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कनिका कपूर बेबी डॉल से संकट बन गई..

By   /  March 20, 2020  /  No Comments

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-पंकज चतुर्वेदी।।

गायिका कनिका कपूर ने देश को संकट में डाल दिया , वह लंदन से लौटीं और एयरपोर्ट पर शायद स्टार होने के कारण उनकी जांच में कोताही हुई , फिर वह कई पार्टियों में शामिल हुई. कोई चार सौ उच्च वर्ग के लोग उनके संपर्क में आये , इनमें वसुंधरा राजे भी थीं ओर उनके बेटे ओर झालावाड से सांसद दुष्यंत भी, दुष्यंत कल सारे दिन संसद में रहे ओर उनके संपर्क में कई सांसद ओर संसद भवन का स्टाफ भी आया .
अब कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद पूरे स्वास्थ्य विभाग के लिए नया सिरदर्द शुरू हो गया है. दुखद यह है कि कनिका अभी भी झूठ बोल रही है कि वह किसी पार्टी में शामिल नहीं हुई , जबकि उनके पिता राजीव कपूर स्वीकार कर चुके हैं कि वे कम से कम चार सौ लोगों के संपर्क में आई हैं , अब यह बड़ा सरदर्द है कि कनिका से मिले ओर उनके मिलने वालों से मिले लोगों को तलाशना ओर उनकी करोना जांच करवाना . कनिका कपूर ने खुद के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि करते हुए इंस्टाग्राम पर लिखा, ‘पिछले चार दिन से मुझमें फ्लू के लक्षण हैं, मैंने खुद का चेकअप कराया और रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई।



विदेश से आने वाले तकरीबन हर एक नागरिक को पहले क्वारंटाइन में रखा जाता है और उसकी विधिवत जांच होती है. ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि विदेश से आने के बाद कनिका ने कोरोना टेस्ट पास कैसे कर लिया और किस तरह उन्हें बिना आइसोलेशन में रखे सीधे घर आने की अनुमति दे दी गई. हालांकि अब सारी बातें सामने आने के बाद कनिका के पूरे परिवार का टेस्ट किया जा रहा है और सभी से आइसोलेशन में रहने को कहा जा रहा है. कनिका को लखनऊ के मेडिकल कालेज में भर्ती करवाया गया है
सच में यह “बेबी डोल” सोने की नहीं हैं —-

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  • Published: 3 months ago on March 20, 2020
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  • Last Modified: March 20, 2020 @ 8:40 pm
  • Filed Under: संकट

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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