/पिता का अकेलापन दूर करने चले थे: सेकेंड मैरेज डाट कॉम

पिता का अकेलापन दूर करने चले थे: सेकेंड मैरेज डाट कॉम

भारत में शादीयों का बहुत ही महत्त्व है यहाँ शादी बहुत ही बड़ा उत्सव है पर दूसरी शादी को बहुत ही बुरी नजर से  देखा जाता है! लेकिन बदलते समय और हालात के साथ लोगों के सोच में भी बदलाव आ रहा है, उनकी सोच और विचार विकसित हो रही है, एक ऐसी ही अवधारणा दूसरी शादी पर आधारित है फिल्म सेकेंड मैरेज डाट कॉम”.

फिल्म के निर्माता विनोद मेहता का कहना है कि “युवा निर्देशक गौरव ने जब मुझे फिल्म की कहानी सुनाई तो मैं अपने आप को हाँ कहने से रोक नहीं पाया क्योंकि फिल्म का कंसेप्ट बिलकुल ही अलग था. इस फिल्म में यह समझाने को कोशिश की गई है कि दूसरी शादी कोई मुसीबत नहीं है बल्कि बहुत सारी मुसीबतों का हल है जो कि अकेलेपन की वजह से होती है. इस फिल्म में कोई बड़ी स्टार कास्ट नहीं है लेकिन मुझे विश्वास है कि फिल्म की कहानी और कंसेप्ट के सामने सितारों की कमी नहीं खलेगी.

फिल्म की कहानी शुरू होती है दिल्ली के एक युवा आई टी प्रोफेसनल अक्षय से जो अपने विधुर पिता सुनील नारंग के अकेलेपन को खत्म करने के इरादे से उनके लिए एक जीवनसाथी की तलाश मे निकल जाता है.

फिल्म की कहानी आगे बढती है जब उसे एक वेबसाइट सेकेंड मैरेज डाट कॉम से एक तलाकशुदा महिला शोमा मिलती है जो की एक लड़की की माँ है.

अक्षय, सुनील का बेटा और पूनम शोमा की बेटी दोनों अपने माता-पिता को नजदीक लाने के लिए कोशिश करते है और एक दूसरे के साथ एक नये बंधन मे बंधन मे बांध जाते है. जब उन को लगता है की सब कुछ ठीक होने वाला है तब ही अचानक कहानी मे मोड आता है. पूनम और अक्षय को महसूस होता है की वो एक दूसरे के काफी नजदीक आ गए है और एक दूसरे से प्यार करने लगे है…

इस फिल्म की कहानी समाज को एक चुनौती देती है इस लिए बहुत ही रिसर्च और सत्य तथ्यों को ध्यान मे रख कर बनायीं गई है. इस मे ड्रामा, कॉमेडी, रोमांस, और सभी भावनाओं को पर्दे पर उतारने की कोशिश की गई है.

फिल्म के निर्देशक गौरव पंजवानी जिनकी ये पहली फीचर फिल्म है कहते है कि “ हमारा भारत हमेशा विचारों मे प्रगतिशील रहा है पर हमारे समाज मे दूसरी शादी को कभी भी अच्छा नहीं माना गया. हालाँकि अभी पिछले कुछ सालों मे इस सोच मे बदलाव आया है अब, खास कर महानगरों मे लोग दूसरी शादी के बारे मे सोच रहे है. सच क्या है जानने के लिए मैं कई मध्य उम्र के विधवाओं और तलाकशुदा लोगों से मिला और उन के समस्यों के बारे मे जाना. उन से मिल कर मुझे लगा की मुझे इस विषय पर जरुर फिल्म बनानी चाहिए.”

इस फिल्म के निर्माता है विन मेहता फिल्म्स और निर्देशन किया है नवोदित निर्देशक गौरव पंजवानी ने. मोहित चौहान, विशाल नायक, सायानी गुप्ता, चारु रोहतगी, मंजीत टायगर और निकिता मोरे आदि ने इस फिल्म मे अभिनय किया है. संगीतकार है मनन मुंजाल और आदित्य अग्रवाल गायक है रेखा भारद्वाज, राहुल भट्ट, आदित्य अग्रवाल, अश्मित कौशिक व मनमीत सिंह.

फिल्म जल्दी ही सिनेमा घरों मे प्रदर्शित होगी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.