/रक्षा मंत्री बने भक्षक, पत्नी की आठ पेंटिंग्स एयर इंडिया को बिकवाई 25 करोड़ में

रक्षा मंत्री बने भक्षक, पत्नी की आठ पेंटिंग्स एयर इंडिया को बिकवाई 25 करोड़ में

-प्रवीण शुक्ल||
केंद्र सरकार में बैठे मंत्री किस तरह देश को चूना लगा रहे हैं इसका ताज़ा उदाहरण है केन्द्रीय रक्षा मंत्री ए के एंटोनी. यह रक्षा मंत्री देश की कैसी शानदार रक्षा कर रहे हैं कि इनकी पत्नी एलिज़ाबेथ एंटोनी की आठ पेंटिंग्स लगातार घाटे के कारण बंद होने के कगार पर खड़ी एयर इंडिया द्वारा पच्चीस करोड़ रूपये में खरीदने की खबर आयी है. वह भी तब जबकि एयर इंडिया रोज करीब १२ करोड के घाटे में जा रहा है, उसको 13 प्लेन लीज़ पर दूसरी कंपनियों को देने पड़ रहे है, वेतन देने तक को तीन महीनों से लाले पड़े हुए है घाटे की वज़ह से प्लेन ग्राउंड किये जा रहे है .

सूत्रों के अनुसार एयर इंडिया द्वारा रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी की पत्नी एलिजाबेथ एंटनी को पच्चीस करोड रूपए देकर खरीदी गयी इन आठ पेंटिंग्स को तिरुवनंतपुरम और कोच्ची हवाई अड्डे पर लगाया जायेगा.
मज़े कि बात ये कि इन पेंटिंग्स को खरीदने के लिए कोई निविदा भी नहीं आमंत्रित की गयी और ना ही एयर इंडिया इनको खरीदने का आधार बता रहा है. यही नहीं भारी आर्थिक तंगी के दौर में और पायलेट हड़ताल के चलते इन पेंटिंग्स का भुगतान भी सिर्फ तीन दिनों में कर दिया गया. बताया जाता है कि इस भुगतान के लिए एकाउंट सेक्शन पर ऊपर से भारी दवाब था.
जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी राशी से भारत के कई बड़े चित्रकारों से कई अलग अलग पेंटिंग्स बनवाई जा सकती थी. मगर मंत्री पत्नी को फायदा पहुंचाने  के लिए आनन फानन में यह खरीद कर ली गयी.
Facebook Comments

संबंधित खबरें:

  • संबंधित खबरें उपलब्ध नहीं

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.