/बेटियां देश और समाज का गौरव होती हैं – डॉ.पूंजीलाल डामोर

बेटियां देश और समाज का गौरव होती हैं – डॉ.पूंजीलाल डामोर

राजकीय महाविद्यालय बूंदी की एनएसएस की ओर से दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित मेराथन वॉक एवं मेरी बेटी मेरा गौरव प्रतियोगिता में दिनांक 3 मार्च 2012 को भाग लिया गया। कार्यक्रम अधिकारी श्री के.सी.पहाड़िया, डॉ.सियाराम मीणा, डॉ.राजेन्द्र प्रसाद मीणा, डॉ.सीमा सांखला के नेतृत्व में स्वयं सेवक व सेविकाएं बालचन्द पाड़ा स्थिति नवल सागर पार्क में पहुंचे जहां दैनिक भास्कर द्वारा आयोजित मेराथन वॉक में शहर गणमान्य नागरिकों, विद्यार्थियों, अधिकारियों के साथ हिसा लिया।

मेराथन वॉक को जिला कलक्टर सुश्री आरती डोगरा ने हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। जो रणजीत टॉकिज के सामने स्थिति सी.हायर सैकण्डरी स्कूल पहुंची जहां मेरी बेटी मेरा गौरव विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित हुए तथा इसी विषय पर स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें 3 विद्यार्थियों को प्रथम द्वितीय तथा तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया तथा 100 विद्यार्थियों को सान्त्वना पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। महाविद्यालय एन.एस.एस. के स्वयं सेवक सेविकाओं ने भी भाग लिया तथा विकास पांचाल, राधेश्याम मीणा आदि ने सान्त्वना पुरस्कार प्राप्त किया।

इसी अवसर पर बून्दी कालेज एन.एस.एस. द्वारा 20 मीटर लंबे  खादी कपड़े पर बेटी बचाओ हस्ताक्षर अभियान चलाया जिस पर शहर के गणमान्य नागरिकों, जन प्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विद्यार्थियों ने उस पर स्लोग लिखकर अपने हस्ताक्षर किये। राजकीय महाविद्यालय, बून्दी में बेटी बचाओं अभियान के बेनर पर प्राचार्य डॉ.पूंजीलाल डामोर, उपाचार्य डॉ.डी.के.जैन, व्याख्याता डॉ.बीएस आकोदिया, महाविद्यालय के छात्र छात्राओं, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, ग्रामीण छात्र संगठन के जिला अध्यक्ष महेन्द्र कुमार मीणा,पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष चेतराम मीणा ने हस्ताक्षर व अपने संदेश अंकित किये। डॉ. ललित भारतीय व डॉ.मणि भारतीय ने बेनर पर चित्राकृतियाँ अंकित कर अपनी भावना व्यक्त की।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ.पूंजीलाल डामोर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि बेटियां देश और समाज का गौरव होती है, दैनिक भास्कर तथा राजकीय महाविद्यालय बूंदी एन.एस.एस. द्वारा किया जा रहा यह प्रयास सराहनीय है। (प्रेस विज्ञप्ति)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.