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-महेश झालानी।।

अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कुछ मुद्दों को लेकर सुलह में फिर पेच फंस गया है राहुल गांधी दोनो के बीच सुलह के तलबगार थे, लेकिन मामला निपट नही पाया । चार साल से लंबित यह मामला कब और कैसे निपटेगा, इस पर दिल्ली में मंथन चल रहा है ।

राहुल गांधी चाहते थे कि राजस्थान की यात्रा पूरी होने के साथ दोनो नेताओं के बीच चली आ रही खींचतान पर विराम लगाया जाए । इसी गरज से एक बन्द कमरे में राहुल ने दोनों से बात भी की । सूत्र कहते है कि गहलोत नही चाहते है कि अनुशासनहीनता के आरोप में शांति धारीवाल, महेश जोशी और धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की जाए । ये तीनों ही गहलोत के अत्यंत निकटतम है ।

मुख्य पेच सीएम पद को लेकर फंस रहा है । गहलोत चाहते है कि अगला वित्तीय बजट भी वे ही पेश करें । जबकि सचिन पायलट को यह बात मंजूर नही है । वे बखूबी जानते है कि एक बार गहलोत को बजट तक की मोहलत मिल गई तो वे इस कार्यकाल में सीएम का पद छोड़ने वाले है नही । अगरचे बजट के बाद सचिन को सीएम का पद मिल भी जाता है तो उनके पास गहलोत के कार्यो की तारीफ के अलावा कोई कार्य बचेगा नही । ऐसे में सरकार रिपीटीशन की बात बेमानी होकर रह जाएगी ।

यह तो ज्ञात नही हुआ है कि सचिन पायलट किसके निर्देश पर जोधपुर में अग्निपीड़ितों से मिलने गए । लेकिन उनकी यात्रा से गहलोत काफी खफा है । गहलोत के गृह जिले में पायलट का यह कहना कि मृतक परिजनों को पर्याप्त सहायता नही मिली है, सीधे गहलोत की कार्यशैली पर सवाल उठाना है ।

इस माह के दौरान दोनों के बीच मुकम्मल सुलह नही हुई तो मामला और ज्यादा उलझने की संभावना है । गहलोत ने बजट की लगभग पूरी तैयारी करली है और उस पर तीव्र गति से काम भी हो रहा है । यदि एक बार बजट अधिवेशन की घोषणा होगई तो फिर हाथ मलने के अलावा पायलट के पास कोई विकल्प नही बचेगा ।

सूत्रों का कहना है कि आलाकमान सारी बातों के मद्देनजर कोई ऐसा हल खोजने में जुटा हुआ है जो दोनो पक्षों को स्वीकार हो । अब सूत्र कहने लगे है कि गहलोत का सीएम की कुर्सी से हटना कठिन है । सीएम पद से छेड़छाड़ के अलावा नए फार्मूले पर काम चल रहा है जिसकी घोषणा इस माह में कभी भी की जा सकती है ।

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