपए में अपने परिवार और बच्चों के लिए प्रार्थना की व्यवस्था की जाती है। पॉल का सालाना टर्न ओवर पांच हजार करोड़ रूपए से अधिक का है।

अकूत संपत्तियां बटोर चुके पॉल बाबा के पास अपना एक विश्वविद्यालय है कोयंबटूबर में. साढ़े सात सौ एकड़ जमीन पर बने इस विश्वविद्यालय के जरिए हर साल साढ़े सात हजार विद्यार्थी तैयार किये जाते हैं. ये सब पॉल बाबा की चंगाई का कमाल है कि उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी को ए ग्रेड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिला रखा है और कारुण्य यूनिवर्सिटी नामक इस विश्वविद्यालय के चांसलर बने बैठे हैं.

पॉल बाबा के प्रवचनों का नौ देशों में प्रसारण होता है और इन्हीं नौ देशों में पॉल बाबा ने 9 विशेष प्रेयर टॉवर बना रखे हैं जहां रोजाना चंगाई बांटी जाती है. पॉल बाबा के भारत में 29 प्रेयर टॉवर हैं. जीजस काल्स नाम से होने वाले इन कार्यक्रमों में प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं और पॉल बाबा को सुनते हैं. लेकिन याद रखिए पॉल बाबा के दरबार में कुछ भी मुफ्त नहीं है. लेकिन पॉल बाबा का मकसद सिर्फ पैसा कमाना भर नहीं होता है. अपने प्रेयर्स के जरिए वे धर्मांतरण को भी बढ़ावा देते हैं.

पॉल बाबा की पहुंच बहुत ऊपर तक है इसलिए उनकी कमाई पर कभी कोई हाथ नहीं डालता है. ईसाई होने के कारण वे सोनिया गांधी के भी कृपापात्र हैं. सोनिया गांधी खुद ईसाई हैं इसलिए वे ऐसी प्रार्थनासभा का महत्व समझती हैं. पिछले साल देश के जल संसाधन राज्यमंत्री मंत्री विन्सेंट एच पाल द्वारा एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था. इस प्रार्थना सभा में सोनिया गाँधी समेत अन्य कई सांसदों ने हिस्सा लिया था. बाद में मंत्री महोदय द्वारा एक पत्र लिखकर पॉल बाबा को इस प्राथना सभा में आने के लिए धन्यवाद प्रेषित किया गया और उनसे देश के सांसदों को पुनः सेवा देने की गुजारिश भी गयी थी ताकि देश को ईसा का आशिर्वाद मिल सके.

रामदेव बाबा ने लंबे समय में संपत्ति बनाई तो निर्मल बाबा के ‘दरबार की किरपा‘ ने कम समय में संपत्ति जोड़ी अब पॉल बाबा की संपत्ति इन सबसे कई गुना अधिक है। जब मीडिया ने निर्मल बाबा पर निशाना साधा तो भाजपा नेत्री उमा भारती ने मीडिया से सवाल दाग दिया था कि निर्मल बाबा दिखते हैं तो पॉल बाबा क्यों नहीं जो पैसे लेकर चंगाई बांटते हैं और धर्मांतरण करवाते हैं? सवाल तो सही है लेकिन उठाये कौन? जब पॉल दिनाकरन को सीधे सोनिया गांधी का संरक्षण प्राप्त होगा तो उमा भारती की आवाज सुनेगा कौन?

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निर्मल बाबा और पॉल दिनाकरन को एक ही तराजू से नहीं तौल सकते उमा भारती जी ! निर्मल बाबा और पॉल दिनाकरन को एक ही तराजू से नहीं तौल सकते उमा भारती जी !(10)

भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने जिस ईसाई धर्म गुरु को निशाने पर लिया है वो एक अर्से से थर्ड मीडिया के निशाने पर था, लेकिन अब उस अभियान को पंख मिल गए हैं। उमा भारती ने हाल ही में कहा था कि जब निर्मल बाबा के कृपा बांटने पर लोगों को शंका है तो फिर अपने भक्तों के उद्धार का दावा करने वाले ईसाई धर्म गुरु पॉल दिनाकरन पर क्यों नहीं सवाल खड़े हो रहे हैं? हालांकि इसके बाद पॉल के बारे में कुछ मेनस्ट्रीम मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइटों पर पॉल बाबा का पोल-खोल भी चलने लगा है, लेकिन इसके बावज़ूद उनके अंध भक्तों पर इसका कोई असर होगा इसकी उम्मीद कम ही है।

ऐसा नहीं है कि पॉल बाबा के कारनामे किसी से छिपे हुए हैं। इन कथित धर्मगुरु के पास तो घोषित तौर पर निर्मल बाबा से 20 गुनी दौलत है और वो लगातार बढ़ रही है। पॉल दिनाकरन चेन्नई के ईसाई धर्म प्रचारक डॉक्टर डीजीएस दिनाकरन के बेटे हैं। डॉक्टर ‌दिनाकरन और उनके बेटे दोनों ही न सिर्फ पैसे में बल्कि झूठ और डींगे हांकने में भी निर्मल बाबा से कई गुना आगे थे और हैं। डीजीएस दिनाकरन ने दावा किया था कि उन्होंने ईसा मसीह को साक्षात अपनी आंखों से देखा है। उनका कहना था कि जब वे जीवन से तंग आकर सुसाइड करने जा रहे थे, तब क्राइस्ट ने खुद सामने आ कर उनको रोका था।

4 सितंबर 1962 को जन्मे डॉक्टर पॉल दिनाकरन ने भी धर्म प्रचार की शुरुआत कुछ इसी अंदाज में की थी। पॉल ने कहा कि जब वे युवा थे तो अपने भविष्य को लेकर परेशान थे। पॉल के मुताबिक उस दौरान उनके पिता ने ईसा मसीह से उनकी बात कराई और उन्हें ज्ञान दिलाया। अपने पिता के निधन के बाद पॉल ने भी ईसाई धर्म के प्रचार के नाम पर सभाएं करनी शुरू कर दी।

ध्‍यान देने वाली बात यह है कि पॉल बाबा अपनी प्रार्थनाओं की शक्ति से अनुयायियों को शारीरिक और अन्य समस्याओं से निजात दिलाने का दावा करते हैं। पॉल भक्तों को प्रीपेड कार्ड की तरह प्रेयर पैकेज बेचते हैं। यानी, वे जिसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हैं, उससे इसके लिए मोटी रकम भी वसूलते हैं। पॉल की सभाओं में 3000 रुपए में बच्चों और परिवार के लिए प्रार्थना करने की व्यवस्‍था है। पॉल दिनाकरन का सालाना टर्नओवर 5 हजार करोड़ से ज्यादा का है। कुल मिला कर अगर निर्मल बाबा ठग हैं तो पॉल दिनाकरन ठगों का सरताज़ हैं।

पॉल की सभाओं में दवा किया जाता है कि वहां अंधे देखने लगेगे, लंगड़े चलने लगेंगे और गूंगे बोलने लगेंगे। यानि सफेद झूठ और बेसिरपैर के दावों का भंडार।  थर्ड मीडिया और सोशल नेटवर्किंग साइटों पर इन महाशय की कारस्तानियों के बारे में खूब लिखा और पढ़ा जा चुका है। करीब महीने भर पहले जहां इंटरनेट पर निर्मल बाबा के खिलाफ एक दो लेख से ज्यादा नहीं मिलते थे वहीं पॉल दिनाकरन के पक्ष-विपक्ष में लगभग सभी भाषाओं में हजारों लेख भरे हुए हैं। जब उमा भारती के कहने पर भी टीवी चैनलों ने पॉल बाबा के खिलाफ कोई अभियान नहीं छेड़ा तो सोशल नेटवर्किंग साइटों पर उनकी ही निंदा शुरु हो गई।

पॉल जीसस कॉल्स नाम के धार्मिक संगठन के प्रमुख हैं और दावा करते हैं कि उन्हें क्राइस्ट की दैवीय शक्तियां अपने पिता से विरासत में मिली हैं, जिनके दम पर वो प्रार्थनाओं के जरिए लोगों के रोग, गरीबी, बेरोज़गारी और किस्म-किस्म के मानसिक दर्द दूर करते हैं। निर्मल बाबा के विपरीत पॉल बाबा उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। उन्होंने एमबीए की पढ़ाई पूरी की. 27 साल की उम्र में मद्रास यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट साइंस में पीएचडी करने वाले वो पहले छात्र थे।

दरअसल निर्मल बाबा का मामला अलग इसलिए है कि उन्होंने टीवी और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को जम कर इस्तेमाल कर लोगों को  मूर्ख बनाया। पॉल खानदानी ठग हैं। उन्हें पता है कि मीडिया से जितना दूर रहा जाए उतना ही बढ़िया। ये बात उनके महाठग मरहूम पिता (बाप) ने ही समझा दी थी कि अनपढ़ और अंध भक्तों को अगर अपने पीछे लगाना है तो मीडिया से कोई फायदा नहीं होगा। पॉल न तो पत्रकारों की मदद लेते हैं, न खबरिया चैनलों की और न अखबारों की। वे पैसे खर्च करके वैसे ही विज्ञापन अभियान चलवाते हैं जैसे किसी रॉक स्टार या म्युजिकल नाइट का हो।

पॉल को मानने वाले या तो बिल्कुल अनपढ़ हैं या अंधभक्त। उनके यहां भी पैसे लेकर किरपा का असर होने की बात बताने और उनका अंध-प्रचार करने वालों की भी भरमार है।  पॉल दिनाकरन निर्मल बाबा से कहीं ज्यादा शातिर, चालाक और पुश्तैनी ठग हैं। उन्होंने कभी न्यूज चैनल और टैम को मैनेज नहीं किया जबकि वे ऐसा आसानी से कर सकते थे। उन्होंने कोई स्टूडियो शूट नहीं करवाया न कभी रिकॉर्डेड शो न्यूज चैनल पर चलवाया।

निर्मल बाबा भी अगर ऐसे झूठ-सच बोल कर ही अपना धंधा चलाते  रहते तो किसी को ऐतराज़ नहीं होता। सोशल मीडिया में भी निर्मल बाबा के प्रति गुस्सा इसलिए तेजी से भड़क उठा कि वो पढ़े-लिखे और न्यूज चैनल देखने वाले समझदार दर्शकों पर अपना जादू चलाने में जुटे थे। शायद यही कारण रहा कि निर्मल बाबा की दुकानदारी जितनी तेजी से फैली थी उतनी ही तेजी से सिमट भी गई और पॉल दिनाकरन के बारे में इतना लिखे-पढ़े जाने के बाद भी उनका कारोबार दिन-दूना रात चौगुना फल-फूल रहा है।

 

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केरल के एक अंग्रेजी अख़बार में एक पूर्व नन सिस्टर मैरी चांडी की आने वाली पुस्तक के कुछ अंश क्या छपे, बवाल मच गया। अब तो पुस्तक रिलीज़ भी हो गई, लेकिन आनन-फानन में चर्च ने कह डाला, वो कभी नन थी ही नहीं। चर्च ने ये तो माना कि मैरी चांडी रसोइये के पद पर कुछ दिनों तक उसके साथ थी, लेकिन इस सवाल पर खामोश है कि पादरी ने उनके साथ बदसलूकी की थी या नहीं।

ग़ौरतलब है कि अपनी आत्मकथा के तौर पर छपी पुस्तक ‘ननमा निरंजवले स्वस्ति’ (Best wishes, Graceful Lady) में 67 वर्षीय सिस्टर मैरी चांडी ने लिखा है कि वो जिस चर्च में नन थीं, वहां के एक पादरी ने उनके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी और इसका विरोध करने पर उन्हें वह चर्च छोड़ना पड़ा था। यह घटना 12 साल पहले की है। उन्होंने अपनी आत्मकथा के माध्यम से चर्चों में हो रहे यौन शोषण का जिक्र किया है। नन की इस आत्मकथा ने इसाई, खासकर कैथोलिक समुदाय को झकझोर रख दिया है।

सिस्टर चांडी ने इस बात का राजफाश किया है कि कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा ननों का यौन शोषण किया जाता है। ”कैथोलिक चर्चों में पादरियों द्वारा ननों का यौन शोषण किया जाता है। यहां आध्यात्मिकता कम वासना ज्यादा होती है” सिस्टर चांडी ने लिखा है।

हालांकि चर्चों में हो रहे यौन शोषण पर लिखी गई यह पहली किताब नहीं है। करीब दो साल पहले एक नन सिस्टर जेस्मी की पुस्तक ‘आमेन : द ऑटोबायॉग्रफी ऑफ ए नन’ ने एक किताब तहलका मचा दिया था। उनकी किताब ने भी कॉन्वेंट में हो रहे यौन शोषण और व्यभिचार का खुलासा किया था, लेकिन तब भी चर्च ने अपने गिरेबान में झांकने की बजाय सिस्टर जेस्मी को ही झूठा ठहराया था।

सिस्टर मैरी ने लिखा है मैंने ‘वायनाड गिरिजाघर’ में हुए अपने अनुभव को समेटने की कोशिश की है। उनके मुताबिक चर्च में जिंदगी आध्यात्मिकता के बजाय वासना से भरी थी। उन्होंने लिखा है, एक पादरी ने मेरे साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी। मैंने उस पर स्टूल चलाकर इज्जत बचाई थी।” सिस्टर मैरी ने लिखा है, मैंने जाना कि पादरी और नन दोनों ही मानवता की सेवा के संकल्प से भटक जाते हैं और अपनी शारीरिक जरूरतों की पूर्ति में लगे रहते हैं।” इसी वजह से तंग आकर उन्होंने गिरजाघर और कॉन्वेंट छोड़ दिया।

हालांकि सिस्टर मैरी ने अपनी जिंदगी के 40 साल नन के रूप में बिताए हैं। जैसा कि सिस्टर मैरी ने लिखा है कि वे 13 साल की उम्र में घर से भागकर नन बनी थीं। उन्होंने चर्चों के पादरियों पर न सिर्फ ननों से यौन संबंध बनाने, बल्कि उनसे पैदा हुए नवजात बच्चों को जान से मार डालने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस आत्मकथा से कई ऐसे सवाल खड़े हुए हैं जिनका जवाब चर्च सिर्फ सिस्टर चांडी से पल्ला झाड़कर नहीं दे सकता।

चर्च सिस्टर चांडी को नन मानने से ही इंकार कर रहा है। वे कहती हैं कि उन्हें चर्च के इंकार पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ। ‘वे तो मुझपर बाहरी होने का आरोप लगाएंगे ही, ये किसी धार्मिक समुदाय के लिए कोई अच्छी ख़बर तो नहीं है।” सिस्टर चांडी ने मीडिया से कहा।

उधर चर्च के लिए चिंता की बात ये भी है कि पुलप्ल्ली में अनाथ बच्चों के लिए आश्रम चला रही सिस्टर चांडी अपने कॉन्वेंट के कुछ बाकी बचे अनुभवों को भी छापने की योजना बना रही हैं।

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निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV निर्मल बाबा ने फिर बदली टीआरपी, विरोधियों को फायदा समर्थकों को नुकसान: नंo-1 पर India TV(4)

 

निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया। एक हफ्ते में 4.7 अंको की उछाल के साथ इंडिया टीवी नंबर वन पर पहुंच गया। विश्लेषकों का मानना है कि इंडिया टीवी को ये ताज़ा बढ़त बाबा के पोल-खोल की वजह से मिली है, लेकिन चैनल के कर्ता-धर्ता इसे रुटीन बता रहे हैं।निर्मल बाबा पिछले पंद्रह दिनों से खबरिया चैनलों की टीआरपी में उठा-पटक जारी रखे हुए हैं। पिछले कई सप्ताह से नंबर वन की कुर्सी से दूर रहने वाले इंडिया टीवी को दर्शकों ने फिर आसमान पर पहुंचा दिया।

इंडिया टीवी के न्यूज़ डायरेक्टर हेमंत शर्मा ने मीडिया दरबार से बातचीत में यह माना कि निर्मल बाबा के पोल-खोल को लोकप्रियता मिल रही है, लेकिन नंबर वन पर आने के लिए इसे आधार नहीं माना जा सकता। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया टीवी पिछले साल ही नंबर वन पर पहुंच गया था और तब से महीनों इस पोज़ीशन पर जमा रहा था। उस समय तो बाबा का कोई कार्यक्रम नहीं चलता था।

उधर निर्मल बाबा के खिलाफ सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले आजतक को दर्शकों ने दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया है। उसे करीब दो अंकों का नुक़सान पहुंचा है। ग़ौरतलब है कि इंडिया टीवी ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए बाबा के कारनामों की पोल-पट्टी खोली थी। ज़ी न्‍यूज़ को भी बाबा विरोध की किरपा मिली और उसने न्‍यूज़-24 को झटका देकर पांचवें पायदान पर पहुंचा दिया है। ज़ी न्यूज़ 1.2 अंकों की बढ़त के साथ 9.7 की टीआरपी हासिल करने में कामयाब रहा है।

इस बार न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने एक बार फिर अच्‍छी बढ़त के साथ एक बार फिर टॉप टेन में वापसी कर ली है। ग़ौरतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में न्यूज़ एक्सप्रेस ही पहला ऐसा चैनल है जिसने निर्मल बाबा का विज्ञापन चलाने से मना कर दिया था और पोल-खोल की शुरुआत की थी। निर्मल बाबा के पक्ष में खबर दिखाने वाले पी7 को दर्शकों ने नकार दिया है और न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस दसवें पायदान पर पहुंच गया है। मात्र नौ महीनों में ही टॉप टेन चैनलों में शुमार होना न्यूज़ एक्सप्रेस के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। न्‍यूज़ एक्‍सप्रेस ने साबित कर दिया है कि अच्‍छा कंटेंट दिखाकर भी टीआरपी पाई जा सकती है।

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‘‘ये न्यूज़ चैनल दोहरे चरित्र वाले हैं। अगर इन चैनलों का ईमान अचानक जाग ही गया है तो वे एडवांस में ली गई रकम लौटा कर निर्मल बाबा के विज्ञापन वाले कार्यक्रम को बंद क्यों नहीं कर देते? ”   -इंदर सिंह नामधारी

कुछ दिनों पहले ही अपने साले निर्मलजीत नरुला उर्फ निर्मल बाबा की करतूतों का भंडाफोड़ कर सुर्खियां बटोर रहे चतरा के निर्दलीय सांसद इंदर सिंह नामधारी अब ‘पैच-अप’ में जुट गए मालूम पड़ते हैं। झारखंड के बोकारो में नामधारी ने न सिर्फ बाबा का जोरदार बचाव किया, बल्कि टीवी चैनलों पर भी दोहरा चरित्र अपनाने का दोष लगाते हुए उन्हें जम कर कोसा।

नामधारी को अब निर्मल बाबा की पुरानी बातें याद आने लगी हैं। उन्होंने एक भक्त की तरह पत्रकारों से कहा कि बाबा में कुछ न कुछ सिद्धियां तो जरूर हैं। उन्होंने बताया कि कई चीजों के बारे में निर्मल बाबा को पहले ही आभास हो जाता है। उन्होंने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में पहली बार अपने साले का जमकर बचाव किया।

नामधारी ने किसी राज की तरह बताया कि जब 3 दिसंबर 2011 को झारखंड में उनके ऊपर नक्सली हमला हुआ था, उससे आठ दिन पहले ही निर्मलजीत उर्फ निर्मल बाबा ने उन्हें सावधान किया था। उन्होंने कहा कि दिल्ली स्थित आवास में कहा था, ‘‘आपके ऊपर खतरा संभावित है, बुलेटप्रुफ वाहन में चला करें।” इस पर मैंने कहा था, ‘‘जब भगवान को मारना होगा, तो कोई नहीं बचा पाएगा और यदि जीवन बचना होगा, तो कोई मार नहीं पाएगा।” याद करते हुए नामधारी ने आगे कहा, ‘‘जब मैने निर्मल की बात पर ध्यान नहीं दिया, तो देखा कि मेरी पत्नी के सामने उसकी की आंखों में आंसू आ गए थे।”

‘‘ मेरी पत्नी को उसने कहा था, जीजाजी मुझे कभी गंभीरता से नहीं लेते।” नामधारी ने आगे बताया कि जब उनके काफिले पर नक्सली हमला हो गया, तो उसके एक हफ्ते बाद फिर दिल्ली स्थित आवास पर निर्मलजीत आए और कहा कि खतरे की बात आपको पहले ही बताई थी। इस पर नामधारी ने कहा था कि बुलेटप्रूफ गाड़ी वाले उड़ गए, लेकिन बिना बुलेटप्रूफ के ही भगवान ने उन्हें बचा लिया।

सूत्रों का कहना है कि नामधारी पिछले कुछ दिनों से भारी घरेलू दबाव में थे। उनकी पत्नी अपने सगे भाई के चरित्र हनन में अपने पति की भूमिका से नाराज़ तो थी हीं, बच्चे भी तकरीबन हर रोज फोन कर उन्हें अपने मामा जी के पक्ष में बोलने के लिए कहते थे। नामधारी का परिवार निर्मल बाबा से खासी नज़दीकियां रखता है और उनकी ‘शक्तियों’ से खासा प्रभावित है।

नामधारी ने यहां सोमवार को मीडिया से बातचीत में इलेक्ट्रानिक मीडिया पर जमकर निशाना भी साधा। उन्होंने कहा कि निर्मल बाबा पर एक अंगुली उठाने पर तीन अंगुलियां मीडिया पर ही उठेंगी। 35-36 चैनलों पर निर्मल बाबा का आत्म प्रचार विज्ञापन के रूप में चल रहा है। जिन चैनलों ने निर्मल बाबा को बेनकाब करने का बीड़ा उठाया है, उन्हीं चैनलों पर अभी भी निर्मल बाबा के कामर्शियल विज्ञापन चल रहे हैं।

उन्होंने चैनलों पर आरोप लगाया कि वे दोहरे चरित्र वाले हैं और पैसे के साथ-साथ पब्लिसिटी भी कमाना चाहते हैं। नामधारी ने पत्रकारों से ही सीधा सवाल किया, ‘‘अगर इन चैनलों का ईमान अचानक जाग ही गया है तो क्या वे एडवांस में ली गई रकम लौटा कर कार्यक्रम बंद नहीं कर सकते?”

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