गूगल और इंटरपोल मिलकर पकड़ेगें अपराधी…

गूगल और इंटरपोल मिल कर अब इंटरनेट पर यौन शोषण, ड्रग्स तस्करों और बच्चों की गुलामी को बढ़ावा देने वाले नेट्वर्क के खिलाफ मुहिम चलाएंगे. दो दिन की बैठक में अंतरराषट्रीय अपराधियों के खिलाफ जंग छेड़ने का एलान किया गया.

“एक विश्व में, जहां सब लोग एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, वहां कमजोर लोग सुरक्षित होंगे, तस्करी से पीड़ितों को अपने अधिकारों का पता चलेगा और शारीरिक अंगों को गैरकानूनी तरीके से बेचने वालों के बारे में पता लगाया जा सकेगा.” गूगल के प्रमुख एरिक श्मिट ने इस एलान के साथ इंटरपोल के साथ दो दिन की बैठक को मंजिल तक पहुंचाया है. गैर कानूनी नेट्वर्कों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए आयोजित बैठक लॉस एंजेलेस में हो रही है.

इंटरपोल ने गूगल की मदद के एक ऐसा एप्लिकेशन (एप्प) तैयार किया है जिससे नकली सामान और तस्करी में लगे वेबसाइट चला रहे अपराधियों का पता लगाया जा सकेगा. इंटरपोल ग्लोबल रजिस्टर के जरिए इंटरनेट पर बेची जा रही चीजों की जांच की जाएगी और यह काम इस एप्लिकेशन से किया जाएगा. इंटरपोल के प्रमुख रोनाल्ड नोबल ने कहा कि इस वक्त दवाओं, तंबाकू पदार्थों और घरेलू सामान खरीदते हुए ग्राहक पता नहीं लगा सकते कि क्या सही है और कौन सा सामान फर्जी है, “हमने एक तरकीब निकाली है जिसके जरिए ग्राहक, व्यापारी और सुरक्षा संगठन चीजों के कोड को स्कैन कर सकेंगे और पता लगाया जा सकेगा कि वह फर्जी है या नहीं. अगर वह हरा हो जाता है तो इसका मतलब चीज ठीक है. लाल हो जाए तो मतलब फर्जी है.”

गूगल का यह एप्प इस वक्त केवल एंड्रॉइड मोबाइलों के लिए है लेकिन आने वाले समय में एपल, माइक्रोसॉफ्ट और ब्लैकबेरी में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें से एक नया सिस्टम है फार्मासेक्यूर, जो भारत में उत्पादित दवाओं के पैकेट में खास सुरक्षा कोड छापता है. नोबल के मुताबिक अगर भारत से सामान किसी दूसरे देश जाता है जबकि उसे वहां बेचने की इजाजत नहीं है, तो मोबाइल में स्कैनर इस सामान को गैरकानूनी बताएगा. ग्राहक फिर इस आधार पर अपना फैसला ले सकते हैं. साथ ही, जब चीजों को स्कैन किया जा रहा होता है, तो जहां उसका उत्पादन हुआ है, वहां भी पता चल जाएगा कि इसे कहां स्कैन किया जा रहा है और फिर पता चल जाएगा कि सामान चुराकर कहां ले जाया जा रहा है.

ड्रग कार्टेल के नेता पाबलो एस्कोबार के बेटे खुआन पाबलो एस्कोबार ने भी स्काइप के जरिए सम्मेलन में हिस्सा लिया. उन्होंने कहा, “जैसे ही मुझे पता चला कि मेरा देश मेरे पिता से लड़ने के लिए उन्हीं की तरह हिंसा का इस्तेमाल कर रहा है, तो मुझे बहुत डर लगा.” भारत की बाल मजदूर रही रानी होंग ने भी अपने बचपन की दर्दनाक कहानी सम्मेलन में सुनाई, “मुझे पीटा गया, हम उस सात साल की उम्र में गुलामी की बात कर रहे हैं… मुझे किसी की जागीर की तरह इस्तेमाल किया गया, उनके फायदे के लिए. मैं रोती रही, उन्होंने मुझे चुप होने को कहा. मैं कुछ नहीं कह पाई और किसी ने मेरी नहीं सुनी.”

लेकिन जैसा कि गूगल प्रमुख कहते हैं, “संपर्क से लोग जागरूक हो गए हैं. और दुनिया इसकी गवाह भी है. पिछले साल अरब बंसत ने दिखा दिया कि संपर्क के जरिए किस तरह लोगों को नाइंसाफी के खिलाफ एक कर सकते हैं.”

Facebook Comments Box

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *