/दारासिंह गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे…

दारासिंह गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे…

अपने समय के सबसे सफल पेशेवर पहलवान माने जाने वाले फिल्म अभिनेता और हिंदी फिल्मों तथा रामायण सीरियल में हनुमान जी की दमदार भूमिका निभाने वाले दारा सिंह को शनिवार शाम मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों के अनुसार 83 वर्षीय सिंह की हालत बहुत नाजुक बनी हुई है. मुंबई के कोकिलाबेन अम्बानी अस्पताल के सूत्रों के अनुसार दारा सिंह को दिल का दौरा पड़ा है.

उपनगर अंधेरी स्थित कोकिलाबेन अस्पताल के कार्यकारी निदेशक डॉक्टर राम नारायण के मुताबिक, ‘दारा सिंह को शाम 5.15 मिनट पर अस्पताल में भर्ती कराया गया. उनकी हालत बहुत नाजुक है. फिलहाल उन्हें आइसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया है.’ डॉ. नारायण का कहना है कि अगले कुछ घंटे दारा सिंह के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं. हम उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं.

पंजाब के अमृतसर जिले के धरमुचक गांव के जाट-सिख परिवार में दारा सिंह का जन्म 19 नवंबर, 1928 को हुआ. कद-काठी से मजबूत होने के कारण बचपन से ही उनको कुश्ती के लिए प्रेरित किया गया. वर्ष 1954 में वह कुश्ती में राष्ट्रीय चैंपियन बने. अपने दौर में दुनिया के सभी पहलवानों को उनके घर में ही धूल चटाने वाले रुस्तम-ए-हिंद दारा सिंह ने 1983 में कुश्ती से संन्यास ले लिया. करीब 100 फिल्मों में काम कर चुके दारा सिंह ने टेलीविजन के चर्चित धारावाहिक ‘रामायण’ में हनुमान की भूमिका निभाई थी. उन्होंने आखिरी बार इम्तियाज अली की हिट फिल्म में ‘जब वी मेट’ में अभिनय किया था. कई धार्मिक फिल्मों में दारा सिंह ने भीम का किरदार निभाया है.

जैसे यह खब  उनके गांव धर्मूचक्क के लोगों को जैसे ही दारा सिंह की बीमारी के बारे में पता चला, गमगीन गांववासी हाथ जोड़कर ईश्वर से उनकी लंबी आयु की प्रार्थना करने लगे. धर्मूचक्क दारा सिंह का पैतृक गांव है.

दारा सिंह के दोस्त शिंगारा सिंह [85] ने रविवार को गांव के गुरुद्वारे में जाकर वाहेगुरु से दोस्त के स्वास्थ्य लाभ की कामना की. उन्होंने बताया कि गांव में अब भी वह हवेली है, जहां दारा का जन्म हुआ था. हवेली के साथ ही दौ सौ वर्ष पुराना एक बरगद है.

बरगद के नीचे बनी चौपाल में दारा सिंह पिता सूरता सिंह के साथ कुश्ती के दांव-पेंच सीखते थे. शिंगारा सिंह ने कहा- ‘मेरा दोस्त दिल का अच्छा है. कभी किसी के साथ बुरा नहीं किया. दो वर्ष पहले गांव में स्टेडियम के उद्घाटन पर आया था. ढोल बजा तो गांववासियों के साथ दारा भी नाचा था. वादा किया था कि वह फिर गांव आएगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.