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दिल्ली की पत्रकार सहित 10 लोगों को UP पुलिस ने भेजा जेल, पैदल यात्रा का आरोप..

By   /  February 12, 2020  /  No Comments

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-पंकज चतुर्वेदी।।


दिल्ली की पत्रकार प्रदीपिका सारस्वत सहित 10 युवाओं को मंगलवार को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि ये लोग बिना इजाजत के पैदल यात्रा पर निकले थे, इसलिए इन्हें गाजीपुर में गिरफ्तार किया गया. आरोपी युवा गोरखपुर के चौरी-चौरा से दिल्ली के राजघाट तक की पैदल यात्रा पर निकले थे. युवाओं का कहना था कि वे समाज में सद्भाव बढ़ाने के लिए ‘नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा’ कर रहे हैं.

पुलिस ने युवाओं पर धारा 151 के तहत कार्रवाई की है, लेकिन ये नहीं बताया है कि इनकी यात्रा से क्या दिक्कत हो रही थी. प्रदीपिका ने 10 फरवरी को फेसबुक पर लिखा था- ‘कल शाम से लोकल इंटेलीजेंस और पुलिस यात्रियों के चक्कर काट रही है, तस्वीरें खींच रही है, वीडियो उतार रही है. स्टेट इतना डरा हुआ है कि चंद लोगों को शांति और सौहार्द की बात करते हुए नहीं देख पा रहा है. यह यात्रा एक पाठशाला है, जहां महज पैदल चलते हुए हम सीखते हैं कि कोई जगह कश्मीर कैसे बनती है.’

जेल भेजे गए लोगों में मनीष शर्मा, प्रियेश पांडे, नीरज राय, अनंत शुक्ल, मुरारी, राज अभिषेक, शेष नारायण ओझा शामिल हैं. मुरारी और प्रियेश बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के एमए के छात्र हैं. प्रदीपिका ने यात्रा के बारे में एक लेख में कहा था- ‘उत्तर प्रदेश में सीएए-एनआरसी के प्रदर्शनों के दौरान कुल 23 मौतें हुई थीं. इस मुद्दे को लेकर कुछ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने फैक्ट-फाइंडिंग टीम बनाई थी. हिंसक घटनाओं के बारे में जानने के बाद युवाओं ने पदयात्रा करने का फैसला किया.’

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  • Published: 2 months ago on February 12, 2020
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  • Last Modified: February 12, 2020 @ 6:17 pm
  • Filed Under: मीडिया

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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