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योजना आयोग की सिफारिश ताक पर, घोटालेबाज व्यवस्था ही सूट करती है सरकार को

By   /  June 4, 2012  /  No Comments

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दूरसंचार मंत्री रहते हुए ए. राजा पर लाइसेंस आवंटन में बड़े घोटाले का आरोप लग चुका है, लेकिन सरकार अभी भी पुराने सिस्टम को ही बरकरार रखना चाह रही है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नए टेलीकॉम लाइसेंस के लिए दिशा-निर्देशों तय करने में दूरसंचार मंत्री की ही चलेगी। ये योजना आयोग की उन सिफ़ारिशों के खिलाफ़ है जिनमें यह अधिकार कैबिनेट या मंत्रियों के समूह के पास देने की बात की गई थी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नए लाइसेंस के लिए गाइडलाइंस को दूरसंचार आयोग की सिफारिश पर दूरसंचार मंत्री ही अंतिम रूप देंगे। माना जा रहा है कि योजना आयोग ने लाइसेंस पर पूरी ताकत दूरसंचार मंत्री को देने पर आपत्ति जताई थी और यह पॉवर कैबिनेट को देने की मांग की थी। फिलहाल दूरसंचार विभाग (डॉट) दूरसंचार नियामक ट्राई से अंतिम सिफारिशें हासिल करता है। ट्राई अपनी सिफारिशें देने से पहले अंतर मंत्रालय पैनल और दूरसंचार आयोग से चर्चा करता है।

नई दिल्ली दूरसंचार की 22 सेवाओं के लिए स्पेक्ट्रम की ई-नीलामी करवाने वाली एजेंसी का नाम दूरसंचार विभाग 10 जुलाई तक तय कर लेगा। हालांकि यह तय समय से 15 दिन देरी से है। एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 31 अगस्त से पहले स्पेक्ट्रम की बोली करवानी है। सिस्टेमा श्याम, यूनिनोर और वीडियोकॉन जैसी कंपनियों के लिए यह बोली काफी अहमियत रखती है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2जी लाइसेंस रद्द करने में ये सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है।

उधर 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अपनी रिपोर्ट दिसंबर 2012 तक सौंप देगी। जेपीसी के अध्यक्ष पी.सी चाको ने रविवार को कहा कि कार्यकाल और बढ़ाने की जरूरत नहीं होगी और दिसंबर तक के तय समय में ही वे रिपोर्ट सौंप देंगे। जांच का 50 फीसदी काम हो चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि जेपीसी की रिपोर्ट आने तक 2जी स्पेक्ट्रम की बोली प्रक्रिया रोकने के लिए सरकार को कहने का कोई इरादा नहीं है। जेपीसी के कुछ सदस्य इस तरह की मांग कर रहे हैं। ट्राई ने अपनी सिफारिश में नई बोली में बेस प्राइस 10 गुना ज्यादा तक रखने की सिफारिश की है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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