आबादी बढ़ जाने से धर्म की ताकत बढ़ती होती तो फिर…

-सुनील कुमार॥

उत्तरप्रदेश के गाजियाबाद के एक बहुत ही विवादास्पद और साम्प्रदायिक महंत यति नरसिम्हानंद ने हिन्दुओं से अधिक बच्चा पैदा करने की अपील की है ताकि आने वाले दशकों में हिन्दुस्तान हिन्दूविहीन राष्ट्र न हो जाए। अभी-अभी नरसिम्हानंद हरिद्वार में नफरती भाषण के मामले में जमानत पर रिहा हुए हैं। उन्होंने उसके बाद एक भाषण में कहा कि गणितीय गणना कहती है कि 2029 तक एक गैरहिन्दू प्रधानमंत्री बन जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर एक बार कोई गैरहिन्दू प्रधानमंत्री बन गया, तो बीस साल में यह देश हिन्दूविहीन हो जाएगा। उन्होंने हिन्दुओं से अधिक बच्चे पैदा करने को कहा है। इसके पहले इतवार को ही उन्होंने दिल्ली की एक हिन्दू महापंचायत में भी हिस्सा लिया था, और कहा था कि अगर कोई मुसलमान भारत का प्रधानमंत्री बनता है तो पचास फीसदी हिन्दू धर्मांतरित हो जाएंगे, और हिन्दुओं को अपने अस्तित्व के लिए लडऩे के लिए हथियार उठाने बाध्य होना पड़ेगा।

इस तरह की बकवास करने वाले अलग-अलग कई धर्मों के लोगों के बारे में राजनीति बड़े सहूलियत का रूख अख्तियार करती है। अपनी-अपनी पसंद से नेता इनकी बातों को सही ठहराते हैं, या अधिक असुविधा होने से उस पर कुछ कहने से बच जाते हैं। धर्म की वकालत करने वाले कुछ लोग ऐसे लोगों को कभी महत्वहीन बड़बोले करार दे देते हैं, तो कभी उनकी लगाई हुई आग पर अपनी चुनावी रोटी सेंकने के लिए घेरा डालकर बैठ जाते हैं। कुल मिलाकर इस तरह घोर साम्प्रदायिक और हिंसक बातों को करके धर्म के ये झंडाबरदार कसौटी के पत्थर पर अदालत के बर्दाश्त को भी घिसते हैं कि बिना सजा पाए और क्या-क्या कहा जा सकता है। आज महानता के सारे दावे करने के बावजूद हिन्दू धर्म का हाल यह हो गया है कि एक से बढक़र एक घटिया और हिंसक बातें करने वाले लोग अपने आपको इस धर्म का ठेकेदार साबित करते हैं, और जिन अनगिनत हिन्दुओं को वे अपना मातहत बताते हैं, उनमें से अधिकतर चुप रहकर ऐसे दावों को मानो मंजूरी भी दे देते हैं। कुछ गिने-चुने ऐसे हौसलामंद लोग हैं जो सोशल मीडिया पर खुलकर यह कहते हैं कि ऐसे बकवासी तथाकथित हिन्दुत्व-ठेकेदार मेरा प्रतिनिधि नहीं करते हैं। लेकिन जहां पर बात चुनावों में भेड़ों के रेवड़ की तरह हॉंककर ले जाने वाले वोटरों की है, तो उन्हें वोट डालने तक बरगलाने की ताकत काफी रहती है, और उसके बाद की यह फिक्र नहीं रहती कि इससे हिन्दुस्तान के विविधतावादी बुनियादी ढांचे पर कितने जख्म लग रहे हैं। अभी-अभी हमने इसी जगह पर कर्नाटक में चल रही हिन्दुत्व की प्रयोगशाला को लेकर लिखा था और कल से कर्नाटक में मुस्लिम टैक्सी ड्राइवरों के बहिष्कार का एक नया फतवा और जुड़ गया है। हिन्दू धर्म का आज उसके बहुत से ठेकेदारों ने महज यह इस्तेमाल मान लिया है कि उससे गैरहिन्दुओं पर, और फिलहाल खासकर मुसलमानों पर कितना हमला किया जा सकता है। क्या हजारों बरस पहले का यह धर्म या हिन्दुत्व अब महज इतना तंग हो चुका है कि उसे जिंदा रहने के लिए अपने लोगों को बर्बाद कर देने वाली राय देनी पड़ रही है। यह बात साफ है कि सबसे गरीब लोगों के अधिक बच्चे होते हैं, क्योंकि उनमें से कितने जिंदा बचते हैं, और कितने मर जाते हैं, इसका ही ठिकाना नहीं रहता। ऐसे में आज गरीबी, फटेहाली, भुखमरी, और कुपोषण के बीच गरीब हिन्दुओं को अधिक बच्चे पैदा करने का फतवा धार्मिक होने का दावा करने वाला एक ऐसा आदमी दे रहा है जो बिना मेहनत धर्म के नाम पर ऐशोआराम करते हुए जीने वाले तबके का है।

जिन लोगों को यह लगता है कि अधिक बच्चे पैदा करना किसी धर्म को बचाने का काम हो सकता है, उन्हें यह भी समझना चाहिए कि दुनिया में धर्म अधिक संख्या की वजह से नहीं फैला, अधिक संपन्नता की वजह से फैला है, और सत्ता की अधिक ताकत की वजह से फैला है। अपने लोगों को अधिक बच्चों के बोझ से और अधिक लादकर उनके बच्चों को कुपोषण का शिकार बनाना, उन्हें अनपढ़ रहने देना, और उन्हें हमेशा के लिए गरीब बना देना यह किसी धर्म की भलाई का काम नहीं हो सकता। ईसाई धर्म संपन्न शासकों का धर्म था, इसलिए वह हिन्दुस्तान तक आकर यहां फैल सका, और लोगों को ईसाई बना पाया। ठीक इसी तरह मुगल ताकतवर थे, और इसलिए वे हिन्दुस्तान तक आकर यहां हमला कर पाए, और यहां लंबा राज किया, और लोगों को मुसलमान बना पाए। हिन्दू अगर संपन्न होंगे, सक्षम होंगे, ताकतवर होंगे, तो वे और लोगों को हिन्दू बना पाएंगे, लेकिन अगर वे आबादी बढ़ाने के मकसद से अधिक बच्चे पैदा करेंगे तो वे एक गरीब आबादी की भीड़ खड़ी करेंगे जिसे खिलाने का जिम्मा हिन्दुओं के भी कोई मठ-मंदिर नहीं लेंगे, जिनके पास इतनी दौलत है कि जिसे गिनना भी मुमकिन नहीं है।

धर्मान्धता और साम्प्रदायिकता की हिंसक बातें करने वालों के हौसले आज के हिन्दुस्तान में आसमान पर हैं। जो बकवासी आदमी अभी जेल से जमानत पर छूटा हुआ है, वह फिर से घोर साम्प्रदायिक और हिंसक बातें कर रहा है, और धर्म के आधार पर नफरत फैलाने के अपने पसंदीदा शगल में जुट गया है। आज देश की हवा ऐसी है कि गांधी की हत्या की वकालत करने वाले लोगों को संसद पहुंचाया जा रहा है, और गोडसे के मंदिर बनाए जा रहे हैं। ऐसे में कोई हैरानी नहीं कि साम्प्रदायिकता की इतनी बातें करने वाले इस महंत को भी कोई राज्यसभा या लोकसभा पहुंचा दे। लेकिन हिन्दू धर्म के समझदार लोगों को यह देखना चाहिए कि जिनकी आबादी अधिक है, उनकी बदहाली का क्या हाल है। ऐसे फतवेबाज आबादी तो शायद नहीं बढ़वा पाते, लेकिन नफरत जरूर बढ़ा पाते हैं, जिससे कि आज वैसे भी हिन्दुस्तान की हवा जहरीली हो चुकी है। ऐसे लोगों का भांडाफोड़ किया जाना चाहिए, और यह काम इन्हीं के धर्म के लोगों को करना होगा।

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