सुशासन बाबू के राज में मीडियाकर्मियों पर हमले, बाढ़ में विधायक के सामने पिटा पत्रकार

बिहार में इन दिनों सुशासन बाबू नीतीश कुमार के गढ़ माने जाने वाले बाढ़ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की धज्जियां उड़ी हुई हैं। सुशासन का नारा देने वाले राज्य सरकार के मुखिया नीतीश कुमार बाढ़ इलाके से लगातार पांच बार सांसद रह चुके है और केंद्र में मंत्री भी, लेकिन उनके घर में तकरीबन हर दूसरे दिन पत्रकारों के साथ मार-पीट की घटनाएं हो रही हैं।

ताजा मामला है बख्तियारपुर के प्रभात खबर संवाददाता सबल कुमार का,  जिनकी कुछ अपराधियों ने जमकर पिटाई कर दी और कैमरा भी छीन लिया। खास बात यह है कि सारा तांडव बख्तियारपुर के आरजेडी विधायक अनिरुद्ध कुमार यादव के सामने हुआ। पत्रकार पिटता रहा और विधायक तमाशा देखते रहे। विधायक महोदय के साथ सुरक्षा गार्ड और समर्थक सभी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी पत्रकार को बचाने की को‍ई कोशिश नहीं की। महज़ तीन बदमाशों ने जब जी भर कर अपनी मनमानी कर ली और पत्रकार सबल कुमार को पीट कर चलते बने तब विधायक जी हरकत में आए और उल्टे पुलिस पर ही लापरवाही का आरोप लगाने लगे।

उधर पुलिस और प्रशासन एक-दूसरे के पर दोषारोपण करने में जुटे हैं। जब सबल कुमार ने इलाके के डीएसपी रामानंद कुमार कौशल को सूचना दी तो विधायक जी को अपनी दुकानदारी चमकाने का मौका मिल गया। उन्होंने उसी समय डीएसपी से कार्रवाई करने की मांग कर दी, लेकिन तब वे बगलें झांकने लगे जब उनके पैतरे से भन्नाए डीएसपी ने तत्काल उलाहना दे दिया कि कार्रवाई उनके गार्डों ने क्यों नहीं की? डीएसपी रामानंद कुमार कौशल ने विधायक अनिरुद्ध यादव से यह भी शिकायत की कि उन्होने अपने गार्डों को पत्रकार के हमलावरों के पीछे क्यों नहीं दौड़ाया, तो उनकी बोलती बंद हो गई। यह घटना उस वक्त हुई जब विधायक अनिरुद्ध यादव गंगा कटाव का निरिक्षण करने गए थे।

पत्रकार ने पुलिस थाने को लिखित सूचना दे दी है और नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है। इलाके मं चर्चा है कि विधायक अनिरुद्ध यादव के मौन रहने के पीछे कुछ “निजी वजह” थी। हमलावर उनके स्वजातीय थे और संबंधी भी बताए जाते हैं। खास बात ये है कि हमलावरों ने पत्रकार के अखबार “प्रभात खबर” के अधिकारियों से भी सांठ-गाठ कर ली और उन्हें हटवा भी दिया। सूचना है कि सात अगस्त को पत्रकार सबल कुमार अपराधियों क़ी गुंडागर्दी के शिकार हुए और शाम को ही अखबार ने उनको हटाने का फैसला कर लिया।

इससे पहले इसी अनुमंडल के बाढ़ थाना इलाके में सहारा समय के संवाददाता कमालुद्दीन को भी बदमाशों ने धमकाया था कि वो बलात्कार क़ी खबर ना चलाएं। तीन दिनों में पत्रकार उत्पीड़न का यह दूसरा मामला है। यहाँ यह बता देना गौरतलब होगा कि दोनों ही मामले में कोई कारगर कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे पत्रकारों में रोष व्‍याप्‍त है। शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

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