ट्विटर पर विचारों का कारोबार

दुनिया के सबसे बड़े रईस शख्स ऐलन मस्क ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय माइक्रोब्लॉगिंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर को खरीद लिया है। 44 अरब अमेरिकी डॉलर यानी करीब 3368 अरब रुपये में यह सौदा हुआ है। इस सौदे को लेकर एक रोचक टिप्पणी देखने मिली कि दुनिया के सबसे बड़े जोकर ने दुनिया के सबसे बड़े सर्कस को खरीद लिया। निस्संदेह ट्विटर लाखों-करोड़ों लोगों के लिए सूचनाओं के आदान-प्रदान और अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक बड़ा माध्यम है।

लेकिन जिस तरह से ट्विटर या बाकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स को विचारों को प्रभावित करने के इरादे से इस्तेमाल किया जाता है, वह वाकई किसी तमाशे जैसा ही लगता है। खासकर राजनैतिक दल मतदाताओं को प्रभावित करने और अपने विरोधियों की छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का बेधड़क इस्तेमाल करते हैं, यह बात भी जाहिर हो चुकी है। इन हालात में अगर ट्विटर जैसे सशक्त प्लेटफार्म की बागडोर एक व्यापारी के हाथ में आ जाए, तो फिर यह अंदेशा हमेशा बना रहेगा कि उस मंच पर अभिव्यक्ति के लिए निष्पक्ष और लोकतांत्रिक माहौल कब तक बना रहेगा।

पाठक जानते हैं कि ऐलन मस्क टेस्ला और स्पेस एक्स जैसी कंपनियों के मालिक हैं। टेस्ला इलेक्ट्रिक कार बनाने वाली कंपनी है। 2004 में ऐलन मस्क ने टेस्ला की बुनियाद यह कहते हुए रखी थी कि भविष्य में सब कुछ इलेक्ट्रिक होगा। ऐलन मस्क का मानना है कि लोग आने वाले वक्त में दूसरे ग्रहों पर रहेंगे इसी वजह से उन्होंने अंतरिक्ष इंवेस्टिगेशन शुरू किया। इस प्रोग्राम का नाम स्पेस एक्स दिया गया। मस्क का कहना है कि वह मंगल ग्रह पर अपना बेस बनाना चाहते हैं। मस्क सोलर एनर्जी सिस्टम भी बनाते हैं।

बताया जाता है कि ऐलन मस्क ने 10 साल की उम्र में कंप्यूटर प्रोग्रामिंग सीखी थी। 12 साल की उम्र में उन्होंने ब्लास्टर नाम का एक वीडियो गेम बनाया और इसे बेचा। यह उनकी पहली कमाई थी। 27 साल की उम्र में मस्क ने ‘एक्स डाट काम’ नाम की एक कंपनी बनाई और दावा किया गया कि यह कंपनी पैसा करने की प्रक्रिया बहुत आसान बना देगी। जाहिर है ऐलन मस्क ने बहुत कम वक्त में बहुत ज्यादा तरक्की की। अपने अनूठे विचारों और कार्यशैली से बहुत जल्द दुनिया के सबसे अमीर आदमी होने का ओहदा भी हासिल कर लिया। निजी तौर पर ये उपलब्धियां उन्हें चाहें पर्सन ऑफ द ईयर बनाएं या युवाओं के लिए वे आदर्श के तौर पर पेश किए जाएं, लेकिन जब बात दुनिया में विचारों के प्रचार-प्रसार, आदान-प्रदान की हो तो वहां कारोबारी नजरिया कई बार लोकतंत्र और मानवाधिकारों के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

ऐलन मस्क वैसे तो खुद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिमायती बताते हैं। उन्होंने अपने एक ट्वीट में लिखा है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी लोकतंत्र के लिए जरूरी है। ट्विटर एक डिजिटल टाउन स्क्वॉयर है, जहां मानवता के भविष्य पर चर्चा होती है। मैं अल्गोरिदम को ओपन सोर्स रखने, स्पैम बॉट्स को हटाने, प्लेटफॉर्म पर ऑथेंटिक लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने जैसे नए फीचर्स के साथ ट्विटर को और भी बेहतर बनाना चाहता हूं। ट्विटर में अपार क्षमता है। मैं इसे अनलॉक करने के लिए कंपनी और यूजर्स के साथ काम करने को उत्सुक हूं। इससे पहले एक इंटरव्यू के दौरान ऐलन मस्क ने कहा था कि ट्विटर यूजर्स को ये जानने का हक होना चाहिए कि उनका ट्वीट डिमोट या प्रमोट किया जा रहा है। साथ ही ये जानकारी भी होनी चाहिए कि ऐसा किस आधार पर किया जा रहा है? ऐलन मस्क ट्विटर पर एडिट बटन के होने या न होने पर पोल भी करवा चुके हैं और उन्होंने ये संकेत भी दिए थे कि ट्विटर पर फर्जी एकाउंट्स की जो भरमार है, उसे खत्म करने के लिए वे कदम उठाएंगे। यानी ये तय है कि आने वाले वक्त में ट्विटर में कई बड़े बदलाव देखने मिलेंगे। लेकिन ये सारे बदलाव व्यापक तौर पर हितकारी ही होंगे, इस पर संदेह है।

राजनीतिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता उन्हें आशंका जतला रहे हैं कि मस्क के ट्विटर पर नियंत्रण का अर्थ है कि सामग्री पर नियंत्रण कम होगा और उन लोगों की भी ट्विटर पर वापसी होगी जिन्हें नफरत भरी या हिंसक भाषा के इस्तेमाल आदि के कारण इस मंच से हटाया गया था। इनमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं जिन्हें ट्विटर ने भ्रामक सूचनाएं फैलाने के कारण अपने मंच से हटा दिया था। हालांकि ट्रंप ने अभी इस बात से इंकार कर दिया है कि वे ट्विटर पर वापसी कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप जैसे लोगों से दुनिया भरी पड़ी है।

दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने तो इस बात का स्वागत किया है कि अब ट्विटर पर कम नियंत्रण होगा। ये इस बात का इशारा है कि अब तक विद्वेषपूर्ण टिप्पणियों या भ्रामक खबरों पर रोक लगाने या ऐसा करने वालों के ट्विटर एकाउंट प्रतिबंधित करने का जो सिलसिला चल रहा था, वह खत्म हो जाएगा। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर खुल कर लिखने की छूट ट्विटर पर उपलब्ध रहेगी। इस छूट का बेजा इस्तेमाल किस तरह होगा, कैसे राजनैतिक शक्तियां अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए ट्विटर का इस्तेमाल करेंगी, और कैसे विचारों के कारोबार में मुनाफे की खातिर अविचारित समझौते होंगे, ये सब भविष्य में नजर आएंगे। फिलहाल ट्विटर के इस्तेमाल में सद्बुद्धि मिले, यही प्रार्थना की जा सकती है।

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