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चोरी और सीनाज़ोरी… अख़बारों ने ब्लॉग से चुराई तस्वीरें, उल्टे ब्लॉगर को धमकाया

By   /  June 5, 2012  /  4 Comments

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उदयपुर ब्लॉग पर रणबीर कपूर की सिगरेट पीते तस्वीर

इसे कहते है, मेहनत करे कोई और ‘जनहित’ के नाम पर उसका लाभ उठाये कोई और! कुछ ऐसा ही हुआ है हाल ही में ‘उदयपुर ब्लॉग'(UdaipurBlog.com) के साथ और करने वाले और कोई नहीं अपितु लोकतंत्र के चौथे स्तंभ ‘पत्रकारिता’ के लोग, समाज जिनसे उम्मीद लगाये बैठा होता है कि वे ‘सच्चाई और साफगोई’ के साथ हर बात आम और खास तक पहुंचाएंगे, किन्तु यही मीडिया जब किसी और के कार्य को अपने ‘लाभ’ हेतु प्रयोग में ले और वो भी इतनी चतुराई से कि कोई उन पर उंगली नहीं उठा सके.

दैनिक भास्कर ने चुराई तस्वीर

 

 

 

दरअसल मामला हाई-प्रोफाइल शख्सियत से जुड़ा है. हाल ही में अभिनेता रणबीर कपूर उदयपुर आये. शहर में अलग अलग जगह अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के साथ शूटिंग की और अपनी आदत से मजबूर होकर सभी जगह धुएं के छल्ले भी उड़ाए…

उदयपुर ब्लॉग के छायाकार श्री मुज्तबा आरजी ने गणगौर घाट पर उनके इस ‘कृत्य’ को कैमरे में कैद कर लिया. उदयपुर ब्लॉग ने उन तस्वीरों को मई 28 को अपने फेसबुक पेज (Facebook.com/UdaipurBlog) पर डाला और लो जी हो गया बवाल !

रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोन

अगले ही दिन ये मामला सुर्ख़ियों में आ गया, 31 मई को एक प्रमुख समाचार पत्र ने ख़बर प्रकाशित कर दी और जब उदयपुर सेशन कोर्ट ने जमानती वारंट जारी किया तो सभी समाचार पत्रों ने 2 जून को खबर छाप दी.

राजस्थान पत्रिका भी तस्वीर चोर?

 

खबर प्रकाशित की तो साथ में सबूत के तौर पर फोटो तो चाहिए था ही, अब किसी के पास फोटो तो था नहीं. तो उदयपुर ब्लॉग के आर्टिकल से या यूबी के ही फेसबुक पेज से फोटो को कॉपी किया गया.

बहुत ही सफाई से फोटो पर लगे ‘वॉटर मार्क’ जिसमें यूबी (UB – UdaipurBlog.com) का नाम लिखा था, उसे “फोटोशॉप” में जाकर हटाया गया या क्रॉप कर दिया गया और खबर के साथ अखबारों में छाप दिया. ये किसी एक समाचार पत्र ने नहीं किया अपितु लगभग सभी प्रमुख समाचार पत्र इस भेड़चाल में शामिल रहे.

रणबीर और दीपिका की तस्वीर (यूबी वॉटरमार्क समेत)

उदयपुर ब्लॉग ने अपनी सभी तस्वीरों को वॉटरमार्क लगा कर प्रकाशित किया था। स्थानीय समाचार पत्रों का तो ठीक, मुंबई के सांध्य दैनिक ‘मिड डे’ ने भी उदयपुर ब्लॉग के फेसबुक पेज से सभी फोटॉग्राफ्स को कॉपी किया और उन पर से वॉटरमार्क हटाकर उन्हें अपने वेबसाईट पर प्रकाशित कर दिया, बिना क्रेडिट दिए. यहाँ तक भी ठीक था, एनडीटीवी ने मिड डे के हवाले से उन फोटॉग्राफ्स को उठाकर अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया. और उसका क्रेडिट मिड डे (Mid-Day.com) को दे दिया. मतलब जिसने असली मेहनत की, उसका कही नाम नहीं… खुल्लम खुला चोरी नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे इसे..?

अभिनेताओं की एक और (यूबी की एक्सक्लूसिव) तस्वीर

इस बारे में जब मिड डे की सह संपादक जान्हवी सामंत से बात की गई तो उन्होंने सफेद झूठ बोलते हुए हमें कहा कि उन्होंने तो ये फोटो एक अन्य वेबसाईट “पिंक विला” (PinkVilla.com) से उठाये है, और वहाँ कोई वॉटरमार्क नहीं था. जब उनसे हमने सम्बंधित वेबसाईट पिंक विला के उस पृष्ठ का यूआरएल माँगा तो उन्होंने मेल करने को कहा, किन्तु बाद में कोई मेल किया ही नहीं, हमने अपने स्तर पर पड़ताल की तो पाया कि उपरोक्त साईट पर हमारे फोटो थे ज़रूर,किन्तु वाटरमार्क के साथ (माने पिंक विला की गलती नहीं.. उसने तो उदयपुर ब्लॉग को पूरा-पूरा क्रेडिट दिया) – (PINKVILLA.com : Article Link) हमारे पास जान्हवी सामंत का वो मेल भी मौजूद है, जिसमे उन्होंने साफ़ साफ़ कहा है कि फोटो को एडिट करने में या यूबी का वॉटरमार्क हटाने में मिड डे का कोई हाथ नहीं,जबकि हकीकत कुछ और ही है.

चोर मिड-डे ने तो ‘चोरी’ का क्रेडिट भी लूटा

उदयपुर ब्लॉग को कोई आपत्ति नहीं होती यदि ये समाचार पत्र समूह इन फोटो के लिए यूबी को आभार प्रकट कर देते. यदि इन अख़बारों की तरफ से मांग की जाती तो यूबी मूल फोटो इनको उपलब्ध करवा देता. किन्तु इस तरह एडिटिंग द्वारा वाटर मार्क हटाकर फोटो को अखबार में/ वेबसाईट पर प्रकाशित करना क्या “सर्वाधिकारों” का हनन नहीं ? क्या इसे कॉपीराईट ऐक्ट का उल्लंघन नहीं कहेंगे ?

मिड डे का माफ़ीनामा: झूठ का पुलिंदा

अब यूबी (UdaipurBlog) पाठकों से जानना चाहता है कि आगे क्या ऐक्शन लेना चाहिए…? आपकी राय के अनुसार ही हम सोच समझकर “कॉपी राईट” नियमों के खिलाफ किये गए इस कृत्य हेतु एक्शन लेंगे. उदयपुर ब्लॉग (UdaipurBlog.com) इस हेतु अपने सभी अधिकार सुरक्षित रखता है. इस लेख के द्वारा पुनः सम्बंधित समाचार पत्र समूहों से उनका पक्ष रखने की अपील उदयपुर ब्लॉग करता है. अन्यथा इस खबर पर आगे भी लगातार लेख प्रकाशित किये जाने की सम्भावना से यूबी इनकार नहीं करता. यह तो हम हे जो आवाज़ उठा रहे हे न जाने कितने लोगों के साथ ऐसा किया होगा इन मीडिया वालो ने..?

अखबार प्रातःकाल की चोरी

यूबी का डिस्क्लेमर (Disclaimer): जून 02, 2012 को ही हमने इस खबर को यूबी पर प्रकाशित करना चाहा, किन्तु पत्रकारिता के साधारण नियमों के अनुसार किसी भी संगठन के खिलाफ या उनके कार्य विशेष के खिलाफ कोई विषयवस्तु प्रकाशित करने से पूर्व उन्हें पूर्वालोकन हेतु प्रस्तुत करना आवश्यक होता है.इसी सन्दर्भ में इस लेख को प्रकाशन से पूर्व सभी सम्बंधित समाचार पत्र समूहों को प्रूफ के साथ भेजा गया और उनसे आपत्तियां आमंत्रित करनी चाही और उनका पक्ष जानना चाहा. इस सन्दर्भ में सभी को शनिवार दिनाक 2 जून को प्रथम बार एवं सोमवार 4 जून को द्वितीय बार मेल किया गया. आपत्ति प्रस्तुत करने का अंतिम समय पहले शनिवार शाम को रखा गया किन्तु साप्ताहिक अवकाश के चलते बढ़ा कर सोमवार शाम आठ बजे तक किया गया.

मिड डे की तरफ से सोमवार दोपहर में मेल एवं फोन द्वारा “माफ़ी नामा” आया किन्तु उसमे उन्होंने अपनी गलती ” पिंक विला” पर थोपनी चाही जो प्रथम दृष्टया सफ़ेद झूठ है. उस मेल को हू-ब-हू यहाँ प्रकाशित कर रहे है… इसके अतिरिक्त “देश का नंबर एक अखबार” होने का दंभ भरने वालो से लेकर “राजस्थान की माटी” से जुड़ा होने का दावा करने वाले पुराने अखबार और यहाँ तक कि उदयपुर के ही सूरजपोल से प्रकाशित होने वाले एक अन्य अखबार (जिसने इस फोटो को हर खबर के साथ छापा और दावा किया कि खबर भी सबसे पहले उसी ने प्रस्तुत की है) ने अपनी तरफ से कोई प्रतिक्रिया या पक्ष रखने की ज़रूरत ही नहीं समझी, जबकि उन्हें कई बार फोन किया गया अथवा मेल किया गया.

अब ताज़ा खबर ये है कि उदयपुर ब्लॉग को राजस्थान के एक बड़े अखबार के संपादक ने धमकाते हुए कहा है कि इस मामले में ज्यादा ‘चूं-चपड़’ करने की जरूरत नहीं है। उन संपादक महोदय ने ये भी कहा कि ब्लॉग के फोटॉग्राफरों को अखबार वाले जब चाहे किसी भी आधिकारिक समारोह से बाहर निकलवा दे सकते हैं। उन्होंने धमकाते हुए ब्लॉग के मुखिया को कहा, “अगर आगे के लिए भलाई चाहते हो तो मामले को यहीं दफ़न कर दो.”

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

4 Comments

  1. Naveen Saini says:

    Humm aap ke saath hai Media darbar or udaipur blog 😛

  2. tejwani girdhar says:

    या अच्छी बात नहीं है

  3. राजेश सिंघल says:

    चोर मचाए शोर

  4. Babloo Yadav says:

    BHAI COPY RIGHT ACT AAPKE LIYE ACCHA HAI, MEHNAT KARO AAP AUR MALAI KHAAYE YE LOG…. ACHHI BAAT NAHI.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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