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हिंडन बर्ग रिसर्च द्वारा अडानी ग्रुप पर एकाउंटिंग घोटाले कर अपनी शीर्ष कंपनियों को अधिक कीमती बता कर 819 प्रतिशत तक के नाज़ायज़ फायदे उठाए हैं.. पेश है इस रिपोर्ट के मुख्य अंश जिनका अनुवाद किया है वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह ने.. हिंडनबर्ग रिसर्चरिपोर्ट कहती है कि..

अडानी समूह: दुनिया का तीसरा सबसे अमीर आदमी कैसे कॉरपोरेट इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला कर रहा है
खास बातें
 आज हम दो साल की अपनी जांच के नतीजों का खुलासा कर रहे हैं जो 17.8 ट्रिलियन भारतीय रुपए (यूएस $218 बिलियन) के अडानी समूह द्वारा दशकों से किए जा रहे एक बेशर्म स्टॉक फ्रॉड और अकाउंटिंग धोखाधड़ी का सबूत है।
 अडानी समूह के संस्थापक और चेयरमैन, गौतम अडानी ने मोटे तौर पर $120 बिलियन का शुद्ध मूल्य अर्जित किया है, जो पिछले तीन वर्षों में मोटे तौर पर समूह की सात प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों के स्टॉक मूल्य में वृद्धि के करण $100 बिलियन से अधिक बढ़ गया है। इस अवधि में इसमें हमारे शोध में अडानी समूह के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों सहित दर्जनों व्यक्तियों के साथ बात करना, हजारों दस्तावेजों की समीक्षा करना और लगभग आधा दर्जन देशों में मौका मुआयना और दौरा करना शामिल था।
 भले ही आप जांच के हमारे निष्कर्षों को नजरअंदाज करें और अडानी समूह की वित्तीय स्थिति को अंकित मूल्य पर लें, तो इसकी सात प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में आकाश-छूते मूल्यांकन के कारण बुनियादी आधार पर की गिरावट है।
 अडानी समूह की प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों ने पर्याप्त कर्ज भी लिया है। इसके लिए बढ़े हुए मूल्य के अपने शेयरों को गिरवी रखना शामिल है। इससे पूरे समूह को अनिश्चित और नाजुक वित्तीय स्थिति में डाल दिया गया है। सात प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों में से 5 ने अपना ‘चालू अनुपात’ 1 (एक) होने की सूचना दी है। यह निकट अवधि में आने वाले तरलता के दबाव को दर्शाता है।
 समूह के शिखर पर बैठे लोगों और 22 प्रमुख पदों पर अडानी परिवार के आठ सदस्य हैं और ये वो लोग हैं जो समूह की ओर से वित्तीय और प्रमुख निर्णय लेते हैं। एक पूर्व कार्यकारी ने अडानी समूह को “एक पारिवारिक व्यवसाय” के रूप में वर्णित किया।
 अडानी समूह पूर्व में धोखाधड़ी के चार प्रमुख मामलों की सरकारी जांच के केंद्र में रहा है। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, करदाताओं के धन की चोरी और भ्रष्टाचार के आरोप शामिल हैं, जो अनुमानित कुल 17 बिलियन अमेरिकी डॉलर के है। अडानी परिवार के सदस्यों ने कथित रूप से मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, और कैरेबियन द्वीप समूह जैसे टैक्स-हेवन क्षेत्राधिकारों में अपतटीय शेल संस्थाओं को बनाने में सहयोग किया, नकली या अवैध कारोबार उत्पन्न करने और सूचीबद्ध कंपनियों से पैसा निकालने के लिए जाली आयात/निर्यात दस्तावेज तैयार किए।
 गौतम अडानी के छोटे भाई, राजेश अडानी पर राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) द्वारा 2004-2005 के आसपास हीरा व्यापार आयात/निर्यात योजना में केंद्रीय भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। कथित योजना में कृत्रिम कारोबार उत्पन्न करने के लिए अपतटीय शेल संस्थाओं का उपयोग शामिल था। जालसाजी और टैक्स धोखाधड़ी के अलग-अलग आरोपों में राजेश को कम से कम दो बार गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें पदोन्नत करके अडानी समूह का प्रबंध निदेशक बनाया गया।
 गौतम अडानी के रिश्तेदार समीर वोरा पर डीआरआई द्वारा उसी हीरा व्यापार घोटाले का सरगना होने और नियामकों को बार-बार झूठे बयान देने का आरोप लगाया गया था। बाद में उन्हें महत्वपूर्ण अडानी ऑस्ट्रेलिया डिवीजन के कार्यकारी निदेशक के रूप में पदोन्नत किया गया।
 गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी को मीडिया द्वारा “हाथ न आने वाली एक हस्ती” के रूप में वर्णित किया गया है। वह नियमित रूप से अडानी के मामलों में सरकारी जांच के केंद्र में पाया गया है। इनमें धोखाधड़ी के लिए उपयोग की जाने वाली अपतटीय संस्थाओं के नेटवर्क का प्रबंध करने में उसकी भूमिका शामिल है।
 हमारी जांच में मॉरीशस की संपूर्ण कॉर्पोरेट रजिस्ट्री को डाउनलोड करना और सूचीबद्ध करना शामिल है। इससे पता चला है कि विनोद अडानी, कई करीबी सहयोगियों के माध्यम से, अपतटीय शेल इकाइयों के एक विशाल गोरख-धंधे का प्रबंध भी करता है।
 हमने विनोद अडानी या करीबी सहयोगियों द्वारा नियंत्रित 38 मॉरीशस शेल संस्थाओं की पहचान की है। हमने ऐसी संस्थाओं की पहचान की है जो साइप्रस, यूएई, सिंगापुर और कई कैरिबियाई द्वीपों में विनोद अडानी द्वारा गुप्त रूप से नियंत्रित हैं।
 विनोद अडानी से जुड़ी कई संस्थाओं के संचालन के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। इनमें किसी कर्मचारी के होने की रिपोर्ट नहीं है, कोई स्वतंत्र पता या फोन नंबर नहीं है और कोई सार्थक ऑनलाइन उपस्थिति नहीं है। इसके बावजूद, इन सबने मिलकर भारत में सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध अडानी की कंपनियों और निजी संस्थाओं में अरबों डॉलर स्थानांतरित किए हैं। अक्सर सौदों से संबंधित पार्टी की प्रकृति से जुड़ी आवश्यक जानकारी दिये बिना।
 हमने कुछ शेल संस्थाओं की प्रकृति को ढंकने के लिए डिज़ाइन किए गए अल्पविकसित प्रयासों को भी उजागर किया है। उदाहरण के लिए, विनोद अडानी से जुड़ी संस्थाओं के लिए 13 वेबसाइटें बनाई गईं; कई संदिग्ध रूप से एक ही दिन में बनाई गई हैं। इनमें केवल स्टॉक फोटो थी, किसी वास्तविक कर्मचारी का नाम नहीं था और “विदेश में खपत”, “वाणिज्यिक उपस्थिति” जैसी निरर्थक सेवाओं के उसी समान सेट का उल्लेख था। मूल रिपोर्ट में ऐसे और अन्य आरोपों का विवरण और सबूत है
 विनोद-अडानी की शेल कंपनियां कई तरह के काम करती लगती हैं। इनमें (1) स्टॉक पार्किंग / स्टॉक मैनिपुलेशन और (2) मनी लॉन्ड्रिंग सहित कई कार्य शामिल हैं। यह सब अडानी की निजी कंपनियों के जरिए सूचीबद्ध कंपनियों की बैलेंस शीट में किया जाता है ताकि कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और सॉल्वेंसी को कायम रखा जा सके।
 भारत में सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनियाँ उन नियमों के अधीन हैं जिनके लिए सभी प्रमोटर होल्डिंग्स (अमेरिका में इनसाइडर होल्डिंग्स के रूप में जाना जाता है) का खुलासा किया जाना आवश्यक है। नियमों में यह भी आवश्यक है कि हेरफेर और अंदरूनी व्यापार को कम करने के लिए सूचीबद्ध कंपनियों के गैर-प्रवर्तकों के पास कम से कम फ्लोट हो। अडानी की सूचीबद्ध कंपनियों में से 4 उच्च प्रवर्तक स्वामित्व के कारण डीलिस्टिंग के कगार पर हैं।
 हमारा शोध इंगित करता है कि अडानी समूह से जुड़ी अपतटीय शेल कंपनियां और अडानी समूह से जुड़े धन में कई सबसे बड़ी “सार्वजनिक” (यानी, गैर-प्रवर्तक) कंपनियां हैं जिनके पास अडानी का स्टॉक है और यह अडानी की कंपनियों की डीलिस्टिंग का कारण बनेगा बशर्ते भारतीय प्रतिभूति नियामक, (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) सेबी के नियम लागू किए जाएं।
 कथित “सार्वजनिक” फंड्स में से कई प्रमुख अनियमितताओं को प्रदर्शित करते हैं जैसे (1) मॉरीशस या अपतटीय संस्था होना, अक्सर शेल कंपनी (2) नामांकित निदेशकों के जरिए लाभार्थी स्वामित्व छिपाया जाना और (3) बहुत मामूली या बिना विविधीकरण के होल्डिंग पोर्टफोलियो जिसमें तकरीबन विशिष्ट तौर पर अडानी की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयर शामिल हैं।
 सेबी के पास दायर सूचना का अधिकार (आरटीआई) अनुरोध पुष्टि करता है कि अपतटीय धन नियमित चलने वाली जांच का विषय है। यह मीडिया और संसद सदस्यों द्वारा शुरू में जताई गई चिंताओं को उठाए जाने के एक साल बाद की बात है।
 इलारा के एक पूर्व ट्रेडर, एक अपतटीय फंड, जिसके पास अडानी के शेयरों में लगभग 3 बिलियन डॉलर की केंद्रित होल्डिंग है, और इसमें एक ऐसा फंड भी है, जो अडानी के शेयरों में केंद्रित है, ने हमें बताया कि यह स्पष्ट है कि अडानी शेयरों को नियंत्रित करता है। उन्होंने समझाया कि निधियों को जानबूझकर उनके अंतिम लाभकारी स्वामित्व को छिपाने के लिए व्यवस्थित किया गया है।
 लीक हुए ई-मेल से पता चलता है कि एलारा के सीईओ धर्मेश दोषी के साथ सौदों पर काम करते थे जो एक भगोड़ा अकाउंटैंट है और भारतीय बाजार के एक कुख्यात मैनिपुलेटर केतन पारेख के साथ स्टॉक हेरफेर सौदों पर बारीकी से काम करता था। ई-मेल से पता चलता है कि एलारा के सीईओ ने दोषी के साथ स्टॉक डील पर काम किया था, जब वह गिरफ्तारी से बचने के कारण व्यापक रूप से एक भगोड़े के रूप में जाना जाता था।
 कानूनी इकाई पहचानकर्ता (एलईआई) डेटा और भारतीय एक्सचेंज डेटा के अनुसार, मॉन्टेरोसा इन्वेस्टमेंट होल्डिंग्स नामक एक अन्य फर्म 5 स्वतंत्र फंडों को नियंत्रित करती है, जो सामूहिक रूप से सूचीबद्ध अडानी कंपनियों के शेयरों में 360 बिलियन रुपये ($4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक है।
 मॉन्टेरोसा के चेयरमैन और सीईओ ने एक भगोड़े हीरा व्यापारी के साथ 3 कंपनियों में निदेशक के रूप में काम किया। भारत से भागने से पहले भगोड़े ने कथित रूप से एक बिलियन अमेरिकी डॉलर उड़ा लिए थे। विनोद अडाणी की बेटी की भगोड़े हीरा व्यापारी के बेटे से शादी हुई है।
 कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, एक समय अडानी से संबंधित पार्टी इकाई ने मॉन्टेरोसा फंड में से एक में भारी निवेश किया था, जिसे अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी पावर को आवंटित किया गया था, जो अडानी समूह और संदिग्ध अपतटीय फंडों के बीच एक स्पष्ट लाइन है।
 न्यू लीना इन्वेस्टमेंट्स नामक एक अन्य साइप्रस-आधारित इकाई के पास जून-सितंबर 2021 तक अडानी ग्रीन एनर्जी शेयरों में यूएस $420 मिलियन से अधिक का स्वामित्व था, जिसमें इसके पोर्टफोलियो का शामिल था। संसदीय रिकॉर्ड बताते हैं कि यह अन्य अडानी सूचीबद्ध संस्थाओं का शेयरधारक था (और अभी भी हो सकता है)।
 न्यू लीना निगमन सेवा फर्म एमिकॉर्प द्वारा संचालित है, जिसने अपतटीय इकाई नेटवर्क के विकास में अडानी की सहायता करने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। एमिकॉर्प ने कम से कम 7 अडानी प्रमोटर संस्थाओं का गठन किया है। इनमें कम से कम 17 अपतटीय शेल और विनोद अडानी से जुड़ी संस्थाएं हैं तथा अडानी स्टॉक के कम से कम 3 मॉरीशस आधार वाले अपतटीय शेयरधारक हैं।
 एमिकॉर्प ने 1एमडीबी अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप मलेशियाई करदाताओं से 4.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर की हेराफेरी की गई। स्कैंडल पर रिपोर्ट करने वाली पुस्तक, ‘बिलियन डॉलर व्हेल’ के अनुसार, एमिकॉर्प ने प्रमुख भागीदारों के लिए ‘निवेश कोष’ की स्थापना की, जो “म्यूचुअल फंड की तरह दिखने वाले ग्राहक के धन को साफ करने का एक तरीका था”।
 ‘डिलीवरी वॉल्यूम’ एक अनूठा दैनिक डेटा बिंदु है जो संस्थागत निवेश प्रवाह की रिपोर्ट करता है। हमारे विश्लेषण में पाया गया कि अडानी की कई सूचीबद्ध कंपनियों में अपतटीय संदिग्ध स्टॉक पार्किंग संस्थाओं की वार्षिक ‘डिलीवरी वॉल्यूम’ का हिसाब  तक का है। यह एक स्पष्ट अनियमितता है जो यह दर्शाता है कि अडानी के स्टॉक संदिग्ध अपतटीय संस्थाओं के माध्यम से ‘धुलाई के काम’ या अन्य हेरा-फेरी वाले ट्रेडिंग करते रहे हैं।
 अडानी की सूचीबद्ध कंपनियों में स्टॉक की हेरा-फेरी के सबूत आश्चर्य नहीं लगने चाहिए। सेबी ने अडानी एंटरप्राइजेज के स्टॉक को पंप करने (कृत्रिम रूप से बढ़ाने/फैलाने) के लिए अडानी के प्रवर्तकों सहित 70 से अधिक संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ वर्षों जांच और मुकदमा चलाया है।
 2007 के सेबी के एक फैसले में कहा गया है कि, “अडानी के प्रमोटर्स के खिलाफ लगाए गए आरोप कि उन्होंने केतन पारेख की संस्थाओं को अडानी के शेयरों में हेराफेरी करने में मदद की और उकसाया, साबित होते हैं”। केतन पारेख भारत का शायद सबसे कुख्यात स्टॉक मार्केट मैनिपुलेटर है। अडानी समूह की संस्थाओं को उनकी भूमिकाओं के लिए मूल रूप से प्रतिबंध की सजा मिली थी, लेकिन बाद में उन पर जुर्माना लगा दिया गया था, जो इस समूह के प्रति सरकार की उदारता का एक स्पष्ट प्रदर्शन है और यह दशकों लंबा पैटर्न बन गया है।
 2007 की एक जांच के अनुसार, अडानी की 14 निजी संस्थाओं ने पारेख द्वारा नियंत्रित संस्थाओं को शेयर हस्तांतरित किए। उस समय वह बाजार में जबरदस्त हेरा-फेरी में लगा हुआ था। अडानी समूह ने सेबी को जवाब में यह तर्क दिया कि उसने केतन पारेख के साथ मुंद्रा बंदरगाह पर अपने संचालन की शुरुआत के वित्तपोषण के लिए सौदा किया था। इससे यह प्रतीत होता है कि स्टॉक में हेरा-फेरी के माध्यम से शेयर बिक्री करना किसी न किसी तरह वित्तपोषण का एक वैध रूप है।
 अपनी जांच के भाग के रूप में, हमने एक ऐसे व्यक्ति से बात की जिसे मॉरीशस स्थित फंड के माध्यम से स्टॉक में हेराफेरी के लिए भारतीय बाजार में काम करने से प्रतिबंधित कर दिया गया था। उसने हमें बताया कि वह केतन पारेख को व्यक्तिगत रूप से जानता है और कुछ खास नहीं बदला है। उसने स्पष्ट किया कि “पिछले सभी ग्राहक अभी भी केतन के प्रति वफादार हैं और उसके साथ काम कर रहे हैं”।
 स्टॉक पार्क करने के लिए अपतटीय पूंजी का उपयोग करने के अलावा, हमने सूचीबद्ध सार्वजनिक अडानी कंपनियों को तटवर्ती निजी अडानी कंपनियों के माध्यम से धन भेजने के अपतटीय शेल के कई उदाहरण पाए।
 ऐसा लगता है कि धन का उपयोग अडानी की खाता-बही ठीक करने के लिए उपयोग किया जाता है (चाहे इसके लिए रिपोर्ट किए गए लाभ को बढ़ाया जाए या नकदी प्रवाह), सूचीबद्ध संस्थाओं को अधिक क्रेडिट योग्य बनाने के लिए अपनी पूंजी शेष को सुरक्षित रखा जाता है या अडानी साम्राज्य के अन्य हिस्सों में ले जाया जाता है जहां पूंजी की जरूरत होती है।
 हमने सूचीबद्ध और निजी दोनों तरह की कंपनियों द्वारा कई अघोषित संबंधित पक्ष लेन-देन की भी पहचान की, जो भारतीय प्रकटीकरण कानूनों का खुला और बार-बार उल्लंघन प्रतीत होता है।
 एक मामले में, विनोद अडानी-नियंत्रित मॉरीशस की एक इकाई, जिसके मूल संचालन के कोई संकेत नहीं थे, ने अडानी की एक निजी इकाई को 11.71 बिलियन रुपये (उस समय ~253 मिलियन अमेरिकी डॉलर) उधार दिया, जिसने इसे संबंधित पार्टी ऋण के रूप में प्रकट नहीं किया। बाद में निजी संस्था ने अडानी एंटरप्राइजेज को रुपये 9.84 बिलियन (हाल ही में काफी कम विनिमय दरों पर अमेरिकी $ 138 मिलियन) सहित सूचीबद्ध संस्थाओं को धन उधार दिया।
 एक अन्य विनोद अडानी-नियंत्रित मॉरीशस इकाई जिसे इमर्जिंग मार्केट इन्वेस्टमेंट डीएमसीसी कहा जाता है, का कोई कर्मचारी लिंक्डइन पर सूचीबद्ध नहीं है, कंपनी की कोई ऑनलाइन उपस्थिति नहीं है, उसने किसी ग्राहक या सौदे की घोषणा नहीं की है, और यह संयुक्त अरब अमीरात में एक अपार्टमेंट से चलता है। इसने अडानी पावर की सहायक कंपनी को एक बिलियन अमेरिकी डॉलर का कर्ज दिया है।
 इस अपतटीय शेल नेटवर्क का उपयोग कमाई में हेरा-फेरी दिखाने के लिए भी किया जाता है। उदाहरण के लिए, हमने लेन-देन की एक श्रृंखला का विवरण दिया है, जहां इन सौदों की संबंधित पार्टी प्रकृति के प्रकटीकरण के बिना, विनोद अडानी द्वारा नियंत्रित एक सूचीबद्ध अडानी एंटरप्राइजेज की एक सहायिका द्वारा सिंगापुर की एक निजी इकाई को ऐसेट स्थानांतरित की गई थी। एक बार निजी इकाई की लेखा पुस्तकों में दर्ज होने के बाद ऐसेट लगभग तुरंत खराब हो गई थी, संभवतः सार्वजनिक इकाई को भौतिक अवलेखन और शुद्ध आय पर नकारात्मक प्रभाव से बचने में मदद करने के लिए।
 अडानी समूह की स्पष्ट लेखां अनियमितताएं और आधा-अधूरा सौदा वस्तुतः गैर-मौजूद वित्तीय नियंत्रणों द्वारा किया गया प्रतीत होता है। सूचीबद्ध अडानी कंपनियों ने मुख्य वित्तीय अधिकारी की भूमिका में निरंतर कारोबार देखा है। उदाहरण के लिए, अडानी एंटरप्राइजेज के पास 8 वर्षों के दौरान 5 मुख्य वित्तीय अधिकारी थे, जो संभावित लेखा मुद्दों में गड़बड़ी को इंगित करने वाला एक प्रमुख कारण था।
 अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी टोटल गैस के लिए स्वतंत्र ऑडिटर शाह धनधरिया नामक एक छोटी सी फर्म है। लगता है शाह धंधारिया की कोई मौजूदा वेबसाइट नहीं है। इसकी वेबसाइट के आर्काइव (ऐतिहासिक अभिलेखों) से पता चलता है कि इसके केवल 4 भागीदार और 11 कर्मचारी थे। रिकॉर्ड बताते हैं कि यह मासिक कार्यालय किराए में 32,000 रुपये (2021 में अमेरिकी $435) का भुगतान करता है। इसके द्वारा ऑडिट की जाने वाली हमें केवल एक सूचीबद्ध इकाई मिली और इसका बाजार पूंजीकरण लगभग 640 मिलियन रुपये (अमेरिकी $ 7.8 मिलियन) का है।
 शाह धंधारिया जटिल लेखापरीक्षा कार्य में शायद ही सक्षम हो। उदाहरण के लिए अकेले अडानी एंटरप्राइजेज की 156 सहायक कंपनियां और कई संयुक्त उद्यम और सहयोगी कंपनियां हैं। इसके अलावा, अडानी की 7 प्रमुख सूचीबद्ध संस्थाओं में सामूहिक रूप से 578 सहायक कंपनियां हैं और बीएसई के खुलासों के अनुसार अकेले वित्त वर्ष 2022 में कुल 6,025 अलग-अलग संबंधित-पार्टी लेन-देन में शामिल हैं।
 शाह धंधरिया के ऑडिट पार्टनर, जिन्होंने क्रमशः अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी टोटल गैस के वार्षिक ऑडिट पर हस्ताक्षर किए, जब उन्होंने ऑडिट को मंजूरी देना शुरू किया, तब उनकी उम्र 24 और 23 वर्ष थी। वे कायदे से स्कूल से बाहर नए थे, शायद ही देश की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों की वित्तीय जांच करने और उनके सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों में से एक द्वारा चलाए जाने की स्थिति में थे।
 गौतम अडानी ने एक साक्षात्कार में दावा किया है, “आलोचना के प्रति बहुत खुला दिमाग होना … हर आलोचना मुझे खुद को सुधारने का अवसर देती है।” इन दावों के बावजूद, अडानी ने बार-बार सरकार और नियामकों पर सवाल उठाने वालों का पीछा करने के लिए अपनी अपार शक्ति का उपयोग करते हुए आलोचनात्मक पत्रकारों या टीकाकारों को जेल में डालने या मुकदमेबाजी के माध्यम से चुप कराने की कोशिश की है।
 हमारा मानना है कि अडानी समूह बड़े पैमाने पर दिन के उजाले में धोखाधड़ी करने में सक्षम रहा है क्योंकि निवेशक, पत्रकार, नागरिक और यहां तक कि राजनेता प्रतिशोध के डर से बोलने से डरते हैं।
 हमने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में 88 प्रश्नों को शामिल किया है। यदि गौतम अडानी वास्तव में पारदर्शिता को अपनाते हैं, जैसा कि वे दावा करते हैं, तो उन्हें उत्तर देने के लिए आसान प्रश्न होने चाहिए। हम अडानी की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
शुरुआती खुलासा:
व्यापक शोध के बाद, हमने यूएस-ट्रेडेड बॉन्ड और गैर-भारतीय-ट्रेडेड डेरिवेटिव इंस्ट्रूमेंट्स के माध्यम से अडानी ग्रुप की कंपनियों में शॉर्ट पोजीशन ली है। यह रिपोर्ट केवल भारत के बाहर कारोबार की जाने वाली प्रतिभूतियों के मूल्यांकन से संबंधित है। यह रिपोर्ट प्रतिभूतियों पर सिफारिश की तरह नहीं है। यह रिपोर्ट हमारी राय और खोजी टिप्पणी का प्रतिनिधित्व करती है और हम प्रत्येक पाठक को अपने स्वयं के उचित परिश्रम करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। कृपया रिपोर्ट के निचले भाग में हमारा पूर्ण अस्वीकरण देखें।
मामला
भारत दुनिया के कई सबसे शानदार उद्यमियों, इंजीनियरों और प्रौद्योगिकीविदों का देश है और एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। हालाँकि, देश की अर्थव्यवस्था को इसके पूंजी बाजार की टूटी हुई हालत ने जकड़ और रोक रखा है।
भारत के खास कारोबारियों और राजनेताओं की आलोचना के परिणामस्वरूप पत्रकारों को कैद में रखने या हत्या तक कर दिए जाने के मामले बढ़ गए हैं। शेयर बाजार के विश्लेषकों को कंपनियों के बारे में नकारात्मक लिखने के लिए गिरफ्तार किया गया है। अभिव्यक्ति के इस दमघोंटू माहौल में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी काफी हद तक अनियंत्रित हो गई है।
इस रिपोर्ट में, हम इस बात पर प्रकाश डाल रहे हैं जो हमारी राय में कॉर्पोरेट धोखाधड़ी का इतिहास का सबसे खराब नहीं तो एक उदाहरण जरूर है।
हमने अडानी समूह में दशकों से चली आ रही बेशर्म अकाउंटिंग फ्रॉड, स्टॉक मैनिपुलेशन और मनी लॉन्ड्रिंग के सबूतों का खुलासा किया है। अडानी ने सरकार में सक्षम लोगों और इन गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के कुटीर उद्योग की मदद से इस विशाल उपलब्धि को हासिल किया है।
भ्रष्टाचार के ये मुद्दे सरकार की कई परतों में व्याप्त हैं। कई स्रोतों के साथ हमने बात की, भारतीय प्रतिभूति नियामक सेबी अपराधियों को दंडित करने की तुलना में उनकी रक्षा करने के लिए अधिक इच्छुक प्रतीत होता है।
हम खुलासे को सबसे अच्छे उपाय के रूप में देखते हैं और आशा करते हैं कि यह रिपोर्ट इन मुद्दों पर प्रकाश डालने में मदद करेगी। उस लक्ष्य के आगे, हम आशा करते हैं कि अडानी उन 88 प्रश्नों को संबोधित करेंगे जिन्हें हमने इस रिपोर्ट के निष्कर्ष में शामिल किया है।
(पूरी रिपोर्ट बहुत लंबी है और खास बातें यही हैं। यहां जो उदाहरण दिये गये हैं उनका रिपोर्ट में विवरण है।)

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One thought on “अडानी फ्रॉड पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट की खास बातें..

  1. Preet pratima says:

    I doubt if adani will have any answer to these questions, because he is a fraudster, and no fraudster will ever admit that he has committed any crime, looted the country, जब संयां भये कोतवाल तो फिर डर काहे का 😜

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