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-सुनील कुमार॥

लोग सुबह-सुबह पूजा करने की तैयारी में निकलते हैं, और किसी बगीचे, किसी कॉलोनी, या किसी सरकारी अहाते के फूल तोडऩे लगते हैं कि मानो पूजा के लिए कहीं से भी हर फूल को तोड़ लेने का ईश्वर का आदेश उनके पास है। धर्म लोगों को कई तरह के गलत काम करने का हौसला देता है जिनमें फूल तोडऩा सबसे ही छोटा जुर्म है। इसके बाद सार्वजनिक जगहों पर देखें तो धार्मिक प्रतीकों को ढो रहे लोग तरह-तरह के गलत काम करते दिखते हैं, जो अपने ईश्वर को बताने वाले प्रतीक सिर पर, चेहरे पर, कपड़ों की शक्ल में, या धागे या ताबीज की तरह दिखाते चलते हैं, उन्हें ऐसी नुमाइश के साथ-साथ गलत काम करने में कोई हिचक नहीं रहती। अभी कुछ महीने पहले एक धर्मांध और कट्टर इस्लामी हमलावर ने विख्यात लेखक सलमान रूश्दी पर जानलेवा हमला किया था जिसमें वे खुद तो किसी तरह बच गए, लेकिन उनकी एक आंख चली गई। अब उनकी उस तस्वीर के साथ उनके नाम से मुसलमानों और कुरान के खिलाफ एक बात चिपकाकर लोग चारों तरफ फैला रहे हैं, और हिंदुस्तान से की गई एक हिंदू की ऐसी ट्वीट की तस्वीर लगाकर सलमान रूश्दी ने यह लिखा है कि यह उनके नाम से फैलाया जा रहा झूठ है जो कि उन्होंने नहीं कहा है।

अब पिछले दो दिनों से इस लेखक की जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उनकी वजह से साथ की खबरों पर भी ध्यान जा रहा है, और काफी दिनों बाद सलमान रूश्दी ट्विटर पर दिखे हैं। लेकिन यह देखना हैरानी की बात थी कि मुसलमानों और कुरान के खिलाफ दिखती हुई रूश्दी का नाम लगाकर की गई यह पोस्ट हिंदुस्तान के एक हनुमान-भक्त की की हुई थी जिसके सारे ही ट्वीट मुस्लिम विरोधी हैं, या भाजपा और अदानी के समर्थन की हैं, या मोदी की भक्ति के हैं। तमाम हिंदुत्व की ट्वीट, मुस्लिम विरोधी ट्वीट से यह अकाउंट भरा पड़ा है। अब ऐसा व्यक्ति मुस्लिमों के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने के लिए रूश्दी के नाम से झूठ को फैला रहा है। अब सवाल यह उठता है कि ऐसा व्यक्ति अपनी फोटो की जगह बजरंग बली की फोटो लगाता है, ट्विटर पेज की तस्वीर की जगह मंदिरों की फोटो लगाता है, तो क्या वह अपने ऐसे झूठ के साथ, अपनी ऐसी नफरत के साथ काम करते हुए हिंदू धर्म का भी अपमान करता है?

आज यह बात जरूरी इसलिए है कि हिंदुस्तान जैसे देश में किसी धर्म का अपमान सिर्फ धर्मांध लोगों को दिख रहा है। आम अमनपसंद लोग जिन बातों में अपनी धार्मिक भावनाओं का कोई अपमान नहीं देखते हैं, उन बातों में भी कट्टर धर्मांध लोगों को अपमान दिखता है, और वे पुलिस और अदालतों तक भी दौड़ते हैं, और सडक़ों पर भी हिंसा करते हैं। दूसरी तरफ जब वे अपने धर्म को बचाने के नाम पर तरह-तरह की हिंसा करते हैं, सोशल मीडिया पर कत्ल और बलात्कार की धमकी देते हैं, गालियां लिखते हैं, अश्लील बातें पोस्ट करते हैं, तो उन्हें यह नहीं लगता कि उनके धर्म और उनके ईश्वर का असली अपमान तो इससे हो रहा है।

यह बात हमने उस वक्त भी लिखी थी जब स्वर्ण मंदिर पर ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार नाम की फौजी कार्रवाई हुई थी, और सिख लोगों ने उसे पवित्र स्वर्ण मंदिर को अपवित्र करने की कार्रवाई माना था, और बाद में उसी का बदला लेने के लिए सिख अंगरक्षक ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी थी। उस वक्त भी हमने लिखा था कि स्वर्ण मंदिर की पवित्रता उन लोगों ने खत्म की थी जिन लोगों ने इस मंदिर परिसर को आतंकियों का डेरा बना दिया था। भिंडरावाले के आतंकी वहां से निकलते थे, चुनिंदा कत्ल करते थे, और लौटकर आ जाते थे। स्वर्ण मंदिर की पवित्रता तो ऐसे आतंकियों ने खत्म की थी जिन्होंने उसे आतंकियों की पनाहगाह बना रखा था, और धर्म से जुड़े लोगों ने उसका कोई विरोध भी नहीं किया था। आज भी हिंदुस्तान में अपने-अपने धर्म के बलात्कारियों को बचाने के लिए उस धर्म के लोग अपने झंडे-डंडे लेकर तो निकलते ही हैं, जम्मू में मुस्लिम खानाबदोश बच्ची से मंदिर में बलात्कार और उसका कत्ल कर देने वाले पुजारी से लेकर हिंदू पुलिसवाले तक को बचाने के लिए जिस तरह धर्म का इस्तेमाल किया गया था, उसके बाद इस धर्म का अपमान करने की किसी और को कोई जरूरत पड़ सकती है?

कोई धर्म उतना ही इज्जतदार हो सकता है जितना इज्जतदार उस धर्म को मानने वाले आम और औसत लोगों का बर्ताव होता है। अपने मानने वाले लोगों के औसत से अधिक सम्मान कोई धर्म नहीं पा सकता। आज हिंदुस्तान में अपने घर बैठे घायल रूश्दी के नाम से मुसलमान और कुरान के खिलाफ झूठ फैलाकर कोई व्यक्ति बजरंग बली की तस्वीर का सम्मान बढ़ा रहा हो, ऐसा बेवकूफ ही सोच सकते हैं। इसलिए जिन लोगों को अपने धर्म की इज्जत की बड़ी फिक्र है, वे अपने धर्म को मानने वाले लोगों के बर्ताव की फिक्र करें। यह बात तमाम धर्मों पर लागू होती है, और हर किसी को पहले अपने घर में झांकना चाहिए, अपना घर सुधारना चाहिए, फिर दूसरे धर्म, और उसके ईश्वर पर सवाल उठाने चाहिए।

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