सत्ता की हनक में बेलगाम..


छठ पूजा अब धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ राजनीति का साधन भी बन चुकी है। खासकर दिल्ली में, जहां इस वक्त आम आदमी पार्टी की सत्ता है। भाजपा की ख्वाहिश भी इस सत्ता को अपनी झोली में डालने की थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। बल्कि अब देश के दूसरे राज्यों जैसे पंजाब, गोवा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में आप लगातार भाजपा के लिए चुनौती पेश कर रही है। ऐसे में दिल्ली में दोनों दलों के बीच खींचतान और बढ़ती जा रही है।

भाजपा की कोशिश आप की सरकार को नाकारा साबित करने की है। इसके साथ ही दिसंबर में संभावित एमसीडी चुनावों के लिए भी दोनों दलों के बीच जोर आजमाइश जारी है। चुनावों से पहले एक-दूसरे के शासन-प्रशासन को खराब दिखाने की कोशिश दोनों दलों के नेता कर रहे हैं। इसके लिए कभी गाजीपुर के कूड़े के पहाड़ पर राजनीति हो रही है, कभी कानून-व्यवस्था के हालात पर और अब छठ के मौके पर यमुना नदी का प्रदूषण सुर्खियों में है।

पिछले दिनों भाजपा सांसद प्रवेश वर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ, जिसमें वे दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी से अपमानजनक व्यवहार कर रहे हैं और उन्हें अपशब्द कह रहे हैं। प्रवेश वर्मा भाजपा के चर्चित चेहरों में शायद इसलिए शुमार हो चुके हैं, क्योंकि वे विवादों की श्रृंखला बनाते जा रहे हैं।

शाहीन बाग आंदोलन के वक्त उन्होंने कहा था कि शाहीन बाग में लाखों लोग जमा हो गए हैं। इनके बारे में दिल्ली वालों को सोचना होगा वर्ना यह लोग घरों में घुसकर आपकी बहन बेटियों से दुष्कर्म करेंगे और जान से मार देंगे, इसलिए इन्हें खत्म कर दो। आज समय है, कल मोदी व शाह बचाने नहीं आएंगे। उनके इस बयान के खिलाफ वृंदा करात ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज की थी। इसके बाद पिछले दिनों प्रवेश वर्मा ने बिना नाम लिए एक समुदाय का आर्थिक बहिष्कार करने की सार्वजनिक अपील की थी। जिस पर भाजपा की काफी आलोचना भी हुई थी। और अब प्रवेश वर्मा ने एक सरकारी अधिकारी के साथ उसके कार्यावधि के दौरान अशिष्ट आचरण किया।

जो वीडियो सामने आया है, उसमें प्रवेश वर्मा को तू का संबोधन देते हुए फटकार लगा रहे हैं कि यमुना को साफ क्यों नहीं किया गया। और यमुना सफाई के लिए जो रसायन उन अधिकारी को डालना था, उस पर चिल्लाते हुए प्रवेश वर्मा कह रहे हैं कि ये केमिकल तेरे सिर पर डाल दूं क्या। उनके बात और व्यवहार का यह ढंग यह दर्शा रहा है कि भाजपा सांसद को सत्ता का गरूर है और उन्हें यह एहसास नहीं है कि वे किसी अधिकारी से इतने गलत लहजे में बात कर रहे हैं। वैसे सरकारी अधिकारियों से बदतमीजी के प्रकरण पहले भी सामने आए हैं।

कुछ साल पहले इंदौर में भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय ने अवैध निर्माण तोड़ने गए अधिकारी के साथ बदसलूकी की थी, उन पर क्रिकेट का बल्ला उठा दिया था। हालांकि उन अधिकारी ने अदालत में अपने साथ बदसलूकी करने वाले की पहचान में खुद को असमर्थ बता दिया था। लेकिन दिल्ली के प्रकरण में जल बोर्ड के अधिकारी पूरी शालीनता के साथ अपना पक्ष सांसद प्रवेश वर्मा के सामने रखते दिख रहे हैं। बल्कि उन्होंने रविवार को वही रयासन युक्त यमुना के पानी से स्नान भी कर के दिखा दिया कि इसमें कोई नुकसान नहीं है।

यमुना की गंदगी साफ करने के लिए रसायनों का इस्तेमाल कितना सही है, यह तो विशेषज्ञ ही बता सकते हैं। रसायनयुक्त पानी से नहाने पर अधिकारी की त्वचा पर क्या असर होगा, यह भी बाद की बात है। लेकिन फिलहाल जरूरी सवाल ये है कि एक अधिकारी से या किसी भी सामान्य व्यक्ति से जनप्रतिनिधि की ऐसी बदसलूकी कितनी जायज है और इसका कितना घातक असर लोकतंत्र पर पड़ेगा। यमुना में गंदगी एक दिन में नहीं आई, बरसों-बरस से चिंता का यही विषय बना हुआ है कि यमुना नदी का पानी इस्तेमाल के लिहाज से खतरनाक होता जा रहा है।

एनजीटी ने यमुना नदी में पूजा की सामग्री बहाने आदि पर रोक लगाई हुई है, लेकिन फिर भी नदी साफ नजर नहीं आती है। देश की दूसरी नदियों का जो हाल है, वही यमुना का है और मौके-मौके पर अलग-अलग नदियों का प्रदूषण राजनीति के कारण बहस का मुद्दा बन जाता है। केंद्र में पिछले आठ सालों से भाजपा की सरकार है और दिल्ली में 9 सालों से आप की सरकार है। दोनों ही दलों के पास यमुना की सफाई करने का पर्याप्त वक्त था। लेकिन हकीकत ये है कि यमुना अब भी मैली ही है और इसकी सफाई की जगह राजनीति तेज हो रही है।

प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी कार्यकुशलता का बेहतर परिचय तभी दे सकते हैं, जब उन्हें काम करने का सही माहौल मिले और उन्हें राजनैतिक दबाव से मुक्त रखा जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो पाता है।

मंत्रियों और सरकारों की सुविधा के हिसाब से अधिकारी की नियुक्ति और तबादले होते हैं। और अगर वे जी मंत्री जी वाला रुख न अपनाएं, तो उनके ऊपर कार्रवाई की तलवार हमेशा लटकती रहती है। ऐसे में कोई अधिकारी अपनी रीढ़ की हड्डी बचाते हुए पूरी ईमानदारी से काम करे, ऐसे उदाहरण कम ही देखने को मिलते हैं।

फिलहाल दिल्ली प्रकरण में एक अनूठी बात ये देखने को मिली कि आम जनता की नुमाइंदगी करने वाले एक शख्स ने भाजपा सांसद से आंख से आंख मिलाकर बात की और यमुना गंदी होने की शिकायत करते हुए यह आईना दिखा दिया कि अधिकारी तो सफाई के लिए आते हैं, लेकिन राजनेता नहीं दिखते। इस व्यक्ति ने साफ कहा कि हमें नदी साफ चाहिए, चाहे कोई भी दल यह काम करे।

यानी जनता सरकारों से परिणाम की अपेक्षा रखती है। और ये अपेक्षा तभी पूरी होगी, जब जनता ईमानदारी से काम करने वालों का साथ देने आगे आएगी और सरकारों से उनके काम का हिसाब मांगेगी।

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