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मार्क वेब्ब ने बुना द अमेजिंग स्पाइडर-मैन का जाल

By   /  June 11, 2012  /  No Comments

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रोमांटिक फिल्मो के लिए मशहूर निर्देशक मार्क वेब्ब उस समय आश्चर्यचकित रह गए जब उन को स्पाइडर-मैन श्रंखला की अगली फिल्म द अमेजिंग स्पाइडरमैन का निर्देशन करने का प्रस्ताव आया. फिल्म का निर्देशन करने के जवाब में मार्क वेब्ब ने कहा कि “मै इस तरह की फिल्मे नहीं बनाता.” लेकिन निर्मातओं के अनुसार नये स्पाइडर-मैन के लिए मार्क वेब्ब ही उपयुक्त थे.

सोनी पिक्चर की ये फिल्म द अमेजिंग स्पाइडरमैन अब बन कर तैयार है और २९ जून को भारतीय दर्शकों के लिए रिलीज की जा रही है. निर्देशक मार्क वेब्ब से फिल्म के बारे में पूछने पर उन्होने कहा की “जब वे मेरे पास स्पाइडर-मैन का प्रस्ताव ले कर आये तो मेरे अंदर छुपा बच्चा ये देख बहुत ही उत्साहित हो गया. पहले तो मै झिझका पर बाद में मुझे लगा कि ये मेरे लिए एक नया अनुभव होगा. अभी भी स्पाइडरमैन के ऐसे कई पहलु है जो लोगों के सामने नहीं आये है, मै उन पहलुओं को लोगों के सामने ला सकता हूँ.”

मार्क वेब्ब ने इस से पहले ५०० डेजस् ऑफ समर, ग्रीन डे आदि रोमांटिक फिल्मो का निर्देशन किया है, द अमेजिंग स्पाइडरमैन उन की पहली एक्शन फिल्म है.

क्या मार्क वेब्ब फिर से पिटर पार्कर और मैरी जेन के रोमांस का जादू लोगों के बिच फैला पाएंगे? मार्क वेब्ब स्पाइडरमैन को द अमेजिंग स्पाइडरमैन बनाने  के लिए क्या-क्या करते है इस के लिए तो हमें फिल्म के रिलीज का इंतज़ार करना होगा.

(प्रेस विज्ञप्ति)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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