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क्या यही शिक्षा दी जाएगी आपके बच्चों को.?

By   /  February 28, 2020  /  No Comments

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-मनीष सिंह।।

मणिपुर में बारहवीं कक्षा पास होने के लिए यह चीजे रटनी और बतानी अनिवार्य हो गई हैं..

29- राष्ट्र निर्माण में नेहरू के चार नकारात्मक गुण क्या थे

  • नेहरू को गालियां दो। जाहिर है किताब में इस तरह की चीजें लिखकर कोर्स में शामिल कराई गई हैं। जाहिर है, इस वर्ष ये प्रश्न आया है, तो आगामी वर्ष में बच्चे इसे महत्त्वपूर्ण मानकर याद किया करेंगे। यदि किताब में न मिले तो अखबारों और वाट्सप से आया कंटेंट चिपकाएंगे। नेहरू से नफरत करना आपकी योग्यता की पहली सीढ़ी है।

30- विवेचना कीजिये कि क्षेत्रीय आकांक्षाएं राष्ट्रीय एकीकरण के बाधक होती हैं।

  • विविधता में एकता की अवधारणा में , क्षेत्रीय पहचान और राष्ट्रीय एकीकरण साथ चलता रहा हैं। दोनो की स्थिति द्वन्द्वात्मक नही होती। यह प्रश्न आपको द्वंद्वात्मक विचार सोचने, लिखने को बाध्य करता है। यह एक को मिटाकर दूसरे की सुप्रीमेसी बनाने का विचार है। किसी कौम की पहचान आप मिटा नही सकते। उसे सम्मान देकर साथ रखं सकते हैं। मगर आपके बच्चे को इसका उल्टा लिखने, मानने को बाध्य किया जा रहा है।

31- विवेचना कीजिये कि किस प्रकार वैश्वीकरण समाज मे असमानता लाता है।

  • भारत पिछले 30 साल वैश्वीकरण का हिस्सा बनकर ही सक्सेस स्टोरी बन पाया था। पिछले छह साल में हमने विदेश व्यापार खोया है, और देशी व्यापार में दो चार लोगों को खरबपति बनाया है। जिस सोच से इकॉनमी बर्बादी के कगार पर है, उसकी प्रशंसा में लिखने के नम्बर मिलेंगे।

32- भारतीय जनता पार्टी का इलेक्शन सिंबल का रेखाचित्र खींचिए।

  • 4 नम्बर का प्रश्न है।बगैर दिमाग लगाए सबसे आसान नम्बर इसी पर है।

34- पाकिस्तान से दुश्मनी भरे रिश्तों के कारणों की विवेचना कीजिये।

यानी कि आपको पाकिस्तान से नफरत के जस्टिफिकेशन याद नही होंगे, तो हम आपको 12वीं पास करके कालेज नही बैठने देंगे।

बच्चो को इस शिक्षा से बचाइए। उसे अपनी सोचने समझने की क्षमता कुंद करने पर नम्बर दिए जा रहे हैं। ये भयावह है, पूरी तरह से भावी पीढ़ी को बर्बाद करने की तैयारी है।

राजनैतिक दल भी ध्यान दें। यह छात्र अगले ही वर्ष पहली बार वोट करेगा, और फिर 50 साल तक करेगा।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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