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भोपाल से जब भाजपा की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने लोकसभा का चुनाव जीता था और संसद में अपनी सीट पक्की कर ली थी, तो इस देश के बहुत से लोगों को हैरानी हुई थी। प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मालेगांव बम धमाकों में आरोपी बनाया गया था। 2008 को हुए इस आतंकी हमले में सौ से अधिक लोग घायल हुए थे और 6 लोगों की मौत हो गई थी। इस आतंकी हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया था कि आतंकवाद किसी एक रंग या धर्म से बंधा नहीं होता। जब धर्म उन्माद बनकर एक बड़े समाज को वहशी बनने के लिए उकसाता है, तो वह आतंकवाद की शक्ल लेने लगता है। पिछले कुछ दशकों में अलग-अलग सूरतों में दुनियाभर में आतंकवाद ने मासूम लोगों को अपना निशाना बनाया है, भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश के बहुत से मासूम लोगों ने धर्म के नाम पर फैलाए जा रहे आतंकवाद में अपनी जान गंवाई है।

लेकिन धार्मिक भावनाएं भड़काने का यह सिलसिला थम ही नहीं रहा है। कुछ वक्त पहले धर्म संसदों से सरेआम अल्पसंख्यकों को खत्म करने का आह्वान हुआ था। हरिद्वार, रायपुर, दिल्ली ऐसे तमाम शहरों में आयोजित धर्म संसदों में धर्म के मर्म पर चर्चा की जगह हिंदू धर्म को खतरे में बताकर अल्पसंख्यकों के खिलाफ जहर उगला गया था। इनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हुईं तो कुछ एफआईआर दर्ज हुईं, कुछ गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन जहर उगलने का सिलसिला जारी रहा। इसी कड़ी को अब प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आगे बढ़ाया है।

रविवार को कर्नाटक के शिवमोग्गा में हिंदू जागरण वेदिके के एक कार्यक्रम में भाजपा सांसद ने कहा कि हिंदुओं को उन पर और उनकी गरिमा पर हमला करने वालों को जवाब देने का अधिकार है। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में हिंदुओं से अपने घरों में हथियार रखने का आह्वान किया। और ये भी कहा कि कम से कम सब्जी काटने का चाकू तेज रखें। अगर इससे सब्जी कटेगी तो दुश्मनों के सिर भी कटेंगे। धार्मिक भावनाएं भड़काने वाले अंदाज में प्रज्ञा ठाकुर ने अपने भाषण में बार-बार उन्होंने शब्द का इस्तेमाल किया। यह सर्वनाम किस समुदाय के लिए था यह समझना कठिन नहीं है। इसके अलावा भाजपा सांसद ने कहा कि लव जिहाद में शामिल लोगों को उसी तरह जवाब दें। अपनी लड़कियों की रक्षा करें, उन्हें सही मूल्य सिखाएं। प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने मिशनरी संस्थानों में अपने बच्चों को शिक्षित करने के खिलाफ अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा कि, ऐसा करने से आप अपने लिए वृद्धाश्रम के दरवाजे खोल देंगे। मिशनरी संस्थानों में बच्चे स्वार्थी हो जाते हैं।

भाजपा के बहुत से सांसद, विधायक, नेता मिशनरी स्कूलों से ही पढ़े हुए हैं और अब बहुतों के बच्चे भी यहां पढ़ते होंगे। मिशनरी से शिक्षित भाजपा नेताओं को ही प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बताना चाहिए कि उनमें से कितनों ने अपने मां-बाप को वृद्धाश्रम में रखा है। वैसे भाजपा में बुजुर्गों को मार्गदर्शक मंडल में शामिल करने की परंपरा तो देश ने देखी ही है। लेकिन प्रज्ञा ठाकुर के इस भाषण का इरादा वृद्धों की देखभाल के बारे में चिंतन करने का नहीं था, बल्कि वे सीधे-सीधे हिंदू धर्म को सर्वश्रेष्ठ बताने के लिए दूसरे धर्म को कमतर बता रही हैं। संस्कारों को केवल हिंदू धर्म की जागीर बता रही हैं। संविधान के हिसाब से यह गलत है ही, लेकिन जिस तरह दुश्मनों के सिर काटने की बात उन्होंने की, घर में हथियार रखने को उकसाया, यह सीधे-सीधे देश के सौहार्द्र और सांप्रदायिक सद्भाव को तोड़ने की कोशिश दिखाता है। पिछले आम चुनाव के दौरान प्रज्ञा ठाकुर ने महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताया था। जाहिर है, अपनी इन बातों को भी वे देशभक्ति ही बताएंगी। देखना ये है कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बयान को किस तरह देखता है औऱ इस पर क्या कार्रवाई करता है।

गोडसे को देशभक्त बताने पर प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें दिल से माफ करने की बात कहीथी। हालांकि ऐसे प्रकरणों में मन की बात नहीं कानून की किताब के मुताबिक चला जाता है। अगर तब सत्तारुढ़ भाजपा ने अपनी सांसद के खिलाफ कोई कड़ा कदम उठाया होता, तो शायद वे ऐसे बयान देने से आइंदा परहेज करतीं। मगर भाजपा ने दिल से माफ न करने वाली बात से ही काम चला लिया और अब मंच से खुलेआम उसकी सांसद आत्मरक्षा के नाम पर हिंसा की बात कर रही हैं। क्या भाजपा सांसद को इस देश की पुलिस और न्यायपालिका पर यकीन नहीं है कि किसी के साथ अन्याय होने पर कानूनन इंसाफ दिलाने की प्रक्रिया होगी या फिर बदले की कार्रवाइयों से अन्याय का हिसाब-किताब होने को वे सही मानती हैं। अगर ऐसा है तो फिर देश की संसद में वे किसलिए पहुंची हैं। और भाजपा ने उन्हें किस मकसद से चुनाव में उम्मीदवार बनाया था। क्या भाजपा का मकसद केवल हिंदुत्व के नाम पर वोट बटोरने और लोकसभा में संख्या बढ़ाने का था। अगर हां, तो फिर उसका क्या नतीजा निकल रहा है, ये भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को देखना चाहिए।

मध्यप्रदेश कांग्रेस का कहना है कि केंद्र सरकार को प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज करना चाहिए। लेकिन मध्यप्रदेश भाजपा का कहना है कि प्रज्ञा ठाकुर का बयान किसी धर्म से जुड़ा नहीं, बल्कि सभी बहन, बेटियों की आत्मरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा है। भाजपा उनके बचाव में चाहे जो तर्क दे, उनके भाषण और तेवर देखकर समझना कठिन नहीं है कि यह किसी धर्म के खिलाफ था या नहीं। भाजपा की प्रतिक्रिया ने बता दिया कि वह प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी। देखना ये है कि क्या अदालत ऐसे भड़काऊ बयान का स्वत: संज्ञान लेगी या नहीं।

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