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-सुनील कुमार॥

जिन लोगों को यह लग रहा था कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से इंसानों के रोजगार पर कोई अधिक खतरा तुरंत नहीं आएगा, उनके लिए एक खबर है। एक अमरीकी कंपनी चेग के शेयरों के दाम कल 51 फीसदी तक गिर गए, और कंपनी को एक अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ। एक ब्रिटिश कंपनी पियर्सन के दाम 15 फीसदी से अधिक गिर गए। ऑनलाईन ट्यूशन देने वाली और किताबें छापने वाली कई बड़ी कंपनियों के शेयर तेजी से गिर रहे हैं। और इसका अकेला जिम्मा चैटजीपीटी नाम की एक वेबसाइट है जो लोगों के मनचाहे मुद्दों पर पलक झपकते जानकारी ढूंढकर, जरूरत के मुताबिक शक्ल में ढालकर सामने रख देती है। इसमें कुछ गलतियां भी हैं, लेकिन वह बहुत तेजी से अपने को सुधारती जा रही है। जब घर बैठे मुफ्त में पल भर में पढऩे-लिखने वालों को उनकी मर्जी का माल तैयार मिलने लगेगा, तो वे क्यों तो उसे किताबों में ढूंढेंगे, और क्यों किसी कोचिंग या ट्यूशन वेबसाइट को उसके लिए पैसा देंगे। इसी का असर है कि पश्चिमी दुनिया में शिक्षा का कारोबार करने वाले लोगों का धंधा एकदम से गिरा है, और यह बड़ी जाहिर बात है कि जब कारोबार टूटते हैं, तो उसकी पहली मार कर्मचारियों पर होती है, और जिस तरह आज दुनिया की बड़ी-बड़ी टेक्नालॉजी कंपनियां कर्मचारियों को हजारों की संख्या में निकाल रही हैं, किताब और कोचिंग कारोबार के कर्मचारियों की बारी आई हुई दिखती है।

यहां पर यह समझना जरूरी है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के खतरे सिर्फ नौकरियां जाने तक सीमित नहीं हैं। ऐसा माना जा रहा है कि बरसाती पहाड़ी नदी की तरह अंधाधुंध ताकत और रफ्तार वाले आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से दुनिया में मुजरिमों के हाथ बहुत मजबूत हो सकते हैं, आतंकियों के हाथ एक नया औजार लग सकता है, और इनके मुकाबले बचाव के कोई औजार अभी बने नहीं है। यह भी माना जा सकता है कि विज्ञान के कई किस्म के कामों में, लोकतंत्रों में जनमत प्रभावित करने में, दुनिया में झूठ फैलाने और सच छिपाने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और कारोबार मिलकर इतना कुछ कर सकते हैं कि उससे दुनिया में असला लोकतंत्र ही खत्म हो जाए। यह के तानाशाह और धर्मांध लोग अपनी सोच को फैलाने के लिए, और बाकी तमाम सोच को खत्म करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का मनमाना इस्तेमाल कर सकते हैं, और आज के विज्ञान और टेक्नालॉजी के पास इस असीमित ताकत के हमले को रोकने की कोई ताकत ही नहीं है।

यही वजह है कि दुनिया के एक सबसे बड़े कारोबारी, और चैटजीपीटी बनाने वाली आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कंपनी के प्रमोटरों में से एक, एलन मस्क ने दुनिया के बहुत से कारोबारियों के साथ मिलकर यह सार्वजनिक अपील की है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर चल रही तमाम किस्म की रिसर्च रोक दी जाए क्योंकि यह किस तरह के खतरे पैदा करेगी यह साफ नहीं है। इसे एक दूसरे विशेषज्ञ की जुबान में समझें तो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस उसे विकसित करने वाले ह्यूमन इंटेलीजेंस को कब पार कर जाएगी वह पता ही नहीं लगेगा। ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि इंसानी बुद्धि जीवविज्ञान की क्षमता से काम करती है, और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस डिजिटल क्षमता से। इंसानी सोच कई तरह की सामाजिकता, नैतिकता, मानवीयता, और नीति-सिद्धांतों से प्रभावित रहती है, उनसे बंधी रहती है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इन सबसे पूरी तरह मुक्त रहेगी, और उसे एक आतंकी या मुजरिम की तरह सोचने में कोई हिचक नहीं होगी, कोई वक्त नहीं लगेगा।

एक अपराधकथा की तरह सोचें, तो अगर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के दिमाग में यह बात आ जाएगी कि इंसान धरती पर बोझ बढ़ा रहे हैं, और उन्हें कम करना चाहिए, तो वह भरी सर्दियों में दुनिया के बर्फ जमे देशों में बिजलीघरों को पल भर में तबाह कर देगी, और दसियों लाख लोग जमकर खत्म हो जाएंगे। उसे लगेगा कि आबादी को घटाना है, तो हो सकता है कि वह पानी साफ करने के कारखानों में कोई रसायन घोल दे, दवा कारखानों में रसायनों का अनुपात कम-ज्यादा कर दे, या दुनिया की चुनिंदा प्रयोगशालाओं से वायरस रिलीज कर दे, कहीं कारखानों से यूनियन कार्बाइड की तरह जहरीली गैस छोड़ दे। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस आतंकी या धर्मांध लोग ऐसा काम मिनटों में करने की हालत में रहेंगे क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को इंसानी सोच के तौर-तरीके मालूम रहेंगे, और इंसानों को उसकी सोच के तरीकों का पता भी नहीं रहेगा जो कि वह खुद विकसित कर लेगी। एक आशंका यह भी है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में सीखने की जो अपार क्षमता विकसित हो रही है, वह बहुत जल्दी इंसानी काबू से परे पहुंच जाएगी, और उसके साथ-साथ यह भी चल रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में भावनाएं भी विकसित हो सकती हैं। यह कल्पना की जाए कि ऐसी भावनाओं में किसी धर्म, राष्ट्रीयता, नस्ल, लिंग, या पेशे के खिलाफ नफरत पैदा कर दी जाए, तो वह खुद उस तबके को तबाह और खत्म करने के तरीके पल भर में ईजाद कर सकेगी, दुनिया भर के कम्प्यूटरों में घुसपैठ कर सकेगी, और मनचाहे लोगों को पल भर में खत्म कर सकेगी। यह कल्पना करने के लिए एक तस्वीर सोचें कि अगर इस हथियार से लैस कोई व्यक्ति यह तय कर ले कि दुनिया के तमाम कैंसर मरीजों को खत्म करना है क्योंकि वे इलाज के ढांचे पर बोझ हैं, तो ऐसे मरीजों की जांच रिपोर्ट प्रभावित करने, रेडियेशन की मशीनों से दिए जाने वाले डोज को बदलने, कैंसर की दवाओं में मिलावट कर देने जैसी अनगिनत योजनाएं भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस खुद बना सकती है, और ऐसे मरीजों को बेमौत मार सकती है। आज हम अमरीका में एक अकेले बंदूकबाज को दर्जनों लोगों को मार डालते देख रहे हैं, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस जैसा औजार हथियार में तब्दील होकर बिना लहू बहाए पल भर में लाखों लोगों को मार सकेगा।

आज ये बातें कुछ लोगों को फिल्मी कहानी सरीखी लग सकती हैं, लेकिन याद रखना चाहिए कि अभी कुछ महीने पहले तक किसी ने चैटजीपीटी जैसे किसी मुफ्त औजार की आने की बात की होती, तो लोग उसे विज्ञान कल्पना ही करार देते। ऐसी चर्चा है कि कुछ दिनों के भीतर यूरोपीय यूनियन इस रिसर्च पर कोई रोक लगाने जा रही है, लेकिन लोगों का यह मानना है कि ऐसे फैसले पर कानून बनने, और उस पर अमल होने में बरसों लग जाएंगे, और तब तक यह औजार इंसानों को लाखों मील पीछे छोड़ चुका होगा। आज शायद यह सब लिखने में भी बहुत देर हो चुकी है, और अब तक शायद यह दानव अमर हो चुका है, आगे देखें क्या होता है।

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