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भारत जोड़ो यात्रा से देश में धूम मचाने के बाद अब राहुल गांधी ब्रिटेन के अपने दौरे को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। पहले उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में लेक्चर दिया और रविवार को उन्होंने लंदन में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। कैंब्रिज में उनके व्याख्यान का विषय था- 21वीं सदी में सुनना सीखना। यह विषय लोकतंत्र के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब तक नेता जनता की बात सुनना नहीं सीखेंगे, तब तक उसकी समस्याओं को न वे समझ पाएंगे, न दूर कर पाएंगे। लेकिन भारत में माहौल ऐसा नहीं है। जनता कई तरह की तकलीफों से त्रस्त है और चाहती है कि कोई उसकी तकलीफ सुने। लेकिन देश के प्रधानमंत्री पिछले 9 सालों से मन की बात कर रहे हैं। इसलिए राहुल गांधी जब सुनना सीखने की बात पर विदेशी विवि में व्याख्यान देते हैं, तो यह बात भाजपा को खटक जाती है। कम से कम श्री गांधी के व्याख्यान की जिस तरह से भाजपा खाल उधेड़ रही है, उससे यही लग रहा है।
राहुल गांधी ने कैंब्रिज में भारत जोड़ो यात्रा के अपने अनुभव साझा किए और बताया कि किस तरह आम लोगों को उन्होंने ये अहसास कराया कि वे अपने घर आकर परिवार के किसी सदस्य से मिल रहे हैं। श्री गांधी ने बताया कि पहले वे लोगों की समस्याएं पूछते थे, लेकिन यात्रा के आगे बढ़ने के साथ-साथ उन्होंने केवल हाथ पकड़ कर बिना कुछ कहे-सुने लोगों के मन की तकलीफों को समझना शुरु कर दिया। उन्होंने कश्मीर पहुंचने का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे एक युवक ने उन्हें दूर खड़े कुछ लोगों को दिखाया, जो उस युवक के मुताबिक आतंकी थे, लेकिन उन्होंने राहुल गांधी के साथ कुछ नहीं किया। उन्होंने पुलवामा जाकर श्रद्धांजलि देती अपनी तस्वीर दिखाई और बताया कि यहां कार बम धमाके में 40 सैनिकों की मौत हो गई थी। राहुल गांधी ने देश की समस्याओं का जिक्र करते हुए बताया कि मौजूदा सरकार किस तरह विपक्ष की बात नहीं सुन रही है और न ही उसे बोलने दे रही है। उन्होंने चिंता जतलाई कि मौजूदा सरकार का रवैया भारत के विचार के खिलाफ है। देश के हालात के साथ-साथ दुनिया के विकसित देशों और वहां के राजनैतिक-आर्थिक हालात के बारे में भी राहुल गांधी ने बात की। उन्होंने अमेरिका और चीन के सुपर पावर बनने का जिक्र किया और ये बताया कि किस तरह दोनों की नीतियों में फर्क है, फिर भी दोनों ही देशों में तेजी से विकास हुआ है।
राहुल गांधी के एक घंटे के व्याख्यान में ऐसी कोई बात नहीं थी, जो उन्होंने पहले न कही हो। भारत जोड़ो यात्रा के दौरान और उससे पहले भी वे कई बार मोदी सरकार पर ये आरोप लगा चुके हैं कि भारत की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी विरासत के खिलाफ सरकार काम कर रही है। अब ब्रिटेन में भी वे यही कह रहे हैं, लेकिन भाजपा इस पर आक्रामक हो गई है। हमेशा की तरह भाजपा की आलोचना को देश की आलोचना की तरह पेश किया जा रहा है। भाजपा की ओर से रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर, संबित पात्रा, हिमंता बिस्वासरमा ये सभी राहुल गांधी को देश विरोधी साबित करने में जुट गए हैं। भाजपा की मदद कर रहे पत्रकार भी सुर्खियां बना रहे हैं कि राहुल गांधी ने विदेशी धरती पर देश का अपमान किया। भाजपा के वक्ताओं और भाजपा के पत्रकारों की यह कोशिश राहुल गांधी की छवि खराब करने वाली मुहिम का ही हिस्सा है। क्योंकि फिर से उनके लिए ब्राइट बच्चा न होना, ननिहाल की बात न सुनना जैसे पदबंधों का प्रयोग किया जा रहा है। इतने बरसों तक ऐसी ही कोशिशों से राहुल गांधी की छवि बिगाड़ी गई थी, लेकिन भारत जोड़ो यात्रा से सालों की कोशिश और करोड़ों रूपए खर्च कर चलाए जाने वाली राहुल- विरोधी मुहिम पर पानी फिर गया था। राहुल गांधी को देश की जनता ने करीब से देखा और जाना है। इसलिए अब भाजपा फिर से नए सिरे से इसी कोशिश में लगी है कि किसी भी तरह राहुल गांधी को देशविरोधी साबित कर दे।
भाजपा के कई इल्जामों में कुछ के उदाहरण हैं, राहुल ने पुलवामा की घटना को आतंकवादी घटना क्यों नहीं कहा। उन्होंने चीन की तारीफ क्यों की। उन्होंने कश्मीर में आतंकवादी देखे तो इसकी सूचना जांच एजेंसियों को क्यों नहीं दी। राहुल गांधी की सारी बातों को समग्रता में न पेश कर, उसे अलग से टुकड़ों में बता कर जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। क्या कार बम धमाके का जिक्र करने में अलग से आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल जरूरी है, क्योंकि बम धमाके तो आतंकी ही करते हैं। ऐसे ही राहुल गांधी ने चीन के विकसित होने के कारणों पर रौशनी डालते हुए वहां की सरकार और कार्पोरेट नीतियों पर बात की। अगर यह चीन की तारीफ है, तो फिर विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने जब चीन को भारत से बड़ी अर्थव्यवस्था बताया था, तो क्या यह चीन की तारीफ नहीं थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया में चीन के राष्ट्रपति से खुद आगे बढ़कर हाथ मिलाया, तो क्या यह चीन के आगे झुकना कहलाएगा। राहुल गांधी जब कश्मीर पहुंचे तो उनके आसपास आतंकवादी हैं या नहीं ये देखना जांच एजेंसियों का काम है, या यह राहुल गांधी की जिम्मेदारी है।
कुल मिलाकर भाजपा सारी नुक्ताचीनी करने के बावजूद एक भी ठोस इल्जाम राहुल गांधी पर नहीं लगा पाई। और इसके बाद प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने जवाब भी दे दिया कि देश को वे बदनाम नहीं कर रहे हैं। राहुल गांधी ने साफ कहा है कि हमको समूचे विश्व में अगर प्रजातंत्र को स्वस्थ रखना है, उसको आगे बढ़ाना और बचाना है, तो लोगों की बात हमें पूरे प्यार, संवेदना और गहराई के साथ सुनने की आदत होनी चाहिए. तभी लोकतंत्र फलेगा और फूलेगा। देश में भी ऐसा ही आह्वान सुप्रीम कोर्ट के जज अपनी प्रेस कांफ्रेंस में, आम जनता और किसान शाहीन बाग और किसान आंदोलनों में कर चुके हैं। ऐसी हर मुहिम पर भाजपा ने आंदोलनकारियों को गलत दिखाने की कोशिश की। अब राहुल गांधी के साथ वही किया जा रहा है। भाजपा को यह समझना होगा कि उसका अस्तित्व भी इसी लोकतंत्र से है और लोकतंत्र में आलोचनाओं का स्वागत होता है, तिरस्कार नहीं।

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