Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

प्रकाश झा ने इस्तेमाल किया ‘आरक्षण’ का विरोध करने वालों को

By   /  August 14, 2011  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

विवाद, विरोध और प्रतिबंध ये कुछ ऐसे नुस्खे हैं जो फिल्म निर्माताओं के लिए सबसे सफल पब्लिसिटी स्टंट बन गए हैं। फिल्म चाहे कैसी भी क्यों न हो, अगर पब्लिक को खींच कर हॉल तक लाना हो तो कंट्रोवर्सी सबसे बढ़िया फॉर्मूला है। प्रकाश झा ने भी अपनी ताजा फिल्म आरक्षण को कुछ इसी ढंग से हिट करवा लिया। खास बात ये रही कि खुद को इस फिल्म का विरोधी मानने वाले इस्तेमाल कर लिए गए और शायद(?) उन्हें इसका पता भी नहीं चल पाया।

प्रकाश झा और अमिताभ: लग गया निशाना?

तीन राज्यों को छोड़ कर देश भर में 12 अगस्त को रिलीज़ हुई फिल्म आरक्षण सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्सों में हाउसफुल जा रही है। एक सर्वे के मुताबिक फिल्म देखने गए 83 प्रतिशत लोगों ने बताया कि वो यह देखने पहुंचे हैं कि आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है जो इसका विरोध हो रहा है। बाकी बचे दर्शकों में भी बेशक कहानी और विषयवस्तु को देखने की ललक थी, लेकिन विरोध के विवाद और फिर कुछ राज्यों में प्रतिबंध ने उन्हें जल्दी से जल्दी फिल्म देखने के प्रति आकर्षित जरूर किया।

यह पहला मौका नहीं है जब विवाद ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक आने का आमंत्रण भेजा है। आमिर खान की फना इसका एक सबसे बढ़िया उदाहरण है जिसने विवादों और प्रतिबंधों के बावजूद रिकॉर्ड तोड़ कारोबार किया। सैफ अली खान और करीना कपूर स्टारर ‘कुर्बान’ के रिलीज़ से पहले इस फिल्म के पोस्टर पर काफी बवाल मचा था। शिव सेना के साथ-साथ महाराष्ट्र के कई हिन्दू संगठनों ने करीना और सैफ के बैक लेस पोस्टर पर भारी आपत्ति दर्ज की थी और काफी हंगामा भी मचाया था और फ़िल्म के पोस्टर तक जलाए थे। नतीज़ा ये रहा कि फिल्म ने खासा आकर्षण बटोर लिया और हिट हो गई।
कुछ इसी तरह का हंगामा बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख़ खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘माय नेम इज खान’ की रिलीज़ से पहले भी हुआ था। शिव सेना ने मुंबई की सड़कों पर निकलकर इस फिल्म का विरोध करना शुरू किया और फिल्म की रिलीज़ न करने की धमकी दी। फिल्म की रिलीज़ से पहले शाहरुख़ खान द्वारा एक पाकिस्तानी क्रिकेटर के सपोर्ट में बयान देने से नाराज़ होकर शिवसेना ने किंग खान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उनकी फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग कर दी। भारी विवाद के चलते मुंबई में इस फिल्म को पहले तो रिलीज़ नहीं किया गया मगर बाद में इसकी रिलीज़ पर से रोक हटा दी गई और यह फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई।
इसी तरह सलमान की फिल्म ‘मैंने प्यार क्यों किया’ उस समय रिलीज़ की गई थी, जब यह लवर ब्वॉय तरह-तरह की मुसीबतों और विवादों में फंसा था, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट रही।  अब ताज़ा उदाहरण आरक्षण का है जिसका कारोबार सातवें आसमान पर पहुंच रहा है। इतने के बाद प्रकाश झा अपने निंदकों की बातों का जवाब देंगे या उन्हें भड़काएंगे यह आप ही तय करें।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Nikhil Sablania says:

    ‎@Aarakshan – The worst was imposing (or say stealing) Dr BR Ambedkar’s image of educationist and champion of untouchables and educationist into Gandhi using Amitabh.

    The film crew maintained false notion that it is about reservation & misguided society into a debate which is not there & created panic.

    Film’s director Prakash Jha and Amitabh continued saying that SC/ST/OBC should not shy away from debate on reservation or caste problem. But seeing the film, movie sidelines SC/ST/OBC and enters in the Mhabharathaa (epic war) of Aryans (privileged caste Hindus with three castes Brhamin, Kshatriya and Vaishya). So there is no debate in the film on caste issue but inter-clan debate of Aryans, between Brhamins versus Vishyas of Gandhi versus Hindu Parishad (Hindu Organization). And thereby dilutes the presence of depressed classes in movie too as there in reality. Indian government should ban this in the favor of the nation.

  2. Raj Kumar Yadav says:

    मुझे तो लगता है ये विरोध करने वालों को भी फंडिंग भी फिल्म डायरेटर ने ही किया होगा। अगर विरोध करने वालों ने ऐसा भी नहीं किया है तो उनसे बड़ा मूर्ख कोई नहीं होगा।

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

आखिर होगा क्या मज़दूरों का.?

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: