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ढीली कानून व्यवस्था और पथ भ्रमित युवा..

By   /  February 11, 2020  /  No Comments

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-केशी गुप्ता।।

दिल्ली में हुए गार्गी कॉलेज छेड़छाड़ मामले को देखते हुए आज देश का सबसे बड़ा सवाल यह है कि किस ओर जा रहा है समाज और भारतीय संस्कृति? कहां है कानून व्यवस्था ? क्या सच में हम नारी सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हैं? कौन है यह लोग जो युवा पीढ़ी को इस तरह की शर्मनाक हरकतों और राजनीति का हिस्सा बना रहे हैं? ऐसे कई सारे सवाल है जो आज विकास और डिजिटल इंडिया बनने वाले देश और देश की जनता के समक्ष खड़े हैं।
जिस देश में युवा और वहां की नारियां स्कूल कॉलेजों में सुरक्षित नहीं है वह देश किस प्रगति विकास और सशक्तिकरण की बातें करता है। आए दिन होने वाले जेएनयू, जामिया मिलिया और अब गार्गी कॉलेज के हादसों ने यह साबित कर दिया है कि देश की कानून व्यवस्था कितनी लाचार और बेबस है। जहां बच्चे स्कूल पढ़ने के लिए और अपने भविष्य को बनाने के लिए आते हैं वहां पर वह खुद को सुरक्षित नहीं पाते हैं। क्या अभिभावकों को अपने बच्चों को पढ़ने लिखने के लिए स्कूल कॉलेजों में नहीं भेजना चाहिए? क्यों सुरक्षाकर्मियों के होते हुए भी इस तरह के शर्मनाक हादसे हो जाते हैं? क्यों प्रशासन समय पर कोई कार्यवाही नहीं करता है? क्यों कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू नहीं किया जाता? ऐसी कौन सी कमी है भारतीय कानून व्यवस्था में की लोगों के अंदर कानून व्यवस्था के के तहत सजा का डर खौफ बिल्कुल खत्म होता जा रहा है? क्या प्रशासन की इन सभी बातों की जवाबदारी नहीं बनती है?
कॉलेज के उत्सव में इस तरह की शर्मनाक घटना का घटित होना कॉलेज की अंदरूनी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े करती है जिस पर सही जांच पड़ताल और कार्रवाई का होना जरूरी है। क्यों कॉलेज कार्यकारिणी ने इस मुद्दे पर कोई कार्यवाही नहीं की? यदि देश के भविष्य,छात्र-छात्राएं अपने अध्यापकों और स्कूल कॉलेजों के संरक्षण में सुरक्षित नहीं है तो उस देश का भविष्य अंधकार मैं है ऐसा कहना गलत नहीं होगा। यह एक चिंता का विषय है। समय रहते यदि कानून व्यवस्था को कठोरता से लागू नहीं किया गया तथा युवा पीढ़ी को राजनीतिक हथकंडे बाजी से दूर ना रखा गया तो किसी भी तरह का विकास संभव नहीं।जरूरत है देश में बढ़ती बेरोजगारी गिरती आर्थिक व्यवस्था को मजबूत करने के की । जरूरत है एक अच्छी शिक्षा प्रणाली व्यवस्था और सोच की जो युवाओं को सही दिशा प्रदान कर सकें।

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  • Published: 2 months ago on February 11, 2020
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  • Last Modified: February 11, 2020 @ 12:27 pm
  • Filed Under: नज़रिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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