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गहलोत बनाम पायलट शीतयुद्ध में गुजरे पांच साल

 

-सत्य पारीक॥
राज्य की कांग्रेस सरकार का 2018 से 2023 का कार्यकाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच शीतयुद्ध की छाया में ही पूरा होने जा रहा है । ऐसी जंग के बाद भी मुख्यमंत्री का ये कहना कि उनकी सरकार सत्ता में वापसी करेगी बड़े हसीन सपने देखने जैसा है । पांच सितारा होटलों में और कोविड काल की बन्दी में रह कर आधे से ज्यादा कार्यकाल गहलोत सरकार ने गुजारा है जिसके चलते आज भी उनकी सरकार सुरक्षित नहीं है । इसी कारण बजट सत्र का सत्रावसान नहीं कराया गया है जबकि विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है ।
गहलोत और पायलट बारी बारी से दोनों ही पार्टी आलाकमान से बागी हो चुकें हैं क्योंकि दोनों को ही मुख्यमंत्री पद चाहिए । पायलट ने गहलोत सरकार गिराने के लिए बगावत कर हरियाणा के मानेसर में अपने समर्थकों की बाड़ेबंदी की थी जबकि गहलोत ने अपना मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए आलाकमान से बगावत कर स्वायत मंत्री शान्ति धारीवाल के सरकारी निवास में तम्बू गड़वाये थे और अपने समर्थक 93 विधायकों के विधानसभा अध्यक्ष को त्यागपत्र दिलवाये थे ।
चुनाव के चंद महीने ही शेष हैं फिर भी गहलोत की पायलट के साथ जंग जारी है । गहलोत किसी सूरत में पायलट को मुख्यमंत्री बनने नहीं देना चाहते जबकि पायलट की कोशिश गहलोत को मुख्यमंत्री रहने नहीं देने की है लेकिन उन्हें असफलता ही मिली है । गहलोत ने पायलट को मुख्यमंत्री बनने से दो दफा रोका है इसी प्रयास में स्वंय ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भी खोया है । इनके शीतयुद्ध में पार्टी कार्यकर्ताओं की जम कर अनदेखी हुई है ऐसी स्थिति में सरकार के रिपीट होने के सपने कोरे सपने ही तो साबित होंगे ?

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