Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

सांप के मुंह में छछूंदर: दिग्गी राजा की जुबान फिर फिसली

By   /  August 17, 2011  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

राहुल गांधी के दखल के बाद अन्ना की तिहाड़ जेल से रिहाई तो हो गयी मगर अन्ना हजारे ने तिहाड़ जेल को ही अपना अनशन स्थल बना डाला और जेल महानिदेशक के दफ्तर में जम गए. जिसके चलते तिहाड़ जेल प्रशासन ही नहीं भारत सरकार के भी होश उड़े हुए हैं. अन्ना हजारे की इस रणनीति के चलते न केवल जेल प्रशासन, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार भी उलझन में पड़ चुकी है.
उधर तिहाड़ जेल के चारों दरवाजों पर अन्ना समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा है और तिहाड़ जेल प्रशासन के लिए सिरदर्द बन चुका है. इस अन्ना समर्थक भीड़ से निबटना न तो दिल्ली पुलिस के बस का है और न जेल प्रशासन के. रामदेव प्रकरण में अपनी भद पिटवा चुकी  भारत सरकार के मुंह में जैसे छछूंदर फंस गयी है. क्या करे और क्या न करे. कांग्रेस को अपनी नैय्या डूबता दिखाई पड़ रही है. विपक्षी दल ही नहीं, केंद्र सरकार के घटक दल भी कांग्रेस को कोसने में लगे हैं. कपिल सिब्बल जैसे नेता को भी जैसे सांप सूंघ गया है तो दिग्गी राजा ने पाकिस्तान से लौटते ही दुबारा अपने बडबोलेपन का आसरा लेते हुए बयान ठोक दिया कि १२१ करोड़ कि जनता में से १५-२० हज़ार लोगों के सडकों पर उतर आने से कोई फर्क नहीं पड़ता. दिग्गी राजा ये बयान देते हुए मनीष तिवारी की किरकिरी को नज़र अंदाज़ कर गए लेकिन सरकार के अंदरखाने दिग्गी राजा के इस बयान को लेकर खासी नाराजगी है. कुछ कांग्रेसी नेता तो गुप चुप में दिग्गी राजा को मुर्खाधीश ठहराने में भी नहीं चूक रहे.
जैसे जैसे इस मामले में समय गुजर रहा है, वैसे वैसे केंद्र सरकार दुनियां की नज़रों में हास्य का पात्र बन रही है और कांग्रेस के इन नेताओं की योग्यता पर सवालिया निशान खड़ें हो रहें हैं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. prakhar says:

    दिग्विजय सिंह जैसा नमूना ढूँढने से भी नहीं मिलेगा,ये आदमी हर बार बोलता पहले है सोचता बाद में है |

    • इस आदमी को इसकी ओकात का पता ही नहीं है कोंग्रेस को इसको पार्टी से निकाल देना चाहिए तब इसे अपने बडबोलेपन की सजा मिलेगी

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

विशाखापत्तनम में नाच रही है मौत..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: