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-सुनील कुमार॥

सुप्रीम कोर्ट की दखल के बावजूद दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय मैडल लाने वाले पहलवान युवक-युवतियों के साथ पुलिस जो सुलूक कर रही है, वह हैरान करने वाला है। कुश्ती संघ के अध्यक्ष और भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर यौन शोषण के गंभीर आरोप कई महिला पहलवानों ने लगाए हैं, और उनकी लिखित शिकायत के बावजूद महीनों से इस पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट के हुक्म से और मुख्य न्यायाधीश के कड़े रूख से किसी तरह रिपोर्ट तो दर्ज हुई है, लेकिन बृजभूषण सिंह के इस्तीफे की मांग करते हुए शिकायकर्ता पहलवान युवतियां और उनके साथ खड़े हुए पहलवान युवक सभी जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे हैं। एफआईआर के बावजूद न तो आज तक भाजपा सांसद से कोई पूछताछ हुई है, और गिरफ्तारी तो दूर की बात है। यह तब है जब मुख्य न्यायाधीश ने साफ-साफ यह कहा है कि वे देखेंगे कि पुलिस क्या कार्रवाई करती है। बीती आधी रात इस आंदोलन को खत्म करवाने के लिए दिल्ली पुलिस ने जिस तरह पहलवानों को हटाने की कोशिश की, महिला पहलवानों से धक्का-मुक्की की, और वहां पहुंची दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष को जिस तरह हिरासत में लेकर थाने ले जाया गया, वह सब बहुत खराब तस्वीर बना रहा है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कर्नाटक के चुनाव प्रचार में कल ही महिलाओं के सम्मान में कई तरह की बातें बोले हैं जिनके ट्वीट चल ही रहे हैं, और उसी दिन देश की राजधानी में अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक मैडल लाने वाले पहलवानों के साथ ऐसा बुरा सुलूक हो रहा है कि देश का झंडा रौशन करने वाली लड़कियां वहां रोते हुए दिख रही हैं।

कल से जो वीडियो आए हैं, और महिला खिलाडिय़ों के जो बयान हैं वे बताते हैं कि दिल्ली पुलिस और उसे चलाने वाली केन्द्र सरकार का रूख किसी भी तरह हमदर्दी का नहीं है, और उनकी तमाम नीयत भाजपा सांसद को बचाने की दिख रही है। कल आधी रात को जिस तरह के वीडियो संदेश रिकॉर्ड करके हरियाणा के लोगों को आने की अपील की गई, और बार-बार कहा गया कि उनकी बेटियों की इज्जत खतरे में है, तो वह देखना तकलीफदेह था। पहले तो इन पहलवानों के खिलाफ बड़ा आक्रामक बयान देने वाली भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पी.टी.ऊषा वहां आकर पहलवानों से मिलकर गई थी, और फिर रात में पुलिस ने यह कार्रवाई की। केन्द्र सरकार की पुलिस ने जो बर्ताव दिल्ली सरकार के महिला आयोग की अध्यक्ष के साथ किया है वह भी हैरान और हक्का-बक्का करने वाला है। किसी भी राज्य में किसी संवैधानिक संस्था से जुड़े हुए लोगों के साथ ऐसा बर्ताव कहीं देखा नहीं गया है, और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को आंदोलन कर रहीं खिलाडिय़ों से मिलने न देकर उठाकर थाने ले जाना लोकतंत्र में बिल्कुल भी मंजूर नहीं किया जा सकता, लेकिन हालत यही है कि सरकार के ऐसे रूख को अब नवसामान्य बना दिया गया है।

यह कुछ अधिक हैरानी की बात इसलिए हो जाती है कि कर्नाटक में चुनाव है, और वहां की महिला वोटर औसत हिन्दुस्तानी महिला के मुकाबले अधिक पढ़ी-लिखी हैं, कामकाजी हैं, और जाहिर है कि दिल्ली की खबरें उनको प्रभावित करेंगी। ऐसे में यौन शोषण के आरोपी सांसद की इस हद तक हिमायती दिखकर या बनकर भाजपा पता नहीं कौन सा फायदा पाएगी। अब आंदोलन में हालत यह हो गई है कि एक मैडल विजेता पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा कि लड़कियों ने जो आरोप लगाए हैं उन्हें राजनीति से क्यों जोड़ा जा रहा है? जनता को गुमराह किया जा रहा है, हर चीज में राजनीति घुसाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जैसे ही एफआईआर हुई, ये लोग खिलाडिय़ों को गाली देने लगे। अगर महिलाओं को न्याय मिल रहा है तो राजनीति अच्छी ही है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि खिलाडिय़ों को धरने से हटाकर किसी तरह बृजभूषण को बचा लें। उन्होंने कहा अगर मैडल का ऐसा ही सम्मान है तो उस मैडल का हम क्या करेंगे, उसे भारत सरकार को लौटा देंगे। उन्होंने कहा कि जब पुलिस धक्का-मुक्की कर रही है तब नहीं दिख रहा है कि ये पद्मश्री भी हैं। स्वाति मालीवाल का कहना है कि जिन खिलाडिय़ों ने देश का नाम रौशन किया है वो यहां सडक़ पर बैठे हैं, और बृजभूषण शरण सिंह एसी कमरे में बैठे हैं, दिल्ली पुलिस उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही, लेकिन मैं यहां खिलाडिय़ों से मिलने आई तो मिलने नहीं दिया गया, और मुझे घसीटकर पुलिस थाने ले गए। उन्होंने कहा कि ये गुंडे को बचाने के लिए पुलिस को लगाया गया है, और लड़कियों के बयान दर्ज नहीं किए जा रहे हैं।

यह पूरा सिलसिला बड़ा खराब है। इससे देश में खेलों को जितना नुकसान हो रहा है, उससे कहीं अधिक नुकसान भाजपा और सरकार का हो रहा है। अब देश के मां-बाप अपनी लड़कियों को किस भरोसे के साथ खेलों में भेजेंगे, अगर उन्हें यह साफ दिख रहा है कि महीनों की शिकायतों के बाद भी यौन शोषण पर कार्रवाई के बजाय आरोपी को बचाने में सरकार ने पूरी पुलिस झोंक दी है, सुप्रीम कोर्ट तक में सरकार शिकायती लड़कियों का विरोध कर रही है। इससे दुनिया में भी हिन्दुस्तान की इज्जत गिर रही है। और पी.टी.ऊषा जैसी बेवकूफ खिलाड़ी शायद ही कोई और होगी जो कि दूसरी खिलाडिय़ों की यौन शोषण की शिकायत को दुनिया में भारत की बदनामी की वजह बतला रही है। पी.टी.ऊषा के लिए यौन शोषण बदनामी की वजह नहीं है, उसकी शिकायत बदनामी की वजह है। भारतीय ओलंपिक संघ की ऐसी अध्यक्ष से क्या उम्मीद की जा सकती है। इस पूरे सिलसिले ने केन्द्र सरकार के लिए बड़ी शर्मिंदगी खड़ी की है, और उस भाजपा के लिए भी जिसका सांसद बृजभूषण शरण सिंह है।

आने वाले दिन इस सरकार की साख की बर्बादी थाम सकेंगे, या यह और अधिक दूरी तक जारी रहेगी, वह पता लगेगा। फिलहाल सबको याद रखना चाहिए कि आज इंटरनेट पर हर किसी का हर रूख अच्छी तरह दर्ज हो जाता है, और आने वाला वक्त अपनी ही देश की होनहार लड़कियों के खिलाफ इस सरकारी रूख को काले अक्षरों में दर्ज करेगा।

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