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नया भारत लिफ्ट वाले अदनान सामी का ही तो है..

By   /  January 27, 2020  /  No Comments

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-मुकेश नेमा।।

अदनान को मिला ! ठीक मिला ! उनको लिफ़्ट मिली ! मिलना ही चाहिये थी ! वो सच्चे हक़दार है इसके ! वो हल्के होने के आंदोलन के अगुआ है ! कभी लंबा चौड़ा रह चुका यह आदमी अब केवल लंबा रह गया है ! पहली पहली बार जब देखे गये थे वो तब उनके अंदर एक और अदनान के घुसे होने का अंदेशा होता था ! पर इस धुनी आदमी ने पता नहीं कैसे पर उससे छुटकारा पा लिया और हम उस छरहरे अदनान को देख सकें जो हमें अपने मोटापे पर शर्मिंदा तो करता ही था प्रेरक भी था ! पूरे देश को उत्साह और अचरज से भर दिया उन्होने ! लोगों को लगा जब अदनान दुबले हो सकते हैं तो हम क्यों नहीं ! पर दिक़्क़त केवल यह थी कि अदनान अपने दुबले होने का फ़ार्मूला कोकाकोला की तरह दबाये बैठे हैं !
पर एक बात तो है अदनान अब दाद देने लायक़ गा नहीं पा रहे ! सरकार ने उनकी लिफ़्ट करा दे वाली गुहार तो सुन ली ! लिफ़्ट करा दिये गये है वो ! ऐसे वैसो के साथ उन्हें भी दे ही दिया गया है ! उन्हें ऐसे वैसो के साथ मिला या अदनान को भी ऐसा वैसा होने की वजह से मिला ये अलग से सोचने जैसा है पर मोटे गोलमोल अदनान जैसा गाता था ,वो इस दुबले अदनान से हो नहीं पा रहा ! ये अपने आप में शोध का विषय हो सकता है कि सुरीले होने का मोटापे से क्या संबंध है ! आदमी मोटा होने तक ही सुरीला रह पाता है या मोटापे की वजह से सुरीला हो जाता है ये बात कोई ज्ञानी महात्मा ही बता सकता है !

और फिर अदनान गाते भर नहीं थे बजाते भी अच्छा थे ! थे इसलिये क्योंकि बहुत दिन से उनके बजाने की खबर भी नहीं मिली ! अदनान के बारे में यह बताया गया था कि पूरी दुनिया में उनसे तेज पियानो और कोई नहीं बजा सकता ! हम कब तक शहनाई सारंगी को इनाम इकराम देते रहे ! हम नया भारत हैं और दुनिया को यह जताने के लिये पियानो को नवाज़ा जाना समझदारी भरा फ़ैसला है !
ऐसे में अदनान को पद्म मिलने से कलपते लोगों को मेरी यह सलाह है कि रोने पीटने से बाज आये ! कुछ सीखे अदनान से ! पहली फुरसत में कोई जिम ज्वॉईन करें ! तला भुना खाने से परहेज़ करे ! पास के चोर बजार से पियानो हारमोनियम जैसा कुछ ख़रीद लाये ! और उसके जैसा होने की कोशिश करें !
मुझे तो अदनान सामी उसी दिन पद्मश्री के हक़दार लगने लगे थे जब मुझे पता चला था कि ये मोटा ताज़ा आदमी जेबा बख्तियार जैसी खूबसूरत औरत का शौहर है ! जेबा के बाद दो और बीबियो के शौहर हुये अदनान और ये कारनामा वो तब ही कर चुके थे जब वो मोटे ही बने हुये थे ! सोचने जैसा यह भी है कि ऐसे कारसाज बंदे को पद्म नहीं दिया जायेगा तो हम इन पद्मों का करेंगे क्या !
अदनान चौदह अगस्त को भी पैदा हो सकते थे पर उन्होने इसके लिये पन्द्रह अगस्त का दिन चुना ! उन्हें तो केवल इसलिये ही पद्मश्री दे दी जानी चाहिये थी ! देर से ही सही पर अब यह सच्चा हिंदुस्तानी लिफ़्ट चढ कर ऊँचाई पर पहुँच चुका ! ऐसे में इससे जल भुन कर कुछ हासिल होना नामुमकिन है ! अपना पेट घटाये और मन बड़ा करें ! मेरे साथ मिलकर अदनान सामी को सराहे ! उन्हे बधाई दे ! इसलिये दें क्योंकि आप और कुछ कर भी नहीं सकते !

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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