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क्या कापड़ी और मुकेश चौरसिया के बीच कोई बड़ी डील हो गई?

By   /  July 5, 2012  /  No Comments

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-कुमार सौवीर||
यशवंत अगर दलाल या रंगदारी मांगने वाला शातिर गुंडा है, तो उसका तो फैसला अब अदालत ही करेगी। लेकिन इतना तो तय हो ही गया है कि कापड़ी-चौकड़ी में रंगदारी देने-लेने वालों की तादात खासी है। सी-न्यूज नाम के एक न्यूज चैनल के दिल्ली़ के ब्यूरो प्रमुख ने विनोद कापड़ी का इंटरव्यू किया था। तीन दिन पहले ही। लेकिन इस इंटरव्‍यू के बाद से कापड़ी के सिर पर मानो जैसे आसमान ही फटने लगा। जैसे ही यह विडियो यूट्यूब पर आया और कापड़ी के मुंह से इंटरव्यू में यशवंत द्वारा उधार मांगने की खबर बाज़ार में फैली तो कापड़ी के कदमों के नीचे की जमीन खिसकी और थोड़ी हील हुज्जत के बाद इस शातिरनुमा पत्रकार ने इस इंटरव्यू के फुटेज को यू-ट्यूब पर से हटा दिया। खबर है कि कुछ ही घंटों में इस फुटेज को अपलोड और फिर उसे रिमूव करने की इस पूरी कवायद में अच्छी खासी रकम का लेन देन हुआ है।
भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह भले ही पिछले चार दिनों से जेल में बिना दारू-बिरयानी के तरस हो रहे हों, लेकिन यशवंत के नाम पर गुलछर्रे मनाने वालों की पौ-बारह है। कापड़ी और उसकी चौकड़ी में दीवाली का माहौल बताया जाता है। इस बेमुरव्वत और बेमौसम माहौल में चांदी काटने वालों की जेबों में यशवंत के कत्ल का खून रूपयों के तौर पर अब खूब खनकने लगा है।
मामला कुछ इस तरह है। यशवंत को तो आप खूब जानते-पहचानते ही होंगे। न जानते हैं तो नोएडा के बड़े दारोगा प्रवीण कुमार के बयानों से भी आप यशवंत को जान ही चुके होंगे। खैर, तो मामला यह है कि इंडिया टीवी के प्रबंध संपादक विनोद कापड़ी के झूठे बयान पर नोएडा के मनबढ़ एसएसपी प्रवीण कुमार के सौजन्‍य से यशवंत सिंह फिलहाल डासना जेल में हैं। यशवंत पर आरोप है कि उसने विनोद कापड़ी से बीस हजार रूपयों की रंगदारी मांगी थी। इंडिया टीवी की मसालादार खबरों जैसी स्क्रिप्ट की तरह एक ड्रामेटिक स्टो‍री की तरह रिपोर्ट लिखायी कि सड़कछाप गुंडों की तरह यशवंत ने बीच भीड़भरी सड़क पर उसकी कर रोक कर उससे रकम मांगी थी। बहरहाल, विनोद कापड़ी ने इशारा किया और नोएडा एसएसपी प्रवीण कुमार ने यशवंत को जेल की हवा खिला दिया। लेकिन इस मामले पर कापड़ी की खासी किरकिरी हो गयी तो कापड़ी अपने बचाव में लोगों के सामने हाथ-पांव खोलने गये।
आगरा से हाल ही लांच हुए सी-न्यूज चैनल में कापड़ी ने इंटरव्यू में कुबूल कर ही लिया कि यशवंत ने कापड़ी से रंगदारी नहीं मांगी थी, बल्कि यशवंत ने कापड़ी से बीस हजार की रकम उधार के तौर पर एसएमएस कर मांगी थी। इस चैनल के दिल्ली ब्यूरो प्रमुख मुकेश चौरसिया ने कापड़ी के साथ हुई अपनी इस बातचीत के फुटेज को यू-ट्यूब पर अपलोड कर दिया। सूत्र बताते हैं कि अपनी बातचीत को अपलोड करने का कारण यह था कि इस तरह कापड़ी की मक्खन-मालिश हो जाएगी। चौरसिया ने सभी परिचित न्यूज पोर्टल संचालकों को इस फुटेज का लिंक तथा फुटेज की ट्रांसस्क्रिप्‍ट तैयार कर भेज दिया ताकि उसके आधार पर यशवंत के खिलाफ माहौल बनाया जा सके। कई पोर्टलों ने इस खबर को प्रमुखता से छापा और लिंक भी डाल दिया। बताया जाता है कि इस इंटरव्यू और उसकी पोर्टल में छपी खबर के बाद कापड़ी खासा खुश भी था।
लेकिन कापड़ी के वकीलनुमा पत्रकारों-पुलिसवालों ने जैसे ही यह वीडियो देखा तो कापड़ी को यह खबर दी कि इस बातचीत में रंगदारी के बजाय उधार की बात जैसे ही लोग सुनेंगे, कापड़ी के कपड़े पूरी तरह धुल जाएंगे और कापड़ी नंगा हो जाएगा। यशवंत के पक्ष में इससे पूरा मामला भी पलट जाएगा और कोर्ट में कापड़ी के सारे आरोप हवा होकर यशवंत के चरणों में लोटने लगेंगे। क्योंकि अपनी रिपोर्ट में यशवंत पर कापड़ी पहले ही यह आरोप लगा चुका था कि कापड़ी से यशवंत से रंगदारी मांगी थी।
बताते हैं कि यह पता चलते ही कापड़ी के हाथों से जैसे तोते ही उड़ गये। अपनी इसी बदहवासी में कापड़ी ने चौरसिया से इस फुटेज को यू-ट्यूब से हटाने का अनुरोध किया, लेकिन बताते हैं कि इस पर चौरसिया कापड़ी से धंधे-पानी की बात पर उतर आया। यह देखते ही कापड़ी ने चौरसिया के सामने घुटने टेक कर बात शुरू कर दी। आखिरकार बात लेने-देने की शुरू होने लगी। विश्‍वस्त सूत्रों के अनुसार धंधे के ऐसे ही किसी एक मजबूत पायदान पर इन दोनों के बातचीत तय हो गयी। जानकारों का कहना है कि कापड़ी के प्रस्ताव को चौरसिया ने अपने पक्ष में मोड़ ही लिया और आखिरकार यू-टयूब पर कापड़ी का इंटरव्यू का फुटेज रिमूव कर दिया गया। नतीजा यह हुआ कि कापड़ी की जिस बातचीत को जिन पोर्टलों ने छापा था, उसके क्लिक करते ही यह मैसेज आने लगा कि दिस वीडिया हैस बीन रिमूव बाई द यूजर्स।
उधर जैसे ही कई पोर्टलों को मुकेश चौरसिया की इस करतूत का पता चला, हंगामा खड़ा हो गया। इस करतूत की खबर पूछने के लिए जब पोर्टल संचालकों ने चौरसिया से फोन पर संपर्क करना चाहां तो मुकेश चौरसिया का फोन ही नहीं उठाया गया। जाहिर है कि इस बातचीत और कापड़ी की बातचीत का प्रमाण खत्म कर डाला गया। सी-न्यूज चैनल संचालकों से भी मुकेश चौरसिया की इस करतूत का पता लगाने की कोशिश की गयी, लेकिन उनसे भी संतोषजनक नहीं मिल सका है। बहरहाल, कई संचालकों का सीधे-तौर पर आरोप है कि कापड़ी और मुकेश चौरसिया के बीच भारी डील सम्पन्न हो गयी है।
कुमार सौवीर
लो, मैं फिर हो गया बेरोजगार।
अब स्‍वतंत्र पत्रकार हूं और आजादी की एक नयी लेकिन बेहतरीन सुबह का साक्षी भी।
जाहिर है, अब फिर कुछ दिन मौज में गुजरेंगे।
मौका मिले तो आप भी आइये। पता है:-
एमआईजी-3, सेक्‍टर-ई
आंचलिक विज्ञान केंद्र के ठीक पीछे
अलीगंज, लखनऊ-226024
फोन:- 09415302520
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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