रणवीर सिंह की नग्न तस्वीरों से उठा सवालों का एक सैलाब…

-सुनील कुमार॥

सोशल मीडिया पिछले चार दिनों से उफान पर है। खासकर खुलकर लिखने वाली महिलाओं का एक तबका ऐसा है जो फिल्म अभिनेता रणवीर सिंह की नग्न तस्वीरों को पोस्ट करके अपनी खुली सोच को सामने रख रहा है, और यह साबित भी कर रहा है कि महिलाओं की नग्न तस्वीरों को देखना जिस तरह पुरूषों ने अपना अधिकार बना रखा है, तो उसी तरह किसी पुरूष की आकर्षक और नग्न देह को देखना महिलाओं का हक भी है। ये तस्वीरें रणवीर सिंह ने सोच-समझकर खिंचवाई हैं, और कई तस्वीरों में उनके बदन पर महज पांव में पायजेब की तरह बंधा एक काला धागा भर है। कुछ आजादखयाल महिलाएं इसे महिलाओं का नयन सुख का अधिकार मानते हुए इससे भी बेहतर, मतलब इससे भी अधिक दुस्साहसी, तस्वीरों की उम्मीद कर रही हैं। एक पुरूष अभिनेता की नग्न तस्वीरों ने महिलाओं के समान अधिकार और आजादी के मुद्दे को हवा दे दी है, जिसे देखना बड़ा दिलचस्प है।

यह कोई एकदम ही पहला मौका नहीं है जब किसी हिन्दुस्तानी मर्द की ऐसी पूरी तरह से नग्न तस्वीर मीडिया में आई हो। लोगों को याद होगा कि कुछ दशक पहले एक मॉडल मिलिंद सोमन और एक प्रमुख मॉडल मधु सप्रे के बीच जूते के एक ब्रांड के इश्तहार के लिए एक फोटो खींची गई थी जिसमें ये दोनों मॉडल बिना कपड़ों के खड़े लिपटे हुए थे, और इनके बदन पर सिर्फ एक अजगर लिपटा हुआ था। दोनों ने बस जूते पहन रखे थे, और किसी जूते का उससे अधिक दमदार इश्तहार हो नहीं सकता था। मिलिंद सोमन की कई दूसरी नग्न तस्वीरें इस इश्तहार से परे भी सामने आई थीं, और चौथाई सदी पहले इन तस्वीरों ने बड़ी खलबली भी मचाई थी।

अब हिन्दुस्तान के बिल्कुल ही ताजा और राजनीतिक सांस्कृतिक-पैमानों को छोड़ दें, तो नग्नता भारतीय संस्कृति में कोई नई बात नहीं है। सैकड़ों बरस पहले इस देश में जो मंदिर बने हैं, उनके भीतर और उनके बाहर देवी-देवताओं से लेकर दूसरे लोगों तक की नग्न प्रतिमाओं का बड़ा लंबा इतिहास है। खजुराहो जैसे मंदिर देश भर में बिखरे हुए हैं जहां पर संभोगरत लोगों की प्रतिमाएं सिर चढक़र बोलती हैं। कृष्ण की अनगिनत कहानियों में बिना कपड़ों के गोपियां पानी में खड़ी हैं, और कृष्ण कपड़ों सहित पेड़ पर चढ़े हुए उसका मजा ले रहे हैं।

इक्कीसवीं सदी की ताजा और हमलावर शुद्धतावादी सनातनी संस्कृति के फतवों को छोड़ दें, तो हिन्दुस्तान के हिन्दुओं में भी नग्नता को कभी बुरा नहीं माना गया है। यहां पर कई धर्मों के सन्यासियों का बिना कपड़ों के रहना पूरी तरह सामाजिक मान्यताप्राप्त है। कुंभ के मेले मेें तो नागा साधुओं की तस्वीरें लेने के लिए दुनिया भर से विदेशी फोटोग्राफरों की फौज हर बार आती ही है, लेकिन ऐसे कैमरों और नाटकीयता से दूर जैन धर्म के कुछ सन्यासियों के बीच बिना कपड़ों पूरी तरह नग्न रहना भी प्रचलित है, और समाज उसके साथ आसानी से, आस्था सहित जी लेता है, इसे लेकर कभी कोई बवाल खड़ा नहीं होता। बल्कि अनजाने नागा साधुओं की गोद में भी आम हिन्दुस्तानी लोग अपने बच्चों को देकर उनका आशीर्वाद दिलवाते हैं, और किसी को इसमें कुछ अटपटा नहीं लगता। लेकिन सदियों से चली आ रही ऐसी हिन्दू और हिन्दुस्तानी संस्कृति को आज के हिंसक और हमलावर धार्मिक और सांस्कृतिक फतवों को झेलना पड़ रहा है, और आज की नग्नता इन नवशुद्धतावादी पैमानों पर ही आंकी जा रही है।

यह तो गनीमत है कि अभी की ये ताजा तस्वीरें रणवीर सिंह की हैं, अगर ये शाहरूख खान या सलमान खान की होतीं, तो इन्हें भारतीय संस्कृति पर हमला करार देकर इनको देश भर में दसियों हजार जगहों पर जलाया जाता, और इन्हें भारतीय संस्कृति का गद्दार करार दिया जाता। लेकिन यह देह एक गैरमुस्लिम की है, इस नाते यह नग्नता उतना बड़ा जुर्म नहीं है।

सोशल मीडिया लोगों की बर्दाश्त को तौलने का एक बड़ा अच्छा जरिया भी हो गया है। बदनीयत से भाड़े पर हमले करने वाले, या प्रचार करने वाले लोगों की शिनाख्त आसान रहती है, लेकिन उनसे परे के जो लोग रहते हैं, उनकी प्रतिक्रियाओं से यह समझ आता है कि नाजुक मुद्दों पर लोग क्या सोच रहे हैं, पिछली पीढ़ी से अलग, या उसके मुकाबले क्या सोच रहे हैं, और इस बर्दाश्त को और कितनी दूर तक खींचा जा सकता है। यह बात हम सिर्फ नग्नता के बारे में नहीं कह रहे, जिंदगी के किसी भी पहलू को लेकर कह रहे हैं। जिस वक्त इस देश में गणेश के दूध पीने का पाखंड प्रचारित हुआ था, उस वक्त सोशल मीडिया नहीं था, वरना दूध भी फैलता, और दूध फट भी जाता। पाखंड के खिलाफ भी लिखने वाले लोग रहते, और जो दोनों सिरों के बीच अनिश्चय में फंसे लोग रहते, उन्हें भी दोनों किस्म की बातें पढऩे मिली होतीं, और उनसे वे अपना दिमाग बना पाते।

रणवीर सिंह की नग्न तस्वीरों ने महिलाओं के एक बड़े तबके को इस निराशा से उबरने में मदद की होगी कि महिलाओं की नग्न तस्वीरों को देख-देखकर मर्द मजा लेते हैं। यह बराबरी का कुछ हिसाब चुकता करने का मौका भी है, और साथ ही इस बात का भी मौका है कि औसत हिन्दुस्तानी मर्द जो कि सबसे खूबसूरत मॉडल्स के बदन देख-देखकर अपनी बीवियों को नीची नजर से देखते हैं, आज उन्हें रणवीर सिंह के बदन के मुकाबले अपने बदन को भी तौलने का मौका मिला होगा कि उनका बदन भी नीची नजरों से देखने लायक ही है, और वह तो शायद बिना कपड़ों के किसी कैमरे के सामने पेश करने लायक भी नहीं है। इसलिए चार-छह तस्वीरों का यह सैलाब सबके सोचने का सामान है, औरत और मर्द के बराबरी के हक के दावे का भी, और अपने-अपने बदन का ख्याल रखने का भी।

Facebook Comments Box

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *