खब्ती बना मालिक ट्विटर का..

-सुनील कुमार।।

महीनों से हवा में तैर रहा ट्विटर का सौदा आज शायद पूरा हो गया है, और अमरीका के एक सबसे बड़े कारोबारी एलन मस्क ने दुनिया के इस सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को आसमान छूते दाम देकर खरीद लिया है। इसके साथ ही अमरीका के बड़े और भरोसेमंद अखबारों में यह खबर भी आई है कि नए मैनेजमेंट ने ट्विटर के भारतवंशी मुखिया पराग अग्रवाल के साथ-साथ दो और बड़े अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया है, इनमें भी एक भारतवंशी महिला विजया गडे हैं। नए मालिक एलन मस्क का मुख्य कारोबार टेस्ला नाम की बैटरी से चलने वाली कार बनाना है जो कि ऐसी कार बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है। इसके अलावा वे अंतरिक्ष में सैलानियों को भेजने का एक नया कारोबार शुरू कर चुके हैं। अभी उन्होंने यह कहा है कि उन्होंने ट्विटर इसलिए खरीदा है क्योंकि वे मानवता की मदद करना चाहते हैं, और ऐसा प्लेटफॉर्म मानव सभ्यता के भविष्य के लिए जरूरी है जहां विभिन्न मतों को स्वस्थ तरीके से बिना हिंसा के उठाया जा सके। मस्क ने इस बात को भी इस सौदे के विवाद के दौरान एक सार्वजनिक मुद्दा बनाया था कि ट्विटर पर जो फर्जी अकाउंट हैं, जिन्हें स्पैम अकाउंट कहा जाता है, वे उन्हें हटाना चाहते हैं, और इस प्लेटफॉर्म पर बोलने की आजादी को बचाना चाहते हैं। उनका लगातार यह बयान आते रहा कि ट्विटर पर फर्जी अकाउंट कंपनी के बताए आंकड़ों के मुकाबले बहुत ज्यादा हैं।

दुनिया के किसी बड़े कारोबार का मालिकाना हक बदलने में इस जगह पर लिखने लायक कुछ नहीं रहता लेकिन दुनिया के लोकतंत्रों और तानाशाहियों के बीच आज ट्विटर हर तरह की विचारधारा से जुड़े समाचार और विचार का एक बड़ा मंच बन गया है, और दुनिया के सूचनातंत्र में, दुनिया के लोकतंत्रों में इसकी भूमिका और इसके महत्व को कम नहीं आंका जा सकता। एलन मस्क अपनी कार कंपनी या रॉकेट कंपनी की तरह की दस-बीस कंपनियां भी खरीदते, तो भी यहां लिखने की जरूरत नहीं रहती। लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ कारोबार लोगों को उनकी ग्राहकी के अलावा भी कई दूसरे किस्म से प्रभावित करता है, और इसीलिए इस मुद्दे पर यहां पर बात जरूरी है। आज जब एक सनकी की शोहरत रखने वाले एक कारोबारी ने बेदिमाग दाम देकर जब इस कंपनी को शायद खरीद लिया है, और जब वह अभिव्यक्ति की आजादी की अपनी परिभाषा इस्तेमाल करते हुए वहां पर डोनल्ड ट्रंप सरीखे झूठे, मक्कार, और नफरतजीवी इंसान के स्वागत की भी बात करता है, तो अभिव्यक्ति की ऐसी आजादी परेशान करने वाली बात रहती है। कल ही हिन्दुस्तान की एक जिला अदालत ने यूपी के एक बड़े मुस्लिम नेता आजम खान को नफरत भरे एक भाषण देने के जुर्म में तीन बरस की कैद सुनाई है। हालांकि इस समाजवादी नेता के पास अभी ऊपर की अदालतों तक जाने का विकल्प बाकी है, लेकिन नफरत को लेकर इन दिनों हिन्दुस्तान में सुप्रीम कोर्ट की ताजा रूख भी खतरनाक है, नफरतजीवियों के लिए। ऐसे में ट्विटर पर अगर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर यह नया सनकी मालिक अगर उसे नफरत की और अधिक आजादी का मंच बना देता है, तो यह दुनिया के लिए बहुत फिक्र की बात होगी। दुनिया के इतिहास में पहले भी, जब सोशल मीडिया नहीं था, और जब मीडिया ही सब कुछ था, तब भी लोगों ने यह देखा हुआ है कि किसी दूसरे कारोबार की कमाई पर चलने वाले मीडिया मालिक मीडिया को अपनी सनक के साथ इस्तेमाल करते हैं। दुनिया के सबसे अधिक लोगों के इस्तेमाल किए जाने वाले इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ आज यह खतरा खड़ा हो गया है कि इसका मालिक एक तानाशाह सरीखी सनक के साथ इसके बारे में फैसले कर सकता है। हिन्दुस्तान के संदर्भ में तो हम जानते ही हैं कि इसकी मौजूदा आजादी से भी यहां के करोड़ों भाड़े के भोंपुओं, या समर्पित लोगों की नफरत का सबसे बड़ा मंच बना हुआ है, और अब अमरीका के हिंसाजीवी लोग भी इस नए मालिक से बड़ी उम्मीदें लगाए हुए हैं, और अगर इसकी नीतियों में, इसके कम्प्यूटरों में अगर ऐसी नफरती ‘आजादी’ के लिए और अधिक छूट दी जाती है, तो यह हिन्दुस्तान के हिंसक और नफरतजीवी लोगों के लिए एक जश्न की बात होगी।

वैसे तो दुनिया के किसी कारोबारी पर किसी वैचारिक प्रतिबद्धता की बात लागू नहीं होती है, और फेसबुक जैसे एक दूसरे सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर कई तरह की तोहमतें लगती हैं कि वहां पर किसी खास विचारधारा के लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है, उन्हें अपनी बात अधिक लोगों तक पहुंचाने की छूट दी जाती है। अब इन कंपनियों के कम्प्यूटर एल्गोरिद्म एक बंद रहस्य रहते हैं, इसलिए बाहर के लोग यह नहीं समझ पाते कि वहां पर बदनीयत से किसी को बढ़ावा दिया जाता है, या ऐसी कोई साजिश नहीं होती है। लेकिन ऐसे आरोप लगते ही रहते हैं। और फिर जब दुनिया में पैसों की ताकत के साथ-साथ एक सनक भी रखने वाले लोग अपने आपको मानवता के लिए जनकल्याणकारी बताते हुए ऐसे नाजुक धंधे पर कब्जा करते हैं, तो दुनिया के लिए फिक्र की बात तो रहती ही है। दुनिया का इतिहास बताता है कि जनकल्याणकारी तानाशाह जैसी कोई चीज हो नहीं सकती है, जो सच ही जनकल्याणकारी होंगे, वे तानाशाह नहीं हो सकते, और जो तानाशाह हैं, वे जनकल्याणकारी नहीं हो सकते। ऐसे में एलन मस्क का ट्विटर का मालिक बनना दुनिया में सूचना और विचार के प्रवाह को बेहतर भी बना सकता है, और उसे प्रदूषित भी कर सकता है। आने वाला वक्त बताएगा कि अरबों लोगों के बीच संपर्क का एक बड़ा साधन बना हुआ ट्विटर नए मालिक के हाथों में कैसी शक्ल लेता है।

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