/बुलाया था मॉडलिंग के लिए और बना दिया साकी…

बुलाया था मॉडलिंग के लिए और बना दिया साकी…

-जोआओ फेलेट||

मॉडलिंग की दुनिया में नाम कमाने ब्राजील से भारत की राजधानी दिल्ली पहुंची दो मॉडलों ने कभी नहीं सोचा होगा कि उनके सपने इस तरह से टूट जाएंगे.

दिल्ली पहुंचने के दो हफ्ते बाद 21 वर्षीय मोनिक मेनिज़िस और 19 वर्षीय थेलमा कामिंस्की को उस समय एक झटका लगा जब उनके एजेंट ने उन्हें एक पार्टी में ही पूरी रात गुजारने को कहा.

मोनिक दिल्ली तो आई मॉडलिंग करने लेकिन उनसे पार्टियों में मर्दों को शराब देने को कहा जाता था…

भारत आने से पहले इन दोनों मॉडलों की इस बारे में कोई सहमति नहीं बनी थी.

इन महिलाओं ने बताया कि रैंप पर चलने की बजाय इनसे पार्टियों में मर्दों के मुंह में शराब उड़ेलने के लिए कहा जाता था, ये मर्द उनसे छेड़छाड़ करते थे और इधर-उधर हाथ लगाने की कोशिश करते थे.

अपने करियर के लिए इस यात्रा को एक बेहतरीन अवसर के तौर पर देखने वाली इन मॉडलों ने कभी नहीं सोचा था कि भारत ले जा रही फ़्रांसीसी एजेंसी के बर्ताव से उनके करियर की गाड़ी इस तरह से लड़खड़ा जाएगी.

मोनिक का कहना है, ”उस घटना के बाद हम लोग बहुत डर गए थे लेकिन हम काम करते रहे. हम यहां पैसा कमाने आए थे ताकि अपने देश लौट कर अपना घर बना सके.”

लेकिन दिन प्रतिदिन स्थिति बिगड़ती गई.

छेड़छाड़

घर में 18 कुत्ते और तीन बिल्लियाँ थीं. कुत्ते हमारे बर्तन में ही खाना खाते थे और बिल्लियां हमारे बिस्तर पर पेशाब करती थीं.” मोनिक मेनिज़िस

 

इन दोनों मॉडलों के अनुसार इन्हें हर महीने एक लाख से ज्यादा रुपए देने की बात एजेंसी ने तय की थी लेकिन उन्हें केवल करीब नौ हज़ार रुपए ही दिए जाते थे.

फोटो सेशन की बजाय पार्टियों में इन महिलाओं को होस्टेस बनना पड़ता था और लगातार इनसे छेड़छाड़ की जाती थी.

जिस घर में ये महिलाएं रहती थीं उसकी मालकिन का बर्ताव भी इनके प्रति अच्छा नहीं था.

कामिंस्की बताती हैं, “वो हमें मोटी कहकर हमारा अपमान करती थी. एक बार तो उसने हमारे हाथ से खाना ही छीन लिया था.”

मोनिक कहती है घर में बहुत गंदगी रहती थी जिससे वे बीमार भी हो जाते थे.

वे कहती हैं, ”घर में 18 कुत्ते और तीन बिल्लियां थीं. कुत्ते हमारे बर्तन में ही खाना खाते थे और बिल्लियां हमारे बिस्तर पर पेशाब करती थीं.”

भारत में इस साल के फरवरी में एक महीना पूरा करने के बाद ये महिलाएं ब्राजील के वाणिज्यदूतावास में मदद के लिए गईं.

हर्जाना

हमें छुट्टियां या इस हर्जाने के बारे में कुछ नहीं बताया गया था और क्योंकि मैं उस समय अंग्रेजी नहीं जानती थी तो मैंने भरोसा करके उस कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए थे” मोनिक, मॉडल

 

इन महिलाओं ने ब्राजील में जिस कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे वो अंग्रेजी में लिखा गया था और उसके प्रावधानों के अनुसार अगर ये महिलाएं छह महीने से पहले काम छोड़ देती हैं तो उन्हें पौने तीन करोड़ रुपए हर्जाना देना होगा.

मोनिक बताती हैं, “हमें छुट्टियां या इस हर्जाने के बारे में कुछ नहीं बताया गया था और क्योंकि मैं उस समय अंग्रेजी नहीं जानती थी तो मैंने भरोसा करके उस कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर कर दिए थे.”

दोनों ने उसके बाद घर छोड़ दिया और वाणिज्यदूतावास ने उनके होटल का खर्च उठाया. कामिंस्की को उसके माता-पिता ले गए और मोनिक की मदद एक भारतीय व्यापारी ने मदद की.

बीबीसी ने जब इस एजेंसी बी वन टेलंट से संपर्क करने की कोशिश की तो इसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.

विदेश मंत्रालय के अनुसार ऐसी घटनाएं एक आम बात हो गई हैं. ब्राजील में मॉडलों के ऊंचाई पर पहुंचने के बाद देखा गया है ये हाल में एक चलन बन गया है.

महावाणिज्य विभाग की निदेशक लुइज़ा लोप्स द सिल्वा का कहना है, ”हाल के दिनों में करीब 20 ब्राजीलियाई मॉडलों के साथ एशिया में दुर्व्यवहार की खबरें मिली है लेकिन ये एक बड़ी समस्या का एक छोटा सा रुप है.”

उनका कहना है हमारा आकलन है कि एशिया में करीब 100 से 200 ब्राजीलियाई मॉडल इस तरह की स्थिति झेल रही हैं.

लेकिन भारत में सबसे ज्यादा शिकायतें मिलने के बाद कुछ मामले चीन, उत्तर कोरिया, फिलीपींस, मलेशिया और थाईलैंड से भी सामने आए हैं.

(बीबीसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.